हेलो दोस्तों, मैं रॉनी फिर से हाज़िर हू 4 साल बाद. बीच में किसी कारण मैने लिखना बंद कर दिया था. पर काई लोग मेरी ईद पर स्टोरीस भर दिए थे, और रिक्वेस्ट करने लगे उनकी स्टोरीस शेर करने. तो मैं वापस आ गया हू.
इस बार मैं एक कंबो कहानी लेके आया हू, जो की मुझे भेजी है रूमा घोष ने कोलकाता से. उनकी कहानी में दो कहानियाँ है. एक जो उनके साथ हुआ, और दूसरा जिससे वो इनस्पाइर होके इन्सेस्ट बनी. तो पहले मैं वो कहानी बता रहा हू, जिससे उनके अंदर इन्सेस्ट की इक्चा जागी.
एक और बाअत बता डू, की मेरी कहानी में सब कुछ सच होता है. कुछ फॅंटेसी भी होती है, क्यूंकी काफ़ी मसाला डाल के लिखता हू, ताकि आपको पढ़ने में मज़ा आए. इसलिए आपसे गुज़ारिश है की बस मज़ा ले.
हेलो दोस्तों, मैं रूमा, कोलकाता से हू. मेरी आगे अभी 26 की है, और हाइट 5’6″. साथ में मेरे मम्मी-पापा और एक छ्होटा भाई है आशु. वो मेरे से 2 साल छ्होटा 5 फीट का. मेरा करेंट फिगर 38द-36-38 है.
पहले मैं ऐसी नही थी. मैं बचपन से थोड़ी सी हेल्ती रही हू. मोटी नही, बुत भरा-भरा सा गोरा शरीर है. इस वजह से लोगों को लगता था की मेरे बूब्स भी बड़े है, बुत नही मेरे तब 32″ के थे. आब्वियस्ली ये मेरा भाई का किया है. मुझे बिल्कुल भी आइडिया नही था इन्सेस्ट का. बुत 5 साल पहले कुछ ऐसा हुआ जिसने मेरी सोच बदल दी. और आज मैं खुशी से कह सकती हू की आई आम आन इन्सेस्ट.
मुझे कोई शरम नही है बताने में की मैं अपने भाई आशु से चुड्ती हू. मैं उसकी मूठ मारने से लेके मूट (टाय्लेट) पीने तक सब करती हू, और वो भी मेरा दूध से लेके मूट सब पीटा है. हा दोस्तों, मेरे बूब्स में दूध है. बहुत ज़्यादा नही, बुत तोड़ा सा निकलता है.
नही मैं प्रेग्नेंट नही हुई कभी. फिर भी दूध आता है, और मुझे बहुत अछा लगता है जब भाई मुझसे मेरा दूध माँगता है. मैं उसे खुशी से निकाल के पिलाती हू. कभी-कभी बिना पूछे मेरी त-शर्ट उठा के बूब्स बाहर निकाल के पीने लगता है, और मैं भी उसे नही रोकती.
आशु मेरा भाई भी है, बेटा भी, और पति भी. क्यूंकी दूध पीने में मेरे बेटे जैसा है, और छोड़ता है किसी पति की तरह. सच में 5 साल में इतना खुशी दी है भाई ने की मुझे कोई दिक्कत नही है वो मुझे मम्मी पापा के सामने छोड़े. ना ही कोई दर्र है की ग़लती से कोई जान गया तो क्या होगा. मैं संभाल लूँगी. आफ़टेरल्ल मैं खुश हू, मुझे बस इससे मतलब है.
वैसे ये दूध की कहानी क्या है? और ये भाई से चूड़ने का पागलपन कैसे शुरू हुआ, ज़रूर बतौँगी. लेकिन एक और कहानी है, जिससे मैं इनस्पाइर हुई. पहले मैं आपको वो बताती हू.
ये तब की बात है जब मैं 21 की थी. मैं अपनी सहेलियों के साथ एक बार दीघा गयी थी. बीच से नहा के आने के बाद हम सब एक-एक करके नहाने जेया रहे थे. मैने कर लिया था, बाकी लाइन में थी. ग्रूप में मैं, सीमी, मौसूमि, रिचा और सृजीता थी.
सीमी नहा के बाहर आई तो टवल लपेटी थी. टवल का जोड़ बिल्कुल उसकी बॉडी में था, जिससे उसकी जांघें दिख रही थी.
रिचा (सीमी की छूट की और इशारा करके): ओये तेरा सिंघरा दिख राह है.
हम सब हासणे लगे. सीमी ग्रूप की सबसे हरामी लड़की थी. सबसे छ्होटे कपड़े वही पहनती थी, और पॉर्न खूब देखती थी. हम सब ने उसी से सीखा छूट और लंड का मतलब. सीमी को इस मज़ाक से कोई शरम नही आई. उल्टा कहने लगी-
सीमी: अछा? ये ले.
कह कर टवल निकाल दिया, और नंगी हो गयी. सब शॉक हो गयी. मैं भी लड़की हू, और पॉर्न देखती हू, पर पहली बार सामने किसी नंगी लड़की को देख रही थी. पानी से भीगा पूरा चिकना बदन, मस्त गोल बूब्स, खड़े ब्राउन निपल्स और गीली शेव की हुई छूट. मुझे शरम आ रही थी, बुत नज़र भी नही हॅट रही थी.
सृजीता: वॉट थे फक सीमी?
सीमी (हेस्ट हुए): क्यूँ फटत गयी?
रिचा: वाउ, बूब्स तो मस्त है तेरे. एक बात बता, तेरा तो कोई ब्फ नही है, तो इतनी कम उमर में इतने बड़े कैसे हुए?
सीमी वापस टवल पहनते हुए: हा सही है. कोई ब्फ नही है.
रिचा: तो फिर? खुद से ही?
सीमी ने कुछ नही कहा. बस मुस्कुराते हुए मौसूमि से पूछा: क्या बोलती है बता डू?
सीमी का कुछ इशारा था जो मौसूमि समझ गयी. वो टवल पहन के बातरूम जेया ही रही थी, की वापस आके सीमी का टवल उतार दिया. इससे पहले हम कुछ रिक्ट करते, मौसूमि ने सीमी को अपने पास खींच के बाहों में जाकड़ लिया, और उसके लेफ्ट बूब को मूह में दबा के चूसने लगी. सब की आँखें फटी और मूह खुल्ला रह गया.
सृजीता: ये क्या हो रहा है?
सीमी (आँख मारी): अब समझ आया?
सीमी मोन करने लगी. कुछ देर बाद मौसूमि ने सीमी को हल्का धकेलते हुए पास वाले डेस्क पर टीका दिया, और नीचे बैठ गयी. पहली बात हाज़ाम ही हो रही थी, की सीमी ने दूसरी बिजली गिरा दी. मौसूमि घुटनो पर बैठ गयी, और सीमी की छूट खाने लगी.
हमारा फ्यूज़ उडद गया. अब सीमी भी गरम हो गयी. उसने एक टाँग डेस्क पर उठा ली. इससे उसकी छूट और भी खुल गयी, और साथ ही उसने मौसूमि के सर को पकड़ के और भी छूट में घुसा लिया.
सीमी तड़पने लगी: आहह अया उूउउ मा अया
हम मूह खुला रख के बस देखे जेया रहे थे. कोई भी एक शब्द नही बोल रहा था. कुछ ही देर में सीमी ज़ोरो से चीखी-
सीमी: आआआअहह…
और वो झटके देते-देते झड़ने लगी. उसके छूट से पिचकारी की तरह पानी निकालने लगा. उसका पानी कभी मौसूमि के मूह पे और कभी छ्चाटी पे गिर रहा था. पर इस सब में मौसूमि हिली भी नही, और छूट का सारा पानी चूस्टी रही.
10-12 झटको के बाद सीमी बहाल होके डेस्क पर ही लेट गयी. मौसूमि ने तब भी नही छ्चोढा. उसने सीमी के जांघों, छूट और पेट पे गिरे पानी के छींटो को आचे से चाट कर सॉफ किया, और तब खड़ी हुई. फिर उसने सीमी को उठाया और गले लगा के किस करने लगी, और सीमी ने भी साथ दिया. फिर मौसूमि नहाने चली गयी, और सीमी बेड पे आके गिर पड़ी हमारे बीच. उसकी साँसे चढ़ि हुई थी.
उसने ताकि हालत में पूछा: तो रिचा, जवाब मिल गया?
हम सब हासणे लगे.
सृजीता: साली तू तो बहुत कामिनी है.
सीमी हेस्ट हुए उठी और ब्रा पनटी पहनने लगी.
रिचा: अछा वैसे कितनो से चटवाई है?
सीमी: ये पहली ही है.
पता नही सीमी को क्या सूझा, उसने कुछ सोच कर फिर से ब्रा खोल दी, और पनटी उतार के नंगी हो गयी.
रिचा: अर्रे क्या हुआ? ख़तम नही हुआ? मैं नही करने वाली.
सब हासणे लगे.
सीमी: ना रे. तेरी बात से एक आइडिया आया. क्यूँ ना स्कोर बढ़ाया जाए?
मई: मतलब?
सीमी: एक काम करती हू. आज नंगी ही तुम सब के बीच में सो जाती हू. जिसको जो मॅन करे मेरे साथ कर सकती है. और वैसे भी, जब मेरा सब देख ही लिया है तो कपड़े पहनने की क्या ज़रूरत?
ये कह कर वो बीच में कूद पड़ी. ऐसे की मेरी जाँघ पर उसके बूब्स लग गये, और मैं हॅट गयी.
मैं: सॉरी.
सीमी: अर्रे रूमा. इट्स ओक. योउ कॅन टच मे. अछा सुन लो, आज एक अनाउन्स्मेंट करती हू. मैं तुम सब को आज से खुली छ्छूट देती हू. इस कमरे में जो भी लड़कियाँ है, मुझे जब मर्ज़ी जहाँ मर्ज़ी चू सकती है. ई विल लोवे इट. चाहे बूब्स दबा, छूट में उंगली कर, या खुद नंगी होके अपना पानी पीला, जो तुम लोग का मॅन करे. ई आम ऑल्वेज़ रेडी.
रिचा: मूट दूँगी मूह पे.
सब हासणे लगे.
सीमी बेशर्म हेस्ट हुए बोली: तू करके तो देख, सारा पी जौंगी.
इतने में मौसूमि निकल आई नहा के.
सृजीता: ची सीमी! एनफ. ज़्यादा नही हो रहा?
सृजीता फिर मौसूमि की तरफ देख के बोली: अब ये मत बोल तूने ये भी किया है, तुम दोनो ने.
मौसूमि और सीमी एक-दूसरे को देख के हासणे लगी.
हम समझ गये.
मैं: फक सीमी, ये सब भी?
सीमी: अर्रे ट्रस्ट मे. पहली बार दूसरी बार अजीब लगता है. पर फिर जब आदत हो जाए तो रोज़ मॅन करता है.
मैं: अछा अब रोज़ तो तुम लोग नही मिलते, फिर कैसे?
सीमी कुछ देर चुप रही, पर स्माइल करती रही.
रिचा: अब इतना सब कुछ खोल दिया है, तो ये राज़ भी खोल दे. कहाँ से मिलता है? मूट छ्चोढ़. बूब्स और छूट से खेलना, ये कैसे पूरा होता है? कंवली को भी मिला लिया क्या खेल में?
सीमी हासणे लगी: उससे भी बेटर ऑप्षन है. वो है इसलिए जब मांगू मिल जाता है.
हम कन्फ्यूज़ थे. मेरी बत्ती जाली, पर सोच रही थी की जवाब वही ना हो.
मैं: रिमी?
सीमी: अफ रूमा जी, आप तो कमाल है.
हम सब शॉक में चले गये. रिमी उसकी छ्होटी बेहन थी, सीमी से 2 साल छ्होटी. गोरी-चित्ति, बिल्कुल डॉल की तरह क्यूट है.
सृजीता: साली तू पागल तो नही हो गयी. रिमी के साथ कैसे?
हम अब तोड़ा सीरीयस हो गये.
सीमी; अरे रिलॅक्स. इट’स ओक.
रिचा: क्या ओक. बेहन के साथ कैसे? और वो भी मान गयी?
सीमी: वो लंबी कहानी है. बुत पहले मेरी बात सुन. देख मुझे सिर्फ़ छूट चाटने वाली चाहिए थी. मैने उसे पटाया. वो मान गयी. अब हम दोनो एंजाय करते है, तो क्या प्राब्लम हो गयी? कोई फोर्स थोड़ी किया.
मैं: कैसे पताई, मैं भी सुनू.
रिचा: हा बता ज़रा. अभी जैसे हमारे सामने किया, वैसे उसके सामने भी?
सीमी: अर्रे नही-नही. वो ऐसा था की मुझे भी समझ आ गया था की मौसूमि से रोज़ मिलना नही होगा. मेरी तड़प बढ़ने लगी. फिर एक दिन रिमी सॉफ-सफाई कर रही थी, तो झुकते वक्त उसका क्लीवेज दिख गया. मैने ये सोचा ही नही था की घर में ही एक छूट है. मैने फिर उसे नहाते हुए एक-दो बार दरवाज़े के च्छेद से देखा, तो उसका चिकना बदन देख के पागल हो गयी, और वहीं बाहर खड़ी उंगली करने लगी.
पिंक निपल्स देख मेरा पानी निकल गया, और वही दरवाज़े पर गिरने लगा. उसके बाहर निकालने से पहले मैने सब सॉफ कर दिया. उसके बाद मैने प्लान बनाया.
वो प्लान क्या था, ये जानने के लिए पढ़िए इसका अगला पार्ट.