बरसात की रात

हैलो! दोस्तों कैसे हैं!

अब मैं अपनी कहानी शुरु करता हूं।

मेरा मन अपनी मां और चाची की चूत मार मार कर अब उकता चुका था, गांव वाली बहु की भी चूत का भोसड़ा बना चुका था मैं,।

हां, मगर उनकी दोनों लड़कियों की प्यास अभी अधूरी ही थी।

मैं चाहता तो बड़े आराम से उन्हे चोद सकता था बल्कि बुआ खुद ही मेरा लंड पकड़ कर अपनी दोनो बेटी की चूत में घुसेड़ती।

पर मेरा उनकी बेटियों में कोई इंट्रेस्ट नहीं था पर अब कोइ और चूत भी मेरी नज़र में नहीं थी और लंड था कि उतावला हो रहा था उसे तो चाहिये ही चाहिये।

खैर उस दिन तो मैंने अपनी मम्मी को ही चोदा मगर फ़िर दूसरे दिन मैं बिना इरादा ही सड़क पर टहल रहा था कि अचानक कोई मुझसे टकराया मैंने नज़र उठा कर देखा तो करीब 45-46 साल की एजेड लेडी रही होंगी मगर मैंटैन बहुत थी मैं भी—

ख्याल में था और वो पता नहीं कैसे मुझसे टकरा गयी मुझे अचानक होश आया तब मैं हड़बड़ा कर उनसे सोरी बोला उनके पोली बेग से कुछ सामान गिर गया था और वो बैठ कर उठा रही थी उनका ब्लाउज़ काफ़ी टाइट था जिसके अंदर उनकि बड़ी-बड़ी चूचियाँ बाहर निकलने को बेताब थी।

हालांकि उन्होंने पल्लू डाल रखा था मगर पिंक कलर की झीनी सी साड़ी से सब साफ़ नज़र आ रहा था मैं खड़े-खड़े उनके बूब्स का नज़ारा देख रहा था तब ही जैसे मैं नींद से जागा और मैं भी उनका सामान उठाने में मदद करने लगा।

तभी मैंने कहा सोरी आंटी मेरी वजह से आपका सामान बिखर गया वो बोली कोई बात नहीं बेटा !

और सारा सामान रखने के बाद वो मुझसे बोली- बेटा तुम नयी जेनेरेशन की यही एक प्रोब्लम है हर कोई कहीं ना कहीं खोया रहता है।

मैं शर्मिंदा होते हुए बोला- नहीं आंटी ऐसी बात नहीं है आप गलत सोच रही है।

फ़िर उन्होंने मुझसे पूछा- बेटा क्या तुम कोफ़ी पीना पसंद करोगे?

मैंने तुरंत ही हां में जवाब दिया।

और फ़िर हम लोग वहीं पास के कोफ़ी शोप पर बैठ गये वहां ज्यादा तर स्कूली लड़के और लड़कियाँ ही थे।

वो उन सबको देख रही थी, फ़िर अचानक मेरी तरफ़ देख कर पूछा बेटा आप क्या करते हो?

मैंने कहा- आंटी मैं ला कर रहा हूं।

वो बोली- बहुत खूब मगर तुम्हारा ध्यान किधर था? क्या तुम भी इन सब स्कूली लड़को की तरह नयी तितलियों को ताक रहे थे?

उन्होंने जिस अंदाज़ में ये बात कही मुझे अज़ीब सा लगा मैंने हड़बड़ाते हुए कहा- नहीं आंटी ऐसी कोई बात नहीं है खैर आप बतायें आप कहां से आ रही थी?

तब वो हंसते हुए बोली- क्या बेवकूफ़ी भरा सवाल करा? अरे भाई मार्केटिंग कर के आ ही रही थी कि तुमने धक्का मार दिया अच्छा ये बताओ घर में और कौन-कौन है आपके बेटा?

मैंने कहा- मम्मी, पापा और एक छोटी बहन है और आंटी आपके घर में?

‘मैं और मेरी बेटी!’ उनका छोटा सा जवाब मिला।

मैंने पूछा- और अंकल?

वो बोली- बेटा वो ऐयरफ़ोर्स में हैं और मेरा बेटा भी वहीं ट्रेनिंग कर रहा है।

बहुत उदासी भरी थी उनकी बातों में तब ही अचानक मौसम खराब हो गया और बारिश होने लगी हम लोग बहुत देर तक इधर-उधर की बातें करते रहे करीब 2 घंटे बाद भी पानी नहीं रुका तो आंटी कुछ परेशान हो गयी मैंने पूछा क्या बात है आंटी आप कुछ परेशान सी है तब उन्होंने घड़ि देखते हुए कहा बेटा 8 बज रहे हैं और पानी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा और कोई साधन भी नहीं मिलेगा अब तो तब मैंने कहा आंटी मेरा घर करीब में ही है आप चाहे तो चल सकती है तब वो बोली बेटा असल मे घर पर नेहा अकेली होगी और आजकल का माहौल तो तुम जानते ही हो जवान लड़की को अकेला नहीं छोड़ना चाहिये तब मैंने कहा आंटी आप यहीं रुके मैं अभी कार ले आता हूं तब वो बोली कि बेटा तुम भीग जाओगे तब मैंने कहा आंटी जवान लोगों पर बारिश का असर नहीं होता और मैं भाग कर घर गया और मम्मी को बताया कि एक दोस्त के घर जा रहा हूं कोई ज़रूरी काम है मम्मी रोकती रह गयी कि बेटा बारिश हो रही कल चले जाना मगर मैं रुका नहीं और कार लेकर कोफ़ी शोप पहुंच गया पानी अभी भी बहुत तेज़ था वो जैसे ही शोप से बाहर मेरी गाड़ी तक आयी काफ़ी हद तक भीग चुकी थी और मैं तो पहले ही तर था क्योंकि घर तक जाने में काफ़ी भीग चुका था
खैर थोड़ी ही देर बाद मैं एक बड़ि सी कोठी के सामने रुका कोठी देख कर मैं हैरान रह गया तब ही वो कार से उतरते हुए बोली बेटा कार पार्किंग में पार्क करके घर में चले आओ बहुत भीगे हो चेंज कर लो नहीं तो सर्दी लग जायेगी मैंने कहा नहीं आंटी ऐसे कोई बात नहीं आपको घर तक छोड़ दिया अब मेरा काम खतम मैं चलता हूं इजाजत दीजिये तब आंटी ने थोड़ा डांट कर कहा जितना कह रही हूं उतना करो आखिर मैं तुम्हारी मां कि तरह हूं जाओ गाड़ी पार्क करके आओ इतनी देर की बहस में आंटी बिल्कुल तर हो चुकी थी मैं गाड़ी पार्क करने के बाद जब आया तो आंटी वहीं खड़ी थी
उनकी साड़ी बिल्कुल भीग कर उनके शरीर से चिपक चुकी थी पिंक साड़ी के नीचे उनकी ब्लैक डिजाइनर ब्रा साफ़ नज़र आ रही थी हालांकि मेरे मन में अभी तक उनके लिये कोई गलत विचार नहीं थे मगर आखिर कब तक अंदर का शैतान सोया रहता उनको इस पोज़ में देख कर मेरे औज़ार में सनसनी होने लगी मैं कुछ देर तक उनको निहारता रहा तब ही वो मेरी आंखों के आगे चुटकी बजाते हुए बोली कहां खो गये बेटे? तुम किसी डाक्टर को दिखाओ तुम्हारे में कोइ मरज़ लगता है ये और मेरा हाथ पकड़ कर अंदर ले जाने लगी अंदर दाखिल होते ही मुझे एक बहुत ही खूबसुरत लड़की नज़र आयी जिसकी उम्र करीब 15-16 साल की रही होगी वो मिडी पहने हुए थी और सुरत से बहुत परेशान नज़र आ रही थी आंटी को देखते ही उनसे लिपट गयी मम्मी कहां चली गयी थी आप मैं घबरा रही थी आंटी ने उसको अलग करते हुए कहा मेरी रानी बेटी बाहर पानी बरसने लगा था इस लिये देर हो गयी और मैं फोन लगा रही थी तो एंगेज जा रहा था खैर कोई बात नहीं अब तो मैं आ गयी हूं मेरी बहादुर बच्ची तुमने खाना खाया? उसने कहा जी मम्मी अभी थोड़ी ही देर पहले रामू काका खाना दे कर अपने घर चले गये हैं

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