आंटी जी का चुदाई का ज्ञान-2

दीदी को कुछ समझ नही आ रहा था की यह सब क्या हो रहा है, फिर आंटी ने अपने दोनो पैर दीदी की कमर के अगाल बगल डाले और अपने बूब्स को दीदी के मूँह में घूसेड दिया.

आंटी: पी ले बेटी, बहुत रस्स है मेरे दूध में.

दीदी: नहियिइ आंटी मुझे जाने दो.

आंटी: कुटिया साली, बहुत नाटक कर रही है.

दीदी: आंटी आप यह सब क्या कर रही है.

मे: दीदी, तुम बहुत सनडर हो और आंटी जी भी कितनी अच्छी हैं, तुम्हारे बूब्स बहुत सेक्सी हैं दीदी, मॅन करता है जिंदेगी भर मैं इन्हे ऐसे ही अपने मूँह में ले के पिता रहूं.

आंटी: हन मेरे बेटे, पी ले अपनी बेहन का दूध, मैं जल्दी ही तेरी मा का दूध भी और तेरी रंडी बेहन को पिलाओंगी और खुद भी पियूँगी.

मैं दीदी के निपल्स को दाँतों से काअट काट के चूस रहा था और आंटी जी भी दीदी का मूँह कस्स के अपने बूओबस में दबा के ज़बरदस्ती उनसे अपने बूब्स चुस्वा रही थी.

दीदी भी अब मज़े से आंटी के मोटे मोटे दूध को पी रही थी, इधर मैं दीदी के दूध को पी रहा था, 20 मिनिट तक हम तीनों ऐसे ही लगे रहे.

फिर आंटी जी ने दीदी की स्कर्ट निकाल दी अब दीदी सिर्फ़ पनटी में थी, दीदी ने शरम के मारे अपना चेहरा अपने हंतों से छुपा लिया, मैं दीदी के पास जा के उनके पैरों पे बैठ गया और अपने मूँह से उनकी पनटी को खींचने लगा, धीरे धीरे मैने दीदी की पनटी निकाल दी, दीदी अब मेरे और आंटी जी के सामने बिल्कुल नंगी खड़ी थी.

आंटी: अरी शर्मा क्यूँ रही है, अच्छा अकेले अकेले नंगी है इसी लिए क्या, चल मैं भी नंगी हो जाती हूँ, और तेरा भाई भी नंगा हो जाएगा, फिर तो शरम नही आएगी ना.

आंटी ने अपनी सारी निकाल दी फिर पेटीकोआट और फिर पनटी भी निकाल दी, आंटी जी हमेशा की तरह आज भी शेव्ड तीन, अब आंटी जी भी दीदी के पैरों में घुटने ने बाल बैठ गयी ,, अब मैं और आंटी जी दोनो दीदी के पैरों पे घुटनों के बाल बैठे हुए थे और दीदी खड़ी थी.

आंटी ने दोनो हांतों से दीदी की बर खोली और अपनी जीभ उसके अंदर डाल दी, मैं भी सेम आंटी जी की तरह जी कर रहा था, मेरी और आंटी जी की जीभ आपस में बार बार टकरा रही रही, जैसे ही हमारी जीएभ टकराती तो हम दोनो एक दूसे की जीभ चूस्टे और फिर दीदी की बर चूसना शुरे कर देते, हम दोनो की गरम गरम जीभ के टच से दीदी का पानी छूटने लगा.

वो नमकीन पानी मैं और आंटी जी दोनो ही टेस्ट कर रहे थे, आंटी ने दोनो हांतों से दीदी की टांगे फैला दी और अपनी जीभ उसमें डाल दी, मैं दीदी की टाँगों के नीचे जेया के उनकी टांगे चाटने लगा, और अपनी एक उंगली आंटी की बर में डालने लगा, आंटी को तो बहुत मज़ा आ रहा था.

15 मिनिट तक इसी तरह करने के बाद आंटी खड़ी हुई और दीदी को लीप किस करने लगी और मैं अभी भी नीचे बैठा हुआ दीदी की बर चूस रहा था, दीदी का हांत अब मेरे बालों में था और वो प्यार से मेरे सिर को अपनी बुउर के अंदर धकेल रही तीन, जब दीदी का पानी निकला गया, तो आंटी ने मुझसे कहा की अब खड़े हो जाओ, मैं औतनती के सामने जेया के खड़ा हो गया.

आंटी: तूने अपने भाई का लंड देखा है कभी ?

दीदी: नही आंटी, आज तक नही.

आंटी : तो चल आज हम दोनो मिल के तेरे भाई को नंगा करते हैं.

फिर आंटी मेरे पास आई और मुझे लीप किस करने लगीं, मैं भी आंटी के होंठों को पीने लगा, उनके होंठ को अपने दाँत से काटने लगा, दीदी मेरे पास आई और मेरी जीन्स के बटन खोलने लगी.

मुझे तो लगा मानो जन्नत ही मिल गयी थी, फिर दीदी ने मेरी जीन्स उतार दी, इधर मैं अब आंटी के बूब्स को मूँह मे ले के पीने लगा और आंटी अपनी एक उंगली अपनी ही बर में डाल रही थी.

दीदी ने मुझे नंगा कर दिया, लेकिन आंटी अब मुझे नही छोड़े रही थी और ज़बरदस्ती मेरा मूँह अपने बूब्स में दबा के उसे शुस्वा रही थी, फिर आंटी ने दीदी का हांत पकड़ के उसे भी अपनी तरफ खींचा और उससे कहा की चलो तुम भी अपने भाई के साथ मेरे दूध का मज़ा ले लो.

अब हम दोनो भाई बेहन आंटी के एक एक निप्पेल का मज़ा ले रहे थे, मैं आंटी जी का दूध पी रहा था ुआर एक हांत से दीदी के बूब्स को दबा रहा था, दीदी भी आंटी जी का दूध चूस रही थी और एक हांत दीदी का मेरा लंड सहला रहा था.

फिर औतनी ने हम दोनो को अपने से अलग किया और नीचे बैठ के मेरा लंड चूसने लगी और मैने दीदी का सिर पकड़ के अपनी तरफ खींचा और अपनी दीदी को लीप किस करने लगा, करीब 10 मिनिट बाद, मैने आंटी से कहा की आंटी अब बर्दाश्त नही होता है.

आंटी: अच्छा तो आज अपनी बेहन को नंगा देख के तुझ से रहा नही जा रहा.

मे: हन आंटी मुझे मेरी बेहन की बर छोड़नी है.

दीदी: शरम नही आती है अपनी बेहन के बारे में ऐसा सोंछते हो.

मे: अरी दीदी कल को तुम्हारा पति तुम्हे छोड़ेगा, अगर आज मैं छोड़ लुंग आटो क्या ग़लत है.

आंटी: सही तो कह रहा है, और घर की बात घर में ही रह जाएगी.

दीदी: लेकिन अगर मों को पता चल गया तो ??

आंटी: उसकी चिंता तू मत कर, बॅस इतना बता की जब मैं तेरे निपल्स चूस रही थी तो तुझे कैसा लगा ??

दीदी: बहुत अच्छा लगा आंटी.

आंटी: अब सोंच कल को अगर तेरा भाई, तेरी मों, मैं और मेरी बेटी सोनिया, हम सब मिल के अगर तेरा दूध पीएन, तेरी बर चूसें.

दीदी: यह आप क्या कह रही हैं आंटी, ऐसा कैसे पासिबल है?

आंटी: वो सब तू छोड़े बॅस इतना बता की अगर ऐसा हो जाए तो तुझे कैसा लगेगा ??

दीदी: ई कॅंट इमॅजिन आंटी, फिर तो बहुत मज़ा आएगा.

आंटी: तो बॅस अभी तू मौज कर बाकी सब मुझ पे छोड़े दे.

मे: दीदी बातों में टाइम खराब मत करो, इधर आ के कुटिया बन जाओ.

मेरे इतना कहते ही आंटी जी ने दीदी को घोड़ी बना दिया और खुद नीचे लेट के दीदी के दूध चूसने लगी और मैं पीछे आ के दीदी की बर चूसने लगा.

दीदी अब अपनी चूतड़ हिला हिला के अपनी बर मुझसे चुस्वा रही थी और आंटी जी को अपना दूध पीला रही थी, कुछ देर बाद मैं खड़ा हुआ और एक झटके से अपना मोटा लॅंड दीदी की बर में घुसेड दिया, एक जोरदार झटके से लंड अंदर चला गया, क्यूंकी दीदी ऑलरेडी दो बार झाड़ चुकी थी इस लिए अंदर से उसकी बर बहुत चिकनी हो गयी थी, और एक जोरदार झटके में ही पूरा लंड अंदर घुस गया,, दीदी जोर्र से चिल्ला उठी.

दीदी: नहियीईईईई, कामीने सेयेल, मार ही डालेगा क्या मुझे.

मे: मेरी कुटिया दीदी, जब चूड़ना ही है तो पुर मज़े लो ना, नखरे किस बात के.

आंटी: मेरी रॅंड बिटिया, आज से हम सब ऐसे ही चुदाई के मज़े लिए करेंगे,

दीदी: छोड़ो मेरे भाई अच्छे से छोड़ अपनी बेहन को.

आंटी: मेरे बेटे फाड़ दे अपनी बेहन की बर, छोड़ इसे, चिनार साली.

मे: मेरी बेहन, आआहह, उफफफ्फ़, कितनी टाइट है तेरी बुरर्र.

दीदी: आहह मेरे भाई और ज़ोर से, आअहह.

आंटी: कितनी टेस्टी है तेरी बेहन, मॅन करता है सारा डेन मैं इसी का दूध पीटी रहूं.

दीदी: पियो आंटी, आज से जब भी मान करे मेरा दूध पिया करो, चूसो मेरे निपल्स आंटी जी.

हम सब इसी तरह से बंदी गंदी बातें करते रहे फिर आंटी जी नीचे से उठी और दीदी की गांद में अपनी जीभ डाल के उसे चाटने अल्गी, कभी मेरा लंड दीदी की बर से निकल के उसे चुस्ती और फिर उसे दीदी की बर में डाल देती.

अब मैं ज़ोर ज़ोर से दीदी को छोड़ रहा था, आंटी जी को भी बहुत मज़ा आ रहा था, अब वो दीदी के मूँह के पास गयीं और अपने बूब्स को दीदी से चुसवाने लगीं और अपनी उंगली अपनी बर में डालने लगीं.

आंटी: पे ले मेरी बिटिया, अपनी आंटी का सारा दोध पी ले.

दीदी: मेरी रंडी आंटी, और पिलाओ, आअहह मेरे भाई ज़ोर से छोड़ो, आहह, उउउफफफ्फ़.

मे: मेरी रंडी बेहन.आहह मान कर रहा है की तुझे पुर घर में घुमा घुमा के छोड़ूँ, मों के सामने तुझे ऐसे ही कुटिया बना के छोड़ूँ दीदी.

दीदी: तो बना ले अपनी रंडी मेरे भाई, आहह.

आंटी: मेरा बहनचोड़ बेटा, आहह.

फिर काफ़ी देर तक अपना बूब्स दीदी से चुसवाने के बाद आंटी उठ के मेरे पीछे आ गयी और नीचे लेट के मेरे लंड दीदी की बर से निकाल के चूसने लगी, मैं दीदी की बुरर्र में अपनी उंगलियाँ डाल के छोड़ने लगा, दीदी अपने एक हांत से अपने ही निपल्स का काट रही थी, और आंटी जी मेरी टाँगों के नीचे लेते हुए मेरा लंड चूस रही थी.

फिर मैने आंटी जी को कुटिया बना दिया और दीदी से कहा.

मे: दीदी इधर आओ.

दीदी मेरे पास आ के घुटनो के बाल बैठ गयी, अब मैं आंटी को कुटिया बना और और दीदी से कहा की दीदी ज़रा मेरा लंड चूस लो.

दीदी: क्यूँ मैं क्यूँ चूसूं तेरा लंड, पहले इसे सॉफ कर इसमें मेरी बर का माल लगा हुआ है.

मे: तभी तो कह रहा हूँ दीदी की टेस्ट तो करो की तुम्हारी बर का पानी कितना टेस्टी है.

और मैने ज़बरदस्ती ही दीदी का मूँह नीचे खींच के उनके मूँह में अपना लंड डाल दिया, दीदी अपने मूँह बाहर खीचने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैने उसे अपना लंड उसके मूँह से निकालने ही नही दिया और ज़ोर ज़ोर से दीदी का मूँह छोड़ने लगा, आंटी जी अभी भी कुटिया बनी हुई थी और अपने ही हांतो से अपने बड़े बड़े दूध दबा रही थी.

15 मींते तक दीदी के मूँह की चुदाई करने के बाद मैने अपना लंड दीदी के मूँह से निकाला और आंटी की बर को अपने हांत से फैला दिया, दीदी घूर घूर के आंटी जी की बर देख रह थी.

फिर मैने आंटी जी की बर में तोड़ा सा थूक लगाया और अपना लंड उनकी बर में डालने लगा, अब मैने दीदी को अपने पास खींचा और उनके बूब्स चूसने लगा, एक हांत मेरा दीदी की कमर पे था जिससे मैं उसे अपनी तरफ खींच रहा था और एक हांत आंटी जी की कमर पे था और जॉदार धक्के मार रहा था.

आंटी: कॉड मेरे बेटे और छोड़ मुझे.

दीदी: मेरी रॅंडी आंटी, आहह उउउफ़फ्फ़.

हचार हचार की आवाज़ें उस वक़्त उस रूम में गूँज रही तीन, थोड़ी देर तक इसी तरह से चुदाई करते हुए मैने दीदी से कहाँ की तुम अब नीचे लेट के आंटी जी के बूब्स चोसो, दीदी तो जैसे मेरी इसी बात का वेट कर रही थी और झट से नीचे लेट गयी , अब दीदी किसी बच्चे की तरह दोनो हांतों से आंटी जी के बूब्स को पकक्द के चूस रही थी और मैं आंटी जी को छोड़ने में बिज़ी था, मैने अपने उंगली दीदी की बर में डाल दी और उसका भी पानी निकालने का ट्राइ करने लगा.

लगभग 30 मिनिट के बाद मेरे लंड से पानी निकालने लगा और झट से मैने अपना लंड आंटी जी की बर से बाहर निकाला अपना सारा माल दीदी के ऊपेर डाल,

आंटी भी दीदी के ऊपेर ही लेट गयी, उनका पानी भी उनकी बर से बाहर निकल रहा था, मैं आंटी जी की चटाद पे किस रहा था और अपनी उंगलियों से अभी भी दीदी को छोड़ रहा था,, मुझे अपनी उंगलियों से दीदी की चुदाई करता देख के आंटी जी भी दीदी की बर की तरफ आ गयी और मेरी उंगली दीदी की बर से निकाल के अपनी जीभ से दीदी की बर चूसने लगी.

अब दीदी अपनी चूतड़ उछाल उछाल के आंटी जी का मूँह अपनी बर के अंदर घुसा रही थी.

मैं वहीं खड़ा हो के आंटी और दीदी का यह . ग़मे देखने लगा और एक हांत से अपना लंड सहला रहा था, आंटी दोनो हांतो से दीदी के बॉब्स खींच रही थी मैं झट से दीदी के पास गया और उन्हे अपना लंड . दिया, दीदी अभी भी किसी . की तरह अपनी जीभ से दीदी की बर चूस रही थी.

दीदी ज़ोर ज़ोर से मेरे लंड की स्किन को ऊपेर नीचे कर रही थी और आंटी दीदी की चूस रही थी, लगभग 20 मिनिट के बाद दीदी ने अपना सारा पानी आंटी जी के मूँह में छोड़ दिया, और मेरा माल भी दीदी के हांतों में आ गया और मैं भी दीदी के ऊपेर उनके मस्तेरबातिओं करने से झाड़ गया.

इससे पहले की हम सब कुछ और कर पाते की अचानक नीचे से मम्मी की आवाज़ आई, वो हम दोनो को बुला रही थी.

इसके बाद किस तरह से हम तीनो ने मम्मी और आंटी जी की लड़की सोनिया को भी अपने ग़मे में शामिल किया, यह स्टोरी बाद में.

गर्ल्स आपको यह सेक्स स्टोरीस कैसी लगी ?? प्लीज़ शेर आंड मैल मे मेरी मैल ईद है “[email protected]” ई’म वेटिंग.

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