ट्युशन वाली दीदी की ताबाद-तोड़ चुदाई की कहानी

ही दोस्तों, मेरा नाम अभी है, और मैं पुंजब का रहने वाला हू. मेरी आगे 20 है, और मैं कॉलेज सेकेंड एअर में पढ़ रहा हू. हाइट मेरी 5’11” हो गयी है, और लंड मेरा 7 इंच का है.

मैं रेग्युलर जिम जाता हू, तो मेरी बॉडी भी अची बनी हुई है. ये कहानी मेरी और मेरी गली की दीदी है, जिसके पास मैं पढ़ने जाता था. तो चलिए कहानी शुरू करता हू.

फर्स्ट एअर के पहले सेमेस्टर में मेरे मार्क्स कुछ ख़ास आचे नही थे. मम्मी को ये टेन्षन थी, की कही मैं फैल ना हो जौ. जब उन्होने पापा से बात की, तो पापा ने उनको मुझे टुटीओन लगवाने के लिए कहा.

हमारी गली में एक आदमी से पापा की अची दोस्ती थी. उनकी बेटी ने मास्टर्स की हुई थी, और वो काफ़ी इंटेलिजेंट भी थी. मैं भी काई बार उनसे मिला हुआ था, और उनको दीदी कह कर बुलाता था. तो पापा ने अपने फ्रेंड से बात की, की वो उनकी बेटी को बोले मुझे टुटीओन पढ़ने के लिए. अंकल भी मान गये, और उनकी बेटी भी.

फिर अगले दिन से मैं उनके घर जाने लगा. दीदी का नाम अलका है. जब मैं पहले दिन उनके घर गया, तो उन्होने सिंपल पाजामा और त-शर्ट पहनी हुई थी. मैं काफ़ी टाइम बाद उनको देख रहा था, और वो पहले से खूबसूरत और जवान हो चुकी थी.

वो चेर पर लेग्स फोल्ड करके बैठी थी, और उनकी मस्त जांघें कमाल की लग रही थी. त-शर्ट उनकी ढीली थी, लेकिन उसमे उनके काससे हुए मस्त बूब्स कहर ढा रहे थे. जब वो मुझे पढ़ने के लिए नीचे झुकती, तो मुझे उनके गोरे बूब्स में बनती गहरी घाटी दिखने लगती. इससे मेरा लंड खड़ा होने लग गया.

पहले दिन जब मैं पढ़ कर घर आया, तो मेरा लंड बार-बार उनके बारे में सोच कर खड़ा हो रहा था. फिर मैने उनके बारे में सोच कर मूठ मारी. अब मेरा इंटेरेस्ट उसमे बढ़ गया था, और मैं चाहता था की मुझे उसको छोड़ने का एक मौका मिल जाए.

मैं पढ़ने के साथ-साथ उनसे काफ़ी बातें भी करता था. वो मेरे साथ काफ़ी फ्रेंड्ली और ओपन हो गयी थी. फिर एक दिन मुझे उनको छोड़ने का एक मौका मिला.

हुआ ये की उनके घर पे सब शादी पे जाने वाले थे. लेकिन उनका कोई जॉब एग्ज़ॅम था, और वो नही जेया रही थी. उस दिन उन्होने मुझे टुटीओन से भी छुट्टी डेडी थी. इसलिए मैं घर पर ही बैठ कर पढ़ाई करने लगा.

पढ़ते हुए मुझे एक क्वेस्चन में दिक्कत आने लगी, तो मैने सोचा की मैं जाके उनसे पूच लू. एक ही क्वेस्चन पूछना था मुझे, तो मैने सोचा उनका कोई ख़ास टाइम वेस्ट नही होगा. ये सोच कर मैं उनके घर चला गया.

जब मैं उनके घर पहुँचा, तो घर का गाते खुला हुआ था. जब मैं अंदर गया, तो वो कही नज़र नही आ रही थी. फिर मुझे लगा की वो अपने रूम में होगी. इसलिए मैं लॉबी से होते हुए उनके रूम की तरफ जाने लगा.

जैसे ही मैं उनके रूम के पास पहुँचा, तो मुझे आ आ की आवाज़े आने लगी. इन आवाज़ो को सुनते ही मुझे शक हुआ, और मैं दबे पावं उनके रूम की तरफ बढ़ने लगा. फिर रूम के गाते पास आया, तो गाते तोड़ा खुला था.

मैने अंदर झाँक कर देखा, तो मेरी आँखें फाटती की फाटती रह गयी. अलका किसी लड़के के नीचे लेती हुई थी, और वो लड़का उसको छोड़ रहा था. क्या बाला की खूबसूरत लग रही थी. गोरा बदन, काससे हुए बूब्स, मस्त जांघें कमाल की लग रही थी.

वो लड़का उसके होंठ चूस रहा था, और उसकी छूट में लंड पेले जेया रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे उनकी चुदाई अभी-अभी शुरू हुई थी. तभी वो लड़का अया आ करने लगा, और अलका ‘रूको-रूको’ बोलने लगी. और वो लड़का झाड़ गया. जैसे ही वो झाड़ा अलका उसको गालियाँ निकालने लगी.

अलका: सेयेल मदारचोड़, थोड़ी देर तो टिक जया कर. पहले कहता था नये-नये में ऐसा होता है. अब तो काई बार छोड़ चुका है. फिर भी 2-4 मिनिट से ज़्यादा नही टिकता. तेरे से अछा तो मेरा पिछला बाय्फ्रेंड ही था.

वो लड़का शर्मिंदा हो गया. फिर अलका ने उसको जाने के लिए कहा. वो लड़का अपने कपड़े पहनने लगा. तभी अलका बोली-

अलका: अब तू तो जेया रहा है, लेकिन मेरी प्यास कों बुझाएगा?

तभी मैं हिम्मत करके बोल पड़ा: मैं बुझा सकता हू अगर मौका मिले तो.

अलका: अभी तुम!

मैं: हा मैं. इस छूतिए ने जो आग लगाई है, वो मैं ठंडी कर सकता हू. मुझे तुम बहुत सेक्सी लगती हो. बहुत मूठ मारी है मैने तेरे बारे में सोच कर.

ये बोल कर मैने अपना लंड बाहर निकाल लिया. मेरा बड़ा मोटा, और कॅसा हुआ लंड देख कर अलका का मॅन हरामी हो गया. वो फिरसे लेट गयी, और टांगे खोल कर बोली-

अलका: चल आजा फिर, दिखा अपना कमाल.

वो लड़का सब चुप-छाप देख रहा था. मैने जल्दी से अपने कपड़े उतारे, और अलका पर कूद पड़ा. मैं उसकी जाँघो के बीच आया, और अपना लंड उसकी छूट पर रगड़ने लग गया. उसकी छूट गीली थी, और मैने अपना लंड उसकी छूट के पानी से गीला किया.

जैसे ही लंड तोड़ा गीला हुआ, मैने लंड छूट के च्छेद पर टीकाया, और ज़ोर का धक्का मारा. अलका की चीख निकली, और मेरा लंड पूरा उसकी छूट में घुस गया. उसकी छूट इतनी टाइट नही थी. इसका मतलब वो पक्की रंडी थी.

फिर मैने उसकी छूट में ताबाद-तोड़ धक्के देने शुरू कर दिए. उसने मुझे अपनी बाहों में भर लिया, और हम दोनो पागलों की तरह किस करने लगे. मैं उपर उसके होंठ चूस रहा था, और नीचे फुल स्पीड पर धक्के मार रहा था.

फिर मैने उसके बूब्स चूसने शुरू कर दिए, और उनको नोच-नोच कर चूसने लगा. वो कामुक आहें भर रही थी, और इस ताबाद-तोड़ चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थी.

15 मिनिट मैने उसको उसी पोज़िशन में छोड़ा. फिर मैने उसकी घोड़ी बनने को कहा. इस्पे वो बोली-

अलका: आज मैं पहली बार घोड़ी बन रही हू. पहले वाले सारे पोज़िशन बदलने से पहले ही झाड़ जाते थे.

फिर मैने पीछे से लंड उसकी छूट में डाला, और गांद पर थप्पड़ मारते हुए छोड़ने लगा. वो मज़े से आहह आ कर रही थी. मैं फुल स्पीड से उसको छोड़ रहा था, और तभी वो आ आ करते हुए झाड़ गयी.

अगले 5 मिनिट में मैने भी अपना पानी उसकी छूट में निकाल दिया. फिर हम दोनो बेड पर ही लेट गये. उस दिन के बाद से मैं जब चाहे उसको छोड़ लेता हू.

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