बहन और ब्फ के बाद भाई बहन में हुआ कांड

हेलो रीडर्स आंड फ्रेंड्स. इस नयी स्टोरी के पिछले पार्ट को ढेर सारा प्यार देने के लिए शुक्रिया. ऐसे ही अपना प्यार देते रहिएगा. चलिए अब 3र्ड पार्ट स्टार्ट करते है.

उस दिन शबनम की चुदाई के बाद तो जैसे मेरा दिमाग़ ही हिल गया. ऐसा नही की मैं खुले विचारो का नही हू. ये उसकी पर्सनल लाइफ है, वो कुछ भी करे. पर अगर आप अपनी बेहन को ऐसे चूड़ते हुए देखोगे, तो तोड़ा बहुत बुरा लगता ही है ना. मैने भी लड़कियाँ छोड़ी है. वो भी किसी ना किसी की सिस्टर होंगी.

तुम किसी और की सिस्टर को छोड़ोगे, कोई और तुम्हारी बेहन को छोड़ेगा. ये साइकल चलता ही रहता है. पर जिस तरह से हेस्ट हुए शबनम सब कुछ उसके हवाले कर रही थी, वो देख कर मुझे अजीब लगा.

और दूसरी बात मेरे दिल में ये चुबी, की जिस घर में वो चुड रही थी, उस घर से हमारा, एस्पेशली मेरा और शबू का एमोशनल कनेक्षन जुड़ा हुआ था. बचपन में, मैं और शबू वाहा अक्सर खेला करते थे. मोस्ट्ली च्छूपा-च्छूपी का खेल खेला करते थे. और उसी जगह पे उसने अपनी हवस का नंगा नाच किया. क्या खेल खेला उसने की मैं देखता ही रह गया.

यहा पे तो लड़कियाँ हज़ार बहाने करती है चूड़ने से पहले, और मूह में लंड देने के लिए तो कितने पपद बेलने पड़ते है. और वाहा पे शबनम ने कितनी आसानी से सिर्फ़ उसके एक बार कुछ कहने से फाटाक से अपने मूह में उसका लंड ले लिया, और अपनी टांगे खोल के छूट में भी ले लिया.

जिस तरह से शबनम आराम से घोड़ी बन के चुड रही थी, अपने भाई की शादी के पिछले दिन. ये देख कर एक बारी तो दिमाग़ में ख़याल आया की इसकी अभी वीडियो बना के उसे दिखौ. इससे अगले ही पल वो घुटनो पे बैठ कर मेरा लंड भी अपने मूह में भर ले, तो कोई ताज्जुब नही.

फिर मैने सोचा, की कैसी भी है, छ्होटी बेहन है. और उसके बारे में ऐसा सोचना अछा नही. जब उनकी चुदाई के बाद मैं वापस घर आ रहा था, तो सोचा की भाई की शादी निपटने के बाद जब सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा. तब मैं शबनम से एक बार बात करूँगा, और उसे समझौँगा. फिर मैं घर आ गया.

कुछ देर बाद शबनम भी घर आ गयी. उसके चेहरे पे वही नॉर्मल सा एक्सप्रेशन और हल्की सी मुस्कान थी. उसे देख कर कोई बोल नही सकता था की चाँद मिंटो पहले ये अनमॅरीड लड़की घोड़ी बन के अपने यार से चुड रही थी.

ना चाहते हुए भी मेरे दिमाग़ में बारी-बारी वो सीन आने लगा की शबनम घुटनो के बाल मेरे आयेज बैठ कर, मेरी पंत खोल रही थी. फिर मेरे लंड को सहला रही थी. ऐसे ही रात हो गयी, और सब ने अपनी-अपनी जगह पे सोने का इंतेज़ां कर लिया. क्यूंकी कल बहुत ख़ास दिन था. बारात लेके जानी थी भाई की.

मैं भी थकान की वजह से सो गया था. सोते टाइम भी वही शबनम की चुदाई का सीन और मेरे आयेज बैठ कर उसका मेरा लंड चूस्टा हुआ सीन रिप्ले हो रहा था. फिर ऐसे ही मैं सो गया. रात को अचानक से मेरी आँखें खुल गयी. क्यूंकी कोई मुझे उठा रहा था. मैने मूह घुमा के देखा तो वो शबनम थी. उसने धीरे से मेरे पास आके कहा-

शबनम: उठो भैया, एक प्राब्लम हो गयी है. आप चलो मेरे साथ जल्दी.

मेरे बगल में और भी रिश्तेदार सो रहे थे, तो उनको डिस्टर्ब ना हो, इसलिए मैने वाहा कुछ बोला नही. फिर मैं रूम से बाहर आ गया. मैने मोबाइल में देखा तो रात के 2:40 का टाइम दिखा रहा था. उसने मुझे चुप रहने का इशारा करते हुए दबे पावं उसको फॉलो करने का इशारा किया. मेरे दिमाग़ में बहुत से क्वेस्चन्स थे, पर शबू ने मुझे चुप रहने का इशारा किया था.

नींद अभी भी मेरे आँखों में थी, और मेरी आँखें भी चिप-छिपा रही थी. इसलिए बीच रास्ते में जब वॉशबेसिन आया, तो मैने रुक के धीरे से अपने मूह और आँखों को धो लिया. शबनम इशारे से माना कर रही थी, पर मैने उसकी एक नही सुनी. फिर उसने अचानक से पास आके पानी के नाल को बंद कर दिया, और मेरी तरफ गुस्से की नज़र से देखते हुए उसने मेरी कलाई पकड़ी.

फिर खींच के मुझे उसके साथ ले जाने लगी, जैसे जब कोई गफ़ चुदाई के लिए रेडी है, पर वो नखरे कर रही हो. तब उसका ब्फ उसका हाथ पकड़ के उसे किसी होटेल में ले जाता है. बस वैसी ही फीलिंग आ रही थी, जिस तरह से शबू ने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था.

मेरा तो लंड भी अब धीरे से खड़ा होने लगा. वो मुझे मेरा हाथ पकड़ते हुए उपर च्चत पे ले गयी. ठंड की वजह से और दूसरा कल देर रात को बारिश हुई थी, तो इसलिए आज च्चत पर कोई नही था. वाहा कोने में एक जगह अंधेरा था. शबू मुझे वाहा ले गयी, और वाहा एक बेड भी बिछाया हुआ था. मैं कुछ समझ पौ उससे पहले शबू ने कहा.

शबनम: भाई, मुझे पता है की तुमने मुझे आज शाम को आंटी के घर उस लड़के के साथ देख लिया था. मैं माना नही करूँगी इस बात से. वो मेरा ब्फ है, और हमने बहुत दीनो से नही किया था, सो कल कंट्रोल नही हुआ. और आप तो समझ सकते है की आज-कल हमारी जेनरेशन में ये कामन है. आपकी भी गफ़ होगी, आप ने भी किया होगा.

मे: ये क्या बात कर रही है तू? तू अपनी ग़लती च्छुपाने के लिए मुझे बकरा बना रही है.

शबनम: ऐसा कुछ नही है भैया. बस आप मम्मी पापा से कुछ मत कहिएगा. आपको तो पापा की हेल्त का पता ही है.

मे: नही शबनम, तूने जो किया वो ग़लत है. बताना तो पड़ेगा. अगर कल कुछ उँछ-नीच हुई, और उन्हे पता लगा की मुझे पता होने के बावजूद मैने उन्हे नही बताया, तो क्या होगा?

शबनम: किसी को कुछ नही पता चलेगा (और शबनम ने मेरी जांग पे हाथ रखा). ट्रस्ट मे भाई. और अगर तुम्हे वो चीज़ ग़लत लगी, तो उस टाइम ही रोका क्यूँ नही?

मे: वो मैं. वो उस वक़्त. मैं देखना चाहता था की.

शबनम: क्या देखना चाहते थे, मेरी चुदाई? (अब वो मेरी जांघों को सहलाने लगी) कैसी लगी आपको?

मे: ऐसी बात नही है?

शबनम: अगर ऐसा नही है, तो फिर ये खड़ा क्यूँ है? (शबनम ने मेरे लंड की और इशारा किया, जो उसके टच से फुल ओं हो गया था)

मे: अर्रे ऐसा नही है जैसा तुम सोच रही हो.

शबनम: श (मेरे होंठो पे अपनी उंगली रखते हुए). अब कुछ सोचो मत, बस एंजाय करो.

और शबनम मेरे लंड को ट्रॉवसेर के उपर से पकड़ के सहलाने लगी. फिर उसने अपने होंठो को मेरे होंठो पे लॉक कर दिया. वो स्मूच करते हुए मेरा लंड सहला रही थी. वाउ, क्या मज़ा आ रहा था. मैं तो जैसे उसके स्पेल में हाइप्नॉटाइज़्ड सा हो गया था. वो अपनी टंग को मेरे मूह में डाल कर मेरी टंग को चूसने लगी.

उसी के साथ अब वो हाथ ट्राउज़र के अंदर डाल कर मेरे लंड को हिलने लगी. उसी वक़्त बारिश की हल्की बूंदे बरसने लगी. इससे पहले की बारिश तेज़ हो, शबनम ने किस को तोड़ कर मेरा ट्राउज़र नीचे किया, और मेरे लंड को सहलाते हुए बाहर निकाला. मेरे लंड को देख कर वो हॅपी हुई. उसके चेहरे पे मुस्कान आ गयी, और ये देख कर मैं भी अंदर से खुश हुआ. फिर उसने अपना टॉप निकाला, और ब्रा भी निकालते हुए मेरे हाथो को अपने बूब्स पे रखा, और बोली-

शबनम: भाई, खेलो इनसे, चूसो इनको.

और मेरे सिर को अपने सीने पे च्छूपा दिया. फिर मैं उनको चूसने लगा. छ्होटे और टाइट बुत सॉफ्ट बूब्स थे. निपल को मूह में भर कर चूस रहा था मैं, और वो हल्का सा मोन कर रही थी. बारिश भी हल्की बौछार से हमारे इस प्रोग्राम में चार चाँद लगा रही थी.

कुछ देर ऐसी ही मैने उसकी छ्चाटी को चूसा. फिर उसने मुझे अलग किया और बेड पे लिटा दिया. फिर आयेज झुक कर मेरे लंड को पहले छाता, और फिर उसे चूसने लगी.

मे: आ आ वाउ शबनम, तुम तो सच में मस्त चूस्टी हो. अगर मुझे पहले से पता होता की तुम इसकी शौकीन हो, तो तुम्हे कब का अपना बना लिया होता.

ये सुन कर वो मेरे लंड को पूरा मूह में लेते हुए उसको चूसने लगी. बारिश अब थोड़ी तेज़ होने लगी, तो उसने मूह में से लंड को निकाला, और अपनी सलवार को तोड़ा सा नीचे खिसकाया. फिर पनटी को साइड में हटते हुए वो मेरे लंड के उपर बैठ गयी.

शबनम: भाई इससे पहले की बारिश तेज़ हो, मैं तुम्हारे लंड को अपना बनाना चाहती हू. जिससे तुम मेरा सीक्रेट किसी को ना बताओ.

मे: एस डार्लिंग. मैं किसी को कुछ नही बतौँगा, जब तक तुम मुझे अपनी छूट मारने डोगी इसी तरह.

और फिर शबनम ने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी छूट पे सेट किया. पहले 2 से 3 बार वो फिसल गया. फिर मैने और शबनम हम दोनो ने उसे पकड़ कर छूट पे सेट किया.

शबनम: भाई, तुम अपने लंड को उपर दब्ाओ. मैं छूट को नीचे प्रेस करती हू.

और इस तरह आख़िर-कार मेरे लंड को अपनी बेहन की छूट में जगह मिल ही गयी. कुछ देर तक हल्के धक्के मारने के बाद शबनम के इशारे से मैने उसकी छूट में तेज़-तेज़ धक्के मारने शुरू किए.

शबनम बहुत ज़्यादा हॉट थी, और उसकी छूट भी ज़्यादा गरम थी. बाहर बरसात की ठंड और अंदर छूट की गर्मी, दोनो के कॉंबिनेशन से मैं तो जैसे टेरेस पे ही जन्नत फील कर रहा था. लग रहा था की शबनम ही मेरी जन्नत की हूर थी, और मैं अपनी पर्सनल हूर को छोड़ रहा था. शबनम भी मोन कर रही थी, और मुझे बीच-बीच में स्मूच कर रही थी.

शबनम: एस ब्रो फक मे, फक युवर लिट्ल सिस्टर वेरी डीप. एस, एस. कल भाई भाभी को छोड़ेगा अपनी सुहग्रात पे, उससे पहले हम भाई बेहन की आज सुहग्रात हो गयी. एस, एस, फक मे, फक मे.

मे: एस डार्लिंग, वाउ क्या मज़ा है तेरी छूट में. अगर पहले पता होता की घर में ही इतना करारा माल चूड़ने को रेडी है, तो तुझे कब का छोड़ देता.

शबनम (तोड़ा अफेन्सिव होते हुए): ओये हेलो. मैं तुम्हे यू ही नही दे देती मेरी मारने को. वो तो तुमने मुझे कल देख लिया, इसलिए मुझे अपने सीक्रेट को आ सीक्रेट रखना था, और आ. मुझे इससे अछा कोई आइडिया नही मिला, जो इतना जल्दी तुम्हे कन्विन्स करे, आ. यार मेरे बूब्स मत दब्ाओ ज़ोर से. अभी उतने बड़े नही है, सो पाईं होता है.

मे: ओक शबू, जैसा तुम कहो.

शबनम: अब भाई जल्दी ख़तम करो, कोई आ जाएगा तो प्राब्लम हो जाएगी. ऐसे मौके तो बाद में और मिलेंगे. सो प्लीज़ हरी.

और मैं शबनम की रिक्वेस्ट पर उसकी छूट में अपना लंड घपा-घाप पेलने लगा. वो मोन करने लगी. उसकी छूट की गर्मी जैसे मेरे लंड के लोहे को पिघला रही थी, और अब मेरा भी निकालने को ही था. तभी मुझे शबनम की आवाज़ मेरे कान में सुनाई दी की “भैया जल्दी करो, जल्दी करो. भैया सब उठ गये है, आप भी जल्दी से उठ जाओ”.

और मैने आँखें खोली, तो सामने शबनम थी, जो रेडी हो चुकी थी. मस्त सेक्सी लग रही थी. मॅन तो किया की उसे खींच कर एक लीप-किस दे डू बढ़िया सा. पर जब मैने गौर से आस-पास का माहौल देखा, तो मुझे समझ में आ गया की कल जो शबनम और मेरी चुदाई हो रही थी, वो महज़ एक सपना था, आ गोद डॅम ड्रीम.

और उपर वाले का करिश्मा तो देखिए, की जिस गर्ल को मैं ड्रीम में छोड़ रहा था, वही ड्रेआंगिरल मेरे उस ड्रीम से मुझे जगाने आई थी.

सो फ्रेंड्स, ये वाला पार्ट आपको कैसा लगा आप नीचे कॉमेंट्स में ज़रूर से बताईएएगा. आप मुझसे गमाल/घ्छत (लज़्यलीहास@गमाल.कॉम) पे कनेक्ट कर सकते है. जिसको ऐसी कोई हेल्प चाहिए तो मुझे कॉंटॅक्ट कर सकते है (एस्पेशली गर्ल्स/लॅडीस). ई’ल्ल शुवर्ली गिव योउ सम टिप्स बेस्ड ओं युवर सिचुयेशन. इस स्टोरी के नीचे कॉमेंट्स भी ज़रूर करे.

यह कहानी भी पड़े  अंजलि की रंडी बनने की कहानी


error: Content is protected !!