अंजू के अफेर की कहानी

यह चार साल पहले की बात है। टीना की शादी को करीब डेढ़ से दो साल हो चुके थे। हमारी शादी को तीन साल होने को थे। पहले दो सालों में तो मैंने और मेरे पति संजूजी ने फॅमिली प्लानिंग किया पर उस के बाद हम लोगों पर बच्चे के लिए सब का दबाव बढ़ने लगा।

एक साल तक कोशिश करने पर भी जब मुझे गर्भ ना रुका तब हमने कई डॉक्टरों का संपर्क किया और कई परिक्षण भी हुए। सब में यही परिणाम आया की मुझ में कोई भी कमी नहीं थी पर मेरे पति संजूजी के शुक्राणुं में कुछ कमी होने के कारण उनसे कोई भी स्त्रीको गर्भ नहीं रुक सकता था।

पहले तो मैं इस परिणाम को स्वीकार करने के लिए बिलकुल ही तैयार ही नहीं थी, क्यूंकि मरे पति संजूजी मेरी बड़ी तगड़ी चुदाई करते थे और चुदाई में वह काफी आक्रामक और शशक्त थे। मैं मेरे पति की चुदाई से पूरी तरह संतुष्ट थी। तो मैं कैसे मानती की मेरे पति में कोई कमी थी?

पर जैसे जैसे एक के बाद एक सभी परीक्षणों में जब एक से परिणाम आने लगे तब मुझे और संजूजी को यह स्वीकार करना ही पड़ा की मेरे पति संजूजी में कमी है और मुझे चुदाई का सुख भले ही मिल रहा हो, पर मैं मेरे पति से बच्चा नहीं पा सकती। अब हमारे लिए यह समस्या थी की या तो हम इस बात को सब के साथ साझा करें की कमी मेरे पति में थी और सब को यह कह दें की अब कुछ नहीं हो सकता। या फिर कोई इसका व्यावहारिक हल ढूंढे।

मैं इसके बिलकुल ख़िलाफ थी की मेरे पति में जो कमी है यह बात किसी भी कुटुंब के व्यक्ति को पता लगे; क्यूंकि मैं नहीं चाहती थी की कोई भी मेरे पति को हलकी नज़रों से देखे। किसी को भी यह कहने का मौक़ा ना मिले की मेरे पति नपुंशक हैं। मेरे पति नपुंशक नहीं थे। नपुंशक पुरुष वह होता है जिसका लण्ड खड़ा नहीं होता और जिसके लण्ड के अंडकोष में वीर्य नहीं होता।

मेरे पति का लण्ड थोड़ी सी भी उत्तेजना होते खड़ा हो जाता था। कहीं कोई सुन्दर लड़की देख ली या कोई लड़की का चित्र भी देख लिया तब। हाँ उसे शांत करने के लिए मुझे बड़ी मशक्क्त करनी पड़ती थी। और वीर्य की तो पूछो मत। हमारी शादी के बाद शुरू शुरू में तो मेरे पति से चुदवा कर मैं इतनी डरती रहती थी की कहीं मुझे गर्भ ना रुक जाए; क्यूंकि जब मेरे पति झड़ते थे तो इतना गरम, गाढ़ा और ज्यादा वीर्य छोड़ते थे की मेरी चूत भर कर छलक जाती थी और चद्दर, कपडे बगैरह खराब हो जाते थे।

मैं एकदम हताश और मानसिक रूप से टूटने लगी थी। मेरी समझ में नहीं आ रहा था की करें तो क्या करें। हमारे पास तीन विकल्प थे। पहला विकल्प था की हम कोई बच्चे को दत्तक लें, दुसरा विकल्प था की हम आई.वी.एफ. का सहारा लें मतलब किसी मर्द का वीर्य आधुनिक तकनीक द्वारा मेरे गर्भाशय में डाला जाए और मुझे गर्भवती बनाया जाए और तीसरा और आखिरी विकल्प जो सबसे ज्यादा विचित्र था, वह था की मैं किसी दूसरे मर्द से चुदवाऊं और गर्भ धारण करूँ।

मेरी सबसे बड़ी चिंता यह थी की मैं नहीं चाहती थी की हमारे परिवार में किसी को भी यह पता चले की मेरे पति अनुपजाऊ या बाँझ थे। मतलब वह किसी भी औरत को गर्भवती नहीं बना सकते थे। मुझे यह बिलकुल गँवारा नहीं था की कोई उन पर उंगली उठाये। पति की बदनामी मतलब पत्नी की भी बदनामी।

हमने बच्चा दत्तक लिया अथवा आई.वी.एफ. कराया तो पूछा जाएगा की ऐसा करने की जरुरत क्यों पड़ गयी? जो तीसरा विकल्प था वह तो सब से कड़वा और मुश्किल विकल्प था।

तीसरा विकल्प था की मुझे किसी ऐसे आदमी से चुदवाना पडेगा जो हमारे परिवार को जानता ना हो या फिर ऐसा हो जो आगे चलकर कभी हमें ब्लैकमेल ना कर सके। जब मुझे उसके साथ में सो कर उससे चुदवाना ही था तो फिर वह आदमी मुझे भी तो पसंद होना चाहिए। हो सकता है एक ही चुदाई में गर्भ ना टिके। हो सकता है मुझे चार पांच दिन तक या एक हफ्ता या और ज्यादा बार चुदवाना पड़े।

मतलब वह आदमी ऐसा हो जो ना सिर्फ मुझे बच्चा दे सके बल्कि जो मर्द ऐसा हो जिससे मुझे बार बार चुदवाने में कोई हर्ज ना हो और यह व्यावहारिक दृष्टि से भी मुमकिन हो की मैं उससे बार बार चुदवा सकूँ। किसी भी बाहर के मर्द को घर में और ख़ास कर हमारे बैडरूम में कई रातों तक रखना जबरदस्त शक पैदा कर सकता था।

एक बात और भी थी की जो बच्चा हो वह तेजस्वी हो और अच्छा खासा तंदुरस्त और सुन्दर हो। उसके लिए मुझे चोदने वाला मर्द भी तो ऐसा ही होना चाहिए ताकि उसके वीर्य से पैदा होने वाला बच्चा भी ऐसा ही हो। अब ऐसा आदमी कहाँ से लाएं?

दूसरी बात यह भी थी की उसके लिए मेरे पति भी राजी होने चाहिए। खैर मेरे पति संजयजी ने खुद ही मुझे यह तीसरे विकल्प के बारे में बात की थी और बताया था की अगर मैं पहले दो विकल्प के लिए राजी नहीं हूँ तो वह मुझे आग्रह करेंगे की मैं मेरी पसंद के किसी और मर्द से चुदवा कर गर्भवती बनूँ। मेरे पति को उसमें कोई भी आपत्ति नहीं थी। अब तय मुझे करना था की मैं किससे चुदवाऊं?

ऐसा नहीं है की मैंने किसी गैर मर्द से पहले नहीं चुदवाया था। हमारे पड़ोस में मेरी एक सहेली रहती थी। वह कॉलेज में मुझसे दो क्लास सीनियर थी। वह बड़ी चुदक्क्ड़ थी। उसके कई बॉयफ्रैंड्स थे। मैं जब पहले साल में थी तभी उसने मेरी पहचान कुछ लड़कों से करवा दी थी। हमारा एक ग्रुप ही बन गया था।

पहले तो मैं बड़ी ही शर्मीली थी और लड़कों से ज्यादा करीबी नहीं रखती थी पर धीरे धीरे मेरी सहेली के जबरदस्त आग्रह पर मैं ढीली पड़ने लगी। उनमें से एक लड़का जो मेरी सहेली के क्लास में था वह तो मेरे पीछे ही पड़ गया। वह सुबह शाम मेरे इर्दगिर्द घूमता रहता, मेरी बड़ी चापलूसी करता था और था भी वह बड़ा प्यारा। वह लड़का मुझे पसंद भी था।

उस उम्र की हर युवा लड़की की तरह मेरा भी चुदवाने का बड़ा मन करता रहता था। पर माँ बाप के संस्कार के कारण और कुछ कुदरती भय के कारण मैं आखरी वक्त में पीछे हट जाती थी। मुझसे कुछ लड़कों ने थोड़ी हलकीफुलकी जबरदस्ती कर चुम्माचाटी कर ली थी। मैंने उन्हें हल्काफुल्का विरोध करते हुए मेरे बूब्स मसलने दिए थे।

पर मैं किसी लड़के को भी उससे आगे बढ़ने की इजाजत नहीं देती थी। अक्सर भीड़ में बस में या ट्रैन में कई लड़कों ने मेरी चूँचियाँ मसलीं थीं। मेरी पसंदीदा उस लड़के का तो लण्ड भी मैंने पकड़ा, सहलाया और दो बार चूसा भी था। उस लड़के ने मेरी चूत में उंगली डालकर मेरी चूत का रस चूसा था और मेरी चूत को उँगलियों से चोदा भी था। पर मैं उसे उसके आगे बढ़ने नहीं देती थी।

मैं उस लड़के के कई बार मिन्नतें करने पर भी उस को चोदने के लिए मना कर देती थी। मेरी सखी मुझे बार बार उलाहना देती रहती थी की अरे, मौक़ा है तो चौक्का मार ले और उससे चुदवाले वरना बादमें मौका नहीं मिलेगा तो पछताएगी। पर मैं पता नहीं क्यों, आखिरी समय में डर कर मना कर देती थी।

पर धीरे धीरे उस लड़के से मेरी दोस्ती बढ़ने लगी। मैं उसके बारे में, उससे चुदवाने के बारे में कई बार सोचती रहती थी। हमारी दोस्ती इस हद तक बढ़ गयी की एक दिन पिकनिक में उसने मुझे बाकी लड़के लड़कियों से अलग थलग कर के मौक़ा देख कर एक झरने में धक्का मार कर धकेल दिया। बाद में खुद भी उसमें कूद पड़ा।

फिर उसने मुझे प्यार करते हुए हम दोनों के कपड़ों को एक के बाद एक निकाल फेंका। मैं उसे मना करती रही, गिड़गिड़ाती रही पर उसने मेरी एक ना सुनी। कुछ देर बाद जब उसने मेरा ब्लाउज और ब्रा निकाल फेंका और वह मेरे बूब्स को चूसने लगा तब मेरा बचाखुचा अवरोध भी गायब हो गया।

उस दिन उस झरने में खेलते हुए नहाते हुए उस लड़के ने मुझे चोद डाला। उस दिन उसने मुझे पानी में और फिर बाद में किनारे ले जा कर रेत में चोदा। वह चुदाई मेरी पहली चुदाई थी जिसे मैं कभी नहीं भूलूंगी। उस साल उस लड़के ने मेरी काफी बार चुदाई की।

मैं उस लड़के के साथ प्यार करने लगी थी। सारा कॉलेज यह सब जानता था। वह उस साल के बाद कॉलेज छोड़ आगे की पढ़ाई के लिए विदेश चला गया और बाद में उसने ना तो मेरे किसी ईमेल का जवाब दिया ना ही कोई फ़ोन से बात हुई। इस वाकये से मेरा दिल टूट गया।

उसी समय हमारे ही ग्रुप का एक लड़का जो उस लड़के से पहले मुझ से मेलजोल बढ़ाना चाहता था पर जिसे मैं टरका देती थी उसने मेरा उस मुश्किल समय में जबरदस्त साथ दिया। वह रईस घर का लड़का था। वह मुझे खुश करने के लिए कुछ ना कुछ तोहफे देता रहता था और मुझे हरदम दिलासा देता रहता था और अक्सर अपनी कार में घुमाने के लिए इधर उधर ले जाता था।

वह शरीफ भी लगता था क्यूंकि उसने उस दौरान कभी भी मेरा गलत फायदा उठाने की कोशिश नहीं की। मैंने ही उसे किस करना शुरू किया और फिर क्या था, ऐसे ही वक्त जाते हमने उसकी कार में कई बार चुदाई की। उसका लण्ड बड़ा तगड़ा था। मैंने उसके लण्ड को कई बार चूसा भी था। वह बहुत अच्छा चोदता था। पर उसके साथ भी वही हुआ। कॉलेज पास होने पर वह भी विदेश चला गया और फिर दुबारा वही अन्धेरा वक्त।

उसी समय मेरी पडोसी सहेली जो मेरी कॉलेज में थी उसकी शादी हो चुकी थी वह मुझे मिली। जब मेरी उससे दिल खोल कर बात हुई और मैंने उसे मेरा सारा वाक्या बताया तो वह ठहाका मार कर हँस कर बोली, “यार कॉलेज लाइफ ऐसी ही होती है। यहां सब लड़के लडकियां दिल खोल कर मौज करते हैं और बादमें वास्तविक जिंदगी में लड़के या लडकियां माँ बाप के बताये हुए लड़के या लड़की से शादी कर अपना घर बसा लेते हैं।

तू इस लफड़े में कहाँ अपना दिल जला बैठी? तू भी बिंदास मस्ती कर। तेरा यह साल आखरी साल है। खूब चुदवा, मौज कर और फिर पास होने के बाद आगे पढ़ना हो तो पढ़, वरना किसी अच्छे लड़के से शादी करके अपना घर बसाले।”

मुझे उसकी बात जँच गयी। बस और क्या था? तब से मैं बिंदास बन गयी। वहीँ पर मेरे दो बॉयफ्रेंड बन गए। मैंने दोनों से कह दिया था की वह दोनों ही मेरे बॉयफ्रेंड हैं। मैंने दोनों से खूब चुदवाया। उनके लण्ड चूसे, उनसे मेरी चूत चुसवाई और सब कुछ किया। मुझे कोई भी अटैचमेंट नहीं रखना था किसी के साथ।

बल्कि कुछ और लड़के भी मेरे पीछे पड़े हुए थे। उनके साथ भी मस्ती की चुम्माचाटी की और चुदाई के अलावा सब कुछ किया। आज तक वह सब मुझे मेरे बिंदास मेलजोल के कारण याद करते होंगे। वह सब लड़के अच्छे थे। उन्होंने मेरे साथ कोई धोखाधड़ी नहीं की। किसी ने भी मुझसे किसी भी तरह का कोई वादा नहीं किया और ना ही मैंने किसी लड़के से।

मुझे उसका कोई अफ़सोस नहीं है। वह मस्ती का ज़माना था और मैंने खूब मस्ती की। मेरे पति संजयजी को यह सब पता है। पर वह सब बात शादी के पहले की थी। शादी के बाद घरगृहस्थी के बोझ और व्यस्तता के कारण घर से ज्यादा बाहर निकलने का मौक़ा ही नहीं मिला तो किसी और से चुदाई के बारे में सोचना भी नहीं हुआ।

हालांकि मेरे पति संजयजी सेक्स के मामले में बड़े ही उदार दिल के हैं। वह मुझे कई बार उनके दोस्तों से जबरदस्ती मिलाते थे और उनके साथ मेलजोल बढ़ाने के लिए उकसाते रहते थे।

वह तो मुझे यहां तक कहते थे की अगर उनके मर्द दोस्तों में से कोई दोस्त मुझे ज्यादा ही पसंद आये और अगर मैं उससे चुदवाना चाहूँ तो वह ख़ुशी से मुझे इजाजत दे देंगे, बल्कि मुझे सपोर्ट भी करेंगे। पर मैं मेरे पति को इतना ज्यादा प्यार करती थी और उनसे इतनी ज्यादा खुश थी की मैंने और किसी पर ध्यान दिया ही नहीं।

जब मुझे यह पता चला की मेरे लिए एक ही विकल्प बचा है जिसमें मुझे किसी गैर मर्द से चुदवाना पडेगा तब मुझे कुछ हद तक रंजिश रही की अगर मैंने मेरे पुराने दोस्तों में से किसी के साथ संपर्क बनाये रखा होता अथवा मेरे पति की बात मानी होती और उनके दोस्तों में से किसी दोस्त से चुदवाया होता तो मैं उस दोस्त से दुबारा चुदवा कर गर्भधारण कर सकती थी।

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