बाप ने बुआ को रंडी की तरह पेला

मेरा नामे सृजन है. ये कहानी कुछ वक़्त पहले की है. मेरे पापा सरकारी नौकरी करते है. शादी के बाद से ही मेरी बुआ हमारे साथ रहती थी. उनकी शादी भी हुई और टूट गयी क्यूंकी उनका अफेर था. एक बात बता डू की मेरे पापा सेक्षुयली बहुत आक्टिव और डॉमैनेटिंग है. बड़ा लंड और छोड़ने में बिल्कुल जानवर है.

मैने काई बार मा की चुदाई देखी. पापा बिल्कुल भी शरम नही करते और काम से आने के बाद मा को दबोच के छोड़ते थे. घर में मा की आहें गूँजती थी. ऐसे में मैं और बुआ काफ़ी फ्रस्टरेटेड हो जाते थे.

एक बार मा बहुत बीमार पद गयी. पापा को छोड़ने के लिए कोई मिल नही रहा होगा शायद, इसलिए उनकी नज़र बुआ पे चली गयी. बता डू की बुआ बहुत ही हॉट थी. बड़े-बड़े चूचे और मटकती गांद पुर मोहल्ले में फेमस थी. ऐसा इसलिए था क्यूंकी वो शादी से पहले भी काफ़ी चूड़ी थी. एक रात की बात है, मैं अपने कमरे में सो रहा था, जिसमे बुआ भी सोती थी.

पापा आधी रात में कमरे में आए, और बुआ के बगल में सो गये. फिर मैने देखा की वो बुआ के बूब्स मसल रहे थे. मैं समझ नही पाया. बुआ झटके से उठी, और उनकी चीख निकल गयी. पापा ने झट से अपना हाथ बुआ के मूह पे रख दिया.

वो बड़े प्यार से बोले: देख बेहन, तू कब से चूड़ी नही है. और मुझे तेरी हालत पे तरस आता है. मेरी बीवी बीमार है, और मुझे रगड़ने के लिए कोई मिल नही रहा. मैं जानता हू की तू और सृजन हमारी चुदाई काई बार देख चुके है. तो क्यूँ ना आज मैं तुझे रग़ाद के छोड़ू?

बुआ कुछ देर चुप रही. फिर बोली: भाई मेरे अंदर की आग बिल्कुल तुम्हारे जैसी है. मुझे चूड़ने का इतना मॅन करता है की क्या बोलू. तेरा मूसल लंड तो मैने काई बार देखा है. आज इस लंड को अपनी छूट में डालने का मौका मिल रहा है. मैं इसे हाथ से जाने नही दूँगी. लेकिन सिर्फ़ चुदाई से मेरा मॅन नही भरेगा. मुझे इसे चूसना है. तुम मेरे मूह को छोड़ो बिल्कुल रॅंड की तरह.

ये सुन कर पापा का लोड्‍ा तंन गया. उन्होने वही पंत उतार दी. बुआ ने पापा का लोड्‍ा सीधा अपने मूह में ले लिया. पापा भी कहा रुकने वाले थे. उन्होने पूरा लोड्‍ा बुआ के मूह में धकेल दिया, और बुआ का मूह छोड़ने लगे.

इतना बड़ा लंड लेने की आदत ना होने के कारण बुआ ने वॉमिट कर दिया. पर पापा पे जुनून सॉवॅर था. वो लगातार छोड़ते रहे और बुआ का पूरा फेस वॉमिट और कम से भर गया. लेकिन बुआ भी उसकी खानदान से है. वो भी पापा का साथ देती रही.

पापा ने अपना गाढ़ा कम बुआ के मूह में छ्चोढ़ दिया. बुआ के मूह से दोनो तरफ से पापा का वीरया गिर रहा था. बुआ की आँखें फटत गयी थी और वो बहुत ज़ोर-ज़ोर से खांस रही थी.

फिर बुआ ने पापा से कहा: अब तो तू बेहन के मूह को छोड़ चुका है. अब बेहन की छूट इसी मर्दानगी से छोड़.

सच काहु तो बुआ की छूट गुफा थी. काई लड़कों से चूड़ने के बाद ऐसा होना ही था. मैने बुआ की छूट सोते टाइम कितनी बार देखी थी. पापा कहा हटने वाले थे. उन्होने सीधा लंड बुआ की गुफा जैसी छूट में डाल दी. बुआ ने अफ तक नही की.

बुआ ने हल्के से कहा: छोड़ अब इस छूट को. मैं भी देखु कितना दूं है तेरे लोड में.

पापा तेज़ी से लंड को अंदर-बाहर करने लगे. बुआ अपना मूह हाथ से दबा के चूड़ने लगी. पापा के झड़ने का टाइम आया तो उन्होने पूछा-

पापा: कहा निकालु अपना माल?

बुआ ने कहा: अंदर ही छ्चोढ़ दे.

फिर पापा ने अपना सारा माल बुआ की गुफा में छ्चोढ़ दिया, और तक कर बुआ के उपर लेट गये. लेकिन बुआ कहा थकने वाली थी.

वो फिर पापा का लंड सहलाने लगी और बोली: इतने में कुछ नही होने वाला मेरा. एक दो रौंद और चूड़ना है मुझे.

पापा ने जैसे-तैसे अपना लोड्‍ा खड़ा किया, और फिरसे लग गये छोड़ने में. बुआ भी इस बार झाड़ गयी, और हाँफने लगी. उन्होने पापा को एक लंबी किस दी, और बोली-

बुआ: मैं ये लोड्‍ा थोड़ी देर अपने मूह में रखना चाहती हू.

वो दोनो 69 के पोज़िशन में आ गये, और बुआ पापा का काला मोटा लोड्‍ा अपने मूह में लेकर चूसने लगी. उधर पापा बुआ की छूट चाटने लगे. पापा का फिरसे खड़ा हो गया, और उन्होने बुआ से कहा-

पापा: मुझे फिरसे छोड़ना है.

अब बेहन को छोड़ने मिले तो कोई ऐसे थोड़े ना छ्चोढेगा.

बुआ बोली: मेरी छूट में अब दर्द हो रहा है.

तो पापा ने तपाक से कहा: गांद तो अभी बाकी है. सच बता तू पहले गांद मरवा चुकी है ना?

बुआ ने बेशर्मी से कहा: काई लोग छोड़ चुके है मेरी गांद. लेकिन तेरे जितना मोटा लोड्‍ा मैने नही लिया है. लेकिन तेरे लिए मैं ये करने को तैयार हू.

पापा ऐसा मौका कहा छोढ़ने वाले थे. तुरंत उन्होने बुआ को कुटिया बनाया और गांद के च्छेद पे अपना वीरया लगाया, जो बुआ के फेस से तपाक रहा था. चिकनाई काफ़ी थी, जिससे बुआ की गांद का च्छेद ढीला हो गया. पापा का लोड्‍ा तुरंत गांद में घुस गया. आधे घंटे छोड़ने के बाद पापा तक गये.

इस बार माल भी नही निकला क्यूंकी टंकी खाली हो गयी थी. गांद से लोड्‍ा निकालने के बाद पापा बोले-

पापा: मेरी एक विश है, की तेरी गांद से निकला लोड्‍ा तेरे मूह में डालु.

बुआ तो छिनाल थी ही. वो तुरंत ही पापा का लोड्‍ा मूह में लेकर छुड़वाने लगी. फिर दोनो बातें करने लगे. बुआ ने अपना किस्सा सुनना शुरू किया, की कैसे लोगों ने उसे छोड़ा और पापा भी अपनी कहानी बताने लगे. काफ़ी देर तक यही चला, और फिर दोनो कमरे से निकल गये. इधर मेरी हालत खराब थी की मैं क्या करू. सोया राहु या कुछ बोलू.

मैने सोचा सोए रहना ही ठीक है. फिर बुआ को बाद में ब्लॅकमेल करके अपना काम निकाल लूँगा. बाद में मैने ऐसा किया भी, और आचे से उसे किया बुआ को. ये मैं दूसरी कहानी में बताना चाहूँगा. उम्मेड है ये कहानी सब को पसंद आएगी.

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