दोस्तों उमीद करता हू अब तक की मेरी गे सेक्स कहानी आपको अची लगी होगी. अब आते है आयेज की कहानी पर.
दाद का लोड्ा चूसने का सिलसिला कुछ दिन ऐसे ही चलता रहा. डॅडी ज़्यादातर काम में ही बिज़ी रहते थे. लेकिन जब भी घर होते थे मेरी गांद को टूल और मूह को अपने लोड से ज़रूर छोड़ते थे. ऐसे ही 10-15 दिन बीट गये.
दाद आज पूरा दिन घर रहने वाले थे. कुछ दिन बाद मम्मी भी आने वाली थी, इसलिए दाद आज कुछ ज़्यादा ही रोमॅंटिक मूड में थे. आज दाद मॉर्निंग से ही अंडरवेर में ही घूम रहे थे.
मैं किचन में जूस बना रहा था. तभी दाद पीछे से आ कर मेरी गर्दन पर किस करते हुए मेरी पंत खोलने लगे.
मैं: अभी तो मॉर्निंग है?
दाद: आज मैने छुट्टी ली है. आज मॉर्निंग ईव्निंग जैसा कुछ नही है.
दाद मेरी अंडरवेर निकाल कर, मेरी गांद को फैला कर मेरे च्छेद को देखने लगे.
दाद: आज आएगा मज़ा, अब पूरा खुल गया है च्छेद.
मैं: मतलब?
दाद: आरिक आज का मज़ा तू कभी भूल नही पाएगा.
ये बोल कर दाद मेरी गांद के च्छेद को चाटने लगे. मेरे हाथ से जूस नीचे ज़मीन पर गिर गया. मैं झुक कर जूस सॉफ करने लगा. लेकिन दाद अभी भी मेरे पीछे से मेरी गांद को चाटने में ही लगे हुए थे.
दाद की हरकतें मुझे पागल कर रही थी. उन्होने मुझे गोद में उठा कर, किचन से बाहर हमारे हॉल में सोफे पर गिरा दिया. फिर खुद बिल्कुल नंगे हो गये.
दाद ने अपना लोड्ा मेरे मूह में दिया. मेरा सर पकड़ कर ज़ोर-ज़ोर से झटके देने लगे.
2 मिनिट तक ऐसे ही मूह छोड़ने के बाद.
मैं: आज टूल कहाँ है?
दाद अपना लोड्ा पकड़ कर बोले: आज ये टूल से ट्राइ करते है.
मैं: ये तो बहुत मोटा और लंबा है डॅडी.
दाद ने मुझे डॉगी पोज़िशन में किया. फिर मेरी गांद पर लूब्रिकॅंट गेल लगा कर, अपने लोड पर कॉंडम लगाया. फिर उस पर भी गेल लगते हुए बोले-
दाद: पहले दर्द होगा, फिर जो मज़ा आएगा, वो तू बार-बार माँगेगा.
उन्होने मेरी गांद में अपनी उंगलियाँ डाल कर मेरे च्छेद को पूरा फैला दिया. मुझे दर्द तो हो रहा था, लेकिन टूल से बहुत बार कर चुका था, इसलिए अब ज़्यादा पता नही चला.
दाद उंगलियों को अंदर डाल कर पूरा अंदर तक घूमने में लगे हुए थे. मेरे बदन में तो जैसे को बिजली सी दौड़ने लगी थी.
मैं: ओह डॅडी, आराम से, आआआ डॅडी.
दाद 2 मिनिट तक ऐसा करने के बाद उंगलियों को बाहर निकाल कर फिर से गांद के च्छेद में लूब्रिकॅंट गेल डालने लगे. मेरा च्छेद अब फैल चुका था. दाद ने मेरी गांद पर किस किया, और बड़े प्यार से अपना लोड्ा मेरे च्छेद पर रखा. फिर धीरे-धीरे लोड का सूपड़ा अंदर करने लगे.
मैं: आआआ दाद, दर्द हो रहा है.
दाद: बस-बस तोड़ा कंट्रोल कर. थोड़ी देर की बात है.
दाद लगातार लोड्ा अंदर करते गये. फिर एक-दूं रुक गये. कुछ देर तक उन्होने कुछ नही किया, और फिर एक ज़ोरदार झटके के साथ पूरा लोड्ा अंदर कर दिया.
मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी थी. दाद ने मुझे बहुत कस्स के पकड़ा हुआ था, इसलिए मैं डोर भी नही हो सका. वो मुझे धीरे-धीरे झटके देना शुरू करते गये.
मैं: आआआआअ…. डॅडी……. बहुत दर्द हो रहा है.
दाद मेरे चुचो को दोनो हाथ से दबाते हुए मेरी गांद चुदाई करने लगे. वो गांद फाड़ चुदाई करते-करते मेरे लिप्स पर, कभी मेरी गर्दन पर किस करते. 5 मिनिट तक ऐसे ही छोड़ते-छोड़ते दाद ने लोड्ा बाहर निकाला, और कॉंडम जो खून में सन्न गया था, उसे निकाल कर फेंक दिया.
फिर उन्होने मुझे वॉशरूम के अंदर ले जेया कर मेरी गांद का खून सॉफ किया. उसके बाद एक नया कॉंडम लगा कर मेरी गांद को छोड़ने लगे. मेरे दोनो हाथ वॉशरूम की दीवार पर थे. मैं झुका हुआ था. दाद अब तेज़-तेज़ झटको से मेरी गांद फाड़ रहे थे.
मैने शवर ओं कर दिया. शवर का ठंडा-ठंडा पानी हमारे गरम बदन में आग लगा रहा था. मेरी दर्द से हालत बुरी थी, लेकिन दाद की चुदाई मेरी बदन को एक अलग ही सुख दे रही थी.
दाद ने अपने हाथ से मेरा लोड्ा हिलना शुरू किया. गांद छोड़ते-छोड़ते दाद मेरा लोड्ा इतना तेज़-तेज़ हिला रहे थे, की 5 मिनिट बाद ही मेरा माल दाद के हाथ में ही निकल गया. दाद ने सारा माल मेरे मूह में डाल दिया.
मेरा माल तोड़ा नमकीन था. तभी दाद ने मुझे घुमा कर घुटने के बाल नीचे बिताया, और शवर बंद करके, अपने लोड से कॉंडम निकाल कर, मेरे फेस पर लोड्ा तेज़-तेज़ हिलने लगे.
2 मिनिट बाद दाद का सारा माल मेरे मूह से होते हुए मेरे निपल्स पर आ गया. कुछ माल मेरे मूह के अंदर भी चला गया.
दाद: क्यूँ, आया ना मज़ा?
मैं: हा दाद, सच में बहुत मज़ा आया. लोवे योउ डॅडी.
दाद और मैने जल्दी से नहा लिया. उसके बाद हम ब्रेकफास्ट करके बाहर घूमने चले गये. रात को आने के बाद हमने फिर से एक रौंद करा, लेकिन मेरी गांद में दर्द ज़्यादा था इसलिए डॅडी ने ज़्यादा हार्ड चुदाई नही करी.
जब तक मम्मी घर नही थी, दाद मुझे रोज़ रात को छोड़ते थे. लेकिन 3 दिन बाद मम्मी भी आ गयी थी, इसलिए अब दाद के साथ ये सब पासिबल नही हो पा रहा था. इसलिए मैने रात को दाद का सेक्स टूल गांद में लेना शुरू कर दिया.
मम्मी इस बार पूरा 1 मंत हमारे साथ रही. इस बीच दाद और मेरे बीच कुछ नही हुआ. मेरा बहुत मान करता था, लेकिन दाद को सीधा-सीधा बोल भी नही सकता था.
फिर कुछ दिन बाद, हम सब डिन्नर कर रहे थे. तभी दाद बोले: मुझे एक बिज़्नेस डील के लिए 3-4 दिन के लिए शिमला जाना है. मेरा अमेरिका वाला दोस्त आ रहा है. अगर ये डील पूरी हुई तो हम पार्ट्नरशिप में काम कर सकते है.
मम्मी: वाउ गुड, तुम्हारा दोस्त तो यूयेसे में बहुत बड़ा बिज़्नेसमॅन है. हमे ये मौका नही छ्चोढना चाहिए.
मैं: मुबारक हो दाद.
दाद: आरिक तुम भी मेरे साथ चलो. इसी बहाने तुम्हे भी बिज़्नेस को समझने का मौका मिलेगा.
मम्मी: बिल्कुल आरिक, ज़रूर जाओ दाद के साथ. इस ट्रिप में दाद से आचे से घुल-मिल भी जाओगे (अब मम्मी को क्या पता दाद कितना घुल और मिल चुके थे).
नेक्स्ट दे दाद और मैं मॉर्निंग की फ्लाइट से शिमला पहुँच गये. शिमला पहुँच कर दाद और मैं एक रिज़ॉर्ट में पहुँच गये. रिज़ॉर्ट बहुत बड़ा था. वहाः पर कोई भी नही दिख रहा था.
मैं: दाद यहाँ कोई भी नही है. आपके दोस्त कहाँ है?
दाद: आरिक मेरा दोस्त रास्ते में ही है, बस आता ही होगा. ये रिज़ॉर्ट उसका ही है.
दाद मुझे रूम में ले जेया कर किस करने लगे. वो मेरे कपड़े खोलने लगे. तभी मुझे गाते खुलने की आवाज़ आई और हम दोनो बाहर आ गये. एक ब्मो कार से 2 दाद की आगे के आदमी बाहर आए. दाद उन दोनो से गले मिल कर बात करने लगे.
तभी दाद ने मुझे अपने पास बुलाया और दोनो से मिलवाया. जो अमेरिका से आया था बिज़्नेस के लिए उनका नाम विक्रम था. उनकी हाइट 6 फीट, रंग सावला, मूह पर हल्की-हल्की दाढ़ी और मूच भी रख रखी थी. मस्क्युलर जिम वाली बॉडी थी उनकी.
दूसरे दोस्त का नाम रोहित था. उसकी हाइट 5.7 फीट, रंग गोरा, और मस्क्युलर बॉडी थी. दोनो बहुत ही स्मार्ट लग रहे थे. विक्रम ने मुझे गले लगाया और बोले: आरिक बेटा, फाइनली तुमसे मुलाकात हो गयी.
विक्रम और रोहित को आने में बहुत टाइम लग गया था. कुछ देर बाद शाम हो गयी. सब फ्रेश हो कर डिन्नर पर मिले. वहाँ नॉर्मल बात-चीत हुई. उसके बाद हम सब सोने चले गये, क्यूंकी सब बहुत थके हुए थे.
मैं और पापा एक रूम में थे, और हमारे साथ वाले रूम में रोहित और विक्रम थे. पापा को बहुत गहरी नींद आ रही थी. मुझे सस्यू जाना था, इसलिए मैं वॉशरूम में गया. वॉशरूम से बाहर आते हुए मैने देखा विक्रम अंकल के रूम से कुछ गिरने की आवाज़ आई. मैने बाल्कनी का गाते खोला और उनके रूम की तरफ गया.
हम दोनो के रूम की बाल्कनी एक ही थी. विक्रम अंकल की बाल्कनी का गाते तोड़ा खुला हुआ ही था, इसलिए मैने उसमे से देखने की कोशिश करी. मैने जैसे ही रूम में चुपके से देखा, मेरी आँखों पर मुझे विश्वास ही नही हो रहा था.
विक्रम और रोहित 69 की पोज़िशन में एक-दूसरे के लोड चूस रहे थे. दोनो बिल्कुल नंगे थे. रूम की लाइट भी चल रही थी. ये देख कर मेरा भी लंड खड़ा हो गया था. कुछ देर बाद विक्रम अंकल खड़े हुए, और मेरी तरफ आने लगे.
विक्रम अंकल की बॉडी हल्के-हल्के बालों से भारी हुई थी. अंकल का नाग जैसा 7 इंच लंबा लोड्ा एक-दूं सीधा खड़ा हुआ सलामी दे रहा था. वो मेरी तरफ ही आ रहे थे.
मैं बाल्कनी के गाते के पर्दे के पीछे च्छूपा हुआ था. तभी अंकल गाते के पास रखे बाग से कुछ देखने लगे.
मुझे लगा शायद वो गाते खोल कर बाहर ना आ जाए, इसलिए मैं जल्दी से अपने रूम में ही चला गया. पूरी रात मुझे नींद ही नही आई, बस ये ही सोचता रहा.
इसके बाद कैसे विक्रम और रोहित का राज़ मैने डॅडी को बताया, वो नेक्स्ट पार्ट में.
एमाइल: लोवेगुरुदेल21@गमाल.कॉम