आफरीन की मस्त चुदाई-2

वो बोली- मेरे बॉयफ्रेण्ड ने लास्ट टाइम मुझे 4-5 महीने पहले चोदा था.. अब तक ऐसा कोई नहीं मिला.. जिसने मुझसे उसके सिवा छुआ भी हो।

अब उसने अपना अनुभव दिखाया.. वो मेरे ऊपर आ गई और मेरे सीने पर किस करने लगी।
फिर उसने अपने हाथों से पकड़ कर मेरा लंड अपनी चूत के मुँह पर रख दिया।
बाकी काम मुझे करना था।

मैंने हल्का सा धक्का दिया.. उसकी चूत गीली होने की वजह से मेरा लंड सरकता हुआ आधा अन्दर चला गया और उसके मुँह से एक प्यारी सी आवाज़ आई ‘अह्ह्ह्ह्ह्.. ह्म्म्म्म .. प्लीज़ सैंडी धीरे करो.. अब तो मैं सिर्फ़ तुम्हारी ही हूँ..’

मैंने कहा- मेरी रानी अब तो मैं तुझे ज़ी भर के प्यार करूँगा और तेरी प्यास को मिटाता रहूँगा.. और तुम्हारी इस चूत को भी मेरी आदत हो जाएगी।

यह कहते ही मैंने अचानक एक और जोरदार धक्का लगा दिया।
वो संभाल नहीं पाई थी और उसके मुँह से एक ज़ोरदार चीख निकली ‘आअहहह.. उमाआ.. आह सैंडी.. क्या करते हो.. आराम से करो मेरी जान..’

अब मैंने थोड़ा रुक कर धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए, वो मेरी गोद में बैठी आराम से चुद रही थी।
फिर मैं उसे नीचे लिटा कर उसके ऊपर आ गया.. और ज़ोर-ज़ोर से उसे चोदने लगा, पूरे कमरे में मस्त चुदासी आवाजें आ रही थीं ‘ह्म्म्मर.. अहह.. सैंडी फाड़ दो आज मेरी चूत को.. बुझा दो मेरी प्यास..’

मैंने कहा- मेरी जान तुम बस देखती जाओ.. आज जो मज़ा तुम्हें आएगा.. वो तो उस कमीने ने भी नहीं दिया होगा.. ना जाने वो कैसे इतनी खूबसूरत लड़की को धोखा दे सकता है।

मेरे धक्के तेज़ होते जा रहे थे और आफरीन भी गाण्ड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी।
मैंने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी, वो अब तक बीच में एक बार पहले भी झड़ चुकी थी, पूरे कमरे में ‘फक्च.. फक्च..’ की आवाज़ गूँज रही थी।

मैंने उससे कहा- मेरी जान.. मैं झड़ने वाला हूँ..
वो बोली- प्लीज़ बाहर मत निकलना.. मैं तुम्हें महसूस करना चाहती हूँ।

मैं और तेज़ होता चला गया।
लम्बी चुदाई अब ख़त्म होने वाली थी.. मैं एक ज़ोरदार धक्के के साथ चूत में झड़ने लग गया और मेरे साथ आफरीन भी झड़ने लगी, उसका पूरा बदन अकड़ने लगा, उसने मुझे कस कर अपनी टाँगों और हाथों से पकड़ लिया था।

हम दोनों एक-दूसरे से चिपक गए और देर तक ऐसे ही लेटे रहे।
हम दोनों पसीने से लथपथ थे.. जबकि कमरे में पंखा फुल स्पीड पर था।

अब हम दोनों हल्का महसूस कर रहे थे, मैंने उसके माथे पर किस किया।
वो बोली- सैंडी.. यार इतना मज़ा मुझे आज तक नहीं आया।

मैंने उसे समझाया- यार, किसी एक के लिए ज़िंदगी मत बर्बाद करो.. लाइफ में और भी बहुत कुछ है और तुम्हारी फैमिली भी तो है।

वो मुझसे चिपक गई और कहने लगी- यार सैंडी मैंने अपने घर वालों की भी बात नहीं सुनी थी.. अब मेरे अब्बू मुझसे बात तक नहीं करते.. बस मेरी अम्मी से कभी-कभी फ़ोन पर बात हो जाती है।

मैंने कहा- अपनी फैमिली से जाकर मिलो और उन्हें प्यार से ‘सॉरी’ बोलो.. और हाँ अपनी मॉम ओर डैड से अपनी नई लाइफ के लिए रिक्वेस्ट करना.. आख़िर है तो माँ-बाप ही.. वे तुम्हें जरूर माफ़ कर देंगे।
उसने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

मैंने टाइम देखा तो 8.45 हो रहे थे.. मैं झट से उठा और फ्रेश होकर कपड़े पहनने लगा.. आफरीन भी फ्रेश हो गई।
फिर मैं घर की ओर चलने लगा।
जाते-जाते आफरीन ने मुझे गेट पर फिर से एक लंबा सा किस किया और मैं अपने घर आ गया।

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