बरसात की रात

तब उन्होंने मेरा लौड़ा पकड़ते हुए कहा बेटा तुम भी तो नंगे हो मैंने अपने दोनो हाथ झट से लंड पर रख लिये और छुपाने का नाटक करने लगा मगर जानता था कि अब ये साली चुदवायेगी तो ज़रूर मगर फ़िर भी मैंने अपना नाटक चालू रखा बोला आंटी आपको ऐसा नहीं करना चाहिये था ये गंदी बात है

तभी आंटी मेरे लौड़े को मसलते हुए बोली और तुम जो शाम से मेरी चूचियाँ निहार रहे थे मेरे ब्लाउज़ के ऊपर से ही इस तरह देख रहे थे कि बस खा ही जाओगे वो अच्छी बात थी और जब मैं कोफ़ी बना रही थी तब तुम्हारी नज़रें कहां थी मुझे पता है मुझे चोदना सिखा रहे हो अभी कल के बच्चे हो तुम बेटा मैं तुम्हारे जैसे ना जाने कितनो को अपनी चूत में समा कर बाहर कर चुकी हूं

उसकी ये सब बात सुन कर तो मुझे बहुत ही जोश चड़ गया उसने यकीनन मुझे भड़काने के लिये ही ऐसे भाषा प्रयोग की थी मगर मुझे तो शुरु से ही चोदने में गाली गलौच पसंद थी और आंटी इतनी सभ्य नज़र आ रही थी कि उनके मुंह से इस तरह की बात सुनना मेरे लिये एक नया अनुभव था और उसके बाद हम लोगों में इस तरह से घमासान चुदायी हुई इसका ज़िक्र अगले पार्ट में करूंगा

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