अकरम के साथ चुदाई को आज 4 दिन हो गये थे. वो तोड़ा बिज़ी हो गया था, इसलिए ट्रैनिंग नही हो पाई. अकरम का आज कॉल आया, कल कुछ सर्प्राइज़ देने के लिए बोल रहा था.
मैं भी बहुत खुश था. 4 दिन का इंतेज़ार कटम हो रहा था. मॉर्निंग में जल्दी रेडी हो कर वेट करता रहा, लेकिन अकरम नही आया. 11 बाज गये थे, तभी अकरम का कॉल आया और उसने मुझे डाइरेक्ट उपर पहाड़ पर बुला लिया.
मैं जल्दी से वहाँ पहुचा. 12:30 बजे मैं वहाँ पहुँच गया. आज मैने पाजामा और त-शर्ट पहनी थी, और अंदर कुछ भी नही.
जैसे ही मैं वहाँ पहुँचा अकरम झरने के पीछे से अंडरवेर में बाहर आया. मैने उसे देखते ही गले लगा लिया. पागलों की तरह उसे चूमना शुरू कर दिया. फिर नीचे बैठ कर उसका लोड्ा बाहर निकाल कर चूसने लगा.
अकरम: बहुत जल्दी में हो क्या? सर्प्राइज़ भी नही पूचोगे?
मुझे तभी ध्यान आया की सर्प्राइज़ क्या था. तो मैने उससे पूछा. तभी अकरम ने मुझे घुमा दिया. मैने देखा पेड़ (ट्री) के पीछे से एक नंगा लड़का बाहर आया. बहुत मस्त बदन था उसका. मेरी गांद से भी ज़्यादा मोटी गांद थी उसकी. मुझे तभी ध्यान आया ये लड़का तो अज़हर सिर के पास टुटीओन के लिए आता था.
मैं (हैरान हो कर): ये क्या हो रहा है यहा, अकरम कुछ बोलॉगे?
अकरम: रूको मेरी जान, तुम्हारी गांद से पहले हमे साजिद ही मज़े दिया करता था. इसलिए आज टुमरी मुलाकात भी करवा दी. क्यूँ ना हम थ्रीसम ट्राइ करे?
मेरे कुछ बोलने से पहले ही साजिद पीछे से मेरे कपड़े उतारने लग गया. कुछ देर बाद ही हम तीनो नंगे एक-दूसरे को चूमे जेया रहे थे. अकरम एक पत्थर पर बैठ गया, और मैं उसका लोड्ा डॉगी स्टाइल में चूस रहा था. मेरे नीचे साजिद लेट कर मेरा लोड्ा चूस रहा था.
सच में साजिद बहुत एक्सपीरियेन्स्ड लग रहा था. बहुत मस्त चूस रहा था. मुझे तो सातवे आसमान में पहुँचा दिया था सेयेल ने.
साजिद: रायन आज तुम्हे मौका देते है मेरी फाड़ने का, देखे कितना दूं दिखाते हो.
साजिद डॉगी स्टाइल में झुक गया. मैने उसके च्छेद पर लोड्ा लगाया. उसका च्छेद काफ़ी खुला हुआ था. लग रहा था पुर पेशावॉर से छुड़ा हुआ हो.
अकरम ने मेरा लोड्ा हाथ में पकड़ कर साजिद की गांद में डाल दिया. फिर अकरम मेरी गांद में अपना लोड्ा डाल कर मेरे साथ साजिद को भी ज़ोर से पकड़ कर तेज़-तेज़ झटके देने लगा. अकरम के झटके इतने तेज़ थे की मुझे साजिद को छोड़ने के लिए कोशिश ही नही करनी पद रही थी.
पहली बार मेरा लोड्ा किसी की गांद में था. क्या मस्त गरम गांद थी साजिद की. पूरा लोड्ा गरम हो गया. इतना मज़ा आ रहा था. 10 मिनिट बाद मेरा माल तो साजिद की गांद में ही निकल गया.
साजिद: रायन तुम्हे रेडी करने में तोड़ा टाइम लगेगा.
अकरम: नाराज़ मत हो मेरी जान, तेरी प्यास मैं बुझा दूँगा.
ये बोल कर अकरम ने मुझे डॉगी स्टाइल में ही साजिद के उपर कर दिया. अब साजिद भी डॉगी पोज़िशन में था और उसके उपर मैं भी. हम दोनो की गांद अकरम की तरफ ही थी. अकरम कभी लोड्ा साजिद, तो कभी मेरी गांद में डालता, और ज़ोर का झटका देता. ये चुदाई बहुत मज़ेदार होते जेया रही थी.
3 मिनिट बाद पोज़िशन चेंज करके अकरम साजिद को छोड़ने लगा, और साजिद के नीचे मैं अकरम और साजिद का लोड्ा अपनी जीभ से चाटने लगा.
साजिद मेरे सोए हुए लोड को मूह में लेकर फिर चूसने लगा. साजिद की मस्त मूह की चूसने की क़ाबलियत ने मेरे लोड को फिर जगा दिया. अकरम 10 मिनिट तक सेम पोज़िशन में साजिद को छोड़ता रहा, और हम दोनो एक-दूसरे के लोड चूस-चूस का चुदाई का मज़ा ले रहे थे.
तभी साजिद का माल मेरे मूह में निकल गया. मैने मूह से लोड्ा बाहर किया. तभी अकरम ने साजिद की गांद से लोड्ा बाहर निकाल कर माल उसकी गांद पर गिरा दिया, जो माल मेरे मूह और बालों में आ कर भर गया.
अकरम ने साजिद के सर पर हाथ रखा, और मेरे मूह तक ले आया. साजिद ने मेरे मूह का सारा माल चाट कर सॉफ कर दिया. फिर साजिद और मैने किस किया, जिससे मेरे मूह में जो माल था वो मैने साजिद के मूह में उलट दिया.
साजिद: क्यूँ, आया ना मज़ा रायन के बच्चे?
मैं: खुदा कसम तुम कमाल की चुदाई करवाते हो जानी.
हम तीनो जल्दी से नहा कर, अकरम की कार में पहाड़ से नीचे गाओं में आ गये थे. तभी रास्ते में अज़हर सिर हमारी कार के सामने आ गये. वो बिके पर थे.
अज़हर: और काहब से आ रही है सवारी इतनी दोपहर में?
अकरम: भाई जान स्विम्मिंग सीखने लेकर गया था. और आप कहाँ जेया रहे हो?
अज़हर: घर का समान लेने जेया रहा हू. ये रायन है ना, क्यूँ जी आपको टुटीओन नही आना होता क्या? पनिशमेंट भूल गये हो लगता है.
अकरम: कल से चले जाना, पढ़ाई भी ज़रूरी है. ठीक है रायन?
मैं: सॉरी सिर, कल ज़रूर अवँगा.
मैं अपने घर आ गया. तभी मेरे अब्बू के पास अज़हर सिर का कॉल आया.
अब्बू: अज़हर साब का कॉल आया था. कल उनको किसी काम से तुझे कहीं लेकर जाना है, इसलिए 5 बजे वो लेने आएँगे तुझे.
मैं समझ गया था कों सा काम था, और कहाँ लेकर जाना था.
सूभ अज़हर सिर आए. गाओं में बिल्कुल अंधेरा था. मैने ग्रे शॉर्ट्स और वाइट त-शर्ट, और सिर ने ब्लू लूँगी और ग्रीन कुर्ता पहना हुआ था. बिके पर बैठ कर हम दोनो निकल गये. कुछ देर बाद सिर अपने घर के आयेज से भी निकल गये. मुझे समझ नही आ रहा था ये कहाँ लेकर जेया रहे थे.
मैं: हम कहाँ जेया रहे है इतनी सुबा?
सिर: गाओं के बाहर हमारा जो खेत है, वहाँ.
20 मिनिट बाद हम वहाँ पहुँच गये थे. अभी भी सूरज नही निकला था.
अज़हर: ये सारी मिट्टी एक साइड करनी है. उसके बाद तेरी पनिशमेंट का कुछ सोचते है.
मैं: ये पनिशमेंट नही है?
अज़हर: ग़लतियाँ तो बहुत है, इसलिए हर ग़लती की एक सज़ा तो बनती है.
पहले कपड़े उतार और ये खेत की मिट्टी एक तरफ करवा मेरे साथ. मैने शॉर्ट’स और त-शर्ट निकाल कर साइड कर दी. नीचे मैने स्विम्मिंग अंडरवेर पहनी थी, जो मैं कल ही लाया था. ब्लॅक कलर की थी, और इसका साइज़ नॉर्मल था. लेकिन अब मेरी गांद पहले से ज़्यादा मोटी हो गयी थी.
सिर सिर्फ़ लूँगी में मेरी मदद कर रहे थे. अज़हर बार-बार किसी ना किसी बात पर कभी मेरे बूब्स दबा देते, कभी मेरी गांद. मैं सब कुछ सहन करके सारा काम पूरा कर रहा था.
अज़हर: चल एक कुश्ती का रौंद खेलते है.
पहले मैं माना ही कर रहा था, फिर सोचा जल्दी फ्री हुआ तो जल्दी घर जौंगा, इसलिए हा कर दी. अब अज़हर अपने लूँगी खोल कर ओन्ली अंडरवेर में आ गये थे. मिट्टी में काम करके तो हम दोनो ही बहुत गंदे हो गये थे.
अज़हर बार-बार मुझे कस्स के पकड़ते, और ज़ोर से दबा देते. हम दोनो के बदन मिट्टी से गीले और गंदे हो गये थे, और सुबा की ठंडी-ठंडी हवा से और भी ज़्यादा रोमॅंटिक होते जेया रहे थे.
अज़हर ने मुझे ज़ोर का किस किया, और एक हाथ से मेरी अंडरवेर निकाल दी. हम दोनो खेत में बिल्कुल ओपन थे. मुझे बहुत शरम आ रही थी.
मैं: ये क्या कर रहे हो? यहाँ कोई आ जाएगा, डोर-डोर तक सब खुला है.
अज़हर: इतनी सुबा यहाँ कोई नही आता मेरी जान. आज तो तुझे खुले में ही छोड़ूँगा समझा.
मैं: प्लीज़ अंदर रूम में चल लो.
यहाँ खेत में एक छ्होटा रूम बना हुआ था. लेकिन अज़हर तो खुले में ही गांद फाड़ना चाहता था.
अज़हर( मेरे बदन को दबाते हुए): नाटक मत कर. क्या मस्त बदन बना लिया है पिछले कुछ दीनो में. आज तो यहीं करूँगा.
सूरज अभी भी सही से नही निकला था, तोड़ा अंधेरा था अभी भी. अज़हर ने अपना लोड्ा बाहर निकाल कर मेरे मूह में डाल दिया. लोड्ा तो अज़हर का ही मस्त है, ये बात तो कहनी पड़ेगी अकरम और साजिद भी कुछ नही है इसके आयेज.
हम दोनो बिल्कुल नंगे खेत में मस्त लंड चुसाई कर रहे थे. अज़हर के लोड पर लगी मिट्टी बार-बार मेरे मूह में आ रही थी.
मैं: मूह में मिट्टी आ रही है.
अज़हर रूम से एक बाल्टी लेकर आया, और उसमे आपना बदन सॉफ करने लगा. वो अपने बदन पर पानी डाल रहा था, और ये नज़ारा देख कर मेरा लोड्ा एक-दूं सीधा खड़ा सलामी दे रहा था.
क्या मस्त चाल चलते हुए वो मेरी और आ रहा था. मैं भी तोड़ा मज़े लेने के लिए खेत में नंगा ही भागने लगा. अज़हर आपने 8 इंच के लोड्ा के साथ मेरे पीछे भाग रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने बहुत बड़ी से लोकी लगा दी हो. लोड्ा और बॉल्स क्या मस्त उछाल रहे थे अज़हर के.
तभी अज़हर ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, और नीचे गिरा दिया. फिर मेरी टाँगें फैला कर बोला-
अज़हर: अब कहाँ जाएगी मेरी जानेमन?
अज़हर ने मेरी गांद में थूक लगा कर लोड्ा तोड़ा सेट किया, और एक तेज़ झटके के साथ लोड्ा अंदर कर दिया.
मैं: आआहह, बाहर करो, मारोगे क्या!
अकरम के साथ इतनी चुदाई के बाद भी अज़हर का लोड्ा इतना दर्द दे रहा था.
अज़हर: और चिल्ला रांड़, सोच सारे गाओं वाले आ गये तो तेरी गांद का क्या होगा.
अज़हर रेज़-तेज़ हासणे लगा. एक तेज़ झटके के साथ पूरा लोड्ा अंदर डाल दिया.
अज़हर: गांद की सही मालिश कर ली है. लगता है आज तो पूरा ले लिए.
मैं: करता भी क्यूँ नही? आप तो मुझे छोड़े बिना जाने नही देते.
अज़हर ने ज़ोरदार किस के साथ चुदाई के झटके तेज़ कर दिए. 5 मिनिट बाद डॉगी स्टाइल, फिर गोद में उठा कर, फिर मेरे उपर लेट कर अज़हर ने मेरी गांद पूरी तरह सूजा दी थी. अलग-अलग पोज़िशन में चुदाई करके हम दोनो बहुत ज़्यादा मिट्टी में हो गये थे.
फिर अज़हर खड़ा हुआ और डोर पड़ी अपनी लूँगी लाकर मेरे बदन और खुद के बदन को सॉफ करने लगा. फिर वही लूँगी बिछा कर खुद लेट गया और मैं उसके लंड पर हॉर्स राइडिंग करने लगा. अब पूरा लोड्ा बहुत आराम से अंदर-बाहर हो रहा था. अज़हर मुझे छोड़ते हुए मेरे बदन के फुल मज़े ले रहा था. कभी बूब्स तो कभी कमर को मस्त मसालने लगा. मैं भी मदहोश हो कर आँखें बंद करके ये सब कुछ फील कर रहा था.
अब सुबा हो चुकी थी. आसमान में उजाला होने लगा था. हम दोनो बेशार्मो की तरह खुले आसमान के नीचे चुदाई के मज़े ले रहे थे. तभी अज़हर ने मुझे उसी पोज़िशन में गांद के अंदर लोड्ा घुसे हुए ही गोद में उठा लिया, और रूम में ले गया.
रूम में एक चारपाई थी, बाकी सब खेती का समान ही था. चारपाई में मुझे फिर से उसी पोज़िशन में छोड़ते हुए मेरी गांद फाड़ना फिर से शुरू कर दिया. अज़हर ने मुझे खड़ा किया और साइड में दीवार पर झुका कर फिरसे झटके देना शुरू कर दिया. अब और ज़्यादा तेज़ झटको के साथ मेरी गांद फाड़ रहा था.
अज़हर के इतने हार्ड झटको से मेरी गांद पूरी खुल गयी थी. थोड़ी देर में मेरी गांद में गरम-गरम तूफ़ानी लावा भर गया. मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी गांद फूल कर फटत जाएगी, इसलिए मैं लोड्ा बाहर निकाल कर आयेज हुआ. तब भी लोड में से माल निकल कर मेरे बदन पर गिर रहा था.
मैं: इस टंकी का बटन नही है क्या? मेरा जिस्म गीला कर दिया, इतना माल. क्या खाते हो सिर?
अज़हर के माल से मेरा बदन चिप-छिपा हो गया था.
अज़हर (हेस्ट हुए ): जब से तेरी आंटी गयी है, तब से तेरे लिए ही स्टोर किया हुआ था.
इसके बाद हम दोनो नहा कर घर के लिए वापस आ गये. इसके बाद अज़हर सिर, अकरम कभी ना कभी मेरी गांद मार ही लेते है. लेकिन अज़हर सिर बहुत बिज़ी होते है, इसलिए उनके साथ मौका कम ही मिल पाता है.
आयेज मैने अपनी लाइफ में और कितनी बार गांद मरवाई, ये जानने के लिए आपका फीडबॅक ज़रूर देना.