हेलो फ्रेंड्स, मैं थोर अपनी हॉट सेक्स स्टोरी का अगला पार्ट लेके आप सब के सामने हाज़िर हू. उमीद है आपने पिछला पार्ट पढ़ लिया होगा. अगर अभी तक नही पढ़ा है, तो पहले उसको ज़रूर पढ़ ले.
पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की अनुज की मम्मी ने उसकी दीदी की जॉब च्चूदवा दी. फिर उसकी दीदी ने घर पर टुटीओन्स पढ़ानी शुरू की. टुटीओन पर एक अंकल अपने नालयक लड़के को ज़्यादा पैसे देने का बोल कर लगवा गये. लड़का कॉलेज में पढ़ता था, और उसका नाम विवेक था.
अनुज ने हमेशा अपनी दीदी और विवेक को बातें करते और हेस्ट हुए देखा था. फिर एक दिन जब अनुज अचानक से अपने क्रिकेट ग्लव्स लेने घर आया, तो उसने देखा विवेक अंडरवेर में था, और दीदी ब्रा-पनटी में थी. अब आयेज की कहानी अनुज की ज़ुबानी-
मैं दोनो को ऐसी हालत में देख कर एक-दूं हैरान हो गया. मुझे समझ नही आया की अब क्या करू, तो मैं चुप-छाप वहीं खड़े रह कर अंदर देखने लगा.
विवेक बेड पर दीदी के पास गया, जो लेती हुई थी. फिर उसने दीदी की एक लेग पर अपना हाथ रखा, और उस पर हाथ फेरने लगा. दीदी को इससे मस्ती चढ़ने लगी. फिर विवेक ने दीदी की लेग को चूमना शुरू किया, जिससे दीदी को गुदगुदी होने लगी. तभी दीदी बोली-
दीदी: अपनी टीचर के साथ ऐसा करते हुए शरम नही आती तुमको (और वो हासणे लगी).
विवेक: जब टीचर इतनी सेक्सी हो, तो उसके साथ कुछ करने में शरम कैसी? और टीचर को भी पता होना चाहिए की कुछ चीज़ें स्टूडेंट्स सीखा देते है.
फिर विवेक दीदी की सेक्सी लेग को चाटने लग गया. चाट-ते हुए वो उपर पनटी पर गया, और दीदी को देखा. दीदी ने उसको एक स्माइल पास की. फिर विवेक ने दीदी की पनटी के उपर से दीदी की छूट को चूमा. दीदी ने छूट पर विवेक के होंठ लगते ही अपनी आँखें बंद कर ली.
उसके बाद विवेक ने दीदी की पनटी नीचे की, तो दीदी ने भी गांद उठा कर उसको पनटी उतारने में मदद की. दोस्तों मैने कभी सोचा भी नही था की दीदी ऐसी होंगी. विवेक ने दीदी की पनटी को उसके जिस्म से अलग कर दिया. अब दीदी की क्लीन-शेव्ड लाइट ब्राउन छूट नंगी होने विवेक और मुझे दोनो को दिखाई दे रही थी.
फिर विवेक ने दीदी की छूट पर अपना मूह लगाया, और उसको चाटने लगा. इससे दीदी मदहोश होने लग गयी. वो आ आ की हल्की सिसकियाँ निकालने लगी. फिर विवेक ने दीदी की छूट के मूह को एक हाथ से खोला, और उसके अंदर जीभ डालने की कोशिश करने लगा.
अपनी उत्तेजना में दीदी ने अपने हाथो से बेडशीट भींच की, और काँपते हुए झाड़ गयी. दीदी का सारा पानी विवेक के मूह में चला गया, जिसे वो मज़े से पी गया.
फिर विवेक उपर आया, और नाभि और छूट के बीच का जो हिस्सा होता है, उसको चूमने-चाटने लगा. उसके बाद वो नाभि में अपनी जीभ डालने लगा, और फिर उपर आ गया. विवेक ने मेरी दीदी की ब्रा निकली, और उनके बड़े-बड़े चुचे आज़ाद हो गये.
फिर विवेक ने दोनो हाथो से चुचो को मसला, और एक-एक करके दोनो को पीने लगा. दीदी आ आ कर रही थी. फिर दीदी अपना हाथ विवेक के लंड के पास लेके गयी, और अंडरवेर में डाल कर लंड पकड़ लिया. दीदी उसको बोली-
दीदी: मेरी छूट तेरा लंड लेने के लिए बेकरार है. अब डाल भी दे ना.
दीदी का हुकुम सुनते ही विवेक ने अपना अंडरवेर नीचे किया, और लंड बाहर निकाल लिया. उसका लंड काफ़ी बड़ा था, मेरे लंड से भी बड़ा. फिर विवेक ने अपने लंड को हाथ में लिया, और दीदी की छूट पर रगड़ने लगा. दीदी की सिकसियान निकल रही थी, और वो भी गांद उपर-नीचे करके लंड की रगदाई का मज़ा ले रही थी.
फिर विवेक ने लंड का टोपा छूट के मूह पर रखा, और धक्का मारा. दीदी के मूह से चीख निकली, और विवेक के लंड का कुछ हिस्सा छूट में चला गया. दीदी ने विवेक को कंधो से पकड़ा, और अपनी तरफ खींच कर उसके होंठ चूसने लगी. विवेक भी उसका साथ देने लगा. वो साथ में नीचे से प्रेशर बढ़ता गया, जिससे लंड छूट में घुसता गया.
कुछ सेकेंड्स में विवेक का पूरा लंड मेरी बेहन की छूट में था. दीदी को पाईं और प्लेषर दोनो मिल रहे थे. वो पूरा लंड अंदर लेने के बाद कुछ देर विवेक को अपनो बाहों में जकड़े रखी, और हिलने नही दिया. फिर जब उसने अपनी पकड़ ढीली करी, तो विवेक छूट में धक्के मारने लगा.
दीदी अब आ आ श श कर रही थी, और चुदाई का मज़ा उसके चेहरे पर सॉफ दिख रहा था. वो विवेक के धक्को को गांद उठा-उठा कर ले रही थी. दीदी की छूट से काफ़ी पानी निकल रहा था, जिससे विवेक का लंड पूरा गीला हो गया था, और अंदर-बाहर होते हुए छाप-छाप की आवाज़ करने लगा था.
कुछ देर उसी पोज़िशन में चुदाई के बाद विवेक ने दीदी की छूट से अपना लंड बाहर निकाला. फिर उसने दीदी को कुछ कहा, और दीदी उठ कर डॉगी स्टाइल पोज़िशन में घुटनो पर हो गयी. फिर विवेक ने पहले दीदी के छूतदों पर कुछ थप्पड़ मारे. उसके बाद वो दीदी के छूतदों को काटने लगा. दीदी आ आ करती रही.
कुछ ही देर में उसने दीदी के छूतदों को लाल कर दिया. दीदी के चूतड़ वैसे ही बहुत सेक्सी है. लाल हो कर वो और भी ज़्यादा सेक्सी लग रहे थे. फिर विवेक ने पीछे से दीदी की छूट पर अपना लंड सेट किया, और एक ही झटके में अंदर डाल दिया. दीदी की फिर से ज़ोर की चीख निकली, और दीदी बोली-
दीदी: सेयेल कुत्ते, आराम से नही डाल सकता क्या?
विवेक: डाल तो सकता हू, लेकिन तुझे दर्द देने में मज़ा आता है रंडी!
और दोनो हासणे लगे. फिर विवेक ऐसे ही 15 मिनिट दीदी को छोड़ता रहा. जब उसका लंड अंदर जाता, तो दोनो के टकराने से ठप-ठप की आवाज़ आती. दीदी के फेस एक्सप्रेशन्स बिल्कुल किसी पॉर्न वीडियो की हेरोयिन की तरह थे. वो मज़े से आहें भर कर अपने स्टूडेंट के लंड का मज़ा ले रही थी.
फिर विवेक ने जल्दी से अपना लंड बाहर निकाला, और दीदी की गांद पर अपना माल निकाल दिया. सफेद-सफेद वीर्या दीदी की गांद पर पड़ा बहुत अछा लग रहा था. उसके बाद दोनो वैसे ही नंगे लेट गये. कुछ देर बाद जब विवेक कपड़े बदलने लगा, तो मैं वहाँ से बाहर निकल गया.
पहले मैने सोचा की दीदी की शिकायत करू घर पर. फिर मैने सोचा की सब को अपनी सेक्स लाइफ जीने का हक़ है, तो मैने ये इन्सिडेंट अपने अंदर ही संभाल कर रखा.