2 भाइयों का उनकी बेटियों के साथ ग्रूप सेक्स

नमस्ते दोस्तों, काई दीनो से स्टोरी ना पब्लिश कर पाने के लिए माफी चाहूँगी. तो बात है भैया की रिसेप्षन की रात की. सुबा के 2 बाज चुके थे, और रिसेप्षन भी ऑलमोस्ट ख़तम हो चुका था. मैने रिसेप्षन के लिए ग्रीन नयरा कट ड्रेस पहना था, जिसमे मेरी क्लीवेज बिल्कुल सॉफ दिख रही थी. रीमा ने भी सारी पहनी थी, जिसमे वो भी बहुत सुंदर और रसीली लग रही थी.

जब मैं अपने कमरे की तरफ जेया ही रही थी, तभी मुझे पापा का कॉल आया, और उन्होने मुझे कोठरी में बुलाया. मैं समझ गयी थी, की आज फिर दोनो (पापा और चाचा) मेरी चुदाई करेंगे. सच बोलू तो अब मुझे भी इन सब से आनंद आने लगा था. उनका मुझे रंडियों की तरह इस्तेमाल करना मुझे पसंद आने लगा था. मैं फिर चोरी चुपके कोठरी की तरफ चल पड़ी.

जब मैं कोठरी पहुचि, तो वाहा रीमा पहले से थी. चाचा का हाथ रीमा के ब्लाउस में था, और चाचा रीमा के बूब्स को बड़े मज़े से मसल रहे थे. जिससे रीमा के चूची से दूध रिस कर उसका ब्लाउस गीला हो चुका था. रीमा ने मुझे देख कर सर झुका लिया. मेरे लिए भी ये दृश्या नया था.

फिर चाचा ने मेरा हाथ पकड़ा, और मुझे अपनी तरफ खींच कर मुझे अपनी जांघों पे बिता लिया. मेरे पापा अपने और चाचा के लिए पेग बना रहे थे.

चाचा: आज तो तुम दोनो बिल्कुल बवाल लग रही थी शादी में. लोगों की नज़र सीमा की चूचियों से हॅट ही नही रही थी.

पापा: किसके लिए इतना साज-सॉवॅर कर घूम रही थी? और भी कोई यार है क्या तेरा यहा?

मे: नही पापा, बिल्कुल नही. मैं आप दोनो के लिए ही तैयार हुई थी.

रीमा अभी भी बिल्कुल चुप बैठी थी. चाचा ने हेस्ट हुए मेरा दुपट्टा और सूट उतार दिया. मैने भी हाथ उठा कर उनका साथ दिया. डीप क्लीवेज होने के कारण मैने ब्रा नही पहनी थी, तो मैं टॉप से बिल्कुल नंगी थी.

चाचा: भाई तेरी छ्होरी तो सीख गयी. ना जाने मेरी छ्होरी कब सीखेगी.

चाचा के बोलने पर रीमा ने भी अपनी सारी उतार दी. वो अब ब्लाउस और पेटिकोट में थी. फिर पापा रीमा को अपनी गोद में बिता कर, उसके चूचे ब्लाउस से बाहर निकाल कर, उन्हे चूसने लगे. पापा को रीमा के चूचे चूस्टे देख मुझे थोड़ी जलन से हुई. मगर मुझे कुछ करने का मौका नही मिला. क्यूंकी चाचा मुझे किस करने लगे, और मेरे चूचे मसालने लगे.

इन सब से मैं पूरी गीली हो चुकी थी, और मोन करने लगी. मैने खुद ही खुद का पाजामा उतार दिया. मेरी पनटी तक गीली हो चुकी थी. पापा रीमा के बूब्स चूस्टे-चूस्टे उसकी बगल को चाटने भी लगे. रीमा भी अब गीली होनी शुरू हो गयी थी, और खुद को मोन करने से रोकने की कोशिश कर रही थी. पापा ने रीमा के सारे बचे कुचे कपड़े उतार दिया और चाचा ने तो मेरी पनटी ही हाथो से चिर डाली.

रीमा को बिल्कुल नंगी मैने भी बहुत दीनो बाद देखा था. फिर मैं चाचा का लंड सहलाने लगी. चाचा और पापा ने मुझे और रीमा को एक जगह बिता दिया. फिर उन्होने भी अपने-अपने कपड़े उतार दिए. चाचा के लंड पर घने बाल थे, और पापा के लंड पे भी थे, मगर थोड़े कम थे.

मैने और रीमा ने एक-दूसरे को देखा, और फिर मैं चाचा का लंड चूसने लगी, और रीमा पापा का. चाचा का लंड हमेशा की तरह कड़क था, और वो भी मेरे मूह में जितना अंदर तक ले जेया सके, डाले जेया रहे थे. चाचा का लंड मेरे गले तक जेया रहा था, और मैं बार-बार चोक किए जेया रही थी. रीमा का भी कुछ ऐसा ही हाल था. उसका चेहरा पूरा लाल और आँखों में आँसू आ चुके थे.

मेरे बूब्स मेरी ही थूक टपकने के कारण पुर गीले हो चुके थे. मैने रीमा की तरफ देखा. वो भी मुझे देखे जेया रही थी. थोड़ी देर बाद पापा और चाचा ने लंड हमारे मूह से निकले. मैं तुरंत की रीमा की तरफ बढ़ी और उसे किस करने लगी. मैने रीमा के शरीर को चाट-चाट कर सॉफ किया. रीमा के बूब्स से निकलता दूध सही में काफ़ी मज़ेदार था.

रीमा: कुछ तो मेरे बच्चे के लिए छोढ़ दो.

ये सुन कर पापा और चाचा दोनो हासणे लगे. फिर पापा उठे और मेरे सर को रीमा की छूट की तरफ मोड़ दिया. मैं समझ गयी की वो मुझसे रीमा की छूट चटवाना चाहते थे. मैने वैसे ही किया, और रीमा की छूट चाटने लगी. रीमा बहुत गीली थी, और मेरी छूट चाट-ते वक़्त तो मोन भी करने लगी.

तभी पीछे से पापा आए, और मेरी छूट में अपने लंड को एक-दूं से घुसा दिया, और मुझे छोड़ने लगे. चाचा अब रीमा को अपने लंड चुसवाने लगे. मैं पहले से ही रीमा की छूट चाट रही थी. पापा के लंड की तो मैं दीवानी हू, इसलिए मैं साथ ही साथ मोन भी करना शुरू कर दी थी.

पापा मेरी मोनिंग सुन कर मेरी गांद पे थप्पड़ बजाने लगे. मैं दर्द से मचलती, मगर हिल नही पाती. धीरे-धीरे मेरी पूरी गांद लाल हो गयी, और उसमे जब वो मेरी गांद तो ज़ोर से दबाते, तो मेरी चीख निकल जाती. रीमा की भी मूह की चुदाई जाम कर चल रही थी. फिर चाचा ने भी उसे मेरी तरह ही घोड़ी बना कर उसकी भी चुदाई शुरू कर दी.

हम दोनो की नज़रे आपस में मिल रही थी चूड़ते वक़्त.

मुझे यकीन नही हो रहा था, की हम दोनो बहने अपने-अपने पापा से चुड रही थी. फिर चाचा और पापा ने जगह बदल ली. अब चाचा मुझे छोड़ रहे थे, और पापा रीमा को. कुछ देर ऐसे ही चूड़ने के बाद पापा और चाचा ने हमारा सर झुका दिया और हमारी गांद उँची कर दी.

रीमा: नही पिता जी गांद नही. बहुत दर्द होता है.

मे: हा प्लीज़ आप मूह छोड़ लो मेरा.

दोनो ने हमारी एक ना सुनी, और हमारी गांद छोड़ने लगे. रीमा दर्द से चिल्लाने लगी, मगर धीरे-धीरे वो भी शांत हो गयी. मुझे गांद मरवाने की आदत सी हो गयी थी तो में ज़्यादा चीखी नही. कुछ देर तक हमारी चुदाई चलती रही. फिर चाचा ने रीमा के मूह पर और पापा ने मेरी गांद में ही अपना माल डिसचार्ज कर दिया.

हमने चैन की साँस ली. कुछ देर में रीमा का बच्चा उठ गया, तो वो उसे लेकर बाहर चली गयी. अब मैं दोनो के साथ अकेले थी. फिर मेरे साथ जो हुआ, वो मैं आपको अगले पार्ट में बतौँगी.

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