शादी के बाद कज़िन की चुदाई

हेलो मित्रो, मैं नीलेश [30] सूरत का रहने वाला हूँ, आपके लिए अपनी हिन्दी सेक्स स्टोरी लेकर आया हूँ, टेक्सटाइल इंडस्ट्रीस एक छोटा सा मेरा बिज़्नेस है, मेरी बीवी रीमा और एक बेटा है. मैं दिखने मे वैसे स्मार्ट हूँ पर लड़कियों को इंप्रेस करने के चक्कर मे अट्रॅक्टिव दिखने की कोशिश करता हूँ.

बीवी के साथ मेरी सेक्सुअल लाइफ ओके है. आइ एक्सेप्ट रीमा भी मुझे बिस्तर पे पूरा मज़ा देती है, पर क्या करूँ कोई भी खूबसूरत लौंडी को देखा अपना लंड सलामी देने लगता है. जो आदत से मजबूर है, और इसी वजह से बीवी के अलावा बाहर भी मुँह मारता फिरता हूँ.

सेक्स तो मैने शादी से पहले ही सिख लिया था और शादी तक तो एक्सपर्ट बन गया था. मैने अपना पहला सेक्स मेरी चचेरी बहन ऋतु से किया था. ऋतु और मेरी उमर सेम सेम ही है, हम संयुक्त परिवार मे रहते थे. ऋतु और मैं साथ मे ही पाले बड़े है.

साथ मे पढ़ाई की, खेले , घूमते. जवानी के आने तक हम एकदुसरे को अच्छे से समझने लगे थे. ऋतु और मुझे प्यार तो नही, पर जवानी के शुरुआती वक़्त पे जो सेक्स की तलब जागती है ना तो उसको समझने लगे थे और एकदुसरे से पूरी की. यानी उस वक़्त अपनी जवानी की बेसिक नीड्स को हमने अच्छे से पूरी की थी.

ऋतु शादी के बाद अपने पति के साथ देहरादून चली गयी. क्यूंकी उसका पति राजीव वहाँ काम करता था. और बाद मे मेरी भी शादी हो गयी. शादी के बाद भी ऋतु कई बार आई है, पर उसके बाद हमने कोई सीमाए नही लँघी.

ये सब सोचते सोचते मेरी विचारधारा टूटी, मैं देहरादून आया था एक काम से तो सोचा ऋतु को मिलता हुआ चलु. काफ़ी संपन्न परिवार है ऋतु का, दो बच्चे है और राजीव भी खुश रखता है.

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हाला की मैं सिर्फ़ मिल कर जाने वाला था पर ऋतु ने फोर्स किया की आए है तो दो तीन दिन घूम कर ही जाओ.. तो मैं ठहेर गया. कमरे का दरवाजा खुला और ऋतु कमरे मे आई, वक़्त के साथ साथ उसके फिगर मे भी काफ़ी बदलाव आ गया था, पहले पतला सा फिगर था, अब भरौदार हो गया है.

“जाग गये तुम..”, ऋतु ने चाय का कप मेरे हाथ मे थमाया और बेड पे साइट पे बैठ गयी. मैने अंगड़ाई लेते उठा. “हां.. यार.. अच्छा लग रहा है यहाँ, शांति है काफ़ी, राजीव कहाँ है..”, “वो तो ऑफीस गये..”, मैने चाय की चुस्की लेते हुए कहा,”एक बात बोलू ऋतु, बुरा तो नही मानोगी.”, “मैं तुम्हारी किसी बात का बुरा नही मानूँगी.कहो”.

मैने धीमे लहज़े मे कहा, “आज सुबह सुबह मेरे ज़हेन मे अपने पुराने दिन ताज़ा हो गये, शादी से पहले हमने कितने मज़े किए थे, एक बात कहूँ अपने दिल की, अगर हमारे . मे हमारा रिश्ता अलाउड होता तो हम शादी कर सकते थे.पर खैर जो हुआ वो हुआ, अब बताओ तुम कैसी हो, राजीव खुश तो रखता है ना तुम्हे”

ऋतु मेरे तोड़ा करीब आई और बोली, “तुम्हारे साथ शादी करने की मेरी भी ख्वाहिश तो थी, पर किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था, क्या कर सकते है, राजीव बहोत अच्छे है, मुझे कोई प्राब्लम नही है उनके साथ. अच्छा वैवाहिक जीवन चल रहा है हमारा.”

मैने कहा,”गौर किया है मैने तुम्हारे फिगर पे वक़्त के साथ साथ काफ़ी बदल गयी हो, पहले कितनी हल्की फुल्की थी, अब तो हेहेहे..” मेरे मज़ाक करने पर तकिये से वो मुझे मारने लगी. “मज़ाक करने की तुम्हारी आदत अभी भी नही गयी..”

“पर कसम से, अब तुम बिल्कुल पटाका लगती हो.. तुम्हारे ऑरेंज पहले से काफ़ी बड़े लग रहे है, और बड़ा मटक मटक के चलने लगी हो..”, “तुम भी पहले की तरह दिलफेंक थे और आज भी हो.. पर सच कहूँ तो अब भी बड़े हैंडसम दिखते हो..”.

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मैने उसका हाथ पकड़ के कहा,”क्या सच मे, अगर तूमे मैं हैंडसम लगता हूँ तो सो फीसाद मे लगता होंगा, तुमसे बेहतर मुझे और कोई नही समझ सकता.”

ऋतु एक मिंट. बोलकर गयी, मैं समझ नही पाया और बाथरूम मे फ्रेश होने गया बाहर आया तो देख के मेरे होश उड़ गये, ऋतु सिर्फ़ ब्लाउस और पेंटी मे पलंग पे लेटी हुई थी मेरे, और देख के कातिल अड़ाओ से मुस्कुरा रही थी. मैने स्वालियान नज़रों से पूछा तो, उसने अपनी गोरी थाइस पे हाथ फेरते कहा, “बच्चो को स्कूल भेज दिया है, और ये भी ऑफीस गये है, आओ हम पुराने दिन फिर से जी ले.”

ऋतु का जवाब सुन के मेरी खुशी का कोई ठिकाना नही रहा, मैने सीधे बेड पे छलाँग लगाई और ऋतु का चेहरा अपने करीब लेके उसके रसीले होंटो को अपने तपते होंटो से जोड़ दिया. ये कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

वैसे ही मिठास आज भी थी उसके होंटो की, मेरे हाथ खुद बा खुद उसके बूब्स को नापने लगे, मम्मो का कड़कपन ब्रा के उप्पर से ही महसूस हो रहा था, मैने स्मूच जारी रखते हुए ब्रा के हूक़ खोल दिए और नाजुक पुरज़ो को कपड़ों की क़ैद से आज़ाद कर दिया..

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