बेटे ने थकी हुई माँ की चूत और गांड मारी

अगली सुबह जब मैं उठा तो देखा मम्मी पिंक रंग का ब्लाउज और काले रंग का पेटीकोट पहने हुए थी. वो बाहर आगाँ में फोल्डिंग पर बैठी थी और बंसरी भी वह बैठा चाय पी रहा था.

मैंने आज स्कूल न जाने का मैं बनाया और कहा-

मैं: मम्मी आज मैं नहीं जाऊंगा क्युकी आज २ टीचर नहीं आएंगे.

मम्मी तो मान गयी पर मोनू का स्कूल जाना ज़रूरी था. तो वो स्कूल चला गया. तभी ७:३० बजे तक बंसरी भी अपने घर चला गया. उसके बाद मम्मी ने कहा-

मम्मी: अंकु मेरा बदन दर्द हो रहा है.

तो मैंने कहा: मम्मी तुम लेट जाओ और सो जाओ. मैं आपके पेअर दबा देता हु.

फिर मम्मी बैडरूम में आके लेट गयी और मैं भी फ्रेश होक रूम में आ गया. मैंने टीवी पे धीरे से ज़ी न्यूज़ लगा दी और मम्मी के पेअर दबाने लगा. पर मम्मी को हलकी सी नंद आ रही थी.

वो सीधे लेती हुई थी पर तभी मैंने मम्मी के पेटीकोट का नाडा खोल दिया. तभी मम्मी बोली-

मम्मी: ये क्यों उतार रहा है?

मैंने कहा: आपकी जांघ में सरसो का तेल लगा देता हु.

तभी मैंने पेटीकोट खोल के पूरा निकाल दिया. अब मम्मी सिर्फ ब्लाउज में थी और नीचे पूरी नंगी थी. उसकी टाँगे फैली हुई थी. फिर मैंने तेल लिया और उनके पेट पर तेल लगाया पहले.

फिर वो तेल बह कर मम्मी की जांघ और छूट पे आने लगा. वो नींद में थी तभी मैंने पुछा-

मैं: क्या रात बंसरी अंकल ने ज़्यादा छोड़ा आपको?

तो वो बोली: हां तुम दोनों के सोने के बाद उसने मुझे फिर उठाया और उसके बाद भांग खा के उसने मुझे करीब २ घंटे तक नशे करके छोड़ा. उसने मेरी छूट भी मारी और गांड भी. और वो भी घोड़ी बना कर. इसलिए मेरी कमर और पेअर दर्द कर रहे है.

मैं मम्मी की जांघ और छूट पर तेल लगा रहा था और बाते भी किये जा रहा था. फिर मैंने माँ से पुछा-

मैं: माँ एक बात बताओ. आपने पहले वो मुँह बोले नाना के साथ सैक्स किया. फिर वो वैद जी से और अब बंसरी से. तो आपको सबसे ज़्यादा मज़ा किसके साथ आया?

माँ ने जवाब दिया: देख सबकी बात अलग-अलग है. किसी में कोई अछि बात है तो किसी में कुछ कमी है. पर हां अगर तू पूछ रहा है. तो सबसे ज़्यादा मज़ा मुझे तेरे मुँह बोले नाना के साथ ही आया था. क्युकी वो तेरे पापा के बाद पहले ऐसे आदमी है जिन्होंने मेरे साथ ये सब सबसे पहले किया था. और उन्ही से मैं खुल गयी थी.

माँ की ये बात सुन के मेरे दिमाग में वो बचपन वाला सन याद आ गया. उसके बाद मेरा भी लुंड पंत के अंदर खड़ा हो गया था. फिर मैंने अपनी पंत उतारी और माँ की टाँगे खोल के लुंड डालना चाह. तभी माँ बोली-

माँ: क्या हुआ तुझे?

तुरंत मैंने कहा: माँ वो सब याद आ गया और अब आपकी छूट मारने का भी मैं करने लगा है.

ये बोल कर मैंने मम्मी की छूट के छेद में अपने लुंड का सूपड़ा रखा और एक ही हलके से झटके के साथ मेरा लुंड माँ की छूट में घुस गया.

पर मैंने अपने लुंड को अभी अंदर-बाहर करना शुरू नहीं किया था. बस अंदर डाले हुए छोड़ दिया और हल्का-हल्का खुद को हिलने लगा. फिर मैंने उसके होंठो को चूसना शुरू किया.

मैंने उसके होंठो से अपने होंठ चिपकाये और उसको किश करने लगा. अब माँ ने भी मुझे पीछे से पकड़ लिया था. मैं माँ के ऊपर पूरा लेता था और माँ के होंठो को किश किये जा रहा था.

फिर मैंने अपने लुंड से माँ की छूट छोड़नी शुरू कर दी. २०-२५ झटके मारने के बाद मैंने माँ की टांगो को हाथ से पकड़ कर पूरा खोल दिया. फिर मैं उसकी जांघो को नीचे से पकड़ कर उसकी छूट और तेज़ी से मारने लगा.

मैंने माँ से कहा: अपना ब्लाउज खोल दो.

उसने बिना देरी किये अपने ब्लाउज के सभी हुक खोल दिए और अपने दूध को मसलने लगी. मैं इधर उसको तेज़-तेज़ छोड़ने लगा. मेरा लुंड पूरा तेल से गीला हो गया था जो उसके लगाया था.

तेल की वजह से अब चिकनापन्न आ गया था. इसलिए लुंड छूट के अंदर फिसल रहा था तेज़-तेज़. तभी मैंने देखा की माँ की छूट ने अपना पानी छोड़ दिया और वो दोनों हाथो को खोल के ढीली पद गयी. फिर मैंने अपना लुंड उसकी छूट से निकला और कहा-

मैं: मम्मी तुम्हारा पानी निकल गया है. अब मेरा लुंड चूसो.

उसने मन किया पर मैंने उसकी एक न सुनी. मैं उसके पेट पे आके दोनों तरफ पेअर करके बैठ गया और उसके मुँह में अपना लुंड दाल दिया. अब मैं उसको लुंड चुसवाने लगा और माँ भी लोल्लिपोप की तरह मेरा लुंड चूसने लग गयी.

५ मिनट लुंड चुसवाने के बाद मैंने माँ से कुटिया बनने को कहा. माँ ने मुझे फिरसे मन किया. फिर मैंने कहा-

मैं: बन जाओ माँ. पहली बार ऐसा मौका मिला है तुम्हे छोड़ने का.

फिर माँ घोड़ी बन गयी. उसके बाद मैंने सरसो का और तेल लिया माँ की गांड के छेद में रखा और लुंड को डालने की कोशिश की. पहले तो माँ थोड़ा चिल्लाई पर फिर शांत हो गयी. फिर मैंने माँ की गांड में पूरा लुंड घुसा दिया.

माँ को दर्द हो रहा था. पर वो दर्द को सेह रही थी. मैंने माँ की गांड मारनी शुरू कर दी थी. बंसरी ने माँ की गांड खोल दी थी गांड मार मार के. फिर मैंने माँ से कहा-

मैं: मम्मी बंसरी ने तुम्हारी गांड काफी खोल दी है बहुत जल्दी.

फिर माँ बोली: हां जब तू और मोनू स्कूल चले जाते हो तब वो दिन में आता है और तब वो सिर्फ मेरी गांड ही मारता है.

मैंने कहा: क्यों?

तो माँ बोली: वो बोलता है की उसको गांड मारने में भी उतना मज़ा आता है जितना की छूट मारने में.

फिर मैंने पुछा: तो पापा से कभी आपने गांड मरवाई है.

माँ बोली: कभी नहीं. क्युकी तेरे पापा ने कई बार बोलै और तरय किया. पर मैंने मन कर दिया. तो उन्होंने फिर कभी गांड मारने को नहीं कहा. पर बंसरी मेरी एक नहीं सुनता. उसने मेरी गांड ज़बरदस्ती मारी थी. पर तेरे मुँह बोले नाना ने सबसे पहले मेरी गांड मारी थी. उन्होंने भी अकेले में ही मेरी गांड मारी थी.

मैं: पर मैंने कभी देखा नहीं.

माँ बोली: नहीं वो मेरी गांड ड्राइंग रूम में मारते थे तख़्त पर. क्युकी वो बोलते थे की गांड मारने पे मैं चिल्लाऊंगी. इसलिए बच्चो से दूर होक गांड मारते थे ताकि आवाज़ न जाये कही.

मैं माँ की बात सुनते-सुनते माँ की गांड मार रहा था और अब शायद मेरे लुंड का पानी निकलने वाला था. तो मेरी रफ़्तार अब तेज़ हो गयी थी और १०-१५ झटके मारने के बाद ही मेरा पूरा वीर्य मम्मी की गांड के अंदर ही निकल गया.

मैं बहुत ज़्यादा थक गया था और वही बगल में चुप-चाप लेट गया. फिर माँ उठ कर कपडे से अपने गांड पे लगे वीर्य को पोंछने लगी. उसके बाद वो भी मेरे बगल में लेट गयी.

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