तड़पति भाभी से बिनटी करवा कर चोदने की स्टोरी

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा मैने कैसे चुपके से मार्केट से कॉंडम खरीद लिया था, और भाभी को छोड़ने के लिए तैयार था. इस पार्ट में पढ़िए आयेज क्या हुआ उस दिन.

भाभी ने मुझे पूछा: ये कहा से ले आया तू?

मैने भाभी को अपनी बाहों में उठा लिया, और बेडरूम में लेकर जाने लगा और कहा-

मैं: अब बस करो ना सवाल जवाब. मैं भी ये चाहता हू, और तुम भी.

बेडरूम में जेया कर मैने भाभी को बेड पर लिटाया, और कॉंडम निकाल कर पहन लिया. भाभी अभी भी तोड़ा नर्वस थी. पर कुछ और देर तक मैने भाभी को स्मूच किया, और उनके बदन से खेलने लगा, ताकि उनकी छूट फिरसे गीली हो जाए. छूट गीली होते ही मैने मेरा लंड 2-3 बार भाभी की छूट पे रगड़ा, आंड अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था.

छूट गीली थी, पर फिर भी मेरे लंड को 2-3 बार धक्के लगाने के बाद मेरा पूरा लंड भाभी के छूट में घुसा. मैने भाभी से पूछा-

मैं: ऑश भाभी, इतनी टाइट कैसे हो आप?

भाभी ने मुझे कस्स के हग कर लिया. अब हम मिशनरी पोज़िशन में थे. भाभी के बूब्स मेरी छाती पे डब रहे थे, और मेरा लंड भाभी की छूट के अंदर घुसा हुआ था. थोड़ी देर दर्द से झूँझणे के बाद उसने मुझसे कहा-

भाभी: बहुत वक़्त हो गया है सेक्स किए. इसीलिए इतना टाइट लग रहा है तुम्हे.

मैं: क्यूँ, भैया सेक्स नही करते तुम्हारे साथ?

भाभी: पहले करते थे, पर बच्चा होने के बाद से कम हो गया. और अब 2 साल से तो सिर्फ़ किस वग़ैरा करते है सिर्फ़, सेक्स तो किया ही नही.

मैं: बहनचोड़ क्या चूतिया हो गये है भैया. इतनी मस्त वाइफ मिली है उनको, और उनको कदर ही नही.

भाभी ये सुन कर तोड़ा गुस्सा हो गयी और मेरे लिप्स पे ज़ोर से काट लिया और कहा-

भाभी: अपने भैया को गाली देता है, नालयक! भोल मत अगर तेरे भैया से मेरी शादी ना हुई होती, तो आज तेरे साथ बिस्तर नही गर्मी कर रही होती.

ये सुन के हम दोनो तोड़ा हस्स पड़े.

मैं: सॉरी भाभी मेरा वो मतलब नही था. मैं तो बस ये कहना चाहता था, की अगर मुझे ऐसी वाइफ मिले तो मैं तो रोज़ छोड़ता उसको.

भाभी: तू तो वैसे भी अब रोज़ छोड़ने वाला है मुझे. जब की मैं तेरी वाइफ हू भी नही.

मैं: तो क्या हुआ अगर तुम मेरी वाइफ नही हो? मज़े तो मैं तुम्हे उतने ही करौंगा जितना एक पति को करना चाहिए.

भाभी: मुझे यकीन है तू मुझे उससे ज़्यादा ही मज़े करवाने वाला है.

अब हम फिरसे स्मूच करने लगे. थोड़ी देर तक अपना लंड भाभी के छूट में रखने के बाद, अब मैं धीरे-धीरे धक्के देने लगा. दर्द के मारे भाभी तोड़ा चीखने लगी, और एक बार तो मेरे काढ़े पे ज़ोर से काट लिया.

धीरे-धीरे भाभी को भी मेरे लंड की आदत हो रही थी. उसकी छूट धीरे-धीरे खुलने लगी थी. कुछ 15-20 मिनिट्स तक ऐसे ही मिशनरी करते रहे हम. और फिर मैं झाड़ गया.

मैं फिर किचन मैं जेया कर खुद के लिए और भाभी के लिए पानी ले आया. पानी पी कर हम कुछ देर तक ऐसे ही बेड पर नंगे लेट कर कड्ड्ल कर रहे थे, और बातें कर रहे थे. तभी भाभी ने मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया. भाभी अब फिरसे चूड़ना चाहती थी.

मैं फिरसे भाभी के पैरों के बीच गया और भाभी की छूट आचे से चाटने लगा. भाभी ने मुझे पहले दिन पे तडपया था. वो मुझे याद आया अचानक, और मैं भी अब उसको मेरे लंड के लिए तड़पने लगा. मैं जान-बूझ कर उसकी चूत ही चाट रहा था, और उसके बब्ले दबा कर मज़े कर रहा था.

उसने मेरे बाल खींच कर मुझे पूछा: अब सिर्फ़ चाट-ते ही रहोगे या आयेज भी कुछ करने का इरादा है?

मैने कहा: इरादा तो है, मगर उससे पहले मैं मेरी भाभी की प्यारी छूट का स्वाद आचे से चखना चाहता हू.

मैने अगले 15 मिनिट्स तक छूट छाती, और वो एक बार झाड़ भी गयी. अब वो और तड़पने लगी मेरे लंड के लिए. उसने मेरे बालों में हाथ घूमते हुए मुझसे बिनटी की-

भाभी: चलो ना, अब जल्दी शुरू करो.

मैने भी मस्ती में कहा: अर्रे इतनी भी क्या जल्दी है भाभी?

वो अब समझ गयी थी, की मैं उसे जान-बूझ कर तडपा रहा था. मैं उसकी चूत ही चाट रहा था. फिर उसने एक लंबी साँस भरते हुए मुझसे कहा-

भाभी: मैं जानती हू तुम क्या कर रहे हो.

मैने पूछा: क्या?

उसने सिसकारियाँ लेते हुए कहा: तुम यही चाहते हो ना की मैं भी तुमसे बिनटी करू मेरी आग बुझाने के लिए? चलो ठीक है, मैं कर लेती हू बिनटी. प्लीज़ अब और मत तड़पाव यार, प्लीज़ शुरू करो मुझे छोड़ना. लो पद गयी तुम्हारे कलेजे को ठंड? अछा लगा अपनी भाभी को लंड के लिए बिनटी करते देख कर?

मैं हासणे लगा और उसकी छूट से उपर बढ़ते हुए उसका पूरा बदन चूमते हुए उसके मूह के पास पहुँचा. फिर हल्के से उसके कान में कहा-

मैं: बहुत अछा लगा तुम्हे ऐसे चूड़ने के लिए तड़प्ता देख कर.

मैने उसके गाल कस्स के पकड़े, और उसके होंठ चूमने और काटने लगा.

फिर उसने मुझे एक लंबा स्मूच किया, और फिरसे मुझे देख कर चुदाई की बिनटी की. मैं फिर खड़ा हुआ, और लंड पे कॉंडम लगा लिया था. इस बार मैने भाभी को डॉगी स्टाइल में तैयार होने को कहा.

भाभी के तैयार होते ही मैं अपना लंड भाभी की छूट पे सहलाने लगा, और थोड़ी देर में अंदर धकेल दिया. इस बार मेरा लंड आसानी से अंदर घुस गया था. अब भाभी को भी ज़्यादा दर्द नही हो रहा था, तो मैं स्पीड बढ़ने लग गया, और ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा.

देखते-देखते मैं भाभी की इतने ज़ोर से मारने लगा था की पुर घर में हमारी चुदाई की आवाज़ गूँज रही थी. कुछ 15 मिनिट्स बाद हमने फिरसे पोज़िशन चेंज की. अब मैं लेट गया, और भाभी मेरे उपर आके बैठी काउ गर्ल पोज़िशन में, और मेरे लंड पे उच्छलने लगी.

भाभी थोड़ी देर उछाल के तक गयी, और मेरे बदन पर गिर पड़ी. फिर भाभी को तोड़ा चूमने के बाद मैने फिरसे भाभी को पलट दिया, और मिशनरी पोज़िशन में ले आया, और ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा. कुछ 10 मिनिट बाद भाभी ने मुझे कस्स के पकड़ लिया हाथो से भी, और पैरों से भी, और भाभी झड़ने लगी.

उसके 2 मिनिट बाद ही मैं भी झड़ने वाला था. तो मैने लंड छूट से बाहर निकाला, कॉंडम उतार दिया, और भाभी के बदन पर झाड़ गया. फिर मैं उसके बगल में जाके लेट गया. भाभी भी उस ही हालत में मेरे साथ लेती रही कुछ देर तक. फिर थोड़ी देर बाद वो नहाने चली गयी, और मुझे नींद लग गयी.

शाम के 5 बजे उनका बच्चा घर आ गया. भाभी को याद आया की मैं अब तक उसके बेड पर नंगा सोया था. तो भाभी ने वो रूम बंद कर दिया, और अपने बच्चे को फ्रेश करवाने के बाद उसको टीवी देखने बोल दिया.

भाभी फिर बेडरूम में आई, और मेरे उपर बैठ के मेरा बंदन चूमने लगी, ताकि मैं उठ जौ. मेरी नींद तब खुली, जब उसने मेरे निपल पे काटा. मेरे जागते ही उसने मुझे एक लंबी किस दी, और मुझे कपड़े पहन कर बाहर आने बोला और वो चली गयी.

अगले पार्ट में उसी रात की कहानी शेर करूँगा, जब मैने और भाभी ने टेरेस पे ठंडी और अंधेरी रात में खुले में चुदाई की.

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