नादान चूत की चुदाई

virgin choot ki chudai kahani हेलो फ्रेंड्स, आंटीस आंड स्वीट चूत की मालकिनो, अप सब को आर्नब के खड़े लंड की तरफ से मोस्ट वेलकम!! मैं आर्नब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से हूँ. मैं जब क्लास 8थ मे पढ़ता था तभी से मेरे अंदर सेक्स की फीलिंग आ गयी थी. मैं आप लोगो का फालतू समय और पैसा वेस्ट ना कर के सीधे स्टोरी पर आता हूँ.

ये एक सच्ची घटना है. लेकिन इसमे नाम, प्लेस बदला हुआ है और इस घटना को हॉट और एरॉटिक स्टोरी का रूप देने के लिए कुछ बाते जोड़ी गयी हैं. लेट्स नाउ वी कम टू थे स्टोरी…

बात उस समय की है जब मैं 11थ मे पढ़ता था, मैं राज शर्मा की कहानिया बहुत पढ़ता था, और अपने लंड को मसलता रहता. और सोचता रहता कि कोई मुझसे भी चुदवा ले. लेकिन चुदाई होती कैसे है मुझे पता नही था. मैं जहाँ रहता था वहाँ ऐसे लोग भी रहते थे जिनके पास दोनो टाइम खाने को भी नही रहता.

हर दिन शाम को मेरी माताजी उनमे से कुछ बच्चो को दिन का बचा हुआ खाना खाने को देती थी. उनमे दो लड़कियाँ भी थी जो डेली खाना माँगने आ जाती थी. उनकी एज 14-15 साल थी. एक का नाम किरण था और दूसरी का नाम रीना. किरण बहुत गोरी थी जबकि रीना सावली थी. दोनो के चुचिया आपल जितनी बड़ी थी, और वो छ्होटे फ्रॉक पहनती थी, क्यूकी वैसे भी उन के पास पहन ने के लिए कपड़े नही थे.

किरण की चुचिया रीना से बड़ी थी, और उसकी जांघे छ्होटे फ्रॉक मे गोल-गोल और काफ़ी चिकनी और गोरी थी, और उसके चूतड़ भी गोल-गोल और बहुत मस्त लगते थे, कभी-कभी जब वो बैठी रहती तो उसकी छ्होटी सी चड्डी उसकी चूत पर चिपकी हुई दिख जाती थी और जब उठती थी तो उसका फ्रॉक उसके चुतड़ों की गहरहियो मे घुस जाता जिसको देखकर मैं डेली मूठ मारता था.

और रीना, वो सावली तो थी लेकिन बहुत ब्यूटिफुल और सेक्सी लगती थी. मैं जिस एज मे था उसमे वैसे तो सभी लड़कियाँ, भाभियाँ और आंटीस सेक्स बॉम्ब ही लगती है, लेकिन रीना सच मे बहुत सेक्सी थी..जब वो चलती तो उसके उसके चूतड़ जैसे डॅन्स करते थे..बहुत हॉट लगती थी. लेकिन मैं दोनो से कुछ भी कहने या करने डरता था कि वो घर पे बता देंगी.

एक बार मेरे घर के सभी लोग रिलेटिव के यहाँ शादी अटेंड करने चले गये. घर मे सिर्फ़ मैं और एक बुज़ुर्ग नौकर थे. मेरा 11थ का हाफ यियर्ली एग्ज़ॅम स्टार्ट होना था एसलिए मैं नही जा पाया. वो दोनो रोज़ की तरह मा के जाने के बाद भी खाना लेने शाम को आ गयी..लेकिन घर मे कुछ था ही नही. तो दोनो चली गयी.

थोड़ी देर बाद किरण फिर आई और बोली, मुझे भूक लगी है, मेरे घर मे कल रात से कुछ नही बना, क्यूकी उसका बाप दारू पीता था, और उसने जो भी कमाया था उसको दारू मे उड़ा दिया था. मैने कहा आज तो कुछ है नही कल सुबह आना. मैने देखा उसकी आँखो मे आँसू आ गये थे.

किरण को देखकर मुझे बहुत दया आई, और मैं उसके पास जाकर उसके आँसुओ को अपने हाथ से पोछने लगा. उसके गाल को टच करते ही मेरे अंदर सेक्स की फीलिंग होने लगी. मैने उसके गोरे और मुलायम हाथ को पकड़ा और उसको अंदर बुलाया और अपने रूम मे ले गया, और फ्रिड्ज से ब्रेड और बटर ले आया. वो उसको इस तरह खाने लगी जैसे कई दिनो की भूखी हो.

मैं उसके बगल उसके झंघो से अपना जाँघ सटा कर बैठ गया और उसके पीठ पर अपना हाथ रखकर सहलाने लगा. वो ब्रेड खाए जा रही थी. जब उसने 4 ब्रेड खा लिए तब मैने पूछा और चाहिए तो वो हां मे सर को हिलाई. तब मैं जिस हाथ से ब्रेड का पॅकेट पकड़ा था, उस हाथ को उसके गोद मे रख कर बोला आज तो किरण को मैं अपने हाथ से खिलाउँगा..मेरे हाथ से खाओगी..तो वो मुस्कुरा कर हाँ बोली. मुझे लगा आज कुछ मज़ा आ सकता है.

उसकी गोद मे मेरा जो हाथ था वो उसकी चूत के उपर था, जिसे मैं फील कर रहा था. उसकी चूत काफ़ी फूली हुई और बहुत सॉफ्ट लग रही थी. मैने ब्रेड को अपने हाथ से किरण को खिलाना शुरू किया..मैं अब उससे और चिपक गया था. एक अज़ीब सा नशा मेरे अंदर होता जा रहा था. मेरा जो हाथ उसकी गोद मे था मैने उसको उसकी चूत पर थोड़ा और दबा दिया तो वो खाते हुए मेरी तरफ देखी और उसके होंठो पर हल्की सी बट सेक्सी स्माइल थी.

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मैने पुछा किरण कैसा लग रहा है, तो उसने कहा क्या?? मैने कहा अरी ब्रेड की बात कर रहा हूँ. तो वो बोली बहुत अच्छा. हम लोगो को ऐसा खाने को कहाँ मिलता है. तब मैने कहा जब तक मम्मी नही है तू रोज़ दोपहर मे आ जाया कर, मैं तुझे बहुत अच्छी-अच्छी चीज़े खाने को दूँगा. तो बोली ठीक है.

मैने देखा कि मेरा जो हाथ उसकी चूत के उपर था, वो कभी-कभी बीच मे वहाँ पर चोरी से देख लेती थी. मैने फील किया कि उसकी साँसे मेरी तरह थोड़ी ज़ोर-ज़ोर से चलने लगी थी, और उसने अपनी जाँघो को थोड़ा और फैला लिया. अब तो उसकी गोद मे रखा मेरा हाथ उसकी दोनो टाँगो के बीच उसकी चूत पर पूरी तरह से आ गया.

मेरा लंड हाफ पॅंट के अंदर जो थोड़ा सा खड़ा था वो उसकी मस्त फूली हुई चूत के एहसास से पूरा खड़ा हो गया था. मेरा डर भी उसकी इस हरकत से कम हो गया था. मैने ब्रेड का पॅकेट बेड पर रखा और उसकी चिकनी जाँघो को धीरे-धीरे सहलाने लगा, और किरण के मूह से दबी-दबी सिसकियाँ निकलने लगी.

मैने उसके फ्रॉक को थोड़ा सा हटा कर उसकी फूली हुई नमकीन चूत को उसकी पतली सी चड्डी के उपर से दबाने और सहलाने लगा, और दूसरे हाथ को आपल जैसी हार्ड चुचियो पर ले जा कर दबा दिया. किरण के मूह से कामुक सी आवाज़ आई…आआआअहह..और वो मुझसे लिपट गयी.

अब तो पूरा रास्ता क्लियर था. मैं उठा और जा कर पहले मैन गेट बंद किया. फिर किरण के पास आया तो वो मेरे बेड पर अपनी गोरी टाँगे फैला कर बैठी थी, मुझे देखते ही सेक्सी स्माइल दिया. मैने किरण को बेड पर लिटा कर उसका फ्रॉक उपर किया और उसकी मस्त छ्होटी सी चूत को उसकी चड्डी के उपर से ही सहलाने लगा और उसकी चुचियाँ जो फ्रॉक उपर करने से खुल गयी थी, क्यूकी उसने फ्रॉक के नीचे कुछ भी नही पहना था, उसको मूह मे ले कर चूसना स्टार्ट किया.

किरण…आआआहह! क्या कर रहे हो आप….. लग रहा है जैसे मेरी चूत मे बहुत सारी चईटियाँ घुस गयी हैं…ऊऊओह!!! और ज़ोर से चूसिए ना…मेरे राजा…मेरे निप्पल्स को खा जाओ ना…आआआहह..!!! बहुत अच्छा लग रहा है…और ज़ोर से दबाओ मेरी चुचियो को… आआआअहह….और जब मैने उसके निप्पल्स को एक बार ज़ोर से मसल दिया तो…आआओउऊउक्ककचह….

मैने किरण की चड्धि नीचे खींच दे..उसकी गोरी, मक्खन जैसी, फूली हुई, और बहुत पिंक चूत मेरी आँखो के सामने थी… बहुत छ्होटी सी चूत थी उसकी, लेकिन बहुत प्यारी…मैं पहली बार किसी की चूत देख रहा था..मैने उसकी चूत पर अपना हाथ रखा तो उसको झटका सा लगा..वो अपने चुतड़ों को बार-बार उठा रही रही थी..उसको बहुत मज़ा आ रहा था..लेकिन सच बोलूं तो मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मैने कोई खजाना पा लिया है.

मैं किरण की चूत के लिप्स को फैला कर उंगली से उसके बीच का हिस्सा सहलाने लगा तो पागल सी हो गयी… उसकी बूर पूरी तरह से भींग चुकी थी…मैने अपना भी हाफ पॅंट खोल दिया और लंड को बाहर निकाल कर उसके हाथ मे पकड़ा दिया. तो किरण ने कहा मेरे राजा ये तो बहुत बड़ा है..मेरे पापा के लंड से भी..मैने पूछा तुम अपने पापा का लंड कब देखी..तो उसने बताया कि रात मे जब पापा ममी को चोद्ते हैं तब.

और वो मेरे लंड को सहलाने लगी…मेरा तो हाल दोस्तो बहुत बुरा हो गया था…मैने अब किरण की चूत पर अपना मूह लगा दिया…लेकिन मुझे कुछ अच्छा नही लगा..लेकिन राज शर्मा की सभी कहानियो मे लड़की की चूत की चुसाइ और चाटने का जो किस्सा होता थॉ वो मुझे याद आया कि लड़की की चूत चाटने और चूसने से लड़की को बहुत मज़ा आता है.

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तब मैने उसकी चूत को चाटना स्टार्ट किया…स्पेशली उसकी बूर को फैला कर बीच वाला हिस्सा..अब किरण पागल होकर बोलने लगी..मेरे राजा अब मेरी बूर मे अपना लंड डाल कर चोदो ना…मुझे तो तुमसे ही अपनी बूर चुदवानी थी..आआअहह!! तभी तो मैं आज फिर से आई…चोदो ना मेरे जानू मुझे…मैने कहा मैं जैसे तेरी बूर चूस रहा हूँ तू भी मेरा लंड चूस ना..तो वो बोली हाँ क्यू नही मैं तो अपने राजा की हर बात मानूँगी..और लंड के उपर का पिंक हिस्सा अपने जीभ से चाटने लगी…आआअहह!! क्या एहसास था दोस्तो…और इधर उसकी बूर पानी पर पानी छ्चोड़े जा रही थी..नमक जैसा स्वाद..

थोड़ी देर मे ही मुझे लगा मेरा पानी गिर जाएगा और मैने उसके मूह मे ही अपना पूरा पानी गिरा दिया..और किरण वो मेरे लंड का पानी बहुत मस्त से पी रही थी…फिर मैने किरण के सारे कपड़े निकाल दिए और उसको अपनी बाँहो मे ले कर बेड पाए लेट गया..मेरा लंड जो सिकुड कर छ्होटा हो गया था..उसकी बूर से चिपका हुआ था..और मेरा हाथ उसकी गोरी , गोल और बला की खूबसूरत चुतड़ों को सहला रहा था. फिर मैने अपना हाथ उसके चुतड़ों की दरार मे डाला और एक उंगली से उसके गांद के छेद को सहलाने लगा..किरण बार-बार अपना गांद आगे पीछे कर रही थी जिस से उसकी चूत बार-बार मेरे लंड से रगड़ खा जाती..

धीरे-धीरे मेरा लंड फिर से टाइट होने लगा. मैं थोड़ा सा नीचे की तरफ सरक कर उसकी चुचियो को मूह मे लेकर चूसने लगा..और मेरे हाथ उसके गोल-गोल चुतदो पर थे..वो अब मेरा लंड अपने हाथ मे लेकर सहला रही थी. फिर मैं अपना हाथ उसकी बूर पर ले गया जो फिर से पूरी तरह गीली हो चुकी थी मैने उसके बूर को सहलाते हुए उसकी चूत मे उंगली डाली जो बहुत आराम से चली गयी..वो फिर से मादक अंदाज़ मे सिसकियाँ लेने लगी…आआआहह…जानू अब तो चोदो मुझे…मेरी बूर को फाड़ डालो ना…

अब मेरे बर्दस्त के भी बाहर होता जा रहा था..मैने उसकी टाँगो को फैला कर उसकी फूली हुई मस्त बूर पर अपना लंड रखा और ज़ोर का धक्का लगाया मेरा लंड 3 इंच उसकी बूर मे चला गया…वो अया..अया.. कर रही थी…फिर मैने एक धक्का फिर लगाया तो लंड 5 इंच घुस गया लेकिन तभी वो चिल्लाने लगी… ऊउउउउईईएईई माआ….फट गई मेरी बूर…निकालो बहुत दर्द हो रहा है…मैने कहा ठीक है बस 5 मिनट रूको फिर निकाल लेता हूँ…मैं लंड को हिलाउन्गा नही..ऐसे ही तुम्हारी बूर मे रहेगा..और मैं उसकी चुचियो को चूसने लगा…और एक हाथ उसकी बूर के पास घुसा कर सहलाने लगा.

5 मिंट भी नही हुए होंगे वो अपने चुतदो को बार – बार उठाने लगी…लौंडिया मस्ती मे आ चुकी थी..तभी मैने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाल कर एक ज़ोर का धक्का दिया तो मेरा पूरा 7 इंच का लंड उसकी बूर की गहराइयों मे जा चुक्का था..मैने धीरे-धीरे उसके बूर को चोदना स्टार्ट किया…थोड़ी देर मे

वो आआआअहह….. ऊऊऊहह!!! जानू चोदो, और ज़ोर से… और वो अपने मस्त गांद को उठा-उठा कर अपनी बूर को भोसड़ा बनवाने लगी….चोदो जान…मैं पहले एक बार नानी के घर गयी थी तब मामा के लड़के ने मुझे 2 दिन चोदा था…तभी से मैं आप से चुदवाना चाहती थी…आआअहह..!! क्या मस्त लॉडा है मेरे राजा का…अंदर तक मेरी बूर की ठोकाई कर रहा है…आआहह…मेरे राजा ये क्या हो रहा है मुझे..आअहह!!! मेरी बूर मे कुछ हो रहा है…कहते हुए मुझे और ज़ोर से जाकड़ लिया और उसने ढेर सारा पानी अपनी बूर से निकाल दिया…मैं अभी भी उसको चोद रहा था..

अब लंड और भी आराम से और लपलुप उसकी बूर मे आ जा रहा रहा था..और आवाज़ भी बहुत मस्त आ रही थी…फफफफ़ूूचह….फफफफफुऊऊुउऊचह….

15 मिंट की चुदाई का बाद मेरा भी गिरने वाला था…मैने ज़ोर-ज़ोर के 15-20 स्ट्रोक्स उसकी..कमसिन बूर को दिए और उसकी बूर मे ही पूरा पानी भर दिया..और उसके उपर गिर गया…

मैं उसकी गांद भी मारना चाहता था लेकिन बहुत देर हो गयी थी..और उसकी मा उसको ढूँढ भी सकती थी. एसलिए मैने उसको दूसरे दिन दोपहर मे बुलाया. दूसरे दिन हम दोनो ने 4 बार चुदाई की और 2 बार मैने उसकी टाइट गांद भी मार कर फाड़ दी…

समाप्त!!

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