अंजाने में चुदाई के बाद जान कर चुदाई

मेरा नाम पल्लवी है. मैं ब.आ. सेकेंड एअर की च्चात्रा हू. मेरी उमर 24 साल है. मैं दिखने में बहुत ही ज़्यादा गोरी और फिगर 34-30-34 है. मेरे घर में मम्मी-पापा और एक भाई है.

पापा का नाम ज्ञानेश ठाकुर है, और वो किसी कंपनी में काम करते है. पापा को शराब की भी आदत है. वो कभी कभार अपने दोस्तों के साथ इधर-उधर पीने के लिए भी चले जाते थे, पर जब मम्मी रहती थी तो वो कभी कहीं नही जाते थे.

एक बार की बात है, जब मम्मी को नानी के यहाँ जाना था. तो उन्होने मुझे और पापा को भी साथ जाने के लिए बोला. पर मुझे और पापा को छुट्टी नही थी. तब उन्होने भाई के साथ जाना ठीक समझा, और वो लोग 15 दीनो के लिए निकल गये.

मेरे सेकेंड एअर के एग्ज़ॅम चल रहे थे, तो मैं सुबह उठती और पापा को नाश्ता खिला कर अपने एग्ज़ॅम देने के लिए निकल जाती. पापा भी अपने ऑफीस चले जाते थे.

एक दिन जब मैं कॉलेज से वापस लौट रही थी, तब मौसम तोड़ा खराब हो गया, और मुझे ऑटो नही मिल रहा था. तब मैं सोची की एक शॉर्टकट रास्ता लेकर अपने घर चली जौ. मेरे घर के लिए चौराहे से एक पतली गली जाती थी, जिसमे शराबी शराब पिया करते थे. वो गली बदनाम थी, की लड़कियों को वो लोग च्चेड़ा करते थे.

पर मैने उस दिन बिना दर्रे उसमे जाने का निश्चय किया. मैं अपने बाग से दुपट्टा निकली, अपने मूह को बाँध लिया, और चल पड़ी. लगभग 5 मिनिट के रास्ते में थी, की बदल घिर आए थे, और गरजने लगे थे. मुझे दर्र था कहीं बारिश और तेज़ ना हो जाए, मैं तो भीग ही जाती. उस दिन मैं एक शर्ट और नीचे स्कर्ट पहने हुई थी.

मैं पतली गली में चली जेया रही थी, की तभी मुझे पापा दिखे शराब पीते हुए. वो शराब पी कर नशे में गिरे थे. मैं सोची उन्हे उठा कर ले जौ. जब मैं उनके पास पहुँची तो उन्होने मेरी आँखों में गौर से देखा, और मैं कुछ बोल पाती उससे पहले उन्होने मेरे हाथ को खींचा और मैं उनके उपर गिर पड़ी.

मेरा मूह दुपट्टे से बँधा हुआ था. वो मुझे नही पहचान पा रहे थे. उनका एक हाथ मेरी कमर में और दूसरा हाथ मेरे गालों को सहला रहा था. मैं उन्हे देखे जेया रही थी.

पापा शराब के नशे में मेरी आँखों में देखते हुए बोले: कितनी कमसिन हो यार. क्या खूब बनाया है उपर वाले ने तुझे.

और उन्होने मेरे होंठो पर दुपट्टे के उपर से ही किस कर दिया. मैं शर्मा गयी. पापा मुझे कोई और लड़की समझ कर किस कर रहे थे.

मैं बोलने को हुई, तभी उन्होने मेरे मूह को दबा दिया, और वो खुद मेरे उपर आ गये. फिर वो मेरी गर्दन को चूमने लगे. मैं झटपटाने लगी. इससे पहले की मैं कुछ बोल पाती और कर पाती, पापा अपने हाथ को नीचे ले गये, और मेरे स्कर्ट के अंदर डाल कर पनटी खोल नीचे सरका दी. फिर अपना लंड निकाल कर मेरी छूट में घुसने लगे.

मैं बोलना चाह रही थी, पर वो मेरे मूह को अपने हाथो से दबाए हुए थे. जब उनका लंड मेरी छूट में नही जेया रहा था, तब उन्होने ढेर सारा थूक लिया, और मेरी छूट पर लगा कर अपने लंड को कस्स के धक्का मारा. उनका लंड मेरी छूट में आधा घुस गया.

मेरी चीख निकल गयी, पर वो मेरे मूह को दबाए हुए थे, और तभी तेज़ बारिश भी होनी शुरू हो गयी. मैं फ़ासस चुकी थी. इधर पापा शराब के नशे में मेरे मूह को दबाए हुए थे, और मेरी छूट में धक्के लगाने शुरू कर चुके थे.

वो अपने एक हाथ से मेरे मूह को दबाए और दूसरे हाथ से चुचियो को मसल रहे थे. मैं आँखें बंद करके शरम महसूस कर रही थी. मैं अपने आप को कोस रही थी की, क्यूँ इस गली से आ गयी. पापा मुझे लगातार छोड़ रहे थे. उन्होने अब अपने पुर लंड को मेरे छूट में घुसा दिया था.

मेरी छूट फटत चुकी थी, और जलन देने लगी थी. उनकी रफ़्तार बढ़ती ही जेया रही थी, और मेरी चुचियो को मसल रहे थे. थोड़ी देर छोड़ने के बाद, वो झाड़ गये. फिर मुझे छ्चोढ़ कर हटते. तब मैने अपना दुपट्टा खोला. जब उन्होने मेरे चेहरे को देखा, तो वो हैरान रह गये. उनके मूह से कोई आवाज़ नही निकल रही थी.

फिर मैं वहाँ से बारिश में भीगते हुए ही घर चली आई, और आ कर सो गयी. जब शाम हुई, तो देखा की पापा आ चुके थे. मैं उनसे नज़रें नही मिला रही थी. मैं चुप-छाप जेया कर खाना बनाने लगी. शाम को उन्हे खाना दी, और बिना उनसे कोई बात बोले अपने कमरे में सो गयी.

पापा मुझसे बात करना चाहते थे, पर मैं नही चाहती थी की उनसे कुछ बोलू. मैं चुप-छाप सो गयी, और सुबह उठ कर भी ऐसे ही उन्हे खाना दी. उसके बाद अपने कॉलेज चली जाती थी.

ऐसे ही टीन-चार दिन बीट गये और मैं सब भूलने लगी थी. मेरी छूट फिर से वही लंड माँगने लगी थी. मेरी छूट में आग फिर से लगने लगी थी. जब शाम को पापा खाने पर बैठे, तब पहली बार मैने उनसे नज़रें मिलाई और काफ़ी देर तक मिलाई. उन्होने भी मुझे देखा पर कुछ बोले नही.

मेरी नज़रें अब उनसे कुछ माँग रही थी. मैं उनसे अब बोलने भी लगी, मैं पापा बोलने लगी थी. और फिर हम लोग खाना खा कर सोने चले गये. जब मैं सो रही थी, तब वो मेरे कमरे में आए, और मेरे सामने बैठ गये.

वो मुझसे उस दिन के लिए माफी माँगने लगे. उनकी आँख से आँसू आ गये, पर मैं तो उन्हे अब माफ़ कर चुकी थी. मैं उनके गले लग गयी, और उनके आँसू को पोंछ लिया.

उन्होने भी मुझे बड़े प्यार से अपनी बाहों में भर लिया. मैं उनका लंड चाहती थी, पर बोल नही पा रही थी. वो मुझे आज बेटी की तरह प्यार कर रहे थे. फिर वो अपने कमरे में जेया कर सो गये. सुबह हुई, मैं उन्हे नाश्ता कराई, और उसके बाद मैं कॉलेज चली गयी. वो अपने ऑफीस चले गये. शाम को भी हम जब वापस आए, तो वो मेरे लिए खूब सारे गिफ्ट लेकर आए.

मैं गिफ्ट देख कर उनके गले लग गयी. मेरी चुचियाँ उनकी छ्चाटी से चिपक गयी. वो बड़े प्यार से मुझे बाहों में भर लिए. मैने उनके गाल पर किस कर दी. उन्होने भी मेरे गाल और माथे को चूम लिया. फिर मैं गिफ्ट्स खोल कर देखने लगी. बहुत ही अची-अची गिफ्ट थी. जब मैं लास्ट वाला गिफ्ट खोली, तो उसमे ब्रा और पनटी थी. मैं पापा की तरफ शरारती नज़रों से देखी.

तब उन्होने मुझसे वो गिफ्ट छ्चीन लिया और बोले: ये तुम्हारे लिए नही, ग़लती से आ गया.

फिर मैने भी उनसे वो गिफ्ट छ्चीन लिया और बोली: अब आ गया तो आ गया. अब से मैं ही पहनुँगी.

और मैं वो लेकर कमरे में पहनने जाने लगी. मैं कमरे में नंगी हुई, और पनटी को पहन लिया. फिर उसके बाद ब्रा पहनी और हुक लगाने लगी. पर हुक लग ही नही रहे थे. ब्रा छ्होटी थी. तभी पापा अंदर आए. मैं उन्हे देख रही थी. वो बड़ी शरारती निगाहों से मुझे देखते हुए मेरे पास आए, और मेरी पीठ पर हाथ लगा कर हुक लगाने लगे.

मैं उनकी आँखों में देख रही थी, और वो मेरे पुर बदन को निहार रहे थे, फिर उन्होने उनको लगा दिया. हम दोनो पर वासना का भूत सवार था. मैं उनकी तरफ पलटी, और उन्होने मुझे अपनी बाहों में ले लिया. हम दोनो एक-दूसरे की आँखों में देख रहे थे.

हम दोनो के होंठ एक-दूसरे से मिल गये. वो बड़े ही प्यार से मेरे होंठो को चूसने लगे. आज मैं भी उनका साथ दे रही थी. वो मेरे होंठो को चूस्टे हुए मुझे बेड पर ले गये, और मैं उनकी शर्ट को उतार दी. फिर उन्होने मेरे पुर बदन को चूमना शुरू कर दिया. मेरे पुर बदन के हर हिस्से को चूम लिया उन्होने. मैं सिहर उठी.

फिर मैं भी उनके उपर आई और उनके पुर बदन को चूमने लगी. उसके बाद उनकी पंत को खोली और निकाल दी. उनका लंड टाइट खड़ा हुआ था. उनके लंड को मैं मसालने लगी. तभी पापा ने मुझे नीचे लिटा दिया, और मेरी ब्रा को उतार कर मेरी नन्ही-नन्ही चुचियों को मसल कर चूसने लगे.

मैं उनके लंड को सहला रही थी, और वो मेरी चुचियों को चूस रहे थे. वो मेरी चुचियों को चूस्टे हुए नीचे गये, और पनटी को उतार कर मेरी फूली हुई छूट में अपनी जीभ लगा कर चूसने लगे. मेरी छ्होटी सी छूट को बड़े प्यार से चूम रहे थे, और जीभ लगा कर चूस रहे थे.

फिर पापा, मेरे उपर आए, और अपने लंड को मेरी छूट में घुसने लगे. मैं अपने पैरों को उनकी कमर में लपेट ली, और वो धीरे-धीरे अपने पुर लंड को मेरी छूट में उतार दिए. मेरा मूह खुला की खुला रह गया. वो अपनी जीभ को मेरे मूह में डाल कर मेरे होंठ को चूसने लगे, और नीचे छूट को छोड़ने लगे.

थोड़ी देर इस तरह छोड़ने के बाद उन्होने मुझे कुटिया बनाया है, और पीछे से लंड डाल कर छोड़ने लगे. आज मुझे चुदाई में बड़ा मज़ा आ रहा था. मैं प्यार से उनके लंड को अंदर ले रही थी.

अब मेरी छूट पानी छ्चोढ़ चुकी थी, और चिकनी हो गयी थी. फिर उन्होने मुझे नीचे लिटाया और मेरी एक टाँग को अपनी कंधे पर लेकर ज़ोर-ज़ोर से मेरी चुदाई करने लगे, और मैं उनके होंठो को चूस रही थी, और वो मेरी चुचियो को मसल रहे थे.

वो नीचे लेट गये, और मैं उनके उपर आ गयी, और मैं उनके लंड पर उछाल कर चुदाई करवाने लगी. वो मेरी चुचियों को मसालने लगे. फिर वो ज़ोर-ज़ोर से हानफते हुए मुझे नीचे लिटा कर छोड़ने लगे, और मेरे होंठो को चूस कर मेरी चुचियों को मसालने लगे.

मैं अपने पैर को उनकी कमर में लपेट ली, और वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगे. फिर हानफते हुए मेरी छूट के अंदर टीन-चार पिचकारी गरम-गरम लावा की मार दी, और मेरे उपर निढाल हो गये.

हम दोनो नंगे ही उस दिन सो गये, और उसके बाद जब तक मम्मी और भाई घर नही आ गये, हम लोग पति-पत्नी की तरह नंगे ही एक साथ सोते, और चुदाई करते. उउउफ़फ्फ़ पापा…

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