शादी मई जवान लड़की की चुदाई

हाय दोस्तों मैं भी आप के जैसे ही सेक्स की कहानियाँ पढने का सौकीन आदमी हूँ. मैं 26 साल का हूँ और मेरा नाम जीतू हे मैं हरयाणा के हिस्सार का रहने वाला हूँ. मेरे लोडे की लम्बाई 6 इंच और चौड़ाई करीब 2 इंच हे. अब मैं आप को सीधे ही कहानी पर ले के चलता हूँ जो आज से 6 साल पहले हुई थी. तब मैं 20 साल का था.

ये बात मेरे चाचा के लड़के की यानी की मेरे कजिन भाई की शादी की हे. मेरे चाचा शहर में रहते हे लेकिन उनका घर बहुत छोटा हे. घर में बहुत सारे महमान आये हुए थे. उनमें से एक लड़की भी थी मस्त मोटे मोटे बूब्स और गदराये बदन की. वो राजस्थान से आई थी. जब मैंने पहली बार उसे देखा तो निचे मेरी पेंट के अन्दर एक तम्बू बन गया.

फिर मेरी और उसकी नजर मिली तो मैंने हलकी सी स्माइल दे दी तो उसने भी थोडा स्माइल दिया.  हाय रे क्या स्माइल थी उसकी मे तो बस उस पर फ़िदा ही हो गया था. शाम को वो छत पर अकेली खड़ी थी. फिर मौका देख कर मैं उसके पास गया और उस से बातें करने लगा. इस लड़की ने अपना नाम गुड्डो बताया.

बात बात में पता लगा की वो ज्यादा पढ़ी नहीं हे. राजस्थान के एक छोटे से विलेज से थी वो और उसने मिडल में ही पढ़ाई छोड़ दी थी. मैंने मन ही मन में सोचा फिर तो गुड्डो को चोदने का चांस जल्दी ही हाथ लगेगा. मैं इस देसी लड़की को अब बस जल्दी से जल्दी चोदना चाहता था. बातें करते हुए मैं उसके बूब्स को ही देखता था.

ऐसे करते हुए उसने मुझे देख लिया था पर वो कुछ बोल नहीं रही थी. बस वो हलकी हलकी सी स्माइल दे रही थी. मेरी तो हालत खराब हो रही थी. निचे पेंट में बुरा हाल हुआ पड़ा था. मैं लंड को दीवार के साथ छिपा रहा था. बात करते करते मैंने इस लड़की के कूल्हों को टच कर लिया. वाऊ क्या चिकनी गांड थी यार इस देसी लड़की की!

फिर मैंने बात को आगे बढाने के लिए उसकी तारीफ़ करना चालू कर दिया की तुम बहुत खुबसुरत हो, साला तभी निचे से मेरी चाची ने गुड्डो को आवाज लगाईं और वो चली गई. फिर मुझे पता चला की वो चाची के कजिन भाई की लड़की हे.

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ऐसे ही रात हो गई और वक्त आया जिसका मुझे इंतजार सा था मतलब की सोने का टाइम. जैसे की मैंने बताया था की मेरे चाचा का घर छोटा था तो सब को निचे बिस्तर पर सोना पड़ा. तो मैं भी वो बिस्तर लगा के सो गया. मेरी किस्मत ने मेरा खूब साथ दिया तो गुड्डो भी मेरे बराबर में आकर ही बिस्तर लगा के लेट गई. थोड़ी देर में काफी लोग और भी आये तो मेरी तरफ खींचती चली गई.

धीरे धीरे कर के सब लोग सोने लगे लेकिन मेरी आँखों में जरा भी नींद नहीं थी. मुझपे तो बस चुदाई का भूत सवार था. लेकिन कैसे चोदुं डर भी लग रहा था. करीब 2 घंटे के बाद मैंने हिम्मत की और गुड्डो के ऊपर अपने हाथ रख के हिलाया ये चेक करने के लिए वो सो रही या जाग रही हे. लेकिन वो हिली भी नहीं. मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने अपने हाथ को इस देसी लड़की के बूब्स के ऊपर रख दिया. क्या मस्त नर्म नर्म गोल मटोल चुन्ची थी उसकी यारो. मैं मन ही मन सोचने लगा की यार पूरा बदन कितना मस्त होगा इस लड़की का.

थोड़ी देर इस लड़की की चूची दबाने के बाद जब वो नहीं जागी तो मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई. मैंने अपना हाथ धीरे से उसके पेट पे लगाया और धीरे से उसका स्यूट ऊपर किया और नंगे पेट पर हाथ घुमाने लगा. अँधेरे में कुछ भी नहीं दिख रहा था बस उसका बदन की नरमी मुझे और भी गरम कर रही थी.

मैंने धीरे धीरे हाथ को स्यूट के अंदर डाल के ऊपर बढाया और उसके चुचों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा. अब मुझे लगा की वो जाग रही हे लेकीन सोने की एक्टिंग कर रही हे. मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई तो मैंने हाथ को सीधा अपने असली टार्गेट के ऊपर यानी की उसकी चूत के ऊपर रख दिया.

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लेकिन इस बार इस लड़की ने मेरा हाथ पकड़ लिया, यारो मेरी ऊपर की सांस ऊपर और निचे की सांस निचे ही रह गई. मैं बहुत डर गया था की अब क्या होगा! लेकिन उसने किसी को कुछ नहीं बोला, मेरी हिम्मत फिर से बढ़ी. इस बार मैंने हाथ धीरे से चूत पर रखा और अब उसने कुछ नहीं कहा मुझे लगा वो सो रही थी. मैं धीरे धीरे से चूत से खेलने लगा. यारो मैं तो जन्नत के दरवाजे पर खड़ा था बस इन्तजार था इस दरवाजे के खुलने का!

अब मुझे लगा की उसकी साँसे भी तेज हो रही थी और पेट भी तेज तेज से ऊपर निचे हो रहा था. ये मेरेलिए अच्छे संकेत थे तो मैंने भी मौके का फायदा उठाया और धीरे से उसकी सलवार को पैरो से ऊपर की तरफ सरका दिया. धीरे हीरे सलवार जांघो तक आ गई. मैंने उसकी मस्त नरम जांघो को सहलाया तो वो अब मेरे पास होने लगी. मेरी हिम्मत और भी बढ़ गई मैंने जल्दी से उसकी सलवार का नाडा खोला और फटाफट सलवार और पेंटी को निचे कर दिया. उसने मेरे हाथो को पकड़ के ऐसे करने से जैसे रोका मुझे.

लेकिन मैं अब कहाँ रुकने को था. अँधेरी रात थी और उसके बदन के ऊपर चद्दर थी. कोई देखता तो भी जल्दी से कुछ दीखता नहीं. मेरे लिए इस देसी लड़की की चूत यानी की मेरी जन्नत का दरवाजा खुल गया था. मैंने जल्दी से हाथ को नंगी चूत के ऊपर रख दिया. मेरे हाथ रखते ही वो सिहर उठी. और मुझसे लिपट गई. मैं उसके नंगे बदन को देखना चाहता था बट अँधेरे में कुछ भी नहीं दिख रहा था मुझे. मुझे फिर मैंने सोचा बदन तो फिर भी देख लूँगा एक बार चोदना नसीब जो जाए तो बस हे.

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