तड़प्ते हुए भाई-बहन की हवस भारी चुदाई की कहानी

तो पिछला पार्ट जिसने नही पढ़ा वो पढ़ कर आए. फिर आयेज का पार्ट पढ़े. चलिए तो शुरू करते है स्टोरी.

मेरे एग्ज़ॅम्स शुरू हुए तो मैं शिखा के पास नही जेया पाया. हा पर फोन पर बात करते थे हम दोनो. पर फोन पर भी कम ही करता थे जान-बूझ के, की कही उसके मम्मी पापा को शक ना हो जाए की ये दोनो इतनी बात क्यूँ कर रहे है.

जैसे-जैसे दिन गुज़र रहे थे भाई साहब, बता नही सकता कितनी चुदस चढ़ रही थी हम दोनो को ही. मगर हमने डिसाइड किया था की ना वो फिंगरिंग करेगी और ना मैं अपना हिलौँगा. और अब सीधा बेड तोड़ेंगे एग्ज़ॅम के बाद.

तो जैसे-जैसे एग्ज़ॅम ख़तम होने को हुए. मैने समान लेना शुरू कर दिया, कॉनडम्स के पॅकेट, वियाग्रा टॅब्लेट्स, और जेल, क्यूंकी मैने उसे बोल दिया था की अब तो उसकी गांद चाहिए ही थी मुझे. वो भी मान गयी थी.

मैने यौतूबे के कुछ वीडियोस के सजेशन्स भी फॉलो किए, जिसमे वो देसी वियाग्रा बनाने का तरीका बताते है तो लास्ट लोंग आंड फक हार्ड. मैं ये सप्प्लिमेंट्स पर डिपेंड नही होना चाहता था शिखा को देर तक छोड़ने के लिए.

मैने एक्सर्साइज़ भी शुरू कर दी, जिससे स्टॅमिना मेनटेन रहे मेरा. लगभग 10 दिन में मुझे फराक भी लगने लगा था फ्रेंड्स. ऑलमोस्ट 1.5 मंत्स में मेरे एग्ज़ॅम प्रॅक्टिकल आंड वीवा कंप्लीट हो गये. मैं कॉलेज से निकला, और बस यही सोच रहा था की आज तो शिखा की मा छोड़ दूँगा.

मेरे से ज़्यादा खुश तो मेरा लंड था भाइयों. बिना किसी सप्प्लिमेंट के या कुछ भी किए राक हार्ड था बहनचोड़. मैं जल्दी-जल्दी अपने फ्लॅट पर गया. वाहा से सारे समान लिए, और शिखा के फ्लॅट की तरफ चल दिया. उसकी फ्लॅट की कीस सेम जगह ही रखी थी.

इतने टाइम बाद मैं जेया नही रहा था, और मैने उसे बताया भी नही था आज का प्रोग्राम. मैने चुपके से चाबी उठाई, और रूम अनलॉक किया, और दबे पावं अंदर गया, बिल्कुल शोर नही होने दिया. अंदर से मोन्स की साउंड आ रही थी आह आ फक मे की. पर आवाज़ शिखा की नही थी, इतना तो पहचान गया मैं.

मैने रूम में देखा तो शिखा बिल्कुल नंगी लेती थी, और तब पर कोई पॉर्न देख रही थी, और उसने अपने हाथ बेड की दोनो साइड्स पर कपड़े से बाँध रखे थे. उसने बाद में बताया के वो ये 1 वीक से कर रही थी.

पहले बेड की दोनो साइड्स कपड़े बाँध देती थी. फिर 1 बड़ी ड्यूरेशन की पॉर्न मोविए प्ले करती थी, और फिर अपने हाथ उन कपड़ों की गाँठ में डालती थी और टाइट कर देती थी. जिससे उसके हाथ उसकी छूट तक ना पहुचे, और वो पॉर्न देख कर फिंगरिंग के लिए तडपे. पर उसकी प्यास तभी ही बुझे जब उसके भाई का लोड्‍ा उसकी प्यास बुझाए.

विवेक: बेहन की लोदी, हमने डिसाइड किया था ना की नो फिंगरिंग आंड नो फाप्पिंग?

वो एक-दूं से शॉक हो गयी और उससे भी ज़्यादा दर्र गयी थी की ऐसे कों आ गया, और वो नंगी पड़ी थी हाथ बाँधे हुए.

शिखा: वो मैं, आप, ऐसे-कैसे? वो मैं बस, पर.

घबराहट में वो कुछ बोल नही पा रही थी. मैने देखा वो कुछ ज़्यादा ही दर्र गयी थी, तो मैं जल्दी से गया और उसको हग किया. वो दर्र की वजह से एक-दूं रोने लग गयी. मैने उसको हग किए हुए ही पीठ पर मलना शुरू किया.

विवेक: अर्रे बस-बस, क्या हुआ, रो क्यूँ रही है पागल?

शिखा (रोते हुए): अर्रे आपने ऐसे आ कर इतना दर्रा दिया, मेरी तो गांद ही फटत गयी भैया. मुझे लगा कोई चोर आ गया, और मैं नंगी पड़ी हू. मेरा रेप कर देगा और हाथ बँधे हुए है, तो मैं कुछ नही कर पौँगी. या फिर अगर मम्मी पापा हुए तो क्या सोचेगे. बस यही सब सोच कर रोना आ गया.

विवेक: पर तू ऐसे नंगी लेती क्यूँ है यार? और ये हाथ कैसे बाँधे हुए है.

शिखा ने फिर मुझे वो सारी कहानी बताई जो मैं उपर बता चुका हू. उसे सुन कर मेरा लोड्‍ा जो पहले से तन्ना हुआ था, और तंन गया. अब बस अब तो बेड पर युध होना था. मैने फटाफट कपड़े निकाल फेंके, और लंड ने शिखा को सलामी दी.

शिखा: अफ भैया यार, ये आपके एग्ज़ॅम के चक्कर में ना कितनी तदपि हू मैं और मेरी छूट, और उपर से आपने नो फिंगरिंग का रूल लगा दिया. देखो मेरी छूट कैसे फूल गयी है. अब निकालो इसका सारा पानी भैया.

मैने उसकी छूट की तरफ देखा तो हल्के-हल्के बाल थे, और छूट सच में फूली-फूली थी जैसे नयी उँचुई छूट होती है रस्स से भारी.

शिखा: देख क्या रहे हो? नो फिंगरिंग रूल की वजह से बाल सॉफ नही किए वरना कंट्रोल नही कर पाती, और सारा रस्स बह जाता. फिर आप प्यासे रह जाते ना. मेरे छोड़ू भैया, अब बस और मत तड़पाव यार, वैसे भी टाइम कम है हमारे पास. आओ ना भैया, ज्लडी से करो चढ़ाई मेरी छूट पर.

मैने शिखा की टांगे पकड़ी, और बेड के किनारे पर ला कर उसे पटका. फिर नीचे बैठ कर अपना मूह उसकी फूली छूट पर रख कर बहुत ज़ोरो से छूट पर दबा कर फुल जोश में चूसने लगा.

शिखा: आहह हाअ आआ उफ़फ्फ़ भैया, कितनी तदपि हू इसके लिए उम्म्म मा एस. चूस डालो भैया, प्लीज़ सक मे हार्ड.

शिखा पहले से ही गरम थी, तो मुझे ज़्यादा टाइम तक झेल नही पाई.

शिखा: एस भैया, मेरा रस्स निकालने को है भैया. बस चूस्टे रहो आह.

और वो झड़ने लग गयी. सच में बहुत रस्स निकला उसकी छूट से. मैं जो तोड़ा बहुत पी पाया पी गया, और बाकी सारा मेरे मूह पर पिचकारी की तेज़ धार के जैसे लगा, और सारा मूह गीला कर गया. मैने जब देखा तो शिख बुरी तरफ हाँफ रही थी. फिर मैं जैसे ही उपर की तरफ बढ़ा, उसने किसी भूखी शेरनी की तरह मेरा चेहरा पकड़ा, और अपनी तरफ खींच कर मेरा पूरा चेहरा चाट कर सॉफ करने लगी.

उसकी गरम जीभ यार मेरे चेहरे को चाट रही थी, और मुझे जोश दिला रही थी. उसने चेहरे को चाट कर सॉफ किया, और हेस्ट हुए हानफते हुए मुझे देख और लपक कर मेरे होंठो को चूमने लगी. उम्म, वाह मज़ा आ गया यार. सच में हम दोनो जिस तरह एक-दूसरे को ज़ोर से किस रहे थे, पता चल रहा था की 1.5 महीने से दोनो बराबर तडपे थे.

वो कभी मेरे होंठो को चूस्टी, कभी जीभ को, कभी ज़ोर-ज़ोर से चूस्टी तो कभी साँस लेने को धीमे-धीमे से. पर हम दोनो ही होंठ नही छ्चोढ़ रहे थे. लगभग 20 मिनिट की चुसाई के बाद हम दोनो हानफते हुए अलग हुए, और एक-दूसरे को देख कर हासणे लगे.

शिखा: उफफफ्फ़ भैया, मज़ा आ गया. कितना मिस कर रही थी मैं आप के होंठो के टेस्ट को पता है?

विवेक: हा शिखा, मैं भी बहुत मिस कर रहा था यार तुझे. पहले वीक तो लंड इतना परेशन कर रहा था की सोचा एक-दो रौंद छोड़ ही डू आ कर.

शिखा: अर्रे तो आ जाते ना भैया यार. एक-दो राउंड्स तो हम कर ही सकते थे हर दिन.

विवेक: हा बेहन की लोदी, चुदाई की थकान के बाद पढ़ाई तेरा बाप करता ना.

शिखा: अर्रे, बाप पर नही जाना भैया.

विवेक: अछा तो तू बता मा पर चला जौ मदारचोड़ साली?

इतना कह कर मैने अपने लंड पकड़ा, और एक झटके में उसकी छूट में उतार दिया.

शिखा: अया हा मदारचोड़ अफ भैया, आज तो ऐसा लग रहा है जैसे पहली बार लंड ले रही हू. छूट में कसम से आपका लंड बहुत टाइट फील हो रहा है भैया.

बात तो उसकी सही थी. उसकी छूट मुझे भी बहुत टाइट फील हो रही थी, जैसे नयी-नवेली छूट पेल रहा था. लंड को एक-दूं कस्स कर जाकड़ लिया था, और उसकी छूट की गर्मी आए-हाए, उसका तो कोई जवाब नही.

शिखा: चलो भैया अब मारो धक्के, और निकाल दो मेरी चीखें. मेरी छूट में आपका लंड फील करने को कितना तदपि हू मैं, और आपका नाम चिल्लाने को भी. बस अब फाड़ डालो आज मुझे. आहह एस मा, आज तो गयी तेरी बेटी. आज ये जानवर पूरा नोच खाएगा तेरी बेटी को मा.

मैं शिखा को फुल स्पीड में छोड़ रहा था, और उसके बूब्स को बहुत ज़ोर-ज़ोर से चूस रहा था.

शिखा: एस भैया, छोड़ो मुझे छोड़ो. आअहह आपका लंड उफ़फ्फ़ कितना कमीना है ये. मेरी छूट की आग भड़का दी है इसने. कितनी तदपि हू इसके लिए एक महीने में. फक मे भैया एस…

पुर कमरे में सिर्फ़ शिखा के मोन्स गूँज रहे थे, और हमारे मिलन का संगीत ठप ठप ठप ठप फ़च फ़च फ़च करके बाज रहा था. मैने शिखा का गला दबाया, और उसे फुल स्पीड में पेल रहा था. वो भी फुल एंजाय कर रही थी, और अपनी गांद उठा-उठा कर साथ दे रही थी. मैने एक-दो थप्पड़ भी जड़ दिए उसके चेहरे पर.

एक तो गला भी दबा रखा था, और उपर से थप्पड़ पड़े तो उसका चेहरा रेड हो गया पूरा. फिर छोड़ते-छोड़ते उसकी छूट पर दो-टीन थप्पड़ मारे, और उससे बर्दाश्त नही हुआ.

शिखा: आहह बहनचोड़, मैं आई भैया, मेरा निकला.

और वो झाड़ गयी. मैने लंड निकाला, और मूह उसकी चूत पर लगा कर सारा रस्स पी लिया उसका. फिर उसकी छूट को आचे से चूसा, उपर से नीचे, नीचे से उपर. मस्त मज़ा ही आ गया. पर अभी मैं झाड़ा नही था, और लंड फुल टाइट था.

शिखा: भैया अब मेरे हाथ खोलो, और मुझे इस कालू की सेवा करने दो. देखो कितना प्यारा लग रहा है ये. मुझसे नही कंट्रोल हो रहा है. इसे मेरे मूह में लेने दो भैया.

मैने उसके हाथ नही खोले, पर अपना लंड मूह में दे दिया उसके. वो वैसे ही चूसने लगी.

विवेक: उफ़फ्फ़ बहनचोड़ साली. क्या मस्त चूस्टी है यार तू मेरा लोड्‍ा. ब्लोवजोब में तेरा कोई कॉंपिटेशन नही है. तू बेस्ट है यार शिखा. आआ एस, चूस, चूस साली.

मैने उसके चेहरा पकड़ा, और धीरे-धीरे स्ट्रोक्स देने लगा. वो भी जब लंड अंदर-बाहर होता तो अपने मूह को ज़ोरो से बंद कर देती. इससे और मज़ा आने लगा. मैं भी डीप स्ट्रोक्स के साथ उसके मूह की चुदाई करने लगा. आअहह एम्म्म क्या मज़ा था दोस्तों, और फिर मैं भी झड़ने के करीब आ गया.

मैने अपनी स्पीड बधाई, और उसके मूह में धक्के पेलने लगा ज़ोर से. उसके गले तक पहुचा दिया अपना लंड. उसकी आँखें बाहर निकल आती थी हर स्ट्रोक पर. पर उसने मुझे रोका नही, उल्टा और ज़ोर से लंड चूसने लग गयी, और अपने होंठो को और कस्स कर मेरे लंड पर जाकड़ दिया. मैं फिर उसके मूह में झाड़ गया.

विवेक: उफ़फ्फ़ यार शिखा एम्म, मज़ा आ गया. तू साली फुल रंडी हो गयी है यार, कितना मज़ा आया तेरे मूह को छोड़ने में बहनचोड़ बता नही सकता.

शिखा बेसूध पड़ी थी बेड पर हाथ फैलाए हुए. मैं भी उसके उपर ही लेट गया और दोनो हानफते हुए आँखें बंद करके पडे रहे.

आयेज क्या हुआ आयेज के पार्ट्स में.

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