बाप ने बेटी को बताया अपनी हवस का सच

ही दोस्तों ये स्टोरी एक सॅकी घटना पे आधारित है. मेरी फॅमिली में, मैं गोपाल (48), मेरी वाइफ सुनीता (47), मेरी बेटी अनामिका (26), और मेरा बेटा आयुष (20), रहते है.

मेरी बेटी जो इस कहानी की रानी है, उसने नॉर्मल पढ़ाई करी है, और उसे कुकिंग का भी काफ़ी शौंक है. वो अपनी कुकिंग वीडियोस भी यौतूबे पे डालती रहती है. जैसे-जैसे मैं कहानी में आयेज बढ़ुंगा, वैसे-वैसे मैं उसके फिगर के बारे में बतौँगा.

मैं अपनी फॅमिली से बहुत प्यार करता हू. पर मैने मॅन में मेरी बेटी के लिए कभी ग़लत नही सोचा. लेकिन एक बार हम लोग गाओं जेया रहे थे खानदानी पूजा के लिए. हमारे घर से गाओं जाने में करीब 4 घंटे लगते है. उस दिन अनामिका ने जीन्स और टॉप पहना हुआ था. जाने में हमे कोई दिक्कत नही हुई, सभी को आचे से सीट मिल गयी थी.

पर जब हम लौट रहे थे, तब शाम की बस थी 7:30 पीयेम की. उस बस में काफ़ी भीड़ थी. हमे सिर्फ़ एक ही सीट मिली, जिसमे मैने अपनी वाइफ को बिताया क्यूंकी उसकी कमर में काफ़ी दर्द रहता है. मेरा बेटा आयेज जाके ड्राइवर के पास थोड़ी सी जगह में जाके बैठ गया. मैं और मेरी बेटी वही खड़े रहे.

करीब आधे घंटे के बाद लास्ट में एक सीट खाली हुई, जिसमे मैने अपनी बेटी को बैठने को बोला. पर उसने ज़िद करके मुझे बिता दिया. अनामिका मेरे बगल में ही खड़ी थी. मैने सोचा थोड़ी देर बाद मैं उस सीट पे उसे बिता दूँगा. रोड काफ़ी खराब था. ड्राइवर के अचानक ब्रेक मारने से मेरी बेटी मुझ पर गिरी. उसके दोनो बूब्स मेरे चेहरे को दबा दिए. वो पहली बार था जब मैने उसके मुलायम बूब्स को महसूस किया था.

वो जल्दी से पीछे हटी, और मुझे सॉरी बोलने लगी. पर मेरा ध्यान उसके दोनो बड़े बूब्स पे था. मेरी बेटी बिल्कुल शर्ली सेटिया जैसी दिखती है. उसके बूब्स पर्फेक्ट शेप में है, और उसका बदन काफ़ी गोरा है. उसके लंबे बाल उसके कमर तक आते है. उस समय मेरे मॅन में अपनी बेटी के लिए फीलिंग्स चेंज हो गयी.

रात काफ़ी हो गयी थी. फिर मैने अपनी बेटी को बैठने के लिए बोला. आधे घंटे खड़े होने के बाद मुझे नींद आने लगी. मेरी बेटी ने मेरा हाल देखते हुए मुझे वो सीट पे बैठने को बोला. पर उसे भी नींद आ रही थी.

मैने उसे मेरी गोद में बैठने को बोला. मेरे मॅन में अभी भी कोई ग़लत फीलिंग्स नही थी. पर जब वो मेरी गोद में बैठी, तब मुझे उसके बूब्स का ख़याल आने लगा, और मेरा लंड खड़ा होता जेया रहा था.

उसने ये महसूस भी किया. उसने पीछे मूड के देखा और मैने अपनी आँखें बंद कर ली. मैने फिरसे सोने की आक्टिंग की. थोड़ी देर आयेज जाने के बाद मैने अपने हाथ उसके थाइस पे रख दिए. उसने फिरसे मुझे देखा. मैं फिरसे सोने की आक्टिंग कर रहा था. 15 मिनिट के बाद हमारा डेस्टिनेशन आ गया. लेकिन उस बस वाले इन्सिडेंट के बाद मेरे मॅन में मेरी बेटी के लिए फीलिंग्स पूरी तरह से चेंज हो गयी.

अब मैं उसके बूब्स को देखता, उसकी छ्होटी टॉप से उसके आर्म्पाइट्स को देखता. उसके मोटे-मोटे थाइस को देखता. मैं घर में पागल सा हो रहा था. अब मुझे हर हाल में उसे पाना था. ऐसे ही 1 महीना हो गया, और मुझे एक काम से अस्साम जाना था. अब आयेज का कॉन्वर्सेशन अट होमे.

गोपाल: सुनीता मुझे अस्साम जाना है ऑफीस के काम से.

सुनीता: ठीक है, कितने दिन लगेंगे?

गोपाल: 4 दिन.

अनामिका: पापा मुझे भी जाना है अस्साम. मुझे वाहा के लोकल फुड्स ट्राइ करने है. प्लीज़ मुझे भी ले चलिए.

ये सुनते ही मैं पागल सा हो गया. मुझे पता था इससे अछा मौका मुझे नही मिलेगा अनामिका को हासिल करने का. मैने तुरंत हा बोल दिया-

आयुष: अगर मेरा ट्रैनिंग नही होता ना, तो मैं भी जाता (रोते हुए).

मेरा बेटा स्पोर्ट्स में इन्वॉल्व रहता है, इसीलिए उसकी रोज़ ट्रैनिंग चलती है, जो की वो मिस नही कर सकता.

गोपाल: कोई बात नही, नेक्स्ट टाइम तुम्हे ले जौंगा.

सॅटर्डे शाम की ट्रेन थी. 2न्ड एसी में साइड अप्पर आंड साइड लोवर सीट थी हमारी. मैने ये सीट जान-बूझ के ली थी, क्यूंकी ये सीट्स में परदा होता है.

शाम को ट्रेन में बैठने के बाद हमने खाना खाया, और बैठ के बातें करने लगे.

अनामिका: पापा आप कितना काम करते हो हमारे लिए. ई आम सो प्राउड ऑफ योउ.

गोपाल: ई आम प्राउड ऑफ योउ टू डार्लिंग. तुम भी मेरा काफ़ी ख़याल रखती हो, बिल्कुल मम्मी के जैसा.

अनामिका: आपको मैं मम्मी से भी ज़्यादा प्यार करती हू (स्माइल के साथ).

गोपाल: हा मुझे पता है.

मुझे अब बस वाला इन्सिडेंट याद आने लगा. आज अनामिका ने ट्रेन में ट्रॅक पॅंट्स आंड त-शर्ट पहना था. उसमे से उसके तनने हुए बूब्स और क्लीवेज भी दिख रहे थे.

हम साइड लोवर सीट में बैठे थे, पैर सीधे करके. मैं उसका पैर सहला रहा था. उसे गुदगुदी हो रही थी.

जैसे ही वो मेरा हाथ हटाने के लिए झुकती उसकी क्लीवेज दिखाई दे रहे थी. बड़े-बड़े बूब्स देख मेरा दिमाग़ खराब हो रहा था. मैं उसे हवस की नज़र से देखने लगा. उसने मेरी तरफ देखा तो मैं उसके बूब्स देख रहा था. जैसे ही उसने मुझे उसके बूब्स को ताड़ते देखा, वो समझ गयी और ब्लंकेट से अपने बूब्स को कवर कर लिया.

अनामिका (मॅन में): पापा मेरे बूब्स को क्यूँ घूर रहे थे? लगता है मेरी क्लीवेज ज़्यादा दिख रही है. मैं अभी चेंज करती हू.

अनामिका: पापा मुझे नींद आ रही है. आप उपर चले जाइए ना, मुझे सोना है.

गोपाल: ठीक है बेटा, मुझे भी नीड आ रही है. मैं भी सोता हू.

गोपाल (मॅन में): लगता है इसे पता चल गया मैं इसके बूब्स देख रहा था. ओह शीत! अब क्या होगा?

मैं उससे नज़र भी नही मिला पा रहा था. सुबह हमने अपनी डेस्टिनेशन पे पहुँच के एक होटेल बुक कर लिया.

वो होटेल रूम डबल बेड का था. फ्रेश होने के बाद मैं ऑफीस के काम से चला गया, और अनामिका फुड एक्सप्लोर करने बाहर चली गयी. शाम को करीब 6 बजे मैं होटेल रूम में आया, और अपनी बेटी को बिस्तर पर सोते हुए देखा वित शॉर्ट्स आंड त-शर्ट. वो काफ़ी सेक्सी लग रही थी. मैने उसे नही उठाया, बस यू ही उसे देखता रहा. अचानक बेटी उठी और बोली-

अनामिका: पापा आप कब आए?

गोपाल: बस थोड़ी देर पहले.

अनामिका के बूब्स उसकी टाइट त-शर्ट में काफ़ी बड़े दिख रहे थे. मेरी नज़र फिरसे अनामिका के त-शर्ट पे जाके चिपक गयी. अनामिका एक ओपन माइंडेड लड़की थी. उसने अपने पापा को फिरसे उसके बूब्स को देखते हुए देखा. वो समझ गयी थी की पापा उसे छोड़ना चाहते थे. इससे आयेज ना बढ़ने के लिए अनामिका ने अपने पापा से डाइरेक्ट बोला-

अनामिका: पापा प्लीज़ मुझे ऐसे मत देखिए, मुझे अछा नही लगता. आप मेरे पापा है. प्लीज़. ये बोलते हुए अनामिका बातरूम की और चली गयी.

बातरूम से बाहर आने के बाद उसके पापा बोले-

गोपाल: बेटी जब से वो बस वाला इन्सिडेंट हुआ है, मैं अपने आप को कंट्रोल नही कर पा रहा हू. प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो. मेरे दिमाग़ में तुम्हारे लिए सिर्फ़ उल्टे-पुल्टे ख़याल आ रहे है.

अनामिका: आपको शरम नही आती अपनी बेटी के बारे में ऐसा सोचते हुए? मैं आपको कितना अछा समझती थी, पर आप तो हवसी निकले.

गोपाल: प्लीज़ बेटा मुझे माफ़ कर दो. अब से मैं ये सब नही सोचूँगा.

अनामिका: आप प्लीज़ मुझे अकेला छोढ़ दीजिए.

अनामिका ने अपने कपड़े चेंज किए. उसने वो ड्रेस पहना जिसमे उसके शरीर का कोई पार्ट ना दिखे. वो दर्र भी रही थी अपने पापा के साथ सोने में.

गोपाल बाहर जाके अपने आप को कोसने लगा की उसने डाइरेक्ट्ली क्यूँ उसे सब कुछ सच-सच बता दिया. अब वो उसे छोड़ना तो डोर छूने भी नही देगी.

गोपाल गुस्से में इन्ही सब चीज़ों के बारे में सोच रहा था, और अचानक उसका पैर सीडी से फिसल गया और वो लूड़कते हुए नीचे गिर गया.

इसके आयेज क्या हुआ, ये आपको अगले पार्ट में पता चलेगा.

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