गाओं में लंड चूसने का मज़ा

मेरी गे सेक्स स्टोरी अब आयेज-

मदहोश करने वाली चुदाई के बाद हम गाओं के लिए निकल गये, और रात 9 बजे पहुँच गये. घर का मैं गाते खोलते ही एक गार्डेन था, जिससे होते हुए हम घर में एंटर हुए. वहाँ एक ओल्ड लेडी बैठी हुई थी. सिर ने मुझे बताया वो उनकी वाइफ थी.

सिर की वाइफ: और कैसे हो हितें? छ्होटे थे तब देखा था. कितने बड़े हो गये हो.

मैने उनको परणाम किया और हम अंदर हॉल में आ गये. वहाँ एक पतली सी लेडी थी, जिसने सारी पहनी हुई थी. वो हमारे लिए पानी लाई.

सिर: बेटा ये मेरे छ्होटे बेटे की वाइफ है.

सिर की वाइफ: आप दोनो तक गये होंगे. खाना खा लो, बाकी सब सो गये है. कल मॉर्निंग में सब से मिल लेना.

हम सच में बहुत तक गये थे, इसलिए हम जल्दी से खाना खा कर सो गये. मुझे एक रूम दिया था, जो उपर था, और सिर अपनी वाइफ के साथ नीचे वाले रूम में सो गये. नेक्स्ट मॉर्निंग 7 बजे सिर मेरे पास आए.

सिर: हितें, गुड मॉर्निंग बेटा. एसी के बिना नींद मुस्किल ही आई होगी तुम्हे?

मैं: गुड मॉर्निंग. नही ऐसी बात नही है, और रेडी हो कर कहा जेया रहे हो?

सिर: बेटा वो गाओं के स्कूल का कुछ काम है. इसलिए जाना पड़ेगा. बाकी शाम को माइट है, तब तक नीचे सब के साथ घुलो-मिलो.

सिर के जाने के बाद में जल्दी से नीचे गया, और सब के साथ ब्रेकफास्ट किया. सब मेरे लिए कुछ ना कुछ लाते ही जेया रहे थे, जैसे मैं कहीं का राजा हू.

सिर के 4 बच्चे है, बड़ा लड़का (योगेश) आमेडबॅड में अपनी वाइफ और बच्चो के साथ रहता है. छ्होटा लड़का (जिग्नेश) किसी काम से गाँधीनगर गया हुआ. रात में जो लेडी मिली थी, वो उसकी ही वाइफ थी, जो आज मॉर्निंग में ही अपनी मामी के घर चली गयी थी. सिर की 2 लड़कियाँ भी थी, जिनकी शादी हो चुकी थी. सिर की छ्होटी लड़की, और उनका एक लड़का ( जे) जो 18 साल का था, यहाँ आए हुए थे.

जे, मैं और पड़ोस के 2 बच्चे मिल कर मार्केट और गाओं घूमने गये थे. आते-आते 3 बाज गये. घर पर सब आराम कर रहे थे. उसने मुझे बोला-

जे: भैया क्या आप हमारे साथ च्छुपान-च्छुपाई खेलोगे?

जे की मामी बाहर आई, और हम सब से बोलने लगी: सब आराम कर रहे है. आवाज़ मत करना, और हा जे उपर मामा आ गये है. इसलिए उपर मत जाना, वरना वो गुस्सा करेंगे.

हम सब खेलने लग गये. बच्चो के साथ खेलते-खेलते मैं खुद बच्चा हो गया था. कुछ देर बाद मेरा रौंद आया. मैं सब को ढूँढ रहा था, लेकिन कोई मिल ही नही रहा था. पता नही कहाँ चले गये थे. तभी मुझे ध्यान आया जे की मामी उपर जाने को माना कर रही थी. तो शायद सब उपर तो नही चले गये. क्यूंकी बच्चे माना करने वाले काम ज़रूर करते है. इसलिए मैं भी उपर जाने लगा.

धीरे-धीरे मैं उपर मेरे रूम के पास आ गया था. तभी मुझे किसी की घर से बाहर जाने की आवाज़ आई. मैने मेरे रूम का गाते खोला, पट्टी अभी भी मेरी आँखों पर थी. तभी मैं किसी से टकरा गया, और मैने तभी उससे ज़ोर से पकड़ लिया.

मैं: पकड़ लिया, पकड़ लिया.

मैने अपनी आँखों पर से पट्टी निकली. मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन ही निकल गयी. मैं एक-दूं चौंक गया. ये बच्चे नही थे. ये तो जिगर था, विहान मामा का दोस्त, जो ओन्ली टवल में मेरे सामने नंगा खड़ा था.

मैं (धीरे आवाज़ में): तुम यहाँ कैसे?

वो कुछ बोलने लगा, तभी नीचे से आवाज़ आई: जिग्नेश आ कर खाना खा ले, वरना लाते हो जाएगा वहाँ पहुचने में.

मुझे अब सब समझ आ गया था, की जिग्नेश ही जिगर था. मैं एक-दूं चुप-छाप साइड में खड़ा रहा. जिगर ने मेरे सामने टवल निकाला. उसने एक ब्लू कलर की अंडरवेर पहनी हुई थी, जिसमे उसके सोए हुए लोड का उभार कितना मस्त लग रहा था.

जिगर: मुझे पापा ने बताया था की तुम आए हो. यहाँ बोर तो नही हो रहे ना?

मैं: जी नही, बिल्कुल नही. मुझे नही पता था की आप सिर के लड़के हो.

जिगर: अब तो पता चल गया ना? चल आजा खाना खा ले.

मैं पहले ही खाना खा चुका था, इसलिए मैं अपने रूम में सोने चला गया, और जिगर नीचे. ऐसे ही शाम हो गयी. हम सब नीचे बैठे बात कर रहे थे. तभी बिके पर जिगर और सिर एक साथ आए. जिगर अपनी वाइफ को उनकी मम्मी के घर छ्चोढने गया था.

डिन्नर के बाद हम सब 9 बजे सोने चले गये. सिर और मेरे बीच जब से आए थे, तब से कुछ हो ही नही पा रहा था. वो काम में ही बहुत बिज़ी थे. लेकिन मेरी गांद को किसी भी हालत में लोड्‍ा चाहिए था.

मैने सोच लिया था अब क्यूँ ना जिगर का लोड्‍ा मूह के बाद अब गांद में लिया जाए. लेकिन डाइरेक्ट बोलने से दर्र भी लग रहा था. इसलिए मैने एक प्लान बनाया. मैं रात 10 बजे जिगर के रूम में गया.

जिगर: क्या हुआ, नींद नही आ रही क्या?

मैं: क्या करू, गर्मी ही बहुत है, और कूलर भी सही नही चल रहा. क्या मैं यहाँ सो सकता हू?

जिगर: ह्म, तुम्हे एसी की आदत है ना? वैसे भी मैं च्चत पर जेया रहा हू सोने. वहाँ कूलर भी लगा हुआ है. क्यूंकी मैं और तेरी मामी उपर ही सोते है.

मेरे तो मॅन में जैसे लड्डू ही फुट गये थे.

जिगर और मैने मिल कर च्चत पर बिस्तर लगा दिया. फिर हम बात करने लगे. जिगर ने शॉर्ट्स और बनियान और मैने शॉर्ट्स और त-शर्ट्स पेनी हुई थी.

जिगर: तुम्हे त-शर्ट में गर्मी नही लग रही क्या. इसे उतार लो.

मैं: मइए इसके नीचे कुछ नही पहना हुआ.

जिगर (हेस्ट हुए): मुझसे क्या शर्मा रहा है?

ये बात सुन कर मुझे शरम आ गयी.

मैं: मैं नहा कर आता हू. फिर नींद सही आएगी.

च्चत पर ही एक बातरूम था. मैं जल्दी से उसमे नहा कर सिर्फ़ शॉर्ट्स में बाहर आया. मेरा बदन चाँद की रोशनी में चमक रहा था.

जिगर: कहना पड़ेगा तुम में कोई चेंज नही आया.

मेरे बाद जिगर नहा कर आया, और ये क्या, जिगर ने तो शॉर्ट्स भी निकाल दी. अब वो शिरफ़ चड्डी में था.

जिगर: अब हुआ मूड फ्रेश, सला गर्मी ही बहुत हो रही. क्यूँ हितें?

मेरा ध्यान तो उसके लोड पर ही था, जिससे बार-बार जिगर चड्डी में से ठीक कर रहा था.

मैं: लगता है आपको ऐसे ही नींद आती है.

जिगर: क्या करू, तेरी मामी तो ये भी नही पहनने देती.

हम दोनो हासणे लगे. हम दोनो कूलर के आयेज लेते-लेते बात करते-करते सेक्स की बात पर आ गये. जिगर की बातों से सॉफ पता चल रहा था, की वो भी मेरी लेना चाहता था.

जिगर: उस दिन तो मैं बहुत दर्र गया था, की कहीं तू किसी को बोल तो नही देगा. और बहनचोड़ अगली सुबा विहान भी तो तेरे साथ नंगा ही सो रहा था, सला हरामी.

मैं: क्या आप भी. मामा ने मेरा पाजामा पहना था, और दारू इतनी पी ली थी की उनको ये भी नही पता चला की वो नंगे हो गये.

हम दोनो हासणे लगे.

मैं: वैसे आपने भी तो मामा और भनजे को उस दिन नंगा देख लिया था.

जिगर: तू तो उस दिन भी चड्डी में था. पता नही आज क्यूँ ये शॉर्ट्स में बैठा है. मैं भी तो चड्डी में हू.

मैने भी शॉर्ट्स निकाल कर साइड कर दी. फिर मैं मौके का फ़ायदा लेते हुए जिगर की जाँघ पर सर रख कर लेट गया. ऐसे ही जिगर विहान मामा की सेक्स लाइफ की बातें करते-करते मेरी नंगी पीठ को सहलाता जेया रहा था. मेरे कोई विरोध ना करने पर उसने अपना एक पैर मेरी कमर पर रखते हुए मुझे तोड़ा उपर खिसका लिया. इससे अब मेरा फेस उसकी चड्डी में बने तंबू की और आ गया था.

जिगर तोड़ा नीचे झुक कर, मेरी पीठ के नीचे मेरी चड्डी के उपर से मेरे चुतताड को दबाने लगा. मैं उसे सब करने दे रहा था. इसलिए उसकी हिमत बढ़ती जेया रही थी.

जिगर (बड़े मदहोश आवाज़ में): हितें मेरे से पहले भी तुमने किसी का चूसा था क्या?

मैं: नही-नही, आपका तो बहुत मोटा और लंबा था. बहुत दिन तक गले में दर्द रहा था.

जिगर धीरे से हेस्ट हुए बोला: आज दर्द नही होगा?

ये बोलते ही उसने अपनी चड्डी में से लोड्‍ा मेरे मूह पर निकाल कर लगा दिया. मैने जिगर को देखा, और उसने चाँद की रोशनी में मुझे चूसने का इशारा करते हुए आँख मारी. मैं जिगर का लोड्‍ा, जो अभी पूरा खड़ा नही था, मूह में लेकर एक अव्वल नंबर की रांड़ की तरह चूसने लगा.

जिगर: वाह. ह्म. क्या चूस्टा है यार तू.

जिगर का लोड्‍ा मोटा और मस्त था, एक-दूं अपने बाप के जैसे. चूस्टे-चूस्टे मेरे मूह में उसके लोड के बाल आ रहे था, जिन्हे बार-बार मैं अपने मूह से निकाल रहा था.

जिगर ने एक पैर से मेरी चड्डी निकाल दी. फिर मेरे लोड को खुद के मूह के पास, और अपने को मेरे मूह के पास रख कर चुसाई करने लगे. जिगर ने जैसे मेरे लोड को चूसना शुरू करा, मैने जिगर की जाँघ को कस्स कर पकड़ लिया.

अब समझ आया लोड चूसने का क्या मज़ा है. जिगर मेरा लोड्‍ा ऐसे चूज़ ही जेया रहा था, की थोड़ी देर में ही मेरा माल उसके मूह में ही निकल गया. इससे उसने खड़े हो कर मेरा मूह अपने हाथ से खोल कर सारा माल अपने मूह से मेरे मूह में निकाल दिया.

मैने अपना माल पूरा निगल लिया. तोड़ा मीठा था. जिगर ऐसे ही नंगा च्चत के गाते को लॉक लगाने चला गया, और बातरूम से आयिल लेकर आया.

इसके आयेज क्या हुआ, वो आपको अगले पार्ट में पता चलेगा. फीडबॅक लोवेगुरुदेल21@गमाल.कॉम पर दे.

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