अनसॅटिस्फाइड पत्नी के बस में लंड चूसने की कहानी

आदाब दोस्तों! मेरा नाम ज़ैनब है. मैं 29 साल की महिला हू और भोपाल में अपने पति इमरान के साथ रहती हू. ये कहानी आज से करीब 1 साल पहले हुई घटना की है, जिसने मेरी ज़िंदगी बदल के रख दी है. उम्मीद करती हू इसको पढ़ते हुए आप सब का लॉडा रस्स छ्चोढ़ देगा. गुज़ारिश करती हू की आप अपने लॉड को सहलाते हुए इसको पढ़े, ताकि आनंद पूरा मिले.

कहानी शुरू करने से पहले शायद आपको मेरे जिस्म के बारे में बताना ज़रूरी है. मेरा शरीर मक्खन की तरह नरम और दूध जितना गोरा है. मेरी चूचियाँ 36″ की है, बहुत ही ज़्यादा बड़ी, और एक-दूं सीधी.

इस वजह से हर कोई उनके दीदार करता ज़रूर है, और ये ख्वाइश रखता है की उन्हे अपने हाथो में ले पाए. मेरी गांद 34″ की है, और काफ़ी उभार है. आखरी लेकिन सबसे ज़रूरी. मेरी छूट गुलाबी है, और हमेशा शेव की हुई रहती है.

कहानी उस दिन की है, जब मैं और इमरान मेरे रिलेटिव्स के घर से वापस आ रहे थे. उस समय हमारा झगड़ा हुआ था, और हम दोनो एक-दूसरे से गुस्से में थे. इमरान से मैने लोवे मॅरेज की थी घर वालो के अगेन्स्ट जेया कर. सोचा था बाद में जेया कर वो संभाल जाएगा, और हम खुश रहेंगे.

लेकिन उसको अब तक नौकरी नही लगी थी, और घर मेरी कमाई पे चल रहा था. वो बिल्कुल निकँमा था. पैसों की कमी के कारण मैं एक बत्तर सी ज़िंदगी जी रही थी, अपनी ख्वाहिशो को दबाते हुए.

रिश्तेदारो के सामने मैं काफ़ी शर्मिंदा होती थी. ये सब काफ़ी नही था की एक-दूसरा दुख मेरी ज़िंदगी में आ चुका था. शादी के बाद पता चला की इमरान सेक्षुयली कमज़ोर था. उनका लंड छ्होटा सा था, और वो बहुत जल्दी रस्स छ्चोढ़ देता था.

मैं सेक्षुयली भी बहुत अनसॅटिस्फाइड थी. इमरान को बुरा ना लगे बस इसलिए उसको कुछ बोलती भी नही थी. बस हमेशा अपनी किस्मत पे रोटी थी. बाकी सहेलियों के साथ जब सेक्स लाइफ की बातें होती थी, तो मैं झूठी कहानियाँ बनती थी, और अंदर ही अंदर बहुत जलती थी उनकी बातों से.

कभी-कभी मॅन करता था सब कुछ छ्चोढ़ कर नये से घर बसा लू. लेकिन कभी हिम्मत नही हुई. छूट की प्यास ऐसी बन गयी थी, की पहले जब कोई पराया मर्द छूटा तो गुस्सा आता था, लेकिन अब एक अजीब सी झंझनाहट होती थी किसी के छूने पे. मॅन करता था कोई पूरी तरह मसल दे मुझे. खैर मैं शरीफ हू, कोई रंडी तो नही, की ऐसे प्यास बुझा लू अपनी.

तो हम उस दिन लौट रहे थे मेरे भाईजान के घर से. उनकी बेटी के बर्तडे में शामिल हो कर. वाहा भी इमरान की बे-रोज़गारी के कारण मुझे ज़िल्लत का सामना करना पड़ा. हम सब मेहमआनो में सबसे ग़रीब और दुखी थे.

इमरान को मैने कुछ लोगो के सामने सुना भी दिया, जिस वजह से वो गुस्सा हो गया. जब रात को उसने सेक्स करने की कॉसिश की, तो मैने उसको धक्का दे दिया, और पता नही कैसे मैने बोल दिया-

मैं: मर्द जैसा कुछ है भी तुम में, जो छोड़ने आए हो? ना कमाई से, ना चुदाई से खुश कर पाते हो.

ये सुन कर वो आग बाबूला हो गया, और मुझे थप्पड़ मार दिया. मैं भी गुस्से में थी, लेकिन गुस्सा दबा लिया, वरना तमाशा हो जाता. बर्तडे से निकलते वक़्त सब जब अपनी कार में जेया रहे थे, तब भाईजान ने हमे उनकी कार ले-जाने को कहा. लेकिन मैने तुरंत माना कर दिया और कहा-

मैं: जैसी हैसियत है वैसे ही जियेंगे भाईजान. हम बस से चले जाएँगे.

हम पैदल बस-स्टॉप तक गये. कुछ बसस गुज़री, लेकिन भीड़ बहुत थी सब में. तो हम नही चढ़े. लेकिन बाद में मौसम खराब होने लगा, और बारिश कभी भी हो सकती थी. तो हमे मजबूरन एक बस में चढ़ना परा.

हम जहा खड़े हुए, वही बैठे दो लोग उस बस-स्टॉप पर उतार गये. तो भीड़ होने के बावजूद हमे सीट मिल गयी. इमरान विंडो की तरफ बैठा मुझसे मूह घुमा कर.

मैं ख़यालों में बस खो गयी. उसके बाद सोचने लगी की इस तरह की ज़िंदगी क्या मुझे उमर भर ज़ीनी होगी. ऐसे ही ख़यालों में डूबे हुए मुझे होश तब आया जब मुझे लोगों से हल्के-फुल्के धक्के लग रहे थे.

मेरे बाजू में मर्दों की भीड़ थी. बस में काफ़ी भीड़ हो चुकी थी. मैने महसूस किया की मेरा लेफ्ट कान किसी की उंगलियों से टच हो रहा था. मैने पलट के देखा की बगल में खड़े एक आदमी का हाथ था. खैर मैने कुछ नही बोला. भीड़ में क्या करे अब.

फिर यू ही मैं खिड़की के बाहर देखने लगी. रात की खूबसूरती और बारिश बहुत आकर्षक लग रही थी. तभी मेरे बगल में खड़ा आदमी दूसरे यात्री के लिए जगह बनाते हुए तोड़ा सीधा हो लिया. इससे अब तक उसकी टांगे मेरी बाहों में लग रही थी, लेकिन अब सीधा उसका ख़ास हिस्सा मेरी बाहों से जेया चिपका.

मुझे लगा शायद उसको इसका एहसास नही हुआ था, और पता चलते ही वो पीछे हो जाएगा. मुझे कुछ फील भी नही हो रहा था वैसे, तो मैं बाहर देखने लगी.

मेरी बाहों पे उसका ज़ोर बढ़ गया था, और वो आदमी अपनी इस अवस्था में बना रहा. मुझे बड़ा अजीब लगा, लेकिन मैने कुछ भी बोलना सही नही समझा. समय जैसे-जैसे बीट-ता गया वैसे-वैसे मुझे उसका लॉडा ज़्यादा आचे से महसूस होने लगा. मुझे शक़ हुआ तो मैने उपर मूड के देखा.

वो आदमी बाहर की तरफ ऐसे देख रहा था मानो नीचे जो हलचल हो रही है उसका उसको कोई एहसास नही. वही उसके बाजू में खड़ा दूसरा लड़का ठीक मेरी बाहों पे देख रहा था जहा लंड चू रहा था.

मुझे अगले पल समझ आने लगा क्या हो रहा था. मुझे 3 मर्द चू रहे थे. एक जो मेरे कानो को सहला रहा था. दूसरा जिसने अपना लॉडा मुझसे लगा रखा था, और तीसरा जिससे मैने मेरी तरफ देखते देखा.

वो नीचे अपना पैर मेरे पैरों से चिपकाए हुए था. ये सब संजोग नही हो सकता था. वो तीनो जान-बूझ कर मेरे मज़े लेने की कोशिश कर रहे थे. मुझे गुस्सा आना चाहिए था, और उन तीनो पे चिल्लाना चाहिए था. पर आज पता नही क्यू मैं चुप थी.

धीरे-धीरे जो लुल्ली थी, वो फूल कर लॉडा बन चुका था, और मेरे सामने एक तंबू बन गया था उसकी पंत में. उसका स्पर्श मुझे सॉफ मिल रहा था. मैने इतना बड़ा लॉडा हक़ीक़त में कभी नही देखा था. मैं तिरछी नज़रों से सारी हलचल देख रही थी.

ट्रॅक पंत होने के कारण उसके लंड का उभार और आकार सॉफ दिख रहा था. मैने जब दूसरे आदमी की तरफ देखा तो वो मुझे लंड के दीदार करते हुए ही देख रहा था. पीछे खड़े तीसरे ने अब अपना हाथ और करीब कर लिया था. वो मेरे गले और कानो को चू रहा था.

लंड का दबाव शरीर से चू रहा था. एक मर्द का हाथ और नंगी टाँगो पे दूसरे मर्द की गरम हेरी टांगे, अफ मैं खुद को संभाले नही संभाल पा रही थी. इसमे तो कोई शक नही था, की वो टीन मेरे मज़े ले रहे थे. दिमाग़ में बस इतना था की अगले पल क्या होगा, और ये क्या कुछ करेंगे.

इमरान की तरफ घूम के देखा तो वो सो चुका था. उन तीनो की तरह मैं भी अंजान बनी रही, और जो हो रहा था होने दिया. बारिश के कारण ठंड लगने लगी थी अब. मैं तो वैसे भी स्कर्ट और टॉप में थी, तो बिल्कुल सिकुड रही थी.

उन मर्दों का गरम स्पर्श मुझे पागल कर रहा था. मैने एक बार फिर उपर देखा. बस में इतनी भीड़ हो चुकी थी, की खड़े हुए लोगों को गला घूमने तक की जगह नही थी. और ये तीनो अब सीधा मुझे देख रहे थे. शायद मेरे चेहरे के भाव को या शायद मेरी चूचियों को.

मुझपे छाई मदहोशी मुझे बेकाबू कर रही थी, और मैने अपने हाथो को अपनी बाहों पे फेरते हुए ऐसे दिखाने की कोशिश की, जैसे मुझे कितनी ज़्यादा ठंड लग रही हो.

और ऐसे हाथ फेरते-फेरते इतना उपर लेके चली गयी, की मेरी बाहों का वो हिस्सा मैने अपनी रिघ्त हाथ से चू लिया जहा लंड चिपका हुआ था. मैने ऐसे बिहेव किया जैसे मुझे मालूम ही नही वो क्या था, और अपने हाथ उस हिस्से में फेरती रही 3-4 बार.

मुझे ये कमाल का लगा. इतनी देर में पहली बार मैने अपनी तरफ से एक कदम बढ़ाया था, और लंड के स्पर्श से मेरे अंदर की चिंगारी अब आग बन चुकी थी. उस आदमी को भी झटका लगा, और इतना चौक गया की एक बार तो उसने अपने आप को पीछे कर लिया.

लेकिन अब उसको और उसके साथियों को एहसास हो चुका था, की ग्रीन सिग्नल मिल गया था. और फिर वो वापस चिपक गये, इस बार बिल्कुल बेखौफ़ हो कर. उन टीन मर्दों में से एक जो आयेज मेरे पैरों से पैर चिपका कर खड़ा था. वो एक स्किनी जवान लड़का था करीब 22-23 साल का, और एक-दूं गोरा आंड हॅंडसम.

बाकी दोनो करीब 30-32 साल के होंगे. एक जो पीछे मेरे गले को चू रहा था, वो काला और हटता-कटता था. सामने वाला जिसका लंड मुझे चू रहा था, वो भी स्ट्रॉंग और ब्राउन-स्किन वाला था.

मैं तो अब शायद गाड़ी पर सवार हो चुकी थी. इमरान की तरफ एक बार देख कर चेक कर लिया मैने. वो अभी भी सोया था. तो मैने अपनी टॉप को अड्जस्ट कर लिया. टॉप अड्जस्ट करने के बहाने मैने अपनी क्लीवेज एक्सपोज़ हो उस तरह कर दी, ताकि वो सब मज़े ले पाए, और खुद को कंट्रोल ना कर पाए.

जो पीछे से हाथ लगा रहा था, उसने बेखौफ़ हो कर अपना हाथ मेरे कंधे पे रख दिया. मैने उसके हाथ की तरफ देखा, तो वो मेरे कंधे पे हाथ फेर रहा था. मुझे अछा लग रहा था. लेकिन मैं अंजान बनी रही.

अब वो लगातार मुझे हाथो से धक्का दे रहा था, ताकि मैं दूसरे आदमी जिसका लॉडा मुझसे लगा हुआ था, उसकी बॉडी से चिपक जौ. ऐसा ही होता रहा. मैं बिल्कुल डब के उसके बॉडी से चिपक गयी थी अब.

उसका लॉडा मुझे सॉफ-सॉफ महसूस हो रहा था, जो की बिल्कुल टाइट हो चुका था. अब वो तीनो मेरे और करीब आ चुके थे. पीछे वाला भी मुझसे चिपक गया, और अब उसका लॉडा भी मुझे महसूस हो रहा था.

मैने सीट को एक हाथ से पकड़ा हुआ था, जैसे लोग बस में पकड़ते है सपोर्ट के लिए, और सामने खड़े लड़के ने अपना हाथ मेरे उस हाथ पे रख दिया.

मैं अब जन्नत में होने जैसा महसूस कर रही थी. 2-2 लंड का स्पर्श, और 3 मर्दों के हाथो और शरीर की गर्मी, उफफफफफफ्फ़! मेरे सामने खड़े लड़के ने अपने दूसरे हाथ से अब पंत के उपर से ही अपना लंड मसलना शुरू कर दिया था. मैं सीधे उसके लंड की तरफ देख रही थी, और वो मुझे देख के हैवानियत की हल्की हस्सी हस्स रहा था.

बाकी दोनो तो अब खुल के मज़े ले रहे थे, और अपना लंड बॉडी पे तो रग़ाद रहे ही रहे थे, साथ ही साथ बस के झटके के बहाने अपने हाथो से मेरे बॉडी के साथ भी तोड़ा बहुत खेल रहे थे.

मेरा मॅन बहुत मचल रहा था. मैं सोच ही रही थी की अगर सब हो ही रहा था तो शरमाना कैसा, तो लंड पकड़ लेती हू. वो सब इतना कुछ कर रहे थे, तो मेरा भी कंट्रिब्यूट करना बनता था.

लेकिन ऐसा करती इससे पहले कुछ और ही हो गया. बस ने अचानक बहुत झटके करना शुरू कर दिया. शायद रास्ता पथरीला आ गया था. और इस मौके का फ़ायदा उठाते हुए मेरे सामने खड़े मर्द ने एक झटके में मेरे बालों से मुझे खीच कर मेरा मूह अपने पंत के उपर से लॉड पे दबा दिया और ज़ोर से प्रेशर अप्लाइ करने लगा.

मैं समझ ही नही पाई एक बार को क्या हुआ. लेकिन जब समझी तो बिल्कुल दर्र गयी ये सोच के की इमरान उठ गया होगा इस पथरीले रास्ते के झटको से. मैं खुद को अलग करने की कोशिश कर रही थी. लेकिन उस कम्बख़्त ने छ्छूटने नही दिया.

जब पथरीला रास्ता ख़तम हुआ तो मुझे साँस लेने के लिए छ्चोढा उसने. मैने इमरान की तरफ देखा, तो वो अभी भी सो रहा था, नपुंसक कही का. शायद वो चाहता था आज मैं चुड ही जौ उनसे. मैने राहत की साँस ली, और मेरा सारा दर्र चला गया. क्यूंकी इमरान तो अब उठने से रहा.

तो मैने सोचा क्यू ना आज खुल के रंडी बन ही जौ, और अब तक की ज़िंदगी का दुख आज मिटा लू.

उन तीनो ने भी मेरे चेहरे की खुशी देख ली, जो इमरान को सोता देख मुझे मिली थी. और वो समझ गये की मैं अब पूरी तरह से तैयार थी.

सामने वाले लड़के ने मेरा जो हाथ दबाया हुआ था, उसको लिया, और मुझे देखते हुए उसपे एक किस कर दी. फिर उसने सीधा मेरे हाथ को अपने औज़ार पे रख दिया, और दबाने लगा. आहहा! लंड, इतना बड़ा लंड, और वो भी मेरे हाथो में.

मैने तो उम्मीद ही छ्चोढ़ दी थी ऐसे लंड की. मैं अपनी ज़िंदगी में पहली बार एक मर्डाने लॉड को मसल रही थी, पंत के उपर से ही सही. फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा, और लंड से अलग कर दिया.

माइंड उसकी तरफ देखा, उसने मेरे हाथ को दोबारा किस किया, और अपना नाम बताया. उसका नाम आकाश था. फिर बारी-बारी से सब ने मुझसे हाथ मिलाया, और हमने आपस में एक-दूसरे को इंट्रोड्यूस किया. बाकी दोनो का नाम प्रतीक और समीर था. फिर ये इंट्रो ख़तम होते ही आकाश का लॉडा मैं वापस पकड़ने लगी.

वो मुझे बोला: रुक जेया रानी, अब औज़ार बाहर निकाल के देता हू.

हम सब हल्का फूलका स्माइल किए. फाइनली! ऑम्ग! ऑम्ग! मुझे अपनी आँखों पे बिल्कुल भरोसा नही हो रहा था, ये क्या था? इतना बड़ा, इतना बड़ा! ऐसा तो अब तक सिर्फ़ पॉर्न में देखा था. आकाश का लॉडा तो बहुत लंबा और मोटा था. बहुत ज़्यादा बड़ा!

मैं तो सहम सी गयी. लेकिन तभी प्रतीक ने अपना हथियार पेश किया. वाउ! आफ्रिकन ब्लॅक लंड देखा है ना आप सब ने पॉर्न में? बस समझो मेरी आँखों के सामने आ गया था वैसा ही कुछ.

मेरी नज़रे अब अपने आप समीर की पंत पे चली गयी. और उस हैवान का भी लॉडा मुझे सलामी दे रहा था. उसका लंड गोरा और तगड़ा था. टीन लंड, तीनो एक से बढ़ कर एक! मुझे तो अब समझ नही आ रहा था कुछ भी. हाथ पैर सुन्न होने को थे मेरे. तभी प्रतीक ने प्यार से मेरा हाथ लेकर समीर के लॉड पे रखवा दिया.

मैने अब डरना बंद किया, और लंड पकड़ के हिलना शुरू किया. लॉडा सूखा-सूखा था इसलिए मैने उसपे थूक कर गीला किया. फिर मैने लंबे-लंबे स्ट्रोक्स लगाना शुरू किया. समीर अपनी आँखें बंद करके मज़े ले रहा था.

आकाश ने मेरा मूह अपने हाथो से पकड़ा, और मुझपे थूक दिया. ची! मुझे बहुत गंदा लगा. लेकिन अब मेरी बॉडी मेरी रहने कहा वाली थी. उसने आयेज मेरा पूरा चेहरा कुत्ते की तरह चाटना शुरू कर दिया, और एंड में वो आ कर मेरे लिप्स पे रुक गया.

श! क्या गर्मी थी उसके होंठो में. मुझे बहुत सुकून सा लगा जब वो मेरे होंठ चूस रहा था, और काट रहा था. उसकी सांसो की गर्मी मुझे और पागल कर रही थी. मैं आकाश को किस कर ही रही थी, की मैने महसूस किया की मेरे चूचों पे भी कुछ हाथ था. वो उन दोनो का था.

समीर मेरी टॉप को उपर कर रहा था, तो प्रतीक मेरी चूचियाँ दबा रहा था. मैने अपना हाथ समीर के लंड से हटाया, और प्रतीक का लॉडा पकड़ लिया.

आकाश ने भरपूर किस करने के बाद मुझे संभालने का मौका तक नही दिया, और सीधा मेरा चेहरा लेकर अपने लॉड पे दबा दिया. उसका लॉडा सीधा मेरे मूह को पेलते हुए अंदर चला गया.

आकाश तो जानवरो की तरह हॉर्नी था. उसने मेरे मूह को ही छोड़ना शुरू कर दिया. मेरी तो इससे साँसे फूलने लगी थी. प्रतीक ये देख के बोल रहा था-

प्रतीक: चूस रंडी चूस. आज छिनाल तेरी छूट का भोंसड़ा बनेगा.

मैं तो अब पूरी तरह रंडी में परिवर्तित हो चुकी थी. मेरी चूचियाँ कपड़ो से बाहर थी. मेरे मूह में एक लंड था, हाथ में दूसरा, और तीसरा लाइन में खड़ा था. बस में कोई भी देख लेता तो ना-जाने क्या हो जाता. पर फिर भी अब रुकने का तो सवाल ही नही था.

मैं आकाश का लंड सहला रही थी, और समीर वाला वापस मेरे मूह में था. प्रतीक अपना लंड हिलाते-हिलाते बीच-बीच में मेरी चूचियों को दबाता. फिर वो बैठ गया, और मेरी चूचियाँ मसालने और चूसने लगा.

वो हाथो से मेरी जांघों को भी बीच-बीच में दबाता, जिससे मुझे बहुत दर्द होता. अब प्रतीक और आकाश ने अपनी पोज़िशन स्वाप कर ली, और प्रतीक को मैं ब्लोवजोब दे रही थी. आकाश ने अपना लॉडा लिया, और मेरे चूचियों के बीच रख के रगड़ने लगा.

मुझे पर कोई थूकता तो कोई गंदी गालियाँ देता. पूरा गंदा कर दिया था मुझे. मैं लंड चूस्टे हुए सब की हेरी और नंगी जांघों को बारी-बारी से सहला रही थी, और मर्द के शरीर का मज़ा ले रही थी.

इसके बाद मैने प्रतीक का लॉडा मूह में लिया ही था, की आकाश ने अपना वाला भी पेल दिया. कहा मैं एक लॉड के लिए तरसती थी, और अब देखिए दो लंड एक साथ चूस रही थी.

दोनो मेरे मूह को ऐसे छोड़ रहे थे मानो मूह फाड़ ही देंगे. करीब 10 मिनिट तक ऐसे ही बारी-बारी से मैं तीनो लंड चूस्टी रही, और वो तीनो मेरे मूह और चूचियों को छोड़ते मसालते रहे.

फिर समीर ने अपना लॉडा मेरे मूह में ज़ोर से पेल दिया, और मेरे मूह को दबाने लगा. मेरे मूह में मुझे कुछ गरम-गरम महसूस हुआ जो और कुछ नही बल्कि वो मर्दाना रस्स था जिसे पीने का ख्वाब मुझे बहुत दीनो से था. रस्स इतना ज़्यादा छ्चोढा उसने की मूह से ओवरफ्लो होते हुए बॉडी और बूब्स पे भी गिर गया.

रस की बदबू से मुझे उल्टियाँ जैसी आई. लेकिन तीनो ने मेरा मूह पकड़ के उपर कर दिया, तो मेरे पास कोई दूसरा चारा नही था सिवाए की मैं वो रस्स निगल जौ. अब प्रतीक मेरा मूह पकड़ के ज़ोर-ज़ोर से मूठ मारने लगा.

कुछ सेकेंड्स में वो भी मेरे उपर झाड़ गया. उसकी पिचकारी से मेरा पूरा चेहरा वाइट हो गया, क्यूंकी उसने बहुत सारा कम छ्चोढा था. प्रतीक बाजू हुआ, और अब आकाश ने मोर्चा संभाला. आकाश मेरा मूह पकड़ के उसपे बीच-बीच में थूकता, और साथ ही साथ मूठ भी मार रहा था.

आकाश बेखौफ़ होके बोल रहा था: कम ओं बेबी, मेक मे कम! दो योउ वाना हॅव मी कम बेबी?

तो मैने कहा: यॅ बेबी! कम ओं मे प्लीज़.

आकाश ने तो दो-टीन बार मेरा मूह छोड़ा, और फिर अंत में वो झड़ने लगा ज़ोर-ज़ोर से. उसने ऐसे पिचकारी चलाई अपने लॉड से, की सारा मूह और सारी बॉडी और चूचियाँ रस्स से भर गये.

फाइनली! हमारी आग शांत हुई थोड़ी. वो तीनो अपने कपड़े ठीक करने लगे, और मैं क्या करती बेचारी, पूरी तरह गंदी हो चुकी थी. मैने थोड़े कपड़े ठीक करके बॉडी और मूह पे पड़ा रासा उंगलियों से पीना शुरू किया.

अचानक मेरी दूसरी और कुछ हलचल हुई. ऑम्ग! ऑम्ग! इमरान उठ गया! उसने मेरी तरफ देखा तो देखता ही रह गया. शायद उसको पहले समझ नही आया होगा, लेकिन जब समझ आया तो उसका चेहरा देख कर मैं तो बिल्कुल दर्र गयी.

उसने उपर देखा मर्दों की तरफ, और वापस मेरी तरफ देखा. उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया था, और होना भी था, अपनी बीवी को दूसरे मर्दों के कम से कवर्ड देख कर गुस्सा किसको नही आएगा. लेकिन इसके बाद जो सब हुआ, वो तो आपके होश ही उड़ा देगा!

बाकी बातें अगले पार्ट में. हादसे पे अपनी फीडबॅक ज़रूर लिखे मुझे

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