शादी से पहले मेरी सुहागरात

अब उन्होंने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरे होठों के साथ मेरे माथे पर और आँखों पर और गालों पर किस करने लगे।
यह एहसास मुझे बिल्कुल नया सा, बहुत अच्छा सा लग रहा था।

उसके बाद उन्होंने मुझे खड़ी किया और मेरी साड़ी उतार दी, मैं पेटीकोट ब्लाउज़ में आ गई।
मैं खड़ी-खड़ी शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी, मैंने अपना चेहरा हथेलियों के बीच ढक लिया और वो किसी आशिक की तरह बस मुझे निहारे जा रहे थे।

उन्होंने आगे बढ़कर मुझे बिस्तर पर बैठाया और मेरे ब्लाउज़ के हुक खोलने लगे। एक-एक करके उन्होंने सारे हुक खोल दिए और मेरे ब्लाउज़ को उतार कर फेंक दिया।
फिर मेरे पेटीकोट के साथ भी वही हुआ, अगले ही पल मैं ब्रा-पैंटी में थी।

अपने कपड़े भी उन्होंने उतार दिए और वो भी अपनी ब्रा-पैंटी, मेरा मतलब अंडर गारमेंट्स में आ गए।
मैं ब्रा-पैंटी पहले बिस्तर पर लेटी थी और वो धीरे धीरे मेरे ऊपर आ रहे थे।

उन्होंने मुझे चूमना शुरू किया… अबकी बार मेरे पैरों की तरफ से!

वो मेरे पैरों को चूम रहे थे और बीच बीच में चूस रहे थे और धीरे धीरे चूसते हुए ऊपर आ रहे थे।
मेरे पैरों पर, घुटनों पर, जांघों पर और फिर मेरी पैंटी के पास।

पैंटी को उन्होंने ऊपर से किस किया, फिर कुत्ते की तरह सूंघने लगे और आँखें बंद करके न जाने क्या महसूस कर रहे थे।

फिर जैसे ही उन्होंने अपना हाथ मेरी चूत पर रखा, मेरे बदन में करंट सा दौड़ गया।

वो धीरे धीरे ऊपर आते जा रहे थे।
चूत को ज़्यादा न दबाते हुए वो मेरे पेट पर आये और बेली बटन में अपनी जीभ डाल दी।
‘आआह्ह्ह्ह’ सी निकली मेरे मुँह से और एहसास हुआ कि यह भी एक जगह है, जिसमें मज़ा आता है।

वो मेरे पेट को चूमते चूसते ऊपर आते गए और बूब्स के पास आते हुए मेरे बूब्स दबा दिए जिसका एहसास नीचे चूत में हुआ।

अब उन्होंने पूरी तरह मेरे ऊपर आकर अपने दोनों पैरों को मेरी नंगी कमर के दोनों ओर कर दिया और मेरी कमर में हाथ डालकर मेरी ब्रा का हुक खोलकर उसे भी मेरे बदन से अलग कर दिया और फिर वैसे ही पलट कर मेरी पैंटी भी उतार दी।

मैं अब बिल्कुल नंगी थी, मैंने उन्हें इशारा किया कि वो भी अपने बाकी कपडे उतार दें।
उन्होंने वैसा ही किया।

जैसे ही उन्होंने अपना अंडरवियर उतारा, तो उनका फनफनाता हुआ लंड मेरी आँखों के सामने था।
पहली बार मैं किसी लंड को ऐसे देख रही थी, करीब 6-7 इंच रहा होगा उनका लंड जो मेरे लिए बहुत बड़ा था।

मुझे डर तो लग रहा था कि आज न जाने मेरी चूत का क्या बनने वाला है, लेकिन साथ ही जिज्ञासा भी थी कि क्यों लोग सेक्स के लिए पागल हुए रहते हैं।

वो मेरे ऊपर वैसे ही बैठे थे मेरी कमर को जकड़े हुए मेरी आँखों में आँखें डालकर जैसे कह रहे हो कि आज मेरी सुहागरात मनवा कर ही छोड़ेंगे।

अब उनके हाथ मेरे नंगे बूब्स को सहला रहे थे, मेरे निप्पल को दो उँगलियों में हौले-हौले मसल रहे थे, मुझे थोड़ी दर्द के साथ बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर उन्होंने एक हाथ से चूत को सहलाना शुरू किया। वो मेरी चूत को ऊपर से सहला रहे थे और मेरी चूत अन्दर तक छटपटा रही थी।
अब उन्होंने नीचे आकर मेरी दोनों टाँगों को खोल दिया और मेरी चूत को गौर से देखने लगे, अपना मुंह उन्होंने मेरी चूत के मुँह पर लगाया और चाटने लगे।

मेरे बदन में एक कंपकपी सी दौड़ गई।

वो मेरी चूत के दाने को चूस रहे थे और मेरी चूत के दोनों होठों को खोलकर अपनी जीभ को मेरी चूत में अन्दर तक पहुँचा रहे थे, लग रहा था जीभ से ही चोद डालेंगे और हुआ भी वही।
उनके इस तरह बूब्स दबाने और चूत चूसने से मेरी स्वीटी ने अपना पानी छोड़ दिया जिसे उन्होंने साफ कर दिया।

अब उन्होंने अपना लंड मेरे मुँह में डालना चाहा लेकिन मैंने मना कर दिया। उन्होंने भी इसके लिए ज़िद नहीं की, बोले- आज तुम्हारी सुहागरात है, हम वही करेंगे जो तुम्हें अच्छा लगे।

उन्होंने एक बार फिर मेरे पूरे बदन को चूमा और अपनी एक उंगली गीली करके मेरी चूत में डाल दी।
मैं चिहुंक उठी।
वो धीरे धीरे चूत में उंगली अन्दर बाहर कर रहे थे, मुझे एक असीम आनन्द का एहसास हो रहा था, मेरे पूरे बदन में सरसराहट हो रही थी। चूत अब तक पानी पानी हो चुकी थी और लंड लेने के लिए बेचैन थी।

मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी लेकिन अन्दर से आवाज़ आ रही थी- अब चोद दो यार, क्यों तड़पा रहे हो।
मैंने उनका लंड पकड़ लिया जिससे वो समझ गए कि लोहा पूरा गर्म है। उन्होंने अपने लंड पर क्रीम लगाई और मेरी चूत के होंठों को खोलकर लंड को उस छोटे से छेद पर रख दिया जिसने अभी तक किसी लंड का स्वाद नहीं चखा था।

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