सुलह के बाद मा-बेटे की चुदाई

आपने मेरी सेक्स स्टोरी के पिछले कुछ पार्ट्स में पढ़ा होगा, कैसे मैने अंकित के चुंगल से मम्मी को बचाया. उस दिन के बाद मम्मी में काफ़ी बदलाव आया. उनके चेहरे से धीरे-धीरे सारी टेन्षन ख़तम हो गयी. मम्मी के साथ वनिता आंटी ने भी राहत की साँस ली. क्यूंकी वो भी अंकित से परेशन हो गयी थी. उस दिन के बाद अंकित ने मम्मी और वनिता आंटी को परेशन करना बिल्कुल बंद कर दिया. अब उसकी कोई खबर नही थी.

कुछ दिन के बाद मम्मी और वनिता आंटी ने फिर से जिम रेग्युलर जाय्न कर लिया. मम्मी की लाइफ रुटीन में आ गयी थी, और मैं इस बात से बहुत खुश था. लेकिन, मैं और मम्मी जब घर पर अकेले होते, तो हम दोनो के बीच एक अजीब सा तनाव बना रहता था. हम कोई झगड़ा नही करते थे, पर दोनो कुछ बात भी नही करते थे. मम्मी मेरे से बात करने की कोशिश करती, पर मैं उसे ताल देता था, पता नही क्यूँ.

ऐसे ही कुछ दिन निकल गये. मम्मी की लाइफ से सारी टेन्षन ख़तम होने और रेग्युलर जिम जाने से उनका चर्म बदल रहा था. वो अब और भी सेक्सी लगने लगी थी. मैं अपने मॅन को बहुत समझता की अब मम्मी से कोई इंटिमेट रिलेशन्षिप नही बनाना है. पर जैसे-तैसे दिन तो काट रहा था. लेकिन रात को मम्मी के साथ बिताए वो पल, और जवान लड़कों के साथ मम्मी की देखी हुई चुदाई मुझे सोने नही देती थी.

ऐसा नही था की मेरी लाइफ से सेक्स ख़तम हो गया था. कभी-कभी मैं वनिता आंटी को होटेल पर बुला कर उनकी चुदाई करता था. एक दिन मुझे वनिता आंटी ने बताया की “भावना की लाइफ सेक्स के बिना अधूरी है. वो मुझे बताती है की वो चुदाई के बिना नही रह सकती.” उन्होने मुझे एक बात ये भी कही की “तुम अपनी मम्मी का ख़याल रखना, कहीं छूट की आग उनको फिर से कोई ग़लती करने पर मजबूर ना करे.”

वनिता आंटी की बात अब मेरे दिमाग़ में बुरी तरह बैठ गयी थी. मैने सोचा अगर सच में मम्मी फिर से कोई ग़लती करे तो हमारे लिए अछा नही होगा. मम्मी मेरे से जितना खुल कर बात करती है, उतना वनिता आंटी से नही कर सकती होंगी. तो मैने सोचा मम्मी को भी एक मौका देना चाहिए. उनको भी अपनी ग़लती सुधारने का हक़ है.

एक दिन भाई और भाभी किसी फंक्षन में गये थे, और पापा ऑफीस में थे. उस दिन मुझे ज़्यादा काम नही था, तो मैने सोचा मम्मी को कहीं बाहर घुमाने ले जाता हू. घर पर बेचारे बोर हो रहे होंगे. मैने पापा से बात की और बोला-

मैं: पापा, मैं मम्मी के साथ सिटी जेया रहा हू. मुझे तोड़ा काम है, और उनको भी कुछ काम होगा तो वो भी हो जाएगा.

पापा ने भी “ठीक है” कहा, और मैं ऑफीस से सीधा घर पर आया. मैं जैसे ही घर आया, मम्मी उस टाइम किचन स्लॅब सॉफ कर रही थी. उन्होने हल्की पतली सी पिंक सारी पहनी थी. उनकी आधी पीठ और कमर दिख रही थी. मैं तो सारी में बँधे उनकी गांद का उभार देख कर कंट्रोल नही कर पाया. वो साइट मेरे दिमाग़ में अटॅक कर गयी.

मैने उनको पीछे से हग किया और धीरे से बोला: मुम्मा, ई आम सो सॉरी.

मेरा इतना बोलते ही मम्मी फूट-फूट कर रोने लगी. वो पलट कर मेरे गले लग गयी. उन्होने मुझे इतना टाइट पकड़ लिया था की जैसे वो मुझे कहीं जाने ही ना देने वाली हो. मम्मी के बूब्स मेरी चेस्ट से टच होते ही मेरे अंदर करेंट दौड़ गया. मैने अपने दोनो हाथ उनकी पीठ पर रखे और उनको भरोसा दिलाया की मैं उनके साथ था और हमेशा रहूँगा. वो पल कितना एमोशनल था, मैं बता नही सकता.

मैं मम्मी के सर को उपर उठा कर, आँखों में देखते हुए “मुम्मा, आप रोते हुए आचे नही लगते. इतना खूबसूरत चेहरा है, रो कर क्यूँ खराब कर रहे हो?”

मम्मी की हस्सी निकल गयी और वो मेरे माथे को चूमते हुए बोली, “कहाँ थे इतने दीनो तक? मैने तुम्हे कितना मिस किया बेटा.” उनकी आवाज़ में इतना प्यार था की मेरा दिल भर आया.

मैं: मुम्मा, इसलिए तो आपको सॉरी बोला. अब से आपको कभी अकेला नही होने दूँगा, प्रॉमिस!

मम्मी: बेटा, तेरी कोई ग़लती नही है. तुम मेरे आचे बेटे हो. मैने तेरे साथ धोका किया. फिर भी तुमने मुझे बचाया. मैं इसी के लायक थी. लेकिन अब ये ग़लती दोबारा नही होगी. प्रॉमिस देती हू.

उनकी आँखों में सकचाई थी. मैने उनके आँसू पोंछे और उनके सर को तोड़ा उपर उठा कर मेरे लिप्स उनके लिप्स के क़रीब कर दिए. उन्होने अपनी आँखें बंद करी और अपने होंठ ऐसे खोले जैसे वो भी यही चाहती हो. मैने जब उनको किस किया, मुझे इतना सुकून मिला की क्या काहु दोस्तों. जो सुकून मेरी मम्मी की बाहों में था, वो मुझे किसी भी औरत के अंदर नही मिल सकता था. ये अलग ही फीलिंग थी.

मम्मी ने अपने दोनो हाथ मेरे सर के पीछे रखे, और दबा कर मेरे लिप्स चूसने लगी, जैसे वो कितने बरसों की भूखी हो. हम एक-दूसरे के मूह में जीभ डाल कर एक-दूसरे के होंठ नोच रहे थे. कुछ हमने 10 मिनिट तक लिप्स लॉक रखा. जब हमारी किस टूटी तो दोनो ज़ोर-ज़ोर से साँस लेने लगे, और एक-दूसरे की तरफ देख कर मुस्कुरा रहे थे, एक अजीब सी शरम और खुशी के साथ.

मम्मी ने एक नॉटी स्माइल के साथ, जो मेरे दिल में उतार गयी कहा, “कितने दिन से ये करने के लिए मॅर रही थी.”

मैं: मैं भी आपका सेक्सी जिस्म देख कर छोड़ने के सपने देख रहा था (मेरी आवाज़ में भी वो गर्मी थी).

मम्मी: आज तेरे सारे सपने सच कर देते है.

उनके इतना कहते ही मैने एक हाथ मम्मी की सारी के उपर से बूब्स पर और दूसरा उनकी गांद पर रख दिया. मैं उनको किस करते हुए बूब्स दबा रहा था, और साथ में उनकी गांद सहला रहा था. मैने मम्मी का पल्लू धीरे से नीचे सरका दिया, और उनके लिप्स को छ्चोढ़ कर उनकी नेक, रलोब, और ब्लाउस के उपर से क्लीवेज पर किस कर रहा था. हर टच में एक नशा था.

मेरा हाथ उनकी सारी के अंदर गया, और मैं उनकी चिकनी कमर को सहला रहा था. मम्मी ने एक गहरी साँस ली, और मेरे बालों में उंगलियाँ फेरते हुए मुझे और करीब खींच लिया. उनके बूब्स मेरे हाथो में थे, और मैं उन्हे ब्लाउस के उपर से ही मसल रहा था. मम्मी की साँसें तेज़ हो रही थी, और वो मदहोश सी लग रही थी.

“बस बेटा,” मम्मी ने धीमी, कामपति हुई आवाज़ में कहा, “आज मुझे इतना प्यार दे की मैं सारी दुनिया भूल जौ.”

उनकी बात सुन कर मेरे अंदर एक अजीब सी हिम्मत आ गयी. मैने उन्हे गोद में उठा लिया, और वो मेरे गले लग गयी. मैं उन्हे किचन से सीधा . में ले गया. बेडरूम में जाते ही मैने उन्हे बेड पर धीरे से लिटा दिया. मम्मी ने शरमाते हुए अपनी आँखें बंद कर ली थी.

मैने मम्मी के उपर झुक कर उनके माथे पर किस किया. फिर आँखों पर, गालों पर और फिर से होंठो पर टूट पड़ा. इस बार हमारी किस में पहले से भी ज़्यादा जुनून था. हमारी जीभें एक-दूसरे में उलझ गयी थी, और हम दोनो एक-दूसरे का रस्स चूस रहे थे.

धीरे से मैने मम्मी का ब्लाउस खोला, और उनकी ब्रा के स्ट्रॅप नीचे किए. जैसे ही उनके गोरे-गोरे, बड़े-बड़े बूब्स बाहर निकले, मेरी साँसें थम सी गयी. उनके निपल्स पहले से ही टाइट हो चुके थे. मैं बिना देरी किए उनके एक निपल को अपने मूह में भर लिया, और चूसने लगा, जैसे कोई प्यासा बच्चा दूध पी रहा हो. मम्मी ने एक सिसकी भारी और अपने हाथो से मेरे सिर को और दबाने लगी. “आह… बेटा… और ज़ोर से चूसो… बहुत अछा लग रहा है…”

मैं उनके एक निपल को चूस्टा और दूसरे को हाथ से मसलता रहा. कभी उनके बूब्स को दबाता, कभी सहलाता, कभी उनके क्लीवेज पर किस करता. मम्मी बस “अया… ऊवू… ह्म…” की आवाज़े निकाल रही थी. उनका जिस्म पूरा गरम हो चुका था, और वो बेचैन हो रही थी.

मैने उनके बूब्स को छ्चोढ़ कर नीचे उतरा, और उनकी सारी उतारने लगा. एक एक प्लीट खोलते हुए मैने सारी को उनके जिस्म से अलग कर दिया. अब मम्मी सिर्फ़ पेटिकोट और ब्रा में थी. उनका गोरी-गोरी जांघें और गोल-गोल गांद देख कर मेरा लंड पूरी तरह टन चुका था.

मैं उनके पेटिकोट का नाडा खोलने लगा. मम्मी ने शरमाते हुए मेरी तरफ देखा और फिर अपनी आँखें बंद कर ली. जैसे ही पेटिकोट नीचे सरका, उनकी छूट की आउटलाइन दिखने लगी. उन्होने पिंक कलर की पनटी पहनी थी.

“आज तो मैं तुम्हे पूरी तरह से अपना बना लू,” मैने धीमी, भारी आवाज़ में कहा. मम्मी ने बस एक प्यारी सी स्माइल दी. मैने मम्मी के होंठो को फिर से चूमा, और धीरे से उनकी पनटी को नीचे सरका दिया. जैसे ही वो हॅट गयी, मम्मी की हल्की घनी छूट मेरे सामने थी. उससे एक हल्की सी मीठी खुश्बू आ रही थी. मम्मी ने अपनी टाँगें थोड़ी सी फैला ली, जैसे वो भी इस पल का इंतेज़ार कर रही थी. मैं उनकी छूट को देखता रहा, उसकी हर एक खूबसूरती को आँखों में भरते हुए.

मैने धीरे से अपनी उंगली मम्मी की छूट पर रखी, और उसे सहलाने लगा. मम्मी ने एक गहरी साँस ली और उनका जिस्म काँपने लगा. मैने उंगली को क्लाइटॉरिस पर रखा और हल्के से दबाया.

“आ… बेटा…,” मम्मी के मूह से एक सिसकारी निकली.

मैं उनकी आँखों में देखा. उनमे शरम और इक्चा दोनो थी. मैने उनकी छूट को अपनी उंगलियों से और सहलाया, और फिर धीरे से एक उंगली अंदर डाली. मम्मी ने अपनी कमर उठा दी, और उनका चेहरा खुशी से भर गया.

“कितना इंतेज़ार किया मैने इस पल का,” मम्मी ने धीमी आवाज़ में कहा.

मैने उनकी छूट में एक उंगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया, और फिर दूसरी उंगली भी डाल दी. उनकी छूट गीली हो चुकी थी और मेरी उंगलियाँ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी. मम्मी बस सिसकियाँ भर रही थी और अपने होंठ काट रही थी.

मैं उठा और अपने कपड़े उतारने लगा. मम्मी ने अपनी आँखें खोली और मेरे नंगे जिस्म को देखा. उनकी आँखों में एक चमक थी. मैने सारे कपड़े उतारे और अपने बड़े, तनने हुए लंड को मम्मी की आँखों के सामने लाया. मम्मी ने उसे देखा और एक गहरी साँस ली.

“आज तुम्हारी हर इक्चा पूरी करूँगी, बेटा,” मम्मी ने प्यार से कहा.

मैं मम्मी के पास वापस आया और उनके पैरों के बीच बैठ गया. मेरा लंड उनकी छूट के ठीक सामने था. मैने धीरे से अपने लंड का सूपड़ा उनकी छूट के मुहाने पर रखा. मम्मी ने अपनी टाँगें और फैला ली.

मैने उनकी आँखों में देखा, उन्होने पर्मिशन दी. मैने एक गहरी साँस ली और धीरे से लंड को अंदर धकेलना शुरू किया.

“आह…” मम्मी के मूह से एक दर्द और खुशी भारी आवाज़ निकली.

लंड धीरे-धीरे मम्मी की गरम और गीली छूट में अंदर जेया रहा था. वो इतना टाइट और गरम था की मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था. जैसे ही पूरा लंड अंदर गया, हम दोनो ने एक लंबी साँस ली. हम दोनो एक-दूसरे को कस्स कर पकड़ लिया.

मम्मी ने अपने पैर मेरी कमर पर कस्स लिए थे. कुछ देर तक हम बस एक-दूसरे को हग किए हुए पड़े रहे, साँसों की गर्मी एक-दूसरे के चेहरे पर महसूस करते हुए. ये पल कितना सुकून भरा था, मैं बता नही सकता. वो फीलिंग अलग ही थी, मदर-सोन की इंटिमेसी जो शरम और प्यार दोनो से भारी थी.

मैने धीरे-धीरे मम्मी की कमर हिलना शुरू किया. पहले हल्के-हल्के धक्के, फिर धीरे-धीरे उनकी स्पीड बढ़ा दी. मम्मी भी अब मेरी हरकतों का जवाब दे रही थी.
वो अपनी कमर उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी. “उहह… आ… ह्म…” की आवाज़े अब पुर कमरे में गूँज रही थी.

“और तेज़ बेटा… और तेज़…!” मम्मी ने अपनी आँखें बंद किए हुए कहा. उनके चेहरे पर खुशी और बेचैनी सॉफ दिख रही थी. मैने स्पीड और तेज़ कर दी. अब धक धक की आवाज़ आने लगी थी. लंड मम्मी की छूट में अंदर-बाहर हो रहा था, और हर स्ट्रोक के साथ एक प्यारी सी आवाज़ आ रही थी. मम्मी अपने सिर को इधर-उधर हिला रही थी और अपने हाथो से बेडशीट को कस्स के पकड़ रखा था.

“मैं आ रही हू बेटा… मैं आ रही हू…!” मम्मी ने कहा.
मुझे भी अपना जिस्म गरम होता हुआ महसूस हुआ. मैने और ज़ोर से धक्के मारना शुरू किया. मम्मी ने अपनी टाँगें और खोल दी, जैसे वो मुझे पूरी तरह से अंदर लेना चाहती हो.
“आहह… मुम्मा…” मेरे मूह से निकल गया.

और फिर, एक तेज़ झटके के साथ, हम दोनो एक साथ झाड़ गये. मम्मी का जिस्म काँपने लगा और उन्होने मुझे और ज़ोर से पकड़ लिया. मेरा गरम पानी मम्मी की छूट में भर गया. हम दोनो हानफते हुए एक-दूसरे के उपर गिर पड़े.

कुछ देर तक हम वैसे ही पड़े रहे, एक-दूसरे की गर्मी और साँसों को महसूस करते हुए. जब साँसें नॉर्मल हुई तो मैं धीरे से मम्मी के उपर से हटा और उनके बगल में लेट गया. मम्मी ने मेरे हाथ को पकड़ लिया और कस्स कर दबाया.

“आज मुझे सच में लगा की मैने अपनी ज़िंदगी दोबारा जी ली,” मम्मी ने धीमी आवाज़ में कहा, आँखों में खुशी के आँसू थे.

मैने उनके माथे को चूमा. “मैं आपको कभी अकेला नही छ्चोधुंगा, मुम्मा. कभी नही.”

हम दोनो ने एक-दूसरे को कस्स कर हग किया. वो दिन हमारी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत दीनो में से एक था, जहाँ हमने सिर्फ़ जिस्म से नही, दिल से भी एक-दूसरे को पाया था.

थोड़ी देर बाद मैं उठा और मम्मी को देखा. वो अब भी मेरे पास ही लेती हुई थी, उनके चेहरे पर एक अलग ही सुकून और चमक थी.

“मुम्मा, अब उठो. हमे सिटी जाना है ना?” मैने धीरे से कहा.

मम्मी ने अंगड़ाई ली और मुस्कुराते हुए उठ बैठी. “हा बेटा, चलते है.” उनकी आवाज़ में अब एक नयी ताज़गी थी.

मैने उन्हे शवर लेने को कहा. मम्मी बातरूम में चली गयी, और मैं बेडशीट ठीक करने लगा. कुछ देर बाद जब वो बाहर आई, तो उन्होने एक बहुत ही सेक्सी सी डार्क ब्लू कलर की सारी पहनी हुई थी. उसमे वो और भी खूबसूरत और जवान लग रही थी. उनकी कमर और कुवर्व्स उस सारी में और भी उभर कर आ रहे थे. मैं उन्हे देखता ही रह गया.
“क्या हुआ, बेटा? अची नही लग रही?” मम्मी ने शरारत से पूछा.

“नही मुम्मा, आप तो क़यामत लग रही हो,” मैने दिल से कहा. मम्मी शर्मा गयी और हस्स पड़ी. “चल अब, देर हो रही है.”
मम्मी ने तोड़ा मेक-उप किया हल्का सा और घर से निकल गये. हमारी कार सिटी की तरफ चल पड़ी. रास्ते भर हम दोनो हँसी-मज़ाक करते रहे.

वो पुराना तनाव अब बिल्कुल गायब हो चुका था. मम्मी मेरे साथ इतनी खुल कर बात कर रही थी, जैसे हम सच में एक बाय्फ्रेंड-गर्लफ्रेंड की तरह हो.

सिटी पहुँच कर हमने एक आचे रेस्टोरेंट में लंच किया. मम्मी बहुत खुश थी. उन्होने बड़े चाव से खाना खाया और हमने खूब बातें की. लंच के बाद हमने थोड़ी शॉपिंग भी की. मैं मम्मी के लिए कुछ गिफ्ट्स भी खरीदना चाहता था, पर उन्होने माना कर दिया.

“तुम मेरे साथ हो, बेटा, यहीं मेरे लिए सबसे बड़ा गिफ्ट है,” उन्होने प्यार से कहा. शाम होने लगी थी और हम घर की तरफ लौट रहे थे. कार में मम्मी ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और धीमी आवाज़ में कहा, “थॅंक योउ, बेटा. आज तुमने मेरी ज़िंदगी में फिर से खुशियाँ भर दी.”
मैने उनका हाथ पकड़ा और हल्का सा दबाया. “ऑल्वेज़ फॉर योउ, मुम्मा.”

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