दोस्तों मेरा नाम अनिता है. मैं अपनी चुदाई की कहानी आप सब के साथ सांझा करना चाहती हू.
मेरी उमर 32 साल है, और मैं शादी-शुदा हू. रंग मेरा गोरा है, और बॉडी सेक्सी है. मेरा फिगर 36-30-38 है. मेरी शादी 4 साल पहले हुई थी, जिससे मुझे एक बेटी भी है. मैं और मेरे पति दोनो देल्ही में एक किराए के घर में रहते है. हम दोनो नौकरी पेशा है.
मेरे हज़्बेंड सुबा-सुबा काम पर निकल जाते है. वो एक फॅक्टरी में काम करते है, जहाँ उनको जल्दी जाना पड़ता है. उनके जाने के बाद मैं अपनी बेटी को तैयार करके स्कूल छ्चोढती हू, और फिर अपने ऑफीस चली जाती हू.
मैं ज़्यादातर लेगैंग्स के साथ गोल गले वाला कुर्ता पहनती हू. ऐसे कपड़े बहुत कंफर्टबल रहते है, और ऑफीस में भी आचे लगते है. सिंपल से कपड़े पहनने के बावजूद भी मेरे कामुक बदन को ऑफीस के मर्द घूरते रहते है. कभी-कभी ये अछा लगता है, क्यूंकी आप खुद को खूबसूरत महसूस करते है. लेकिन कभी-कभी इरिटेशन होनी शुरू हो जाती है.
ऑफीस के मर्दों में से ही एक महा तर्की मर्द है, जिसका नाम सुभाष है. अनफॉर्चुनेट्ली वो मेरा सीनियर है, और मुझे उसको रिपोर्ट करना पड़ता है. उसने इशारों में बहुत बार मुझे जताया की वो मेरे साथ सेक्स करना चाहता था, लेकिन मैने हमेशा अंजन बन कर उसको इग्नोर किया. लेकिन मुझे नही पता था की मुझे उससे रंडी जैसे चूड़ना पड़ेगा. चलिए बताती हू सब कैसे हुआ.
हमारे ऑफीस में आई का नया सिस्टम लगा, तो उससे बहुत सारे काम ऑटोमॅटिक ढंग से होने लगे. इससे ऑफीस में स्टाफ की ज़रूरत कम हो गयी, तो बॉस ने नोटीस बोर्ड पर उन एंप्लायीस की लिस्ट लगवा दी, जिनको वन मंत का नोटीस पीरियड मिला था. उस लिस्ट में मेरा नाम भी था.
मेरे हज़्बेंड काम तो करते है, लेकिन उनकी सॅलरी इतनी नही है की घर के सारे खर्च पुर हो सके. इसलिए मेरा इस नौकरी पर बने रहना बहुत ज़रूरी था. तो ये सोच कर मैं सुभाष के पास गयी, और उसको बोली-
मैं: सुभाष सिर, आप मुझे ऐसे नही निकाल सकते. मेरे घर में प्राब्लम हो जाएगी.
सुभाष: ये मेरा डिसिशन नही है मेडम, बॉस का है.
मैं: लेकिन मेरे टीम लीडर तो आप ही हो ना. और टीम लीडर्स ने ही नेम्स दिए है बॉस को. आप प्लीज़ कुछ करिए.
सुभाष: मेडम आपने मेरे लिए क्या किया है, जो मैं आपके लिए कुछ करू?
मैं उसकी बात समझ गयी थी, लेकिन फिर भी पूछी: क्या मतलब सिर? मुझे क्या करना है आपके लिए?
सुभाष: मेडम आप इतनी भोली मत बानिए. आप शुरू से जानती है की मैं आपको लीके करता हू. लेकिन मैने कभी सीधे-सीधे आपसे नही कहा. पर आज मौका मिला है कहने का. हा मैं आपकी नौकरी बचा सकता हू. लेकिन उसके लिए आपको कुछ देर के लिए मेरी बीवी बनना पड़ेगा.
मैं: सिर ये ग़लत है. आप ऐसा नही कर सकते.
सुभाष: कोई ज़बरदस्ती नही है. नौकरी चाहिए तो करो, वरना मत करो.
अब मैं कशमकश में फ़ासस गयी थी. नौकरी जाने नही दे सकती थी, और उसके साथ कुछ करना नही चाहती थी. पर आख़िर-कार नौकरी मुझे ज़्यादा ज़रूरी लगी. तो मैने उसको कहा-
मैं: ठीक है सिर, आप बताइए कहाँ आना है.
सुभाष ने खुश हो कर मुझे शाम को एक होटेल में आने को कहा. फिर मैं उसके कॅबिन से बाहर आ गयी. शाम को पति को मैने बहाना लगा दिया की मैं सहेली से मिलने जेया रही थी, और तैयार होके होटेल पहुँच गयी. मैने नॉर्मल कुर्ता और लेगैंग्स ही पहनी थी.
वहाँ जाके मैने सुभाष को कॉल की तो उसने मुझे रूम नंबर बताया. मैं फिर उस रूम के बाहर पहुँच गयी, और मैने बेल बजाई. मुझे बहुत दर्र लग रहा था. कुछ सेकेंड्स में सुभाष ने दरवाज़ा खोला. मैं उसको देख कर हैरान हो गयी. उसने सिर्फ़ एक शॉर्ट्स पहना था, और बाकी पूरा नंगा था.
सुभाष एक 45 साल का आदमी है. उसकी तोंद निकली हुई है, और उसका रंग काला है. हर लड़की को वो गंदी नज़र से देखता है. उस शॉर्ट्स में वो एक काला सांड़ लग रहा था.
फिर उसने मुझे अंदर लिया, और दरवाज़ा बंद कर दिया. मैं धीरे-धीरे आयेज बढ़ ही रही थी, की उसने पीछे से मुझे पकड़ लिया. मैं एक-दूं से काँप गयी. वो मेरे दोनो बूब्स को दबाने लगा, और मेरे बालों में मूह डाल कर सूंघने लगा. मुझे बेचैनी होने लगी. उसका लंड मुझे अपनी गांद में चुभने लगा.
वो मेरे बूब्स दबाता गया, और पीछे से अपना लंड मेरी गांद में चुभता गया. मेरी साँसे अब तेज़ होने लगी थी. फिर उसने मुझे घुमाया. मेरा पर्स जो अभी तक मेरे कंधे पर था, उसने वो उतार कर साइड में फेंक दिया. फिर मुझे बाहों में भर कर अपने से चिपका लिया. अब उसका लंड मेरी जांघों में लग रहा था.
वो अपने होंठो को मेरे होंठो के करीब लेके आया, और चिपका दिया. अब वो पागलों की तरह मुझे किस करने लगा. पहले कुछ सेकेंड्स तो मैने उसका साथ नही दिया. लेकिन मैं भी एक औरत हू, और ना चाहते हुए भी गरम हो गयी. फिर मैं भी उसका साथ देने लगी.
कुछ देर की किस के बाद उसने मेरी गर्दन को चूमना शुरू किया. मेरी सिसकियाँ निकालने लगी और मेरी साँस तेज़ हो रही थी. वो मेरी गर्दन को ऐसे चाट रहा था, जैसे आइस-क्रीम चाट रहा हो.
फिर उसने मुझे कुर्ता उतारने को कहा. मैने धीरे-धीरे अपना कुर्ता उतरा. अब मैं उसके सामने ब्रा और लेगैंग्स में थी. मुझे ऐसे देख कर उसकी आँखों में हवस वाली चमक आ गयी.
फिर वो मेरे पास आया. मैं अपनी बाहें समेत कर अपने चुचो पर रखी हुई थी. फिर उसने मेरी बाहें खोली, और मेरी क्लीवेज चाटने लगा. वो अपने हाथ मेरी पीठ पर लेके गया, और ब्रा का हुक खोल कर उसको निकाल दिया. अब मैं उपर से पूरी नंगी हो चुकी थी, और मेरे खूबसूरत चुचे उसके सामने थे.
मेरे गोरे चुचे देख कर वो पागल हो गया. इसके आयेज की कहानी अगले पार्ट में.
यहाँ तक की कहानी आप लोगों को कैसी लगी? फीडबॅक देने के लिए औतोरकराज़्यफोर@गमाल.कॉम पर मैल करे. अगला पार्ट जल्दी ही आएगा.