60 रुपय के लिए लड़के को गांद चुड़वणी पड़ी

ही दोस्तों, मैं राहुल. मेरी उमर 24 साल की है, मगर ये कहानी तब की है जब मैं 21 साल का था. मेरा रंग गोरा है, और मैं एक-दूं दुबला-पतला हू, और मेरा फिगर बिल्कुल लड़कियों वाला है.

अब तो मुझे गांद छुड़वाने की आदत पद चुकी है. मगर जब मैं 21 साल का था, तब मैं इन सब चीज़ो से बिल्कुल अंजान था.

तो सीधा कहानी पे आते है. मैं उप से अमृतसर, पुंजब की तरफ बस में सफ़र कर रहा था. ना-जाने क्यूँ, मगर सफ़र में भी कुछ लोग मेरे मज़े लेने की कोशिश कर रहे थे. उन्हे शायद लग रहा था की मैं लड़की हू. देर रात हमारी बस खाना खाने होटेल में रुकी.

मुझे काफ़ी भूख लगी थी, मगर मेरे पास कॅश नही था. मुझे ढाबे के पास ही आत्म दिखा. मैने सोचा पहले खाना खा लेता हू, फिर आत्म से पैसे निकाल कर दे दूँगा. फिर मैने खाना ऑर्डर कर दिया.

खाना जल्दी ही आ गया, मगर खाना अछा नही था. लेकिन भूख के कारण जैसे-तैसे मैने खा लिया.

जब मैं आत्म से पैसे निकालने गया, तो आत्म आउट ऑफ सर्विस था. मैने ढाबे वाले को सिचुयेशन समझने की कोशिश की, मगर वो नही समझा. उसको तो पैसे पुर ही चाहिए थे.

खाने का बिल 260 र्स हुआ था, और मेरे पास 200 र्स ही थे. मैने बस के यात्रियों से भी बात करने की कोशिश की, मगर किसी ने नही दिए. वही बैठे 2 लोग मुझे शुरू से नोटीस किए जेया रहे थे. उन्होने मुझे बुलाया और कहा-

पर्सन 1: होर जी, की गाल है मैनउ डस्सो.

मे: पाजी खाने के बिल में 60 र्स कम पद रहे है.

पर्सन 1: लो इतनी सी बात. आओ मेरा पर्स मेरे ट्रक में है. मैं देता हू.

फिर उन दोनो ने खुद का नाम बताया. ड्राइवर का नाम कुलजीत और कंडक्टर का नाम मनप्रीत था. दोनो हटते-काटते पंजाबी थे. दोनो का कद भी 7 फुट का होगा, और पुर मूह में लंबी दाढ़ी.

मैं उन दोनो के साथ ट्रक के पास गया. उनका ट्रक ढाबे की दूसरी तरफ लगा था. उन्होने मुझे उपर कॅबिन में आने को कहा, और मैं भी बेवकूफो की तरह चढ़ गया. मेरे उपर चढ़ते ही पीछे से मनप्रीत भी चढ़ गया, और दोनो ने गाते बंद कर लिए. मैं तोड़ा घबरा गया.

कुलजीत: ये लो जी आपके 60 र्स.

मे: थॅंक्स पाजी.

मेरे मॅन से दर्र तोड़ा निकल गया. मैं कॅबिन से निकल ही रहा था की मनप्रीत ने मुझे धक्का दिया, और मैं दोबारा सीट पर जेया बैठा.

मनप्रीत: ओजी किते? पाजी किसी को फ्री में पैसे नही देते.

मे: ओक, तो आप मुझे अपनी अपी ईद दे दीजिए. मैं आपको अपी से भेज देता हू.

कुलजीत: ओजी ना पैसे के बदले कुछ सर्विस देना होगा.

मे: कैसी सर्विस?

कुलजीत: ओजी आपको पहली बार देखते ही आप मुझे पसंद आ गये थे. आपकी गांद मारनी है बस.

मे: पाजी मैं ये सब काम नही करता.

मनप्रीत: देख लो जी, कॅबिन से निकलना है तो पाजी की बात मान लो.

मैं घबरा गया, और मेरी बस भी कुछ देर में छूटने वाली थी.

मे: ओक जी, पर मैने पहले कभी नही किया है. तो तोड़ा आराम से करना.

इतना सुनते ही दोनो मेरे पर टूट पड़े. कुलजीत पाजी मेरे लिप्स पर किस करने लगे, और मनप्रीत पाजी मेरे कपड़े खोलने लगे. दोनो के करीब आने पर पता चल रहा था की शायद उन्होने कुछ दिन से नाहया भी नही था.

फिर उन्होने ने मुझे उठा के पलटा दिया, और मुझे पूरी तरह से नंगा कर दिया. साथ ही साथ उन्होने अपने पयज़ामे भी खोल दिए. दोनो के लंड लगभग 8 इंच के रहे होंगे.

मैं देख कर और घबरा गया. मगर उनके बदन की खुश्बू से मैं गरम होने लगा था, और उनका लंड देख के ना-जाने क्यूँ मुझे खुशी सी हुई.

कुलजीत पाजी: चल अपना मूह खोल और चूस इसको.

मैने पहले कभी किसी का लंड नही चूसा था, मगर मैं माना नही कर सका और मूह खोल के उनका लंड चूसने लगा. उनकी झाँत के बाल तक मेरे सर के बाल जीतने बड़े थे. पीछे से मनप्रीत पाजी मेरी गांद चाटने लगे. इन सब से ना जाने क्यूँ मुझे अछा लग रहा था.

कुलजीत पाजी फिर अपना लंड मेरे मूह में ज़ोर-ज़ोर से डालने लगे. उनका लंड इतना बड़ा था, की मेरे मूह में नही जेया रहा था. कुलजीत पाजी ने मेरे बाल पकड़े, और एक ज़ोर का झटका मारा. उनका लंड मानो सारी लेयर्स पार करता हुआ मेरे गले तक चला गया. मुझे बहुत ज़ोर का दर्द हुआ, मगर आवाज़ तक नही निकल रही थी. मेरी आँखों में आँसू आ गये.

पीछे से मनप्रीत पाजी ने अपनी ज़ुबान से चाट-ते हुए मेरी गांद के च्छेद को तोड़ा फैला दिया था. इन सब से ना जाने क्यूँ मेरा लंड खड़ा हो गया.

मनप्रीत: देखो पाजी, मुंडे नू भी मज़ा आ रहा है.

अभी भी कुलजीत पाजी का लंड मेरी गले में ही था. मैं चोक किए जेया रहा था, मगर उन्होने मेरे सर को इतने ज़ोर से जाकड़ के रखा था, की मैं हिल तक नही पा रहा था.

फिर कुलजीत पाजी ने लंड मेरे गले से निकाला तब जेया कर मुझे साँस आई. अब कुलजीत पाजी ने दोबारा मुझे घुमा दिया. मानो उनके लिए मैं कोई खिलोना था. फिर मनप्रीत पाजी ने अपनी गांद मेरे मूह पर रख दी, और उसको चाटने को कहा.

मैं उनकी गांद चाटने लगा, और वो मेरे मूह पर उछालने लगे. उनकी गांद में भी काफ़ी बाल थे. तभी कुलजीत पाजी ने मेरे खड़े लंड को ज़ूर से पकड़ लिया, और दो उंगली मेरी गांद में डालने लगे.

मनप्रीत पाजी ने मेरे लंड को इतने आचे से छाता था, की कुलजीत पाजी की उंगली मेरी गांद में आराम से चली गयी. मगर मुझे गांद में जलन सी हो रही थी.

कुछ देर के बाद कुलजीत पाजी ने मुझे अपनी तरफ खींचा, और मनप्रीत पाजी को मुझ पर से हटा दिया.

कुलजीत पाजी: हॅट, में इसकी सील तोड़ते वक़्त इसका चेहरा देखना चाहता हू.

मे: पाजी आराम से. मैने पहले कभी गांद नही मरवाई.

मैं इतना बोल ही रहा था की कुलजीत पाजी ने पूरा लंड एक झटके में मेरी गांद में घुसा दिया. मैं दर्द से चीख उठा. तुरंत ही मनप्रीत पाजी ने मेरा मूह बंद कर दिया.

मनप्रीत पाजी: चीख मत, आस-पास के ड्राइवर लोग सुन लेंगे तो वो भी आ जाएँगे.

फिर मनप्रीत पाजी ने मेरे मूह में अपनी चड्डी भर दी. उनकी चड्डी काफ़ी बदबूदार थी. मैने तुरंत ही मूह से निकाल कर कहा-

मे: आ आ, काफ़ी बदबूदार है ये चड्डी. आपका लंड ही डेडॉ मूह में, मैं से लूँगा.

दोनो मेरी बात सुन कर हासणे लगे.

कुलजीत पाजी: लौंडा तेरा लंड चूसना चाहता है, चूसा दे तोड़ा.

फिर मनप्रीत पाजी ने अपना लंड मेरे मूह में दे दिया. एक तरफ मैं कुलजीत पाजी से चुड रहा था, तो दूसरी तरफ मनप्रीत बाजी का लंड चूस रहा था. मेरी गांद से तोड़ा खून भी निकल गया था. मगर ये उन लोगों ने उस वक़्त मुझे नही बताया.

कुलजीत पाजी का लंड मानो मेरी गांद को फाड़ कर ही मानने वाला था. लगभग 10 मिनिट ऐसा ही चला. फिर कुलजीत ने मुझे छोड़ते हुए ही मेरी गांद पर ज़ोर का थप्पड़ मारा.

कुलजीत पाजी ने फिर मेरी गांद से लंड निकाला, और मनप्रीत पाजी मुझे छोड़ने आए. मनप्रीत पाजी ने मुझे पेट के बाल लिटा दिया, और मेरे गांद में लंड सेट किया. मेरे बालों को पकड़ के मेरा सर उठाया, और मुझे छोड़ना शुरू किया.

मंजीत पाजी कुलजीत पाजी से भी रफ थे. मगर कुलजीत पाजी की चुदाई के कारण गांद का च्छेद तोड़ा फैल गया था, जिसके कारण मैं तोड़ा आराम से मनप्रीत पाजी का लंड ले पा रहा था.

फिर कुलजीत पाजी ना अपना लंड मनप्रीत पाजी की गांद पे सेट किया और उनकी गांद में डालने लगे.

मनप्रीत पाजी: आज तो ना छोड़ो, आज ये है ना.

कुलजीत पाजी: ऊ ये तो अभी भर के लिए है. तू तो मेरी पर्मनेंट रखैल है.

ऐसा बोल कर दोनो ने किस किया, और कुलजीत पाजी मनप्रीत पाजी की गांद मारने लगे, और मनप्रीत पाजी मेरी. दोनो का वज़न मेरे पे ही आ रहा था, क्यूंकी मैं सबसे नीचे था.

ऐसे ही कुछ देर चूड़ने के बाद कुलजीत पाजी मनप्रीत पाजी की गांद में ही अपना सारा माल गिरा दिया. मनप्रीत पाजी अभी मुझे छोड़ ही रहे थे, मगर मुझे घूम के उनकी गांद सॉफ करने को कहा.

मैं इतना फ्लेक्सिबल था, की मैने घूम के उनकी गांद चाट कर सॉफ कर दी. थोड़ी देर बाद मनप्रीत पाजी ने मुझे घुटनो पे बिताया, और सारा माल मेरे मूह में गिरा दिया. माल के कुछ छींटे उनकी सीट पर भी गिर गयी थी.

मैने उनके बिना कहे ही उसको भी चाट कर सॉफ कर दिया. इन सब के बाद मैं काफ़ी तक चुका था. सच पूछो तो मुझे भी इन सब में काफ़ी मज़ा आया था. बाहर देखा तो मेरी बस मुझे छ्चोढ़ कर जेया चुकी थी.

मे: अब मैं कैसे जौंगा अमृतसर?

कुलजीत पाजी: तू चिंता मत कर, हम तुझे फ्री में अमृतसर छ्चोढ़ देंगे. मगर किराया हम रास्ते में वसूल कर लेंगे.

मैं समझ गया था की रास्ते भर मेरी चुदाई चलने वाली थी. मगर मेरे पास और कोई चारा नही था, और मैं खुद अपनी ये साइड एक्सप्लोर करना चाहता था.

रास्ते भर मेरी और ज़बरदस्त चुदाई हुई.

मगर वो कहानी इसके अगले भाग में बतौँगा. तब तक के लिए आपके जो सवाल हो, मुझे कॉमेंट सेक्षन में पूच सकते है.

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