गे सेक्स स्टोरी अब आयेज से-
एक दो दिन निकल गये. गर्मी के कारण हमारा बाहर घूमना ही नही हो रहा था. लेकिन गर्मी की वजह से दोनो मामू ज़्यादातर लूँगी या कभी-कभी तो सिर्फ़ अंडरवेर में ही रहते, जो मेरे दिल को सुकून देने वाला पल था.
शोहेब मामू ने 2 दीनो में 3-4 बार आपना लोड्ा मुझसे चुस्वा लिया था. लेकिन कुछ ज़्यादा करने की उनकी हिम्मत ही नही हो पा रही थी.
नेक्स्ट मॉर्निंग…
आज मौसम बहुत सुहाना था. इसलिए हमने बाहर घूमने का और शॉपिंग करने का प्लान बनाया. हम सब 11 बजे घर से निकल गये. पूरा दिन मज़े करने के बाद जब हम मोविए देख कर 8 बजे बाहर निकले, तो मौसम बारिश वाला हो गया था.
मैं: जल्दी चलो, वरना बारिश आ जाएगी.
हम तीनो बिके पर बैठ कर घर के लिए निकल गये. 30 मिनिट बाद बारिश होने लगी और बहुत तेज़ होने लगी. बिके अकबर मामू चला रहे थे. मैं दोनो के बीच में बैठा था. बिके पर ठंड लग रही थी, इसलिए मैने अकबर मामू को कमर से कस्स के पकड़ लिया था.
मामू को कमर से पकड़े हुए मैं अपना हाथ बार-बार उनके लोड पर ले आता था, जो उनको नॉर्मल लग रहा था. घर आते-आते हमे 30 मिनिट और लग गये. हमारा सारा समान गीला हो गया था, और हमारे कपड़े भी बहुत गंदे हो गये थे.
अकबर मामू: हम तीनो पर कीचड़ लगा हुआ है. घर भी गंदा हो जाएगा. सलीम तू पहले नहा ले, तब तक हम यहाँ ही रुकते है. फिर शोहेब और फिर मैं चला जौंगा.
मैं जल्दी से वॉशरूम में जेया कर, अपने कपड़े निकाल कर, सिर्फ़ रेड कलर की ब्रीफ अंडरवेर में हो गया. मैने वॉशरूम के अंदर से ही आवाज़ दी “आप दोनो भी यहाँ आ कर कपड़े दे दो. लाइट का कुछ पता नही है, अभी एक साथ धूल जाएँगे.”
दोनो मामू अंदर आए. मुझे ऐसे देख कर शोहेब ने मेरी चुचो को दबाते हुए बोला, “ये चड्डी तो पहनता ही है. क्यूँ ना मोटे-मोटे चुचियो के लिए ब्रा भी ला दे तेरे लिए?”
मैं अकबर मामू के पास जेया कर उनकी शर्ट खोलते हुए बोला, “ब्रा बाद में लाना. पहले कपड़े उतार कर मशीन में डाल दो. और वैसे भी अकबर मामू आज कल तो सब पहनते है ये चड्डी, क्यूँ?”
अकबर मामू आपनी पंत खोलते हुए बोले, “ये भोंसड़ी वाले को क्या पता सलीम फॅशन क्या होता है. तुझे जो अछा लगे वो पहन, तेरा मामू ला कर देगा तुझे.”
दोनो ने भी अपने कपड़े मशीन में डाल दिए. मैने अकबर मामू को गले लगते हुए बोला, “ये देखा शोहेब मामू, अकबर मामू मुझे कितना प्यार करते है?”
अकबर मामू ने ब्लॅक और शोहेब मामू ने ब्राउन अंडरवेर पहनी हुई थी. अकबर मामू का बदन छाती से पेट तक बालों से बरा हुआ था. मुझे मामू का बदन इतना आकर्षित कर रहा था, की बस उनको छ्छूने का मौका जाने नही देना चाहता था.
शोहेब मामू, अकबर मामू से डोर करते हुए मुझे अपने गले लगते हुए बोले, “अछा जी, मैं प्यार नही करता क्या तुझे?”
मैने भी और मज़े लेते हुए बोला, “अछा जी गुस्सा भी आता है आपको?”
हम तीनो ही हासणे लगे.
अकबर मामू: वैसे सलीम तेरा बदन बचपन में भी इतना ही गोरा और चिकना था, जैसा आज है? खूबसूरत तो बहुत है.
शोहेब मामू मुझे पीछे से पकड़ते हुए बोले, “महँगे साबुन लगता है भाई जान, तब तो होगा ही.”
मैं, अकबर मामू की चेस्ट पर हाथ फेरते हुए बोला, “आप दोनो भी कुछ कम नही हो. आज भी पहले की जैसे मज़बूत बॉडी बना रखी है.”
मैं दोनो से मज़े लिए जेया रहा था. शोहेब मामा तो वैसे भी मेरी गांद मारना ही चाहते थे. लेकिन मुझे अकबर मामू को गांद देनी थी.
मैं: बचपन के दिन याद आ गये आज.
शोहेब मामू: क्यूँ ना जैसे बचपन में हम दोनो तुझे नहलते थे. आज भी नहलाए?
दोनो मामू मेरे उपर पानी डालने लगे. अचंक पानी गिरने से मुझे इतना ठंडा लगा की मैने तुरंत अकबर मामू को कस्स कर पकड़ लिया. तभी शोहेब मामू मेरी गर्दन से होते हुए पीठ पर साबुन लगाने लगे.
अकबर मामू भी अब मेरे चुचो से पेट तक अपने गरम-गरम हाथो से मसलते हुए मेरे मोटे-मोटे चुचो पर साबुन लगाने लगे.
मैं: वाह मामू, आप दोनो के ऐसे मसालने से सारी थकान डोर हो रही है.
शोहेब मामू मेरी पीठ पर साबुन लगते हुए सीधा कमर तक आ गये, और बार-बार जान-बूझ कर हाथ से मसालते-मसालते मेरी गांद से चड्डी को तोड़ा नीचे खिसका देते. इससे मेरी गांद की गहराई सॉफ नज़र आ रही थी.
शोहेब मामू मेरी कमर मसलते हुए बोले, “अब देख कैसे सारी थकान डोर हो जाएगी.”
अकबर मामू अपने मज़बूत हाथो से मेरे चुचो को मसल रहे थे. तभी मैने अपने चुचो पर पानी डाला. मेरे दोनो चुचे लाल हो गये थे.
मैं: आराम से मामू, कितना स्ट्रॉंग है आपका हाथ!
अकबर मामू: श, कोई नही. अब ध्यान रखूँगा.
ये बोल कर उन्होने मेरे गाल पर किस किया. मैं भी साबुन अकबर मामू के हाथ से लेकर उनकी बालों से भारी छ्चाटी पर लगाने लगा. थोड़े से साबुन से कितना सारा झाग बन गया.
अकबर मामू: हम तुझे नहला रहे थे की तू हमे?
मैं: बचपन में आपने मेरी कितनी सेवा की है, आज मेरी बारी है.
मामू के छ्चाटी और पेट पर मैने पूरा साबुन का झाग फैला दिया. मैने साबुन हाथ में लिया, और अकबर मामू को दोनो हाथो से कस्स कर पकड़ लिया. फिर उनकी पीठ पर साबुन लगाने लगा. ऐसा करने से मामू का लोड्ा चड्डी से मेरे पेट पर लग रहा थे, जैसे कोई मोटा सा मुलायम चूहा हो.
मैं: आराम से, हिलो मत, आपकी कमर और पीठ सॉफ कर देता हू.
अकबर मामू का बदन इतना बड़ा था, की मेरे दोनो हाथो में नही आ रहा था. मैं अकबर मामू के लोड के बार-बार अपने पेट को हिला-हिला कर मज़े ले रहा था. फिर शोहेब मामू मुझे अपनी तरफ खींचते हुए बोले, “वो ही है तेरे प्यारे मामू, हम कुछ नही!”
मैं शोहेब मामू की छ्चाटी पर साबुन लगते हुए बोला, “क्या मामू आप भी.” अब मेरी गांद अकबर मामू की तरफ थी. अकबर मामू का मेरी कमर पर साबुन लगते हुए मेरी गांद पर जैसे हाथ गया, मुझे ध्यान आया शोहेब मामू ने मेरी चड्डी थोड़ी नीचे कर दी थी.
मैने भी उसको फिर से उपर नही करा. मैं तभी शोहेब मामू पर पानी डाल कर मज़ाक करने लगा. तभी शोहेब मामू भी मेरे उपर पानी डालने लगे.
अकबर मामू: अर्रे बस करो अब. क्या नहाते ही रहना है क्या?
अकबर मामू का मूड बनाने के लिए कुछ तो सोचना था. तभी मैने बोला, “बचपन में तो आप इतना गुस्सा नही करते थे. लेकिन अब पता नही क्या हो गया है?”
ये बोल कर मैं शोहेब मामू के गले लग के, उनके ही बदन पर साबुन लगा कर, उनको ही नहलाने लगा.
शोहेब मामू: देखा तेरे मामू को, नाराज़ कर दिया ना तुझे.
अकबर मामू: सलीम, तू तो मामू की जान है. ऐसे नाराज़ नही होने दूँगा.
ये बोल कर वो मुझे पीछे से गले लगाने लगे. कुछ देर ऐसे ही पकड़े रखने के बाद.
मैं: मेरी नाराज़गी डोर करने के लिए मेरी जाँघ और लेग्स पर साबुन लगाओ.
अकबर मामू कमर को मसालते हुए, नीचे बैठ कर मेरी जाँघ को सॉफ करते-करते मेरी गांद को भी दबा-दबा कर सॉफ कर रहे थे, और मैं शोहेब मामू की कमर से होते हुए उनके लोड पर बार-बार हाथ फेर रहा था.
शोहेब मामू ने तभी मेरा हाथ अपनी चड्डी के अंदर दे दिया, और मुझे कस्स कर पकड़ लिया. मुझे कस्स के पकड़ कर मेरी कमर और पीठ को मसालते हुए सीधा मेरी चड्डी में हाथ डाल कर मेरी गांद पर साबुन लगाने लगे.
अकबर मामू सीधे खड़े हो गये, “शोहेब ये क्या हरकत है?”
शोहेब मामू: भाई जान बदन का हर हिस्सा सॉफ करना चाहिए.
मैं बहुत तेज़ चिल्लाया और अकबर मामू ने मुझे पीछे से पकड़ लिया. अकबर मामू की तरफ मेरी गांद थी. वो मेरी गांद पर हाथ मसालते हुए बोले “शोहेब…..”
मैं: नही मामू, वो बस वहाँ छिपकली है. मुझे जल्दी यहाँ से जाना है.
ये बोल कर मैने जल्दी से पानी डाला, और अकबर मामू ने जल्दी से मुझे टवल दिया. मैं ऐसे ही बाहर आ गया.
(मैने छिपकली का झूठ इसलिए बोला था, क्यूंकी मुझे ऐसा लगा सयद अकबर मामू ने शोहेब मामू की चड्डी में मेरा हाथ डाला हुआ तो नही देख लिया.)
मैं बेडरूम में जेया कर टवल से बदन सॉफ करने लगा, और गीली चड्डी निकाल कर दूसरी चड्डी पहन कर गीली चड्डी को मशीन में डालने के लिए पीछे हुआ. मैने देखा अकबर मामू वाइट लूँगी में खड़े थे, जिसमे उनका गीला लोडा लूँगी से चिपका हुआ था. बदन के बालों का पानी लूँगी को और गीला कर रहा था.