विधवा आंटी की प्यास बुझा दी

हेलो दोस्तों मेरा नाम राज हे और आज मैं आप लोगो के साथ अपनी लाइफ का एक रियल सेक्स इंसिडेंट शेयर कर रहा हूँ. मैं 24 साल का हूँ और एक बड़ी कम्पनी में काम करता हूँ मुंबई में ही. ये कहानी उस वक्त की हे जब मैं अपनी ग्रेज्युएशन के आखरी साल में था. मैं 5 फिट 9 इंच का हूँ और मेरी बॉडी एवरेज हे. मुझे फूटबाल खेलना पसंद हे. ये कहानी में आप पढेंगे की कैसे मैंने अपनी वर्जीनिटी एक विधवा औरत के हाथो लूज की जो प्यार, केयर और सेक्स के लिए प्यासी थी.

उनका नाम रज्जो आंटी हे जो मेरी मम्मी की अच्छी दोस्त हे. उनकी उम्र 45 साल हे और वो विधवा हे. उनके हसबंड किसी बिमारी के चलते बहुत समय पहले मर गए. उनका एक बेटा हे जो पुणे में इंजीनियरिंग करता हे. वो हमेशा ही हफ्ते में कम से कम एक बार हमारे घर पर आती थी. पहले मैं उन्हें लाइक नहीं करता था. लेकिन मेरी माँ और रज्जो आंटी की बहुत ही बनती थी और वो दोनों बेस्ट फ्रेंड थी. आंटी के लुक्स एवरेज थे, वो गोरी, थोड़ी मोती और बड़े बड़े 36C साइज के बूब्स वाली हे. वक्त निकलता गया और वो जैसे हमारे घर की ही एक मेम्बर थी.

मेरी पढ़ाई के आखरी साल में, मेरी एग्जाम के बाद मेरे पेरेंट्स ने लोनावाला का ट्रिप प्लान किया. हमने वहां पर ट्रेकिंग के लिए सोचा था. और हमारे साथ में रज्जो आंटी भी आ गई. वैसे उसने भी बहुत समय से कोई पिकनिक वगेरह नहीं किया था इसलिए वो भी ख़ुशी ख़ुशी हमारे साथ में आ गई.

वहां पर हमने एक गेम प्लान किया. वहां पर हमने छोटे छोटे ग्रुप बनाए और जो सब से पहले ट्रेकिंग खत्म कर ले उसे विनर घोषित करना था. मेरी टीम में रज्जो आंटी और दो जवान लड़के थे.

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हमने अपनी जर्नी बातें करते, पिक्स क्लिक करते और जल्दी जल्दी चलते हुए चालु कर दी. लेकिन बिच रश्ते में रज्जो आंटी का पाँव फिसल गया और वो निचे गिर गई. वो चलने की कोशिश कर रही थी लेकिन मुश्किल से खड़ी भी हो पा रही थी. मैं थोडा उदास सा था की अब हम रेस हार जायेंगे. इसलिए मैंने और वो दोनों लडको ने आंटी की मदद की चलने में.

और फिर बीच में एक नदी आ गई जिसे हमें क्रोस करना था. मैं जानता था की उनके साथ इस हालत में रिवर क्रोस करना मुश्किल था. क्यूंकि वो मुश्किल से खड़ी भी हो पा रही थी. इसलिए मैंने सोचा की मैं आंटी को अपने हाथ से पकड़ के उसे नदी क्रोस करवा देता हूँ. पहले वो थोडा झिझक रही थी. लेकिन फिर उसे भी पता था की दूसरा कोई रास्ता भी नहीं था. वो उठाने में मेरे लिए थोड़ी भारी थी. लेकिन मैंने उसे अपने हाथ से उठा रखा था, उसके पाँव वैसे जमीन पर थे ताकि मुझे कम से कम वजन का अहसास हो. मुझे कुछ ही देर में उसकी साँसों की गर्मी महसूस होने लगी थी. उसने मुझे कस के पकड़ा हुआ था, क्यूंकि हम रिवर क्रोस कर रहे थे.

मेरा लंड आंटी को ऐसे टच करने की वजह से खड़ा हो रहा था. मैं उसे और भी कस के पकड रहा था. और मेरा लंड और भी कडक होने लगा था. मैंने उसे बहुत ट्राय कर के छिपाने की और दबाने की कोशिश की लेकिन ऐसा कर नहीं सका!

आखिर हमने नदी क्रोस कर ही ली. और वो मेरे गोदी से उतर गई और उसने मुझे थेंक्स कहा उसकी हेल्प करने के लिए. रज्जो आंटी ने मुझे कहा की तुम सच में रियल लाइफ हीरो हो मेरे लिए. हम मंजिल पर सब से लास्ट में पहुंचे. वहां जो लोग आगे पहुंचे थे उन्होंने केम्प फायर लगाया हुआ था और अन्ताक्षरी खेलना चालू कर दिया था. वो ट्रिप सच में एक यादगार ट्रिप थी सब के लिए जिसे सभी ने खूब एन्जॉय किया था.

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और फिर कुछ दिनों के बाद मुझे रज्जो आंटी का मेसेज आया. और उसने स्टार्टिंग में नोर्मल चेटिंग की. लेकिन जैसे जैसे दिन निकले वो और भी बोल्ड होती गई और अब वो नॉन वेज मेसेजिस भेजने लगी थी. पहले पहले मुझे लगा की उसने गलती से वो मेसेज मुझे भेजे थे. लेकिन फिर वो और भी ऐसे ही मेसेज मुझे भेजने लगी थी. मैंने भी अब रज्जो आंटी को नॉन वेज मेसेज भेजना चालू कर दिया.

और फिर हम दोनों एकदम फ्रेंडली और फ्रेंक हो चुके थे. एक दिन आंटी ने मेरे को पूछा की मेरी कोई गर्लफ्रेंड हे की नहीं. मैंने कहा नहीं हे कोई भी. आंटी ने कहा तेरी बॉडी और दिखावा इतना सुंदर हे तेरी तो गर्ल\फ्रेंड होनी ही चाहिए. मैंने कहा अभी मेरा इरादा नहीं हे गर्लफ्रेंड का, क्यूंकि मैं अभी पढ़ रहा हूँ.

बाद में वो मुझे चेटिंग में परेशान करने लगी थी. अक्सर वो मुझे पूछती थी की मैं कैसी दिखती हूँ वगेरह. वो मेरे से औरत का फिगर वगेरह भी डिसकस करती थी. और फिर हम दोनों के बिच में होर्नी चेटिंग की शरुआत भी हो गई. और फिर एक दिन रज्जो आंटी ने मेरे सामने कन्फेस किया की उसे भी सेक्स की जरूरत थी. और आंटी ने बोला की बहुत समय हो गया था उसे सेक्स किये हुए.

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