बहन बनी पड़ोस की लड़की को पटाने की कहानी

इधर उधर की बकवास ना करते हुए डाइरेक्ट स्टोरी शुरू करता हू.

मेरा नाम विवेक है. मैं देल्ही का रहने वाला हू. जब मैं कॉलेज में आया तो कॉलेज घर से डोर होने की वजह से मैने कॉलेज के पास ही एक फ्लॅट रेंट कर लिया. वाहा पर मेरे पड़ोस में रहती थी एक लड़की “शिखा”.

अब उसके बारे में क्या बतौ यार. एक-दूं गदर माल थी. भरा हुआ जिस्म, छ्होटी हाइट, टाइट बूब्स, बाहर को निकली गांद, एक-दूं गुलाबी होंठ, गोरे-गोरे गाल, मतलब देखते ही लॉडा तंन जाए. मतलब आप ऐसे इमॅजिन कीजिए की वो नेहा कक्कर की हाइट में नोरा फतेही थी.

शिखा 1स्ट्रीट एअर की स्टूडेंट थी. पढ़ाई में बहुत वीक थी वो, और मैं बहुत स्ट्रॉंग. उसके मों दाद ने मुझे बोला उसको तूतिओं देने को. शुरू-शुरू में उस पर इतना कोई ख़ास ध्यान नही दिया मैने. मतलब उसको तूतिओं देना और बस छुट्टी.

पर जैसे-जैसे वो जवानी की तरफ बढ़ी, मेरा ध्यान अपने आप उसके उपर जाने लगा. पर तभी उसने फ्लॅट छ्चोढ़ दिया, और किसी दूसरी एरिया में फ्लॅट रेंट कर लिया. अब मैं उदास था, और मेरा लॉडा मुझसे भी ज़्यादा उदास था.

उसकी याद में मैं लॉड को हिलता, और उसको छोड़ने के सपने देखता. की कभी तो वो मेरे लॉड पर उछाल-कूद करेगी. कभी तो उसके गुलाबी होंठ मेरे लॉड को किस करेंगे. उसको ज़ोर लगा कर चूसेंगे, और मेरे लॉड का पानी निकलेंगे (उफ़फ्फ़ सोच कर ही लॉडा फटने को है).

खैर धीरे-धीरे टाइम निकला. मैं उससे वीडियो कॉल पर बात करता था, और उसके बूब्स और उसकी गांद दिखाने के लिए उसको बोलता था.

मैं: बहुत मोटी हो गयी है. फुल बॉडी दिखा कितना वेट गईं कर लिया है.

ऐसे-ऐसे उसके जिस्म को अपनी आँखों में भर कर फिर रात को सपनो में उसको छोड़ कर लंड को शांत करता था. पर अब मुझसे बर्दाश्त नही हो रहा था. 2 साल हो गये थे यार. कुछ दीनो बाद मैने उसी के एरिया के पास फ्लॅट लिया, और उससे मिलने लगा.

मैं उसको बाहर घूमने ले जाता, उससे फ्लर्ट करता, पर यार वो भैया-भैया करती रहती थी. तो बात आयेज बढ़ ही नही रही थी. जहा भी जाता था, सब हम दोनो को आस आ कपल ही देखते थे. पर ये बेवकूफ़ भैया से आयेज ही नही बढ़ रही थी. और इससे मेरी फ्रस्ट्रेशन बढ़ती ही जेया रही थी.

मैने तान लिया था, की अब तो उसको छोड़ना था, फिर चाहे जो हो जाए. कुछ दीनो बाद मास्टर्स का अड्मिशन प्रोसेस शुरू हुआ. मार्क्स कम होने की वजह से उसको सेम कॉलेज नही मिला. सो उसको एंपी का कोई कॉलेज अलॉट हुआ. अब मम्मी-पापा दोनो वर्किंग थे, सो उन्हे ऑफीस से लीव लेनी पड़ती. और वो तैयार भी थे लेने को.

पर मैने ये सोचा ये बहुत अछा मौका था. सो मैने उन्हे बोला-

मैं: आप दोनो क्यूँ लीव लोगे? मैं हू ना. इसको मैं दिला दूँगा अड्मिशन.

दोनो मुझ पर बहुत ट्रस्ट करते थे. कभी मेरी किसी भी मॅटर में कंप्लेंट नही मिली उन्हे. तो वो दोनो इस बात पर अग्री किए, और हम दोनो का रिज़र्वेशन करा दिया. फिर हम उसके कॉलेज गये. वाहा अड्मिशन की सारी फॉरमॅलिटीस पूरी की.

अब हमे बस से वापस आना था, पर मेरे दिमाग़ में तो बस उसकी छूट, उसके बूब्स, उसकी गांद घूम रहे थे. सो मैने उसको बोला-

मैं: यार आज यही होटेल में रुक कर मस्त मस्ती करते है. दारू पिएँगे बेहोश होने तक. बढ़िया डिन्नर करेंगे. फिर पता नही ऐसा मौका मिले ना मिले.

वो मेरे साथ काफ़ी घुल-मिल चुकी थी, और बहुत ट्रस्ट करती थी. तो वो फ़ौरन मान गयी. फिर हमने उसके घर फोन किया, और बोल दिया के आज पूरा काम नही हुआ. हमे रुकना पड़ेगा यही. कल अगर काम पूरा हुआ तो कल निकलेंगे.

वो मान गये और उसके पापा ने मेरे अकाउंट में पैसे ट्रान्स्फर कर दिए होटेल आंड डिन्नर के ( जब की डिन्नर में तो मैं उनकी बेटी की छूट खाने का प्लान बना रहा था). फिर मैने ओयो में रूम बुक किया, और उसको बोला-

मैं: तुम चेंज कर लो. तब तक मैं डिन्नर और ड्रिंक्स लेकर आता हू.

मैं बाहर गया और 2 दारू की बॉटल ली, और 2 कोल्ड ड्रिंक्स की. फिर डिन्नर में नों-वेग लिया, उसको बहुत पसंद है इसलिए. उसके बाद मैं रूम पर आ गया. वो मेरी वेट कर रही थी.

शिखा: भैया कितना लाते कर दिया आपने. मैं कब से वेट कर रही थी. बहुत भूख लग रही है.

विवेक: क्या करू बेहन, टाइम लगता है बनने में. और फिर मैं यहा शॉप भी नही जानता था, तो ढूँढने में भी टाइम लग गया.

शिखा: अछा ठीक है, बताओ क्या लाए हो डिन्नर के लिए?

विवेक: तेरा फेवोवरिट चिकन.

शिखा: वाउ भैया! ई लोवे योउ. आज मेरा चिकन खाने का मॅन भी था भैया. योउ अरे सो गुड. इसलिए तो आप को इतना प्यार करती हू मैं.

विवेक: ओक-ओक बाबा, अब खाना खाएगी या मुझे भी खाएगी.

शिखा: पर भैया पहले दारू पीते है ना यार, फिर डिन्नर करेंगे. दारू लाए के नही?

मैने उसको एक बॉटल दी, और कहा: ये तेरी बॉटल, और ये मेरी बॉटल.

आक्च्युयली मैने रास्ते में सॉफ्ट ड्रिंक की बॉटल खाली करके उसमे दारू भर दी थी. और वही बॉटल मैने उसको दी.

शिखा: भैया मैं सॉफ्ट ड्रिंक की बात नही कर रही हू. दारू कहा है यार, जल्दी दो ना.

विवेक: अर्रे पागल यही दारू है. वो रास्ते में पोलीस की चेकिंग चल रही थी, तो मैने कोल्ड ड्रिंक की बॉटल को खाली करके दारू भर दी. चल अब पीना शुरू कर. और हा, तेरी वाली में कोल्ड ड्रिंक मिक्स है, तो तुझे पानी या सोडा नही डालना पड़ेगा (वैसे मैने झूठ बोला था, और बॉटल में पानी मिक्स नही था). और मैं नीट पियुंगा.

हमने दारू पीनी शुरू की. वो भी नीट पी रही थी, और उसको बहुत कड़वा लग रहा था. तो वो साथ में चिकन खाने लगी. 1 पेग, फिर 2, फिर 3, फिर 4, और धीरे-धीरे उसको नशा होने लगा. अब टाइम था की मैं गरम लोहे पर हात्ोड़ा मारु. यानी उसकी छूट पर अपना लोड्‍ा मारु.

विवेक: पता है अभी जब मैं उपर आ रहा था, तो रिसेप्षन वाला मुझे बोल रहा था की आपकी गफ़ बहुत हॉट है.

शिखा: क्या! आपने उसको बताया नही के मैं आपकी बेहन हू.

विवेक: बताया था पर वो हमारे सरनेम अलग है तो बोला की ओयो में सब अपनी बेहन को लेकर ही आते है, और रात भर छोड़ते है, और बहनचोड़ बन जाते है है. उसके कहा आप भी जाओ, और अपनी बेहन की छूट बजाओ.

शिखा: ची भैया, कितना गंदा आदमी है. कैसे-कैसे गंदा सा बोल दिया उसने.

विवेक: वैसे सब कुछ तो ग़लत नही बोला उसने. हॉट तो तू है यार बहुत. मतलब देख तू अपने आप को. क्या बूब्स है तेरे.

शिखा: बस करो भैया. अब आप शुरू मत हो. मुझे रिसेप्षन वाले पर ही बहुत गुस्सा आ रहा है.

मुझे लगा यार ये बाज़ी तो उल्टी हो रही थी. कुछ कर विवेक, जल्दी कुछ कर. वरना छूट निकल जाएगी हाथ से.

विवेक: अर्रे नही-नही, तू देख ना हम दोनो कितने आचे लेगते है साथ में.

और मैने फ्ब पर हमारी फोटोस खोल कर दिखाई, और उस पर कॉमेंट्स पढ़ाए (जो मैने ही किए थे फेक आइड्स से). सारे कॉमेंट्स में बेस्ट कपल, लव्ली कपल्स, और ऐसे ही सब कॉमेंट्स थे. वो तोड़ा सा शरमाई और बोली-

शिखा: भैया क्या सच में आपके ये फ्रेंड्स हमे कपल्स समझते है? हम दोनो सच में गफ़ ब्फ लगते है क्या?

विवेक: लगने का तो नही पता, पर हा समझे ज़रूर गफ़ ब्फ ही जाते है.

वो तोड़ा और शरमाई. मैने फिर बोला-

विवेक: वैसे भी ब्फ गफ़ में जो होना चाहिए, वो तो है हम दोनो में.

शिखा: क्या होना चाहिए भैया? क्या है हम दोनो में?

विवेक: प्यार होना चाहिए, और वो तो है हम दोनो में. तू मुझसे बहुत प्यार करती है, और मैने तुझसे बहुत प्यार करता हू.

शिखा: तो फिर क्या हम गफ़ ब्फ है भैया?

विवेक: मुझे नही पता. तू बता, बनेगी मेरी गफ़?

शिखा (शर्मा कर ): आप बताओ, आप शादी करोगे मुझसे?

शादी! वत्फ़! ये तो मैने सोचा ही नही था यार. आयेज के पार्ट में पढ़िए मैने कैसे सिचुयेशन को हॅंडल किया.

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