फ्रेंड की शादी में मिला पहली चुदाई का सुख

हेलो मेरी जान

मेरा नाम निशा और मैं भोपाल में रहती हूं। मैं अपने द्वारा रचित एक और कहानी शेयर कर रही हूं जिसे में एक लड़की शिल्पा के नजरिए से बता रही हूं। यह मेरी दूसरी कहानी है, पहली कहानी की तरह इस पर भी अपना प्यार बरसाए।

पहले मैं आपको अपने यानी शिल्पा के बारे में बताती हू, मेरी उम्र 23 साल है, रंग गोरा है, सीने का साइज 34, और चूतड़ का साइज 36 है। दिखने में ज्यादा न मोटी हूं ना पतली। कोई भी लड़का मुझे देख के लार टपका दे।

मेरी फ्रेंड का नाम रिचा है और वह जबलपुर शहर में रहती है। उसने मुझे एक हफ्ते पहले ही अपने पास बुला लिया जिससे मैं उसे हेल्प करा सकूं शॉपिंग और बाकी तैयारियों में। उसकी शादी 6 मार्च की थी और में 21 फरवरी में वहा पहुंच गई। मेरी फ्रेंड की फैमिली में उसके 2 भाई उसकी मां और पापा है। बड़े भाई का नाम विवेक है और उसकी उम्र 28 साल है और छोटे भाई का नाम विहान है और उसकी उम्र 25 साल। दोनो भाई हैंडसम लगते है और अच्छी पर्सनेलिटी भी है।

मैं वहा पहुंची तो उसकी फैमिली ने मुझे बहुत प्यार से स्वागत किया और मेरा सामान मेरी फ्रेंड के रूम में ही शिफ्ट करा दिया। ज्यादा लोग अभी आए नही थे बस 10–12 लोग ही थे। हम लोग फ्रेश हो कर उसके बड़े भाई विवेक के साथ शॉपिंग पर चल दिए। मुझे मार्केट में ही याद आया कि मैं जल्दी जल्दी में ब्रा पेंटी लाना ही भूल गई। मेरी फ्रेंड साड़ी सेलेक्ट कर रही थी तो मैंने सोचा मैं तब तक ब्रा पेंटी ले कर आ जाऊं तो मैंने विवेक से बोला मुझे लिंगरी शॉप पर ले चलने को।

विवेक मुझे उसके फ्रेंड रवि की शॉप पर ले गया और मैं लिंगरी पसंद करने लगी । विवेक ने शरारती अंदाज में मुझसे कहा आपको पसंद ना आ रही हो तो मैं पसंद करा दूं। मैने स्माइल देते हुए बात को इग्नोर कर दिया पर वह मुझे लाइन दे रहा था और मैने इस सब पर उस समय गौर नहीं किया।

हम लोग शाम तक शॉपिंग कर के वापस आ गए। अगले दिन मॉर्निंग में मैने विवेक को बालकनी में एक्सरसाइज करते हुए देखा उस समय वह शॉर्ट्स और बनियान में था और मैं लोअर टॉप में थी और अंदर ब्रा पेंटी में पहन कर सोती नही हूं । टॉप स्किन टाइट था और उसमे मेरे स्तन का उभार साफ साफ दिख रहा था। मैं बालकनी में गई तो विवेक ने मुझे ऊपर से नीचे देखा फिर बोला तुम तो पहनती नही हो तो लिया क्यू।

मैने उससे पूछा आपको कैसे पता मैने पहनी है या नहीं तो वो बोला पहनी होती तो ये बड़े बड़े भारी दूध लटक नही रहे होते। मैं झेपते हुए वहा से वापस कमरे मैं लौट आई। मुझे समझ नही आया इस बात का मुझे बुरा क्यू नही लगा। कही न कही उसका छेड़ना मुझे अच्छा लगने लगा था।

दोपहर में विवेक ने कहा के वो पास ही नदी में नहाने जा रहा है और मुझसे पूछा तो मैं मना नहीं कर पाई। हम दोनो ही जा रहे थे बाकी सब शादी की तैयारी में व्यस्त थे तो बाइक से चल दिए।

दोपहर के समय ज्यादा लोग नही थे नदी पर, हम लोगो ने एक जगह सामान रखा और मैं लोवर टॉप पर ही नहाने चल दी और विवेक सिर्फ चड्डी में ही। नहाने के कारण मेरे व्हाइट टॉप से सारा नजारा दिख रहा था, विवेक पास में ही नहा रहा था पानी कमर बराबर था नदी में, में जब नहा कर खड़ी हुए तो विवेक देखते ही रह गया, मेरे गोरे गोरे बूब्स उसकी आंखो के सामने थे और वह आंख फाड़े मुझे देखे जा रहा था, तब तक मैं इस बात से बेखबर थी की मेरे स्तन स्पष्ट दिख रहे है। मैने विवेक की तरफ देखा तो मेरा ध्यान इस बात पर गया और मैं फिर झट से पानी में ही बैठ गई।

विवेक ने नजरे हटा ली और ऐसे बर्ताव किया मानो उसने कुछ देखा ही ना हो, मैने सोचा अब बाहर जा कर कपड़े चेंज कर लूं। मैं पानी से बाहर आई और मेरे पीछे से मेरी गान्ड को घूरता हुआ विवेक भी पानी से बाहर आ रहा था। उसका खड़ा लंड उसकी चड्डी में तम्बू बनाए हुए था और वो इस बात से बेखबर बाहर आ गया, शायद मेरी गान्ड ताकने के चक्कर में उसका ध्यान नहीं गया। मेरा ध्यान उसकी चड्डी पर गया तो मेरी उस पर से नजर ही नहीं हट रही थी। काम से कम 8 इंच लम्बा लंड होगा । मैने डिसाइड कर लिया के कुछ भी हो जाए मैं इस लंड को अपनी चूत में घुसा कर ही रहूंगी। फिर हम दोनो ने कपड़े चेंज किए और वापस घर के लिए निकल गए। वापस आते समय मैं उससे चिपक कर बैठी हुई थी उसको अपने बूब्स का मजा दे रही थी।

वापस आ कर हम दोनो अपने अपने कामों में लग गए। अब विवेक भी अंजान बनते हुए मुझे छूने की कोशिश करता, कभी गांड पर हाथ लगाता और कभी पीठ सहलाता। मैं भी मुस्कुरा कर मजे लेती रहती। आग दोनो तरफ लगी हुई थी, बस इंतजार था तो यह देखने का की पहल कौन करता है।

शाम को फ्रेंड की बुआ को लड़की आ गई उसका नाम प्रिया है और वह भी विवेक की ही उम्र की थी, दोनो में दोस्तो जैसा ही व्यवहार था। प्रिया की शादी हो चुकी थी । वह आई और सबसे मिली फिर विवेक ने उसे गले लगा लिया और वह दोनो आपस में लड़ने लगे।
दोनो के इस व्यवहार को देख कर मुझे थोड़ी जलन हुई, पता नही ये उसके लिए हुए आकर्षण के कारण था या वह मुझे फील करा रहा था। प्रिया देखने मैं काफी सुंदर थी और उसका फिगर देख कर बूढ़े भी तरस जाए, कामदेवी जैसा रूप था उसका। बड़े बड़े बूब्स, शायद 34 के आसपास होंगे, पतली कमर 30 की और गांड होगी 38 की। चूतड़ इतने मोटे के गोद में ना समाए।

जब से प्रिया आई थी तब से विवेक मेरी तरफ ध्यान ही नहीं दे रहा था। दोनो आपस में बातें करते, खाना खाते और मोस्टली साथ में ही टाइम स्पेंड करते। रात में दोनो आपस में मोबाइल में कुछ देखते हुए बात कर रहे थे तो मैं उनके पास जा के बैठ गई और सुनने लगी। दोनो आपस में इतना खोए थे के मैं भी वहा हू इसका उनको पता भी नही था। उनके बीच हुई बाते इस प्रकार थी।

विवेक –यार इस बार तू बहुत दिन बाद आई है लगता है मेरी याद नही आती तुझे।

प्रिया– अरे काम में इतना उलझी रहती हू पर टेंशन ना ले इस बार 20 दिन यही रुकूंगी तो सारी कसर पूरी कर लेना।

विवेक– तू 2 दिन और नही आती ना तो शिल्पा को ही तेरी जगह दे देता।

प्रिया– कौन शिल्पा वो रिचा की फ्रेंड, बहन जी टाइप, वो पट भी जाएगी तो मेरे जैसा मजा कहा दे पाएगी।

विवेक – तू जानती नही उसे ऐसी पटाखा माल है ना, मैने नापा है उसका बदन, फ्रेश माल है। अब बेड पर तो तुझे टक्कर दे पाएगी की नही अब ये पता करना पड़ेगा।

प्रिया– कुछ बात आगे बढ़ी या दूर से ही नाप रहा है, मना ले थ्रीसम का मजा लेंगे। मेरी भी मसाज हो जायेगी।

विवेक– अभी 3 –4 दिन हम दोनो ही काफी है फिर लगेगा तो मना लेंगे, मगर तू चाहे तो आज से ही प्लान वन पर काम करने लग जा।

उन दोनो कि बाते सुन मैं उनके रिश्ते को समझ गई थी के ये दोनो कजिन से बढ़ के ही रिश्ता बनाए है पर मेरी चूत की खुजली भी बढ़ती जा रही थी।

सोते समय प्रिया विवेक के साथ उसके कमरे में जाने लगी तो विवेक से बोली चल लूडो खेलते है, मैने भी उनसे पूछा क्या मैं भी खेल लू। प्रिया बोली यार शिल्पा ये थोड़ा अलग गेम है इसमें कुछ न कुछ दांव पर लगाना होता है। फिर भी मैं इस बात को राजी हो गई और उन दोनो के साथ विवेक के रूम में आ गई।

उन्होंने कमरा बंद किया और प्रिया रूल्स बताने लगी

प्रिया– जो भी गेम जीतेगा वह बाकी दोनो से जो चाहे करा सकता है, जो राजी न हो वो अभी बाहर हो जाए और गेम स्टार्ट होने के बाद वापसी का कोई चांस नहीं है।

मैने हामी भर दी ये सोच के की जो होगा देखा जायेगा। गेम स्टार्ट हुआ और पहला गेम मैं जीत गई, तो दोनो को मैने डांस करने का बोला, म्यूजिक लगा कर दोनो ने कपल डांस किया।

दूसरा गेम प्रिया जीती और उसने मुझे टॉप और विवेक को उसकी टी शर्ट उतारने को बोला। मैने बोला ये क्या मांग हुई तो वो बोली रूल्स में कुछ भी करा सकते है और विवेक ने हामी भरते हुए कहा हां ये तो करना पड़ेगा रूल्स आर रूल्स। विवेक ने झट से अपनी टी शर्ट उतार दी और मैंने भी शरमाते हुए अपना टॉप उतार लिया और मैं ब्रा में ही रह गई।

प्रिया बोली विवेक ये तो सच में मालदार है, बड़े बड़े चूचे है इसके तो और एक चूची दबाते हुए बोली बड़ी सॉफ्ट चूचियां है मलाई लगती है क्या इनपे। विवेक बोला सोते समय तो ये ब्रा भी नही पहनती। विवेक टॉपलेस था, मैं ब्रा और लोवर में और प्रिया फुल कपड़ो में। अगला गेम स्टार्ट हुआ और मैं जीत गई तो मैंने भी प्रिया को टॉप उतारने को बोला और विवेक को उसका पैंट, दोनो ने खुशी खुशी काम कर दिया। प्रिया को चूचियां उसकी ब्रा को फाड़ कर बाहर आने को थी, बड़ी गोरी और भारी चूची थी उसकी।विवेक का लंड तम्बू बना हुआ था उसकी चड्डी में। आखिर जब सामने दो सुंदर लड़कियां सामने ब्रा मैं बैठी हुई हो तो किस लड़के का खड़ा नई होगा।

अगला गेम शुरू हुआ और विवेक जीत गया उसने हमे अपनी लोवर उतारने को कहा और फिर दोनो को रोक कर दोनो के लोवर उतार दिए।अब हम तीनो ही अंडर गारमेंट्स में थे। चौथा गेम स्टार्ट होने से पहले मैने कहा 12 बज गए है अब सोने चलते है तो दोनो ने कहा ये गेम 10 गेम खत्म होने पर ही खत्म होता है बीच में नही उठ सकते तो जब तक 10 गेम नही होते तब तक खेलना ही पड़ेगा। प्रिया बोली तू नही आती तो अब तक हमारा दूसरा गेम चालू हो चुका होता।

चौथे गेम में विवेक ही जीता और उसने हम दोनो को ही पूरा नंगा होने को बोला, मैं शरमाते हुए ब्रा पेंटी उतारने लगी और प्रिया तो कब से इसी का इंतजार कर रही थी। मुझे शर्म और मजा दोनो आ रहे थे, मेरी चूत अब पानी छोड़ने की स्तिथि में थी। विवेक ने मेरी चूत देख कर कहा देख साली की चूत एकदम साफ गुलाबी है, लगता है अभी तक किसी के हाथ नही लगी। मैने भी कहा मैने अभी तक किसी के साथ किया नही है तो विवेक बोला इसका उद्घाटन भी मैं ही करूंगा प्रिया की चूत की तरह।

पांचवा गेम प्रिया ने जीता और उसने मुझे विवेक का लंड चूसने को कहा और विवेक को उसकी चूत चाटने का बोला। मैने कहा मुझे ये सब नही आता है तो बोली जैसे बर्फ का गोला चूसती है वैसे ही चूसना चालू कर दे इसमें कोन सा बड़ा साइंस है और एक बार विवेक का लंड मुंह में ले के चूस कर बताया। मैने सहमते हुए विवेक का लंड चड्डी में से निकल कर चूसना शुरू किया बड़ा मोटा लंड था और मुंह में बड़ी मुश्किल से जा रहा था। विवेक ने प्रिया को एक लिप किस किया फिर उसकी चूत चाटने लगा । प्रिया मुझसे बोली ला तेरी चूत को मैं चाट लेती हू और मेरी चूत के होठ से अपने होठ मिला दिए।

मेरे शरीर में सनसनी दौड़ गई मानो अलग ही मजा मिलना शुरू हो गया था। मैं आंख बंद करके मजा ले रही थी और विवेक का लंड चूसते जा रही थी। विवेक भी मजे ले ले कर मेरे मुंह में लंड अंदर बाहर कर के चोदे जा रहा था। प्रिया उसकी पूरी जीभ को मेरी चूत के अंदर डाल रही थी। हाय मैं बयान नहीं कर सकती मेरा शरीर कांप रहा था अलग ही झुनझुनाहट पैदा हुई मेरे शरीर में, शरीर अकड़ने लगा और अगले ही मिनट मैने पानी छोड़ दिया जो प्रिया पूरा पी गई।

प्रिया भी झड़ने वाली थी और मेरे 2 मिनट बाद झड़ गई और सारा पानी विवेक ने पी लिया । मैं विवेक का लंड चूसने में लगी हुई थी और प्रिया मेरा पानी साफ करके विवेक को किस करने लगी। 15 विवेक के शरीर में कम्पन हुई वह झड़ने को था और प्रिया ने ये भांप कर मुझे बोला विवेक का पानी मुंह में ही रखना गटकना नही । विवेक ने आह आह करते हुए मेरे मुंह में पिचकारी छोड़ दी पूरा मुंह सफेद पानी से भर गया।
थोड़ा सा पानी गटक गई कुछ होठ के किनारे से बहते हुए बाहर निकलने लगा। विवेक का लंड मेरे मुंह से निकालते ही प्रिया ने मेरे मुंह पर अपने होंठ रख दिए और विवेक के सफेद पानी को हम दोनो पीने लगे। प्रिया के नाजुक होंठ मेरे होठ को चूस रहे थे, उसकी जीभ जैसे स्पर्म की हर एक बूंद को मेरे मुंह से निकलने में लगी हुई थी। प्रिया एक रंडी की तरह खोई हुई थी किस करने में। 20 मिनट बाद हम अलग हुए, प्रिया ने पूछा मजा आया। मैने बोला ऐसा मजा मेरे जीवन में किसी काम में नही आया जो आज आया है।
इसी सब में हमे समय का होश न रहा रात के 2 बज चुके थे तो प्रिया मैं और विवेक साथ में ही सो गए।

सुबह 7 बजे सब जाग गए और घर के कार्यों में व्यस्त हो गए, रात का सीन मेरी आंखों से नही जा रहा था मैं और प्रिया आपस में देख कर मुस्कुरा रहे थे और मैंने विवेक को खोजा पर उसका कोई पता नहीं था, रिचा को पूछने पर पता चला विवेक किसी रिश्तेदार को लेने के लिए सुबह निकल गया था। हम सबने नाश्ता किया फिर प्रिया ने करीब 10 बजे मुझसे उसके साथ नहाने के बारे में पूछा तो मैं झट से उसके साथ विवेक के कमरे में पहुंच गई और दोनो साथ में ही बाथरूम में लॉक हो गई। उसने मेरे सारे कपड़े उतार कर नंगा कर दिया फिर मैंने भी उसके सारे कपड़े उतार कर दोनो एक दूसरे के बदन से खेलने लगे। उसने मुझसे घुटने के बल होने को कहा मुझे लगा अपनी चूत चटवानी है उसे, में जैसे ही घुटने के बल आई उसने मेरे मुंह पर मूत की धार लगा दी, उसके मूत का गरम गरम खारा पानी मेरे माथे से बहता हुआ सारा शरीर गीला करने लगा मैं जीभ से जितना भी पेशाब समेट कर पी सकती थी मैंने पी लिया। फिर वह मेरे मुंह से लेकर छाती तक जहा भी उसका पेशाब लगा हुआ था उसे जीभ से चाट चाट कर साफ करने लगी। फिर मैंने उसे कहा मुझे भी पेशाब आई है तो वह लेट गई और मुझसे उसके मुंह में पेशाब करने को कहा, मैने अपनी चूत सेट करके मूतना स्टार्ट कर दिया, पूरे बाथरूम में सी सी की आवाज के साथ उसके पेशाब गटकने की आवाज गूंजती रही। मेरी पेशाब खत्म हुई तो प्रिया ने मुंह में पेशाब भर रखी थी और मैंने उसके मुंह से अपने होंठ लगा के पेशाब पीना शुरू कर दिया। कम से कम 20 मिनट तक किस करते रहे फिर एक दूसरे को चूत को चाटना शुरू किया। आह क्या मजा था, सिसकारियां और चूसने की आवाजे बाथरूम में गूंज रही थी, 5 मिनट बाद मैं और प्रिया एक साथ पानी छोड़ते हुए एक दूसरे का पानी पी गए। काम क्रीड़ा करते हुए हमने एक दूसरे को मल मल के नहलाया, मैने उसके पूरे बदन पर साबुन लगाया और उसने मेरे बदन पर। ऐसा एहसास था मानो मैं कोई राजकुमारी हू जिसे नहलाया जा रहा हो, बीच बीच वह मेरे बूब्स दबा रही थी, साबुन की चिकनाई से उसके हाथ मेरे बूब्स से फिसलते हुए कामुक एहसास दिला रहे थे। हम दोनो 15 मिनट बाद नहा कर निकले और तैयार हो गए।

करीब 2 बजे विवेक उसकी मौसी की बहु जिनका नाम वर्षा है उनको ले कर आ गया। वो किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी, नीली साड़ी जो उसने नाभी से नीचे बांध के रखी थी उसके गोरे पेट को खुला छोड़ हुए थी, स्लीवलेस ब्लाउज जो गले से काफी नीचे था उसमे उसका क्लीवेज साफ दिखता था, उम्र करीब 30 साल होगी और फिगर 32, 30, 34 का होगा। उनके साथ उनका 8 महीने का बच्चा भी था। उनका सामान विवेक सीधे खुद के कमरे में ले गया । फिर वो मुझसे और प्रिया से मिलने आया। हम दोनो बोलने लगे के अगर यह तुम्हारे कमरे में रुकेंगी तो हम मजे कैसे करेंगे। विवेक ने कहा ये तो उसने सोचा ही नहीं और कोई तरकीब सोचने लगा। फिर हम लोग अपने अपने काम में व्यस्त हो गए।

शाम को 5 बजे मैं वर्षा भाभी के बच्चे के साथ खेल रही थी उन्होंने मुझसे मेरी डिटेल्स ली और उनका बच्चा रोने लगा तो मैने बोला शायद बच्चे को भूख लगी है तो वह उसे ब्लाउज ऊपर करके अपना दूध पिलाने लगी, ब्लाउज टाइट था उसमे से बूब्स को निकलने में परेशानी हो रही थी और हम दोनो थी रूम में तो वह पल्लू गिरा के ब्लाउज के हुक खोल के पूरा बूब्स निकल के पिलाने लगी, उनके बूब्स ज्यादा बड़े नही थी पर ज्यादा छोटे भी नही थे। एक दम सफेद बूब्स और बड़ा निप्पल किसी भी लड़के को दीवाना बना दे। थोड़ा दबाने के बाद दूध की सफेद बूंदे उनके निप्पल से निकलने लगी और उन्होंने निप्पल बच्चे के मुंह में डाल दिया। मैं यह सब गौर से देख रही थी। मुझे इस तरह देख कर वह बोली इस तरह क्या देख रही हो शिल्पा तुम्हारे तो मुझसे बड़े है। मैने कहा है तो बड़े पर कब तक खुद से खेलूंगी।

वर्षा भाभी– इसको दूध पिलाके सुला दू फिर मैं खिला दूंगी (शरारती स्माइल देते हुए बोली).

शिल्पा – आपके बूब्स से तो भैया खेल लेते है, कोई मर्द खेले तो मजा आता है भाभी (मैने हथखेली करते हुए कहा)

वर्षा भाभी – अरे भैया इतना खेलते होते तो तुम्हारे जितने तो हो ही जाते।

मैं – क्यू भैया नही खेलते क्या ।

वर्षा भाभी– अरे वो तो आए, किस कीए, डाले, निकाले और सो गए, और वैसे भी जबसे प्रेगनेंट हुई हूं तब से मुझे छुआ तक नहीं है।

मैं– फिर कैसे मैनेज करती हो आप।

वर्षा भाभी– मन मसोस कर मूली गाजर के साथ रह जाती हूं अब पता नही कब मेरी चूत में किसी की बरसात होगी।

तभी विवेक कुछ काम से सीधा अंदर आ गया और उसकी नजर भाभी के बाहर निकले हुए बूब पर पड़ी और उसे ही एकटक देखते रह गया। आखिर खुला सफेद बूब के दर्शन कौन सा लड़का न करे। भाभी ने उसकी ओर देखा फिर उसने भाभी को देखा, भाभी ने पल्लू से ढक लिया और मुंह मोड़ के आंखे मूंद ली और विवेक सॉरी बोलते हुए बाहर निकल गया। भाभी बोली मैं भी कैसी पागल हूं गेट लगाया ही नही मैने। मैने बोला अब कुछ नहीं भाभी देख लिया सो देख लिया । मैने भाभी की चुटकी लेते हुए कहा भाभी आपके एक बूब ने तो उसका तम्बू बना दिया दोनो बाहर होते तो टूट पड़ता आप पर। भाभी ने शरमाते हुए कहा हट कुछ भी बोलती है। मैने भाभी की जांघ पर तपली देते हुए कहा हो सकता है भैया का काम विवेक ही कर दे। भाभी कुछ सोच में पड़ गई और कुछ बोली नहीं, फिर दूध पिला के बच्चे को सुला दिया और मैं बाहर को आ गई।

मैने शाम को यह बात प्रिया से शेयर की और उसने विवेक को बुला कर सारी बाते बता दी। विवेक बोला यार पहले मैने भाभी के बारे में ऐसे कुछ नही सोचा था पर उनका बूब मैरी आंखो से हट नही रहा है। रात में खाना खाने के बाद सारी फैमिली ने dumb shrads का प्लान बनाया। हमने 2 टीम बना ली एक में मैं प्रिया और कुछ फैमिली मेंबर्स थे, एक में भाभी, विवेक और कुछ फैमिली मेंबर्स थे। गेम के बीच में एक गेम विवेक की टीम जीती उसमे भाभी ने जिताया था तो भाभी ने खुशी में विवेक को गले लगा लिया विवेक ने भी मौका पा कर कस के भाभी को चपेट में ले लिया, भाभी के बूब्स विवेक की छाती में समा गए थे भाभी भी आंख बंद किए विवेक को कस के पकड़े हुए थे, करीब एक मिनट बाद दोनो एक दूजे से अलग हुए और स्माइल पास करते हुए बैठ गए। फिर कुछ गेम हम जीते कुछ वो लोग। रात में 11 बजे हम गेम बंद करके मैं, भाभी और प्रिया विवेक के रूम में बैठे थे, तभी विवेक आया और भाभी को सॉरी बोला, भाभी को समझ नही आया तब विवेक में बोला की एक्साइटमेंट में उसने भाभी को गले लगा लिया था। भाभी बोली उनको बुरा नही लगा, तो विवेक आंख मारते हुए बोला फिर से लगा लूं गले तो भाभी बोली लगा लो और खड़ी हो गई। विवेक ने उनको गले लगाया और अपनी गर्म सांसे भाभी की गर्दन पर छोड़ने लगा, भाभी के रोंगटे खड़े हो रहे थे, उनकी पीठ और हाथ पर हल्के दाने खड़े हो गए और वह आंख बंद कर के गले लगाए हुई थी। फिर विवेक ने उनको थैंक्स सेक्सी भाभी बोल के बाहर चला गया। मैने भाभी को इशारों में पूछा तो वह इशारों में अपना डिसीजन समझाने लगी की वह विवेक का लंड लेना चाहती है। उनको अभी हमारी थ्रीसम लीला के बारे में भनक तक नहीं थी। मैने उनको एक आइडिया दिया बाहर को आ गई।

मुझे आए 2 दिन हो गए थे तो मैं और प्रिया आज रिचा के कमरे में सोने वाले थे। उसके बाद की भाभी और विवेक के बीच हुए वाकए को में भाभी के शब्दों में बयां करती हु।

रात को मैं अपने बच्चे के साथ विवेक के कमरे में बैठी सोच रही थी की विवेक को कैसे रिझाऊ फिर एक तरकीब सूझी मैंने झट से दोनो हाथों में मेहंदी लगवा ली और सुखाने बैठ गई। विवेक के आने के इंतजार में, रात में विवेक 12 बजे चार्जर लेने रूम में आया तो मैंने बच्चे को हल्की सी चिकोटी काट दी जिससे वह रोने लगा। विवेक ने पूछा क्या हुआ भाभी तो मैने कहा शायद इसे भूख लगी है इसलिए रो रहा है। मैने कहा मैने तो मेहंदी लगा के रखी है इसको कैसे पिलाऊ, बाकी घर वाले भी सो गए है तब

विवेक – मैं कुछ हेल्प कराउ क्या भाभी।
मैं – ठीक है विवेक मेरा पल्लू मेरी गोद में डाल कर बच्चे को गोदी में सुला दो।
उसने गेट लगा के बच्चे को गोद में सुला दिया

मैं– मेरे ब्लाउज के हुक खोल के ब्रा को ऊपर करके एक बूब को निकाल दो।

विवेक ने हुक खोला ब्रा को ऊपर कर रहा था तो वह टाइट थी उससे नही हो पा रहा था।

मैं– एक काम करो ब्रा और ब्लाउज दोनो निकाल दो और ध्यान रहे मेहंदी न लगे उन पर।

उसने ब्रा और ब्लाउज निकाल कर साइड में रख दिए और मेरे दोनो अमरूद उसके सामने उछल कर बाहर आ गए। विवेक की आंखे फटी की फटी रह गई।

मैं– अब दोनो बूब्स को एक एक कर के दबा दो जब तक दूध निकालने न लगे, फिर निप्पल को बच्चे के मुंह में डाल देना।

विवेक– भाभी क्या सॉफ्ट सॉफ्ट बूब्स है आपके मेरा तो मन कर रहा है सारा दिन इनको दबाए जाऊं।

मैं – आह आह विवेक आराम आराम से दबाओ अभी बच्चे को दूध पिला दू फिर मन चाहे जितना खेल लेना।

विवेक– भाभी एक निप्पल बच्चा चूसेगा और दूसरा मैं आपने मेरे शरीर में करंट दौड़ा दिया है।

मैं – चूस लो मेरे राजा, तुम भी पी लो मेरा दूध।

विवेक बिलकुल छोटे बच्चे की तरह मेरे बूब्स पर टूट पड़ा और बीच बीच में काटने लगा।

मैं– उई मां चूसो मेरे देवर राजा, बना लो मुझे अपनी रखैल, रुकना नई आह आह, लगता है आज इस बच्चे की मां चुद के रहेगी।

15 मिनट बाद बच्चा दूध पी कर सो गया और मैंने उसे एक कोने में तकिया के सहारे सुला दिया और फोन पर म्यूजिक चला दिया जिससे बच्चा जागे ना।

विवेक – आजा रानी तुझे में नंगा कर दू आज पूरे मजे लूंगा मेरी जान, मेरी रांड।

मैने भी विवेक को नंगा करके उसका 8 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड पकड़ के सहलाने लगी, उसका लंड बड़ी मुश्किल से मेरी मुट्ठी मैं आ रहा था। मेरे होठों को चूमते हुए उसने जीभ मेरे मुंह में डाल दी और पूरे मुंह में अपनी जीभ घुमाने लगा। विवेक की लार मेरे मुंह में जा रही थी और मैं उसे गटकती जा रही थी। 10 मिनट किस करने के बाद उसने गर्दन पर चुम्मियो की बारिश कर दी, मैं उसको पकड़ने को हुई तो उसने मेरे हाथ मेरी ब्रा से बंधे हुए कहा बहनचोद बच्चे को दूध पिलाने के समय मेहंदी लगी थी अब हाथ घुमा रही है। मेरे हाथ बांध कर वह मुझे तड़पाने लगा गला छाती पीठ, पेट में बारी बारी से चूमने लगा, निप्पल और बूब्स पर काट काट कर दांतों के निशान छोड़ दिए।

मेरी चूत से झरना बह रहा था और विवेक सिर्फ ऊपर ही चूमे जा रहा था। मैं लाख गिड़गिड़ाई पर वह चूत में लंड घुसाने को राजी नहीं हुआ। आधा घंटा तड़पाने के बाद उसने मेरे बाल पकड़ कर मुझे बैठाया और लंड मेरे मुंह में घुसा दिया। इससे पहले मैने कभी किसी का लंड नही चूसा था, उसका सुपाड़ा मेरे मुंह के अंदर बड़ी मुश्किल से जा रहा था मेरे मुंह से गैलप गैलप की आवाज ही आ रही थी। सांस भी बड़ी मुस्किल से ले पा रही थी। पूरे लंड को मैने लॉलीपॉप जैसे चूसा चटा। उसने मेरी चूतड़ पर कस के 2 दो तप्पड़ मारे मेरी चूतड़ लाल पड़ गई। पूरे बदन पर चीटिया si रेंग गई। मुझे लिटा कर उसने पहले मेरी बहती हुई चूत पर एक तप्पड़ मारा, मेरे पूरे शरीर में मानो करंट दौड़ गया। फिर नीचे से ऊपर जीभ को फेरते हुए चूत को चूसने और चाटने लगा, उसकी जीभ मेरी चूत में गोल गोल घूमे जा रही थी, मेरी सिसकारी पूरे कमरे में गूंज रही थी। वहा बेरहमी से मेरी चूत चाट रहा था और

मैं –आह आह, आज भोसड़ा बना दे राजा इस छिनाल चूत का, तू ही मेरा असली पति है, आज से में तेरी रखैल हुई। ओह आह चूस चूस के रबड़ बना दे इस कुतिया चूत को।

चूसते चूसते वह झड़ गया और सारा पानी पी गया। फिर उसने मुझे कुतिया के पोज में करके पीछे से मेरी चूत में लंड घुसा दिया। मेरी चीख निकल गई, काफी महीनो से सेक्स न करने की वजह से चूत टाइट हो गई थी और विवेक का मूसल लंड एक बार में 3 इंच घुस गया, उसने अगला धक्का दिया तो मेरी चूत फट गई मैं तड़पने लगी आंखो में आंसू निकल आए। अगले धक्के में बिस्तर पर औंधे मुंह गिर पड़ी, ऐसा लगा मैं बेहोश हो जाऊंगी थोड़ी देर रुक कर विवेक ने मेरी चूतड़ दबा दी तब तक दर्द कम हुआ। उसने फिर धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया। मुझे भी मजा आने लगा। तभी उसने अपना अंगूठा मेरी गंद मे डाल दिया और अंगूठा फसा के घुमाने लगा। वह मुझे चोदता जा रहा था और मैं आह आह करते हुए मजे ले रही थी। फिर उसने एक हाथ से मेरे बाल पकड़ कर खींचे जैसे घुड़सवार घोड़े की लगाम पकड़ के करता है। मैं मजे की चरम सीमा पर पहुंच गई थी और मैं झड़ गई। कुछ देर बाद विवेक भी झड़ने वाला था तो उसने मुझे सीधा करके मेरे मुंह में स्पर्म की पिचकारी छोड़ दी। उसका खट्टा खारा पानी मैने गटक लिया और दोनो चित्त लेट गए। रात भर विवेक ने मुझे जिस्मानी सुख दिया और मेरी महीनो को हवस को मिटा दिया। मैंने रात में मेहंदी कोन से विवेक के लंड पर अपना नाम लिख दिया और कहा अब से जब तक मेंहदी का रंग नही उतरता तब तक रोज तुम मुझे चोदोगे।

अगली सुबह जब भाभी ने मुझे ये कहानी सुनाई तो मेरी तो चूत का झरना फुट पड़ा । मैने बाथरूम में जा कर उंगली से हवस शांत की और मैंने आज मन बना लिया था की विवेक से चुदना है किसी भी हालत में।
सारा दिन उसके ख्यालों में निकल गया और रात में उसके कमरे में मैने प्रिया और भाभी ने डेरा डाल लिया था ।

हमने भाभी ने बच्चे को एक कोने में सुला दिया और भाभी बाकी औरतों के साथ काम में व्यस्त हो गई । हम रात 12 बजे मैने विवेक को कॉल करके मैने कमरे में बुलाया । प्रिया ने विवेक को दरवाजा बंद करने को बोला, दरवाजा बंद करके उसने प्रिया को किस करना शुरू कर दिया और जोर जोर से टॉप के ऊपर से ही उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए ये देख कर मैंने विवेक को अपनी ओर खींचा और उसके होंठ को दबा कर चूसने लगी आज मैं बेहद आक्रोश में उसे किस कर रही थी पूरे मुंह में जीभ घुसा के उसकी जीभ को चूसा वह भी पूरे जोश में था।

विवेक ने मेरी चूची टॉप के बाहर से ही दबाना शुरू कर दिया प्रिया एक तरफ खड़े होकर देख रही थी। अचानक प्रिया ने मेरी लोवर उतार कर पेंटी को मेरी टांगो से अलग कर दिया और मेरी चूत में मुंह लगा कर मेरा रसपान करने लग गई। विवेक ने मेरा टॉप निकाल कर ब्रा भी अलग कर दी और मेरे बूब्स चूसने लगा। मैं बस इसी आनंद में डूब गई फिर विवेक ने प्रिया के कपड़े उतार कर नंगा कर दिया और उसके बूब्स दबाने लगा। मैने विवेक के कपड़े उतारे और उसके लंड को मुंह में ले कर लॉलीपॉप की तरह चूसना स्टार्ट कर दिया । हम आपस में एक दूसरे के अंगो को चूम चाट रहे थे तभी गेट पर किसी ने दस्तक दी।

प्रिया ने पूछा कोन है तो भाभी बाहर खड़ी हुई थी। विवेक ने पहले थोड़ा गेट खोल कर दरवाजे के पीछे से देखा, भाभी को अकेला खड़ा देख कर उसने उन्हें झड़ से अंदर खींच लिया। भाभी हम तीनो को नंगा पाकर एक दम फटी आंखों से देख रही थी और बोली तुम लोग सामूहिक चुदाई कर रहे हो। फिर भाभी को बताया के यह तो हम पहले ही करना चाहते थे पर एक रात उन्होंने चुरा ली। बातो बातो में प्रिया ने भाभी की साड़ी खींच के निकाल दी ब्लाउज, विवेक ने ब्लाउज पकड़ के खींचा जिससे वह फट कर बाहर निकल आया और मैंने पेटीकोट उतार फैंका। अचानक हमले से भाभी को टाइम का पता लगे उससे पहले भाभी हमारे सामने नंगी खड़ी हुई थी। भाभी कुछ बोल पाती उसके पहले ही प्रिया उनके गुलाबी होठों को अपनी कैद में कर चुकी थी। विवेक उनको गाय की तरह निप्पल निचोड़ कर दूध निकाल रहा था और मुझे चूत का छेद ही मिला चूसने को।

भाभी ने कहा पहले मैं चुदूंगी क्युकी लंड पर मेरा नाम लिखा है, हमने देखा तो लंड पर मेहंदी का रंग चढ़ चुका था और भाभी का नाम साफ दिख रहा था पर 15 मिनट बाद हमने आपस में डिसाइड किया की पहले लंड मैं अंदर लूंगी क्युकी मैने पहले कभी चुदाई नही कराई थी।

विवेक ने लंड मेरी चूत पर सेट किया, मुझे काफी डर लग रहा था उसके लंड का साइज देख कर। भाभी मुझे किस करने लगी और प्रिया मेरे बूब्स को प्रेस करने लग गई। विवेक ने मेरी चूत में एक दम से धक्का मारा लंड अभी 2 इंच ही अंदर गया होगा मेरी सीलपैक चूत में भारी दर्द होने लगा मैं चीख भी नही सकती थी क्युकी भाभी ने मेरा मुंह पर मुंह लगा रखा था, अगले झटके में विवेक ने मेरी चूत में आधे से ज्यादा लंड उतार दिया मेरी आंखों से आंसू निकलने लगे। अगले झटके में विवेक ने पूरा 8 इंच का लंड मेरी चूत में घुसा दिया मेरी चूत की सील टूट चुकी थी और काफी ब्लड आने लगा था। प्रिया बोली विवेक इसका फर्स्ट टाइम है, आराम से करना और साली को ऐसा मजा देना की रोज यही चुदवाने आए।

थोड़ी देर रुक कर विवेक ने आगे पीछे करना शुरू किया तब तक मेरा दर्द कम हो चुका था और मुझे हल्का हल्का मजा आने लगा था।फिर भाभी ने मुंह मेरे बूब्स पर लगा कर बूब्स चूसने लगी और उनके बूब्स मेरी आंखों के सामने लटक रहे थे। मैने भी उनके बूब्स मुंह में रख कर उनका दूध पीने लगी। यह विवेक के झटके तेज होने लगे और मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया पर विवेक मेरी चूत में धक्के लगाता रहा। फिर उसका पानी छुटने वाला था तो उसने लंड निकाल कर प्रिया के मुंह में डाल दिया प्रिया विवेक के पानी की एक एक बूंद पी गई। मैं वहां निढाल पड़ी हुई थी, मुझमें अब उठने की शक्ति नही थी, फिर भी सहारा लेते हुए बाथरूम जा के चूत साफ करने लगी।

बाहर कमरे में भाभी विवेक के लंड को फिर से तैयार करने में लग गई। लंड खड़ा होते ही प्रिया ने अपनी चूत फैलाते हुए कहा अब इस मूसल को मेरी चूत में डालो, फाड़ डालो आज मेरी चूत, विवेक ने लंड को उसकी चूत पर टिका कर जोर का झटका मारा, भाभी ने तुरंत ही उसके मुंह को हाथ से दबा दिया ताकि चीख बाहर न निकले। फिर झटके मरना शुरू कर दिया, भाभी ने थोड़े देर बाद हाथ हटा लिया, प्रिया बोलने लगी, विवेक बहनचोद कबसे इस लंड की प्यासी थी मेरी चूत, फाड़ डाल इसे और बना दे इसका भोसड़ा, विवेक भी उसी जोश में धक्के देता रहा। सारे कमरे में फच फाच की आवाजे गूंज रही थी। प्रिया का पानी निकल गया और विवेक ने भी लंड बाहर निकाला तो भाभी ने लपक के लंड मुंह में ले लिया और उसके सफेद पानी को पी गई, एक एक बूंद साफ करके उन्होंने मुंह लंड से हटाया और प्रिया उनको किस करने लगी।

अगली बारी भाभी की थी वह तैयारी के साथ लेट गई और प्रिया ने लंड मुंह में ले कर लंड को फिर से खड़ा कर दिया। फिर विवेक और भाभी की चुदाई का सिलसिला शुरू हुआ और दोनो एक दूसरे को कॉम्प्लीमेंट कर रहे थे। भाभी की गुलाबी चूत में लंड सरपट अंदर बाहर हो रहा था और भाभी आंखे बंद किए मोन किए जा रही थी। भाभी 15 मिनट बाद झड़ गई और विवेक ने लंड निकाल लिया तो प्रिया ने मुझे मुंह में लेने को कहा और सारा माल विवेक ने मेरे मुंह में डाल दिया। मैं सारा माल पी गई, बेड की चादर पर खून फैला हुआ था, हमने रात में चादर बदली और तीनो नंगे साथ में सो गए, भाभी अपने बच्चे के साथ कोने में सो रही थी।

यह चुदाई का कार्यक्रम शादी तक चला फिर मैं भोपाल आ गई, प्रिया अपने घर और भाभी अपने घर ।
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