स्टूडेंट को थप्पड़ मार कर फ़ससी टीचर

दोस्तों मेरा नाम नेहा है. मैं एक सरकारी स्कूल में टीचर की जॉब पर हू. मेरी उमर 26 साल है, और 2 साल पहले ही मेरी जॉब लगी थी. मेरा रंग गोरा है, और फिगर 34-28-36 है. इस सेक्स कहानी में मैं आपको बतौँगी कैसे मुझे एक स्टूडेंट ने सिर्फ़ इसलिए छोड़ा, क्यूंकी मैने उसको थप्पड़ मार दिया था. चलिए बताती हू सब कैसे हुआ.

मैं एक ग़रीब फॅमिली से हू. बड़ी मेहनत से पहले मैने पढ़ाई की, और फिर एग्ज़ॅम क्लियर करके सरकारी जॉब पर लगी. मेरे घर वाले बहुत खुश थे. ये सरकारी जॉब हमारे तंग हालात को ठीक करने वाली थी.

मेरी पोस्टिंग मेरे गाओं के स्कूल में हुई. वहाँ बच्चे ज़्यादा पढ़ने में इंट्रेस्टेड नही होते, इसलिए सख्ती बरतनी पड़ती है, और कभी-कभी हाथ भी उठना पड़ता है. मैने अपनी क्लास के सारे बच्चो को आचे से सीधा कर दिया, और उनको पढ़ने की आदत डाल दी. उनके पेरेंट्स भी हमेशा मेरा शुक्रिया करते थे.

एक दिन हमारे हेडमास्टर ने मुझे और एक और टीचर को ऑफीस में बुलाया. वो हमे किसी ट्रैनिंग पर भेजना चाहते थे, जो एजुकेशन डिपार्टमेंट ने ऑर्गनाइज़ की थी. हमारे स्कूल के बेस्ट टीचर्स को भेजा जाना था, और उनमे एक मैं थी. इसके लिए हमे 2 दिन के लिए शहर के एक कॉलेज में टीचिंग प्रॅक्टीस करनी थी.

मैने घर पे बता दिया, और अगले दिन में दूसरी टीचर के साथ शहर चली गयी. वहाँ कॉलेज वालो ने हमारे स्टे का अछा इंतेज़ां कर रखा था. थोड़ी देर आराम करने के बाद हम लोग ट्रैनिंग के लिए चले गये. 2 घंटे की ट्रैनिंग के बाद हमे टीचिंग प्रॅक्टीस के लिए अलग-अलग क्लासस में भेजा गया.

मुझे जिस क्लास में भेजा गया, वहाँ सेकेंड एअर के स्टूडेंट्स बैठे थे. ज़्यादातर बाय्स थे, और 3-4 गर्ल्स थी. मैने वहाँ जेया कर फुल कॉन्फिडेन्स में पढ़ना शुरू कर दिया. काफ़ी बच्चे मेरी बात सुनने लगे, लेकिन एक लड़का बहुत शरारातें कर रहा था.

मैने उसको 2-3 बार माना किया, लेकिन उसने मेरी बात को इग्नोर किया. वो साथ वाली लाइन में बैठी लड़की को परेशन कर रहा था काग़ज़ फेंक-फेंक के. मुझे उस पर गुस्सा आ गया. फिर जैसे मैं अपनी क्लास के बच्चो को थप्पड़ लगा देती थी, मैने उसको भी लगा दिया. वो लड़का हैरान हो गया, और सब उस पर हासणे लगे.

फिर वो उठा, और क्लास के बाहर चला गया. मैने फिर से पढ़ना शुरू कर दिया. कुछ देर में कॉलेज का पेवं मेरे पास आया, और बोला की मुझे प्रिन्सिपल ने बुलाया था. मैं प्रिन्सिपल ऑफीस में गयी. वहाँ वो मुझे बोला-

प्रिन्सिपल: मेडम ये आपने क्या किया. संजय अवस्थी को थप्पड़ मार दिया.

मैं: सिर वो लड़का क्लास में डिस्टर्बेन्स कर रहा था.

प्रिन्सिपल: आप जानती है संजय कों है?

मैं: कों है?

प्रिन्सिपल: अभी के एंपी का बेटा है. वो आदमी बहुत पवरफुल है. अगर उसको पता चला की आपने ऐसा किया है उसके बेटे के साथ तो आपकी जॉब भी जेया सकती है..

मैं: ऐसे कैसे जेया सकती है? मेरा पास गवर्नमेंट का अपायंटमेंट लेटर है.

प्रिन्सिपल: उससे कोई फराक नही पड़ता. वो बहुत पवरफुल है, कुछ भी कर सकता है.

प्रिन्सिपल की बातें सुन कर मेरी गांद फटने लगी. मैने सोचा की अगर सच में मेरी जॉब चली गयी, तो मेरे परिवार का क्या होगा. फिर मैने प्रिन्सिपल से पूछा-

मैं: लेकिन सिर ग़लती तो उस लड़के की थी. और मैने जान-बूझ कर उसको नही मारा. मुझे पता होता की वो एंपी का बेटा है, तो मैं उसको नही मार्टी. अब आप ही बताओ इसका सल्यूशन क्या होगा.

अभी प्रिन्सिपल बोलने ही वाला था, की तभी उसका फोन बाज उठा. फोन उठा कर प्रिन्सिपल बोला-

प्रिन्सिपल: हेलो. जी नमस्कार सिर. सिर वो मेडम है, गाओं से ट्रैनिंग के लिए आई है. नही सिर, उनको इस बात का पता नही था की संजय आपका बेटा है. बात करेंगे सिर. अभी करवाता हू.

फिर प्रिन्सिपल ने फोन का रिसीवर मेरे आयेज किया, और बोला: मिनिस्टर साहब बात करना चाहते है आपसे.

मेरी गांद फटत रही थी. मैने काँपते हुए हाथो से फोन का रिसीवर हाथ में लिया. फिर बोली-

मैं: हेलो सिर.

मिनिस्टर: मेडम या क्या किया आपने? आपको पता है ना गूव्ट. रूल्स के हिसाब से बच्चो पर हाथ नही उठना चाहिए. फिर भी आपने ये किया. आपको अपनी नौकरी प्यारी है की नही?

मैं: सिर बस थोड़ी सी ग़लती हो गयी. सिर मैं आपसे माफी मांगती हू. आयेज से ऐसा नही होगा.

मिनिस्टर: देखिए आपने थप्पड़ संजय को मारा है, तो सॉरी भी उसको बोलिए. अगर उसने माफ़ किया तो ठीक. नही तो आपकी नौकरी तो हम रहने नही देंगे.

मैं: नही सिर, मैं बड़ी मुश्किल से यहाँ तक पहुँची हू. मैं संजय से माफी माँग लूँगी. आप बताओ कब और कहाँ माफी माँगनी है.

मिनिस्टर: मैं संजय को बोलता हू. देखते है वो क्या कहता है.

ये बोल कर मिनिस्टर ने फोन कट कर दिया. अब मैं प्रिन्सिपल की तरफ देखने लगी. प्रिन्सिपल बोला-

प्रिन्सिपल: ये तो अची बात है वो आपको माफी माँगने का एक मौका दे रहा है. लेकिन संजय बहुत हरामी लड़का है. पता नही वो क्या करेगा.

अब मेरे अंदर घबराहट बढ़ती जेया रही थी. मैं सोच रही थी की वो जो कुछ भी कहेगा मैं करूँगी. लेकिन किसी भी हाल में मैं अपनी जॉब नही जाने दूँगी.

फिर मैं अपने रूम में चली गयी. कुछ देर बार मुझे एक अननोन नंबर से कॉल आई. मैने फोन उठाया तो सामने संजय था फोन पर. जैसे ही उसने मुझे कहा की वो संजय बोल रहा था, तो मैने उसको बोला-

मैं: संजय बेटा मुझे माफ़ कर देना. मुझसे ग़लती हो गयी. मुझे पता नही था तुम कों हो.

संजय: मेडम ये बात तो सही नही है. आप ने मेरी इन्सल्ट सब के सामने करी थी. तो माफी भी सब के सामने ही माँगनी पड़ेगी.

मैं: हा तुम बता दो, कहाँ माँगनी है. मैं माँग लूँगी.

संजय: सुबा की मॉर्निंग असेंब्ली में आपको सब के सामने मुझसे माफी माँगनी पड़ेगी.

मैं: कोई दिक्कत नही है. अब ग़लती हुई है तो माफी माँगनी बनती है. मैं माँग लूँगी.

संजय: ठीक है, तो कल मिलते है.

दोस्तों आज की कहानी यहीं तक. आयेज की कहानी अगले पार्ट में. औतोरकराज़्यफोर@गमाल.कॉम पर फीडबॅक दे.

error: Content is protected !!