धोखा खा कर सेक्सी स्टूडेंट के चूड़ने की कहानी

मेरी फॅमिली फरीदाबाद में रहती है. मेरे घर में मेरी मा, पापा, भाई और मैं रहती हू. मैं सब से बड़ी हू घर में. मैं दिखने में गोरी हू, और मुझे बाल लंबे रखना पसंद है.

ये कहानी तब शुरू होती है, जब मेरे 12त के एग्ज़ॅम ख़तम हुए थे, और 18 की सीडी क्रॉस कर चुकी थी. एग्ज़ॅम के बाद फरीदाबाद में ही मैने एक कंप्यूटर क्लास जाय्न की थी. उस कंप्यूटर क्लास में हमारे जो टीचर थे वो लगभग 28-30 साल की उमर के थे. उनका नाम मनोज था.

शुरू में वो मुझसे बहुत ज़्यादा फ्रेंड्ली रहते थे. नॉर्मल बातें करते थे. मुझे भी उनसे बातें करना अछा लगता था. मैं जवानी के दहलीज़ पे कदम रख रही थी, इसलिए शायद लड़कों के प्रति मेरा लगाव बढ़ता जेया रहा था.

तब मेरे पास एक छोटा सा मोबाइल हुआ करता था. हम उस पर क्लास के बाद भी बातें करते थे. एक बार क्लास को छुट्टी थी, पर मनोज ने मुझे क्लास में बुलाया ये कह कर, की कोई शॉर्ट कीस और क्वेस्चन्स देने है, एग्ज़ॅम में काम आएँगे. मैं भी चली गयी क्लास में.

क्लास घर से पास में ही थी, इसलिए घर में जल्दी आने का बोल कर चली गयी. मेरी क्लास बिल्डिंग की 3र्ड मंज़िल पे थी, और बाकी ऑफिसस उस दिन बंद थे. मनोज मेरा पहले से इंतेज़ार कर रहा था. मैने देखा वो बहुत हॅंडसम लग रहा था. मैने सलवार कुरती पहनी थी.

मनोज: आज तो कसम से बहुत मस्त दिख रही हो.

मे: थॅंक योउ सिर (शरमाते हुए).

मनोज: तुम्हे मैं आज कुछ अलग सीखने वाला हू (हेस्ट हुए).

मे: हा सिर, आपने बताया था, वो कंप्यूटर के बारे में कुछ बताना है.

मनोज: वो तो सीख लेंगे. पर एक बात और कहनी थी राधिका.

मे: जी सिर कहिए.

मनोज: तुम मुझे बहुत पसंद हो. ग़लत मतलब मत निकालना, पर तुम्हे हमेशा देखने को और मिलने को दिल करता है.

मे (मुझे भी मनोज पसंद था. पर मैने कभी दिखाया नही): सिर लेकिन ये कैसे पासिबल है?

मनोज ने मेरे माथे पर किस किया. मुझे मानो जैसे साँप सूंघ गया हो. मेरा विरोध ना होते देख मनोज ने और हिम्मत करके मेरा हाथ अपने हाथ में लिया. अब मुझे खड़ा करके उसने मुझे बाहों में भर लिया, और मेरी आँखों में देखने लगा.

मुझे पता नही क्या हो रहा था. फिर मनोज ने जेया कर क्लास का डोर क्लोज़ किया, और फिरसे मुझे बाहों में भर लिया.

मे: सिर, ये ठीक नही है.

मनोज ने एक ना सुनी, और मेरे होंठ चूसने लगा.

ज़िंदगी में पहली बार मैं किस कर रही थी. मैं उसका साथ नही दे रही थी, पर उसने अब मेरे बूब्स दबाने शुरू कर दिए.

मैं कसमसाई, और धीरे दबाने का कहने लगी. मनोज को पता चल गया था की अब विरोध नही होगा, तो उसने मेरा लोवर नीचे किया और मुझे झुका दिया. सेक्स क्या होता है इससे अंजान मैं टेबल पे झुक गयी.

तभी मनोज ने अपनी पंत नीचे की, और थूक लगा के अपना लंड मेरी गांद में डाल दिया. मुझे जैसे मेरी जान निकल गयी हो ये एहसास हुआ. उसने और दो टीन धक्के दिए, पर मेरी आँखों के सामने अंधेरा था और मैं बेहोश हो गयी.

जब मुझे होश आया तो देखा मनोज मेरे साइड में बैठा था, और मेरे बदन पे कोई कपड़ा नही था.

मनोज (हसते हुए): कैसी हो?

मे: ये क्या किया आपने? बहुत दर्द हो रहा है.

मनोज: पहली बार होता है राधिका.

मे: लेकिन पीछे कों करता है?

मनोज: अब पीछे नही करूँगा सॅकी.

इतना कह कर वो फिरसे मुझे किस करने लगा. मुझे दर्द हो रहा था, पर उसके प्यार करने से अछा भी लग रहा था. मैने मनोज को कहा-

मे: मुझे जाना होगा.

और मैं कपड़े पहन कर वाहा से घर आ गयी. मुझसे ठीक से चला नही जेया रहा था. घर आकर मैं ज़्यादा काम ना करते हुए, तबीयत ठीक नही है बोल के सो गयी.

मेरा क्लास आना जाना रोज़ की तरहा चालू था. लेकिन अब मुझे भी सेक्स की इक्चा होने लगी. उस दिन के दो हफ्ते बाद ही मनोज मुझे लेके अपने दोस्त के रूम पे गया, जहा उसका दोस्त रेंट पे रहता था. उसका दोस्त गवर्नमेंट एग्ज़ॅम की तैयारी कर रहा था. मनोज जेया कर उससे बात करने लगा. तब तक मैं बाहर खड़ी रह कर मनोज का इंतेज़ार करने लगी.

मनोज: भाई एक घंटे के लिए रूम देदे. ये मेरी गफ़ है.

दोस्त: भाई मेरा एग्ज़ॅम है 2 दिन में. और पढ़ाई करनी है. कही और जुगाड़ कर ले.

मनोज: प्लीज़ यार, एक घंटे का सवाल है.

दोस्त: मुझसे ना हो पाएगा इस बार. तू चाहे तो अंदर के रूम में कर ले. मुझे पढ़ाई करनी है.

मनोज: ये कैसे पासिबल है? उसको पता चला की तू बहार है तो?

दोस्त: मैं बाहर से कुण्डी लगा दूँगा, और खिड़की से अंदर आ जौंगा. उसको नही पता चलेगा.

मनोज: कोई बखेड़ा ना खड़ा करना यार.

फिर मनोज ने मुझे अंदर बुला लिया, और उसका दोस्त बाहर चला गया. मैने देखा के 2 रूम थे. पर दोनो भी गंदे थे. हम दोनो अंदर के रूम में चले गये, जहा एक बेड था और अलमारी थी.

मनोज ने मुझे बाहों में भर लिया, और प्यार से गाल और हाथ पे किस करने लगा. किस करते-करते मेरे बूब्स दबा रहा था. मुझे बहुत सेडक्षन होने लगी थी.

मे: आहह सिर, धीरे करो.

मनोज होंठो पे किस करते-करते मेरे कपड़े उतारने लगा. मैं देखते ही देखते नंगी हो गयी. मनोज अब मेरे स्तन चूसने लगा, और मैं उसके बालों में हाथ डाल कर आनंद लेने लगी.

मे: ऑश… मस्त… मज़ा आ रहा है.

और उसका सर अपने सीने में दबाने लगी. मनोज को ज़्यादा खेलना पसंद नही था. उसने मुझे बेड पे लिटा दिया, और छूट चाटने लगा. मुझे मानो स्वर्ग सुख मिला हो.

मे: एयाया… ज़ोर से, ऑश आहह चूसो.

मनोज ने अपनी पंत नीचे की, और पहली बार आज मैने इतने पास से कोई लंड देखा था. उसका लंड करीब 7 इंच का था. मनोज मेरे उपर आते हुए छूट में लंड धकेलने लगा. दर्द हो रहा था, पर मैं सहन किए जेया रही थी. मुझे तो बस आनंद लेना था.

मनोज धीरे-धीरे अंदर लंड डालने लगा. जब उसको ऐसा लगा के अब पूरा अंदर चला गया था, तो उसने धक्के मारने शुरू कर दिए. हर धक्के के साथ मेरी आवाज़ मदहोश हो रही थी.

मे: क्या मस्त लग रहा है. मज़ा आ रहा है. और ज़ोर से सिर, आहह उई मा, क्या अछा लग रहा है.

मनोज: साली तूने पहले भी कभी चुदाई की है (धक्के मारते-मारते)?

मे: नही सिर.

मनोज: पहली बार में तुझे दुख नही रहा?

मे: सिर, दुख रहा है. पर आपके लिए सब मंज़ूर है. इतना कह कर मैने उनको एक ज़ोरदार किस किया होंठो पे.

मनोज मुझे जाम कर पेल रहा था. करीब 15 मिनिट इस पोज़िशन में छोड़ने के बाद मनोज ने मुझे घोड़ी बनाया. अब मनोज मुझे पीछे से ठोकने लगा.

मे: आआह्ह्ह्ह… हहाा सिर… ऑश… हहाआ…

मेरी नज़र साइड के रूम पर गयी, जहा मुझे पर्दे के पीछे कुछ दिखने लगा. मैने देखा की मनोज का दोस्त हमे चुदाई करते देख रहा था. मैने चुड़वते हुए मनोज को देखा तो वो हस्स रहा था.

मैं चुदाई में इतनी डूब गयी थी, की उसके देखने के बाद भी मैने मनोज को रोका नही. मनोज मुझे पेले जेया रहा था और उसके दोस्त की तरफ मैं देखे जेया रही थी.

आख़िर में मनोज ने अपना माल मेरी छूट में छ्चोढ़ दिया और बेड पे गिर गया. मैं भी वही बैठ गयी नंगी. जब तोड़ा चुदाई का खुमार उतरा, तो देखा के उसका दोस्त वाहा नही था. मैने उठ कर पर्दे को किनारे किया तो देखा की उसका दोस्त बाहर के रूम में बैठा था बुक लेके.

हम दोनो ने कपड़े पहने, और बाहर आ गये. मनोज और उसका दोस्त हस्स रहे थे, पर मुझे अब शरम आने लगी थी.

दोस्त: कभी रूम चाहिए तो आ जाना मनोज.

मनोज: हा अब तेरा ही सहारा है.

और दोनो हासणे लगे.

मनोज और मैं वाहा से चले गये.

मे: वो हमे देख रहा था.

मनोज: देखने से कुछ नही होता. उसका रूम है, इतना तो अड्वॅंटेज लेगा ही वो.

मुझे तो बहुत शरम आने लगी. क्लास के बहाने एक दिन फिर हमने उसी दोस्त के घर जाने का सोचा. अब मैने भी सोच लिया था की देखता है देखने दो.

उसके घर जाते ही मनोज ने उसके सामने मुझे किस करना शुरू कर दिया. मनोज मेरे स्टअंन ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा और मैं भी मज़ा लेने लगी. मनोज ने मेरे कपड़े निकालने चाहे, पर मैने कहा-

मे: यहा नही.

उसका दोस्त सामने था. हम दोनो अंदर के रूम में चले गये, और मनोज मेरे कपड़े निकालने लगा. एक-एक करके हम दोनो नंगे हो गये. मुझे लंड चूसना पसंद नही था. मैं बस उसको हाथ में लेकर खेलने लगी.

मनोज भी ज़्यादा बॉडी से खेलता नही था. उसने सीधा लंड मेरी छूट में घुसाया, और धक्के मारने शुरू कर दिए. कुछ देर बाद उसने पोज़िशन चेंज करके मुझे अपने उपर बिता लिया.

मैं मनोज की तरफ पीठ करके उसके लंड पे बैठ गयी. मैने सामने देखा की उसका दोस्त अपना लंड निकाल कर हिला रहा था. उसके दोस्त का लंड मनोज के लंड जितना ही था. मुझे वो नज़ारा देख कर बहुत हॉर्नी लगने लगा. मैं मनोज के उपर उठक-बैठक करने लगी, और उसका दोस्त मेरे सामने लंड हिलने लगा.

उसका दोस्त थोड़ी और डेरिंग करके मेरे सामने नंगा खड़ा हो गया. मैं घबरा कर पीछे मनोज को देखने लगी तो वो मुस्कुरा रहा था. उसका दोस्त लंड मेरे मूह के पास लाया. पर मुझे लंड मूह में लेना पसंद नही इसलिए मैं उसको हाथ से हिलने लगी.

करीब 15 मिनिट में उसके लंड ने अपना पानी मेरे फेस पे डाल दिया. कुछ पानी बालों में तो कुछ पानी मूह में चला गया. मनोज भी अब लास्ट की स्टेज पे था, और कुछ देर में उसने भी अपना माल मेरी चूत में छ्चोढ़ दिया.

हम तीनो भी नंगे वही पड़े रहे. मैने होश में आने के बाद कपड़े लेने चाहे, पर मनोज ने माना किया की और एक रौंद करना है. मुझे उसके दोस्त के सामने नंगा रहने में शरम आ रही थी. मैने कपड़े पहने, और बाहर आ गयी.

मे: सिर मैं अब यहा नही अवँगी. मैं सिर्फ़ आपकी हू. मुझे उसमे कोई इंटेरेस्ट नही है.

ऐसा कह कर मैं घर आ गयी. मेरी क्लास 6 मंत्स की थी. सब की क्लास 7 बजे ख़तम होती थी. उसके बाद मनोज सिर और मैं जब टाइम मिले तब चुदाई करते थे. मनोज सिर और मैं लगभग 8-9 मंत रिलेशन्षिप में रहे.

उस दौरान उन्होने मुझे उनके ऑफीस में काई बार छोड़ा. लेकिन एक बार मैने उनको एक नयी लड़की से बात करते हुए देखा. ज़्यादा जानने की कोशिश की तो पता चला वो दोनो प्यार करते थे.

अब मुझे समझ आने लगा की मनोज सिर किसी एक के नही थे. वो बस मुझे ट्राइ कर रहे थे. मैने उसके बाद उनसे मिलना बंद किया, और अपनी पढ़ाई पे ध्यान देने लगी.

आयेज क्या-क्या बदलाव हुए ज़िंदगी में, जानने के लिए मैं जल्दी ही हाज़िर हो जौंगी.

तो बे कंटिन्यूड…

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