बचपन से जवानी तक

हेलो ऑल रीडर्स, कैसे हैं आप सब. पहली फ्री सेक्स स्टोरीस और पहली काली सच्चाई लिख रहा हू अपनी ज़िंदगी की. उम्मीद है पसंद आए सबको.

मेरा नाम प्रवेश है(चेंज्ड) सिविल इंजिनियर हूँ. फिलहाल हरयाणा के एक अंबाला मे रहता हू. मेरी एज 25 साल है. दुबला पतला हू. लंड कोई होगा 6.5 या 7 इंच.

ये कहानी मेरे और मेरी कज़िन सिस के बारे मे है. वो मेरे ताऊ जी की बड़ी बेटी है इस वक़्त बहुत सुंदर और सेक्सी है. कोई भी लड़का देखे तो वो चोदना चाहेगा. 36-30-38 का भारी भरकम फिगर पतली कमर तीखे नैन नक्श. और सबसे ख़ास उसकी आँखे जिनसे नज़रें मिलाओ तो ऐसा लगता है चोदने के लिए इन्वाइट कर रही हो.

हम बचपन से साथ खेले पले बढ़े हुए क्यूकी हमारी फॅमिलिस एक साथ रहती थी. हम एक्चुअली बंगाली हैं. मम्मी और टाई जी के डेली के झगडो से तंग आकर पापा ने अलग जघा घर रेंट पे ले लिया और अलग रहने लगे.

फिर एक दिन ताऊ जी का बहोत बुरा एक्सीडेंट हुआ. ब्रेन मे चोट लगी. ताऊ जी की दिमागी हालत बिगड़ गई वो अपना मेंटल बॅलेन्स खो बैठे.

टाई जी ने वापिस बंगाल जा कर हमारी पुश्तैनी हवेली मे रहने का फ़ैसला किया और वो चले गये. मेरी कज़िन का नाम मिनी(चेंज्ड) है, वो उस वक़्त बहोत छोटी थी. छोटा तो मैं भी था तो हमे बहोत बुरा लगा.

फिर दिन गुज़रते गये साल बीत गये और मैं ** साल और वो ** साल की हुई जब किसी काम से मैं और मेरी मम्मा बंगाल गये. हमे 3 दिन वाहा रुकना था. 1 ही दिन मे हम फिर से वही लड़ते झगड़ते साथ खेलते भाई बेहन बन गये.

उस वक़्त उसके और मेरे शरीर मे बहोत चेंजस आ गये थे उसके बूब्स करीब 32 और गांड करीब 36 की थी मोटी हो गई थी. बट मैं हमेशा से पतला ही था. मेरा लंड अब खड़ा होता था और मैं मूठ भी मारने लगा था. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

एक शाम मम्मा और टाई जी मेरी छोटी कज़िन को साथ लेकर कहीं गये हुए थे. मैं और मिनी घर मे खेल रहे थे. खेल क्या रहे थे ऑलमोस्ट कुश्ती कर रह थे. मुझे याद है उसने वाइट फ्रॉक जो घुटनो से थोड़ी उप्पर थी डाली हुई थी और मैने जीन्स और टी-शर्ट.

लड़ते लड़ते मैं बेड पे गिरा और पीठ के बल लेट गया और वो मेरे उप्पर मेरे लोडे पर अपनी गांड सेट कर के पीठ के बल लेट गई. बस यही से मेरे बहनचोद बनने का सफ़र शुरू हो गया. मेरे लंड उसकी नरम मोटी गांड को टच पाकर टाइट हो गया. मुझे मज़ा आ रहा था.

शायद उसे भी, उसने मेरा हाथ पकड़ के अपने लेफ्ट बूब पे रख दिया और मेरा हाथ दबाने लगी. मैं सला चूतिया समझ ही नही पाया के वो क्या चाहती थी. काफ़ी देर तक यही चलता रहा मैं धीरे धीरे अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ता रहा वो अपना मुम्मा दबाती रही मेरे हाथ से.

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फिर टाई जी की आवाज़ सुनाई दी और वो मा-मा करती हुई उठी, मेरे लंड को दबाया और भाग गई. मेरी टाइट जीन्स मे लंड दर्द करने लगा तो मैं चेंज करने बाथरूम मे घुस गया. लेकिन मूठ नही मारी.

फिर हुई रात सबने खाना खाया ताऊ जी को मम्मा ने इंजेक्षन दिया और सुलाया. जब सोने की बारी आई तो मुझे और मेरी दोनो कज़िन्स को एक बेड दे दिया गया अंदर के रूम का. मेरी छोटी कज़िन जल्दी ही सो गई.

बट हम 11 बजे तक गप्पे मारते रहे. मम्मा ने डांटा तो चुप हो कर लेट गये. और कुछ देर मे सो गये. मैने कॉटन का पजामा पहना हुआ था बिना अंडरवियर के और उसने बहोत लूस टॉप और एक स्कर्ट. उसका टॉप इतना लूस था की उसकी हेवी बॉडी भी पतली लग रही थी.

रात को करीब 2 बजे मेरी आँख यूँ ही खुल गई. हम लाइट बंद करना भूल गये थे. मिनी बेसूध हो कर सो रही थी. उसका टॉप सिमट कर नेवेल से उप्पर चड़ गया था और लेग्स स्प्रेड होने की वजह से स्कर्ट भी कमर पर चढ़ गई थी नीचे उसने पेंटी पहनी थी जो उसकी गांड के उभरो पर इकट्ठी हो गई थी.

मेरा लंड फिर खड़ा होने लगा. पजामा तंबू बन गया. मैने अपनी टी-शर्ट उतारी और आधा नंगा हो गया. लाइट ऑफ की और धीरे से जाकर उसके पीछे उसकी गांड और चूत के छेड़ के बीच लंड सेट किया एक हाथ उसके लूस टॉप मे डाला तो उसने नीचे कुछ नही पहना था.

उसका नर्म मुलायम चुचि हाथ लगा. उफफफफफफ्फ़… कितना नर्म कितना मखमली वो पहला एहसास आज भी हाथ पर फील होता है. मैं उससे चिपक गया और लेट गया और हल्के हल्के लंड को उसकी गांड मे रगड़ने लगा. हाथ उसके बूब्स पेट कमर गर्दन हर जगह सहलाने लगा उस मज़े को कैसे बयान करू समझ नही आ रहा.

कुछ देर करने के बाद वो जागी. और मेरा हाथ पकड़ लिया अपने बूब्स पर मैं तभी स्टिल हो गया. वो धीरे से बोली “करो ना अच्छा लग रहा है” याद करके फिर से लंड खड़ा हो गया.

मैं बहोत खुश हुआ. मैं और ज़्यादा उससे चिपक गया लंड को दबा दबा कर रगड़ने लगा और ज़्यादा प्यार से इसे सहलाने लगा. उसने हाथ पीछे लाकर पजामे के उप्पर से मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी. मैं मज़े की सारी हदो को पार कर चुका था.

मेरे मूह से कंट्रोल करने की कोशिश के बावजूद सिसकियाँ निकल रही थी. सस्स्सस्स आहह मैने अपना हाथ उसके बदन को सहलाते हुए उसकी पेंटी मे डाला और उसकी हल्की गीली चूत सहलाने लगा. वो भी मस्त मस्त हो कर आहे भरने लगी.

फिर अचानक वो मेरी ओर पलटी अब हमारे फेस आमने सामने थे. मैने उसके होठों को अपने होठों मे दबा लिया और चूसने लगा. हमे स्मूच नही करना आता था. उसने मुझे पीछे किया और मेरे होठों को अपने मूह मे भर कर चूसने लगी. मैं जोश मे उसके 32 साइज़ के चुचि को मसल रहा था.

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फिर मैने उसे सीधा लिटाया और उसका टॉप उतारा अब वो टॉपलेस मेरे सामने थी. अंधेरे मे कुछ दिखाई नही दे रहा था. फिर भी मैं उसके मम्मो को घूर्ने लगा. उसे भी ये फील हुआ और बोली “ऐसे मत देखो दादा शर्म आती है” मैं मुस्कुरा उठा. फिर ज़ोर से उसके माममे चूसने लगा. उसके पेट पे चूमता रहा और वो आँहे भरती रही.

फिर वो मेरे पजामे को पकड़ के खींचने लगी. मैने भी पजामा उतार दिया और उसकी स्कर्ट और पेंटी भी. अब हम दोनो भाई बेहन अपनी माओ की नाक के नीचे नंगे होकर एक दूसरे को चूम रहे थे चाट रहे थे लड़कपन का मज़ा ले रहे थे.

अब वो मेरे उप्पर थी और मेरे हर अंग पर चूम रही थी अपने होठों की छाप छोड रही थी. मेरी गर्दन को चूमते हुए मेरी छाती को चूमते हुए.

पेट तक पहुँची. फिर पेट से नीचे. और फिर वो हुआ जो मैने कभी ना देखा था ना सुना था ना सोचा था. उसने अपना मूह खोल कर मेरा रॉक हार्ड लंड अपने मूह मे भर लिया. और चूसने लगी जैसे की लॉलिपोप या कुलफी चूस्ते हैं.

कभी ऐसे चूस्ति जैसे के अपनी मा के निप्पल से दूध पी रही हो. अनाड़ी पना मे उसके दाँत बार बार लंड पर लग रहे थे. लेकिन दोस्तो उस अनाड़ी पन मे जो मज़ा वो मुझे दे रही थी वो प्रोफेशनल्स भी नही दे पाती होगी. मेरा उस वक़्त कम नही निकलता था तो चुदाई मे प्रेग्नेंट होने का डर भी नही था लेकिन चुदाई करना ना उसे आता था ना मुझे.

हम तो बस मज़े से मजबूर होकर एक दूसरे को चूम रहे थे चाट रहे थे. मुझे मज़ा आने लगा और मैं चरम पर पहुँचने वाला था लेकिन उसने चूसना नही छोड़ा. मेरा शरीर अकड़ा और मैने उसका सिर पकड़ के लंड उसके गले तक उतार दिया.

मुझे अपना फीडबैक देने के लिए कृपया कहानी को ‘लाइक’ ज़रूर करे, ताकि कहानियों का ये दोर देसिकहानी पर आपके लिए यूँ ही चलता रहे.

उसकी साँस ब्लॉक हो गई. जब लंड निकाला तो वो खाँसने वाली थी लेकिन मुझे इस बात का पहले अंदेशा हो गया तो मैने उसके मूह पर तकिया लगा दिया ताकि खाँसने की आवाज़ बाहर मम्मा और टाई जी के कानो तक ना जाए. फिर हमने अपने कपड़े पहने और एक दूसरे से लिपट के सो गये

इस कहानी मे इतना ही दोस्तो. आगे की कहानी अगली बार बताऊंगा. और हाँ ये कहानी 100% सच है. अगर आप लोगो को पसंद आए तो प्लीज़ मैल मी मैं वेट करूँगा आपकी मेल्स का. और अगर रेस्पॉन्स मिला तो ही अगली कहानी लिखूंगा.

बहुत कुछ है मेरे पास बताने को. बहुत मज़ेदार और दर्दनाक भी. मेरे साथ जो जो हुआ है भगवान करे किसी के साथ ना हो. बस आप लोग प्लीज़ मुझे अपना फीडबैक दें. अब मैं चला मिनी के पास, बाइ. फ्री सेक्स स्टोरीस

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