बातरूम में बहन भाई का चुदाई संगम

ही दोस्तों, तो आख़िर हम फिर मिल गये. चलो अछा है. तो ब्रेक के बाद वापस आते है अपनी कहानी पे. लेकिन एक बार फिर बता डू, जो नये लोग मेरे साथ जुड़ रहे है, प्लीज़ एक बार प्रीवियस कहानी को ज़रूर पढ़े. तो अब हम अपनी कहानी पे वापस आते है.

कहानी शुरू करने से पहले कुछ बात बतानी है. बस 2-3 मिनिट लगेंगे. उसके बाद हम वापस से अपनी कहानी पे आएँगे.

“मेरे घर में हम सब का एक कामन बातरूम है (मतलब, घर पे पीछे एक बातरूम है जिसे सब उसे करते है). बातरूम वैसे ज़्यादा बड़ा तो नही है. लेकिन ज़्यादा छ्होटा भी नही. एक मीडियम साइज़ का बातरूम है.

उसके अंदर कोने में फ्रेश होने के लिए इंग्लीश टाय्लेट है, जिस पर प्लास्टिक का गाते लगा है, और बाहर नहाने के लिए जगह छ्चोढ़ रखी है.” यही था जो बताना था. तो चलते है अपनी कहानी पे.

उस सुबा मुराद भाईजान के मेरे कमरे से जाने के बाद से भाईजान ने मेरे से नज़र नही मिलाई. ये लाज़मी भी था. जो भाईजान मुझे बचपन से लेकर आज तक बस पढ़ाई के लिए टोकते रहे. अचानक से एक रात को थोक के चले जाएँगे. तो उसके बाद बोलने के लिए बचा ही क्या होगा?

हालाकी मैने भी इस बात पे ज़्यादा ध्यान नही दिया. क्यूंकी मेरे पास अभी 3 दिन बचे थे. मुझे बहुत कुछ पढ़ना था, और मैने भाईजान की चुदाई से तोड़ा डोर होने के लिए लाइब्ररी जाय्न कर ली. लेकिन उन दीनो भाईजान के लंड से बिछढ़ कर छूट तो मेरी भी मचलती थी.

जैसे-तैसे 2 दिन के अंदर बचा सब टॉपिक याद करके रिविषन के लिए फ्रेंड के घर ग्रूप स्टडी के लिए पहुँची. वैसे ग्रूप स्टडी तो बहाना था. मुझे ये देखना था की, बाकी ने कितना और क्या-क्या याद कर लिया था.

2-3 घंटो के बाद हम बोर हो गये. तो मेरी एक फ्रेंड (एलिया) ने पिछले 2 दिन की बात बताई. की कैसे वो पिछली 2 रात से अपने ब्फ के साथ वीडियो कॉल पे रॉल्प्ले करके फोन सेक्स कर रही थी. जिसमे एलिया कभी स्टेप डॉटर बनती, तो कभी स्टेप सिस्टर.

बाकी सब उसकी बातें बड़ी गौर से सुन कर आहें भर कर माहौल को गरम करने लगे. उनके बीच मैं बस उनकी बात सुनते जेया रही थी. वैसे भी अब उन्हे कैसे बतौ की जो एलिया फोन सेक्स कर रही थी. वो मैं असल ज़िंदगी में अपने अब्बू और भाईजान मुराद से करवा रही थी.

तभी मुझे अचानक से भाईजान के लंड की याद आई, और जिससे मेरी छूट हल्की गीली होने लगी. फिर अगले कुछ घंटो तक उनकी बाकचोड़ी सुनती रही. फिर एग्ज़ॅम की फुल तैयारी कर मैं अपने घर के लिए निकल गयी. रास्ते मेी थी तभी अब्बू का मेसेज आया-

अब्बू: ज़राइना बेटी, यहा तोड़ा टाइम और लगेगा. और तेरी याद आ रही है मूठ मारने के लिए. एक हॉट सी पिक सेंड कर ना.

जैसे मैं घर पहुँची, सबसे पहले बातरूम में घुस कर अब्बू की ख्वाहिश पूरी करी. फिर किचन में आ कर अम्मी की खाना बनाने में हेल्प करी. रात के डूस बजे तक सब ने खाना खाया, और मैं प्लेट लेकर किचन की तरफ गयी.

मैने पाया था भाईजान पीछे से मेरी गांद निहार रहे थे. इसीलिए मैं अपनी गांद मटका-मटका के चलने लगी. फिर जैसे मूड कर भाईजान की तरफ देखा, तो सतत से वो सर दूसरी तरफ करके कमरे में जाने का बहाना करके उठ गये. सुबा जल्दी उतना था, इसलिए रात में जल्दी सो गये.

अपने कपड़े लिए, और ब्रश करते हुए बातरूम में घुस गयी. कपड़े रस्सी पे डाल कर मैं ब्रा-पनटी में थी. की तभी मुराद भाईजान बातरूम का दरवाज़ा पीटने लगे. दरवाज़ा पीटने की आवाज़ से दर्र कर बिना अपनी हालात सोचे दरवाज़ा खोल दिया.

मुझे ब्रा-पनटी में देख जैसे मुराद भाईजान एक स्माइल देके मेरे साथ बातरूम में घुस आए, और मुझे वही बिता कर अपने पाजामे का नाडा खोल लंड मेरे मूह में घुसा दिया. एक तो पहले से मूह में ब्रश था, उपर से भाईजान की ऐसी हरकत.

उनसे डोर हुई और मूह धो के फिरसे अपने मूह में लंड लेके चूसने लगी. भाईजान ने मेरा सर ज़ोर से अपने लंड की तरफ डब्बा लिया था, जिससे लंड मूह से निकल ना पाए.

मुराद: आहा! ज़राइना क्या सेक्सी माल है तू. पता होता की घर में ही इतना प्यारा सेक्सी माल है, तो…

मैं ( लंड मूह से बाहर निकाल कर): तो क्या? आपकी लॉटरी लगी की नही?

मुराद: वो तो 4 दिन पहले ही लग चुकी, आज तो बस लॉटरी की वसूली करने आया हू.

मुझे खड़ा करके भाईजान ने पहले मेरे होंठो को चूमा, और साथ ही मेरी ब्रा को उतार कर मेरे बूब्स को आज़ाद कर दिया. तभी मुझे अपनी गोद में उठा करके उपर बिता कर मेरी पनटी में छ्होटा सा च्छेद किया, और उसमे अपना लंड डाल कर मेरी छूट में घुसा दिया. छूट तो खुल गयी थी ही, अब पनटी का च्छेद भी बड़ा हो गया था. फिर उसके बाद भाईजान धक्के पे धक्के मारते गये.

बीच-बीच में कभी मेरे होंठो को चूमते तो कभी मेरे बूब्स के निपल्स को चूस्टे. उनके धक्को की रफ़्तार तो कसम से कम नही हुई. मैने तो मुराद भाईजान को कस्स कर पकड़ लिया, जिससे वो मेरे पास ही रहे. बेशक कभी धक्के की रफ़्तार कम भी हो जाए. लेकिन वो मुराद भाईजान है, जो बिना वियाग्रा खाए लंबी चुदाई करने का दूं रखते है.

मैं और मुराद भाईजान दोनो मस्त चुदाई करते हुए एक-दूसरे से बाहों में लिपटे हुए दोनो चुदाई का मज़ा ले रहे थे. लेकिन तभी फिरसे गाते पे पीटने की आवाज़ हुई. इस बार अम्मी थी ( चुदाई में मैं ये भूल ही गयी थी की, मेरा आज एग्ज़ॅम था, और मैं बातरूम में भाईजान से चूड़ने नही नहाने आई थी. )

मैं: भाईजान! जल्दी निकाल अपना माल, मेरा आज एग्ज़ॅम है?

मुराद: बस-बस 2-3 मिंटो में हो जाएगा.

बाहर अम्मी: ज़राइना बेटी! जल्दी से बाहर आ. मुराद को भी ऑफीस जाने को लाते हो जाएगा, और तेरा भी तो आज एग्ज़ॅम है.

भाईजान ने बगल में पड़ा मग लिया. उसमे पानी भर के फेंकने लगे, जिससे अम्मी को लगे मैं नहा ही रही थी. और फिर अम्मी चली गयी. उधर अम्मी गाइ ही थी, की मुराद भाईजान का निकल गया. वो तो शूकर है, वीर्या निकालने से पहले ही भाईजान ने लंड मेरी छूट से निकाल रखा था.

वीर्या की गर्मी मैने महसूस की, और ये भी पता चला की भाईजान का माल कितना गाढ़ा था. मुझे वापस से उतार कर मेरे होंठो को कुछ देर तक चूम कर वो बोले-

मुराद: ज़राइना तुझे नही पता की 4 दिन पहले तक मैने कितनी बार तेरे नाम की मूठ मारी है. मैं बता नही सकता.

मैं ( भाईजान के शांत लंड को हंत में भरते हुए): आज के आपको मूठ मारने की ज़रूरत भी नही है भाईजान.

मुराद: अछा चल अभी तू नहा ले. वरना एग्ज़ॅम के लिए लाते हो जाएगी. और हा, आचे से एग्ज़ॅम डियो. चल बाइ.

भाईजान के जाने के बाद मैं भी नहा के आई. फिर जल्दी-जल्दी नाश्ता किया, और एग्ज़ॅम हॉल के लिए निकल पड़ी. तो एग्ज़ॅम देके आने के बाद मिलते है.

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