वो लंड को मेरी चूत के होठों के अन्दर रगड़ रहे थे। मेरी चूत अब ऐसे आग उगल रही थी जैसे दो पत्थरों को रगड़ने से निकलती है।चूत अब लंड को निगल जाना चाहती थी।
वो मेरी तड़प समझ रहे थे, चूत के होठों का कम्पन मैं महसूस कर रही थी।
फिर उन्होंने मेरे बूब्स को दबाते हुए मेरे होंठ अपने होंठों से बंद कर दिए और लंड का दबाव मेरी चूत पर बढ़ाने लगे, लंड धीरे धीरे मेरी चूत में समाता जा रहा था।
मेरी फटी जा रही थी और वो इस बात की परवाह किये बिना चूत पर लंड का दबाव बढ़ाते जा रहे थे।
मेरा दर्द से बुरा हाल था, मैं चाहती थी कि वो लंड को बाहर निकाल लें।
मैं पैर पटक रही थी, चिल्लाने की कोशिश कर रही थी लेकिन मेरे होंठ पहले से सिले हुए थे।
करीब तीन इंच लंड अन्दर गया होगा तब उन्होंने दबाव बढ़ाना बंद किया और लंड को उसी जगह पर रोक दिया और मेरे होठों को छोड़ दिया।
मेरी आँख से आंसू आ रहे थे।
उन्होंने मुझे देखा और मेरे आंसू पी गए। यह देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा और मैंने उनके होठों को चूस लिया।
अब मेरी चूत का दर्द भी सहने लायक हो गया था। वो भी समझ चुके थे कि बाकी की चढ़ाई करने का समय आ गया है।
इसके बाद वो लंड को चूत से बाहर निकाले बिना चूत पर दबाव बढ़ाते चले गए और उनका छः इंच का लंड पूरा चूत की गहराई में समां गया।
मैं दर्द से तड़पने लगी, मुझे लग रहा था कि आज मेरी जान निकल जाएगी।
लेकिन वो इस बात को अनदेखा करते हुए चूत में समां जाना चाहते थे।
थोड़ी देर में मेरा दर्द कुछ कम होने लगा। उन्होंने अब चूत में धक्के मारने शुरू कर दिए थे।
मैं एक अलग सा अनुभव कर रही थी जो पहले कभी नहीं किया था। मुझे मज़ा आने लगा था, दर्द धीरे धीरे आनन्द में बदलता जा रहा था।
वो ऊपर से धक्के मार रहे थे और मेरी चूत नीचे से उचक उचक कर साथ दे रही थी।
काफी देर की धक्का परेड ने मेरी चूत का बुरा हाल कर दिया था।
मेरी चूत बूब्स और होंठ सब उनके कब्ज़े में थे और कुछ भी उनसे अलग नहीं होना चाह रहा था। चूत ने लंड को अपने आप में ऐसे समेट लिया था जैसे वो उसी का खोया हुआ हिस्सा है जो आज उसे मिल गया है।
चुदाई का वो मज़ा मुझे मिल रहा था जिसके लिए तड़प कभी शांत नहीं होती।
मेरी चूत का अब तक दो बार पानी निकल चुका था जिससे लंड फक फक करता चूत में अन्दर बाहर जा रहा था।
फिर लंड का अंत समय आ गया और उसने अपना पूरा गर्म उबलता हुआ लावा मेरी चूत में उगल दिया।
अब तक चूत से सब बाहर निकलता था, आज पहली बार कुछ चूत के अन्दर गिरा था।
लावा अन्दर गिरने के बाद जलती हुई चूत में ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने गर्म तवे पर पानी की बूंदें गिरा दी हों।
मेरी आँखों में अब एक सुकून था, एक संतुष्टि।
उन्होंने अपना लंड बाहर निकाला और हम दोनों को साफ किया फिर चादर लेकर लेट गए।
अचानक मुझे ख्याल आया, अगर प्रग्नेंट हो गई तो…?
मैंने उनको बोला- सर आपने कंडोम नहीं लिया, अगर मैं प्रग्नेंट हो गई तो किसी को मुँह दिखने के लायक नहीं रहूंगी।
सर- चिंता मत करो, कुछ नहीं होगा, ऐसे सेक्स से प्रग्नेंट नहीं हो सकती।
मैं- समझी नहीं सर, आपका वो तो अन्दर ही गया है न, तो फिर कैसे नहीं हो सकती?
सर- तुम्हें शायद पता नहीं है, मैं एक जिगोलो हूँ। पार्ट टाइम कभी कभी मस्ती के लिए करता हूँ और मैंने एक छोटा सा ऑपरेशन करवा रखा है, जिससे मैं किसी को कितना भी चोदू वो प्रग्नेंट नहीं हो सकती।
मैं- लेकिन आपने ऐसा करवाया क्यों हैं।
सर- अरे यार, कुछ लड़कियों को जब तक चूत में पानी न गिरे, तब तक चुदाई का मज़ा नहीं आता इसलिए ये सब करवाया है ताकि पूरा मज़ा मिले बिना किसी खतरे के।
मैं- फिर तो मज़े है आपके भी और आपसे चुदने वाली के भी!
उसके बाद थोड़ी और मस्ती एक बार और मस्त चुदाई और फिर चैन की नींद!
उसके बाद कब कहाँ क्या हुआ ये बाद में बताऊंगी।
मेरी कहानी पढ़कर उस पर कमेंट्स मेल करना न भूलें।
आपकी आशा
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