जवान दीदी की हॉट चुदाई की कहानी

यह कहानी मेरे एक दोस्त विक्रम के परिवार की है। मैं सीधे विक्रम की कहानी उसी की जुबानी पेश कर रहा हूँ।
‘रमा ओ रमा.. अरे भाई मेहमान आए या नहीं?’ मोहन चिल्लाते हुए बोलता है।
रमा गुस्से से चिल्लाते हुए बोली- क्यों चिल्ला रहे हो.. आ जाएंगे.. नहीं आए तो माँ चुदाएं अपनी.. आपकी गांड में क्यों जलन हो रही है।
दोस्तो.. इसके पहले आगे बढूँ.. मैं विक्रम, आपको अपने परिवार का विवरण दे देता हूँ।
रमा है 45 वर्षीया मेरी माँ.. जो कि बिल्कुल बेबाक हैं.. अपनी बातों में भी.. और चुदाई में भी।
मोहन हैं मेरे पिताजी.. जिनकी उम्र 50 वर्ष है।
इनके अलावा मेरी एक बहन भी है जो कि 24 साल की है और मैं विक्रम 22 वर्ष का हट्टा-कट्टा नौजवान हूँ।
जिन मेहमान के आने की बात पिताजी कर रहे हैं.. वो है मेरी बहन वर्षा के सास और ससुर और उसकी ननद।
मेरी बहन की सास का नाम सविता है और वो एकदम मस्त माल है.. उसकी उम्र 43 साल है, लेकिन वो अभी 30 साल की ही लगती है।
सविता का फिगर 38-30-40 का है। जब भी वो हमारे घर आती, तो मेरी नजर हमेशा उसके मम्मों पर और उसकी उठी हुई गांड पर ही रहती है।
कभी-कभी तो मैंने देखा है कि मेरे बाप की नजर भी हमेशा उसी का पीछा करती रहती है।
सविता की बेटी यानि कि मेरी बहन की ननद प्रिया एक 24 साल की शादीशुदा गरम माल है। प्रिया को उसके पति ने शादी के 2 साल बाद ही छोड़ दिया था।
प्रिया के बारे में मैं आपको बाद में बताऊंगा और रमेश सविता के पति, जिनकी उम्र 46 साल है.. लेकिन भरी जवानी में भी वो 60 साल के बूढ़े लगते हैं।
आखिर वो वक्त भी आ गया.. जब मेहमान आ गए।
मेरी माँ ने सभी को हॉल में बैठाया और हालचाल पूछे।
सविता ने कहा- बड़े दिन हो गए थे आप से मिले हुए, तो सोचा कि मिल कर आ जाएं। इसी बहाने प्रिया का भी मन बहल जाएगा।
मेरी माँ ने कहा- ये तो बड़ा अच्छा हुआ। अब आए हैं तो कुछ दिन यहाँ रह कर ही जाना।
इतने में खाना खाने का समय हो गया तो माँ ने बोला- चलो बातें तो बाद में भी होती रहेंगी, पहले सब खाना खा लो।
सभी लोग डाइनिंग टेबल पर आ गए।
माँ पिताजी के बगल में बैठी थीं, मैं माँ के बगल में.. और पिताजी के बगल में मेरी बहन, मेरी साइड में सविता आंटी थीं.. उनके बगल में रमेश अंकल और सबसे लास्ट में प्रिया थी।
सबने खाना खाना शुरू किया।
अभी 5 मिनट ही हुए होंगे कि मेरी माँ के हाथ से चम्मच छूट कर नीचे गिर गई। माँ उसको उठाने के लिए नीचे झुकीं.. तो देखा कि सविता आंटी अपने पति रमेश का लंड उसकी पैन्ट के ऊपर से ही सहला रही हैं और रमेश चुपचाप अपना खाना खा रहा है।
लेकिन उसके माथे पर शिकन की लकीरें साफ-साफ दिखाई दे रही थीं।
ये देख कर मेरी माँ जो कि बहुत ही कामुक स्त्री हैं.. उन्होंने भी अपने पति का लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और जोर से दबा दिया। मैं ये सब चोरी-चोरी देख रहा था और चुपचाप अपना खाना खा रहा था।
जैसे-तैसे सभी ने अपना खाना खत्म किया और इसके बाद बारी आई सोने की।
तो माँ ने बोला- सविता जी आपका और रमेश जी का बिस्तर ऊपर वाले कमरे में लगा दिया है और प्रिया वर्षा के साथ ही सो जाएगी।
थोड़ी देर सभी ने बातें की, फिर सभी सोने चले गए।
रात में मुझे बहुत जोर से मुतास लगी तो मैं उठ कर बाथरूम की ओर जाने लगा। मैंने देखा कि पापा-मम्मी के कमरे से जोर-जोर से पलंग हिलने तथा और भी कई सारी आवाजें आ रही हैं, तो मैं गेट के पास ही खड़ा हो गया और सुनने लगा।
इसके साथ ही मैं ‘की-होल’ से अन्दर देखने की कोशिश करने लगा।
मैंने देखा कि माँ पापा के लंड के ऊपर तांडव कर रही हैं और जोर-जोर से चिल्ला रही हैं ‘आह मोहन डार्लिंग.. चोदो जोर-जोर से.. चोदो मुझे.. उई माँ.. क्या चोदते हो जानू.. तुम पचास के हो गए.. पर आज भी नए जवान छोकरे की तरह चोदते हो.. हाय राम आह.. आह आह.. आह सीइ.. सी..सी…सीइ हाँ जानू.. ऐसे ही.. आज तो मेरा बलमा बहुत जोश में है.. क्यों भोसड़ी के तेरी समधन जो आ गई है.. देखा मैंने.. कैसे तुम उसकी गांड को घूर रहे थे.. आह्ह..
मोहन- हाँ रंडी.. तेरी माँ को चोदूँ.. तू है ही ऐसी रांड.. कि बूढ़े के लंड में भी कसावट आ जाए.. जो तुझे देख ले तो.. और रही बात सविता की.. तो उस रांड को भी अपनी रानी बनाऊंगा और तुम दोनों रंडियों को इसी बिस्तर पर एक साथ चोदूँगा.. और आज तो तू डाइनिंग टेबल पर अपनी माँ क्यों चुदा रही थी?
रमा ने मोहन के लंड पर कूदते-कूदते कहा- आह.. साले बेटीचोद.. तेरी वो सविता रांड उस मरियल रमेश का लंड सहला रही थी.. तो मैं क्या करूँ जानू.. बस मुझे भी इच्छा हुई ऐसे मजे लेने की.. सो तुम्हारा मूसल पकड़ लिया था।
तभी मोहन जोर-जोर से शॉट मारने लगा और रमा, मेरी माँ भी अनाप-शनाप बकते हुए उसके लंड पर लैंड करने लगी।
पूरे कमरे से चुदाई के संगीत की आवाजें आने लगी।
थोड़ी देर बाद सब कुछ शांत हो गया।
इसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया और सोने की कोशिश करने लगा, पर मुझे नींद कहाँ आने वाली थी।
मुझे बार-बार बस अपनी माँ और पिताजी की चुदाई वाली बात याद आ रही थी।
इसी को सोचते-सोचते अचानक मेरा हाथ मेरी चड्डी के अन्दर चला गया और मैं अपने काले भुजंग को सहलाने लगा।
मैंने अपने लंड को चड्डी से बाहर निकाल लिया और फिर उसके सोटे मारने लगा।
लंड हिलाते-हिलाते मेरे दिमाग में खयाल आया कि क्यों ना सविता रांड और उस मरियल रमेश के कमरे में भी जा कर चैक किया जाए और मैं इसी अवस्था में लंड को हाथ में पकड़े ऊपर सीढ़ियां चढ़ने लगा।
जैसे ही मैं सविता के कमरे के पास पहुँचा.. तो एकदम से चौंक गया।
मैंने सुना कि उसके कमरे से भी चुदाई की मधुर ध्वनि आ रही है।
इसको देख कर मेरी तो बल्ले-बल्ले हो गई।
मैंने सोचा वाह बेटा आज तो मजे आ गए.. एक दिन में दो-दो चुदाई देखने को मिल रही हैं।
ये ही सोचते सोचते मैं सविता के कमरे के गेट पर बने ‘की-होल’ से अन्दर झाँकने लगा।
अन्दर का नजारा झांटों में आग लगाने वाला था। अन्दर सविता अपनी 40 इंच की गांड उठाए अपने पति की टांगों के बीच में बैठी थी और रमेशजी के मुरझाए हुए लंड को जोर-जोर से हिला रही थी।
सविता- रमेश, आज तुम्हारे लंड को क्या हो गया.. कितना चूस रही हूँ, फिर भी ये साला खड़ा ही नहीं हो रहा है?
रमेश ने सिस्कारते हुए- आह उइ.. साली रंडी चूस रही है.. या खा रही है.. तेरी जैसी रांड मैंने आज तक नहीं देखी, अगर मैं या कोई और तेरी चूत में 24 घंटे लंड डाले रहूँ.. तो भी तू ‘और.. और..’ की डिमांड करेगी.. साली छिनाल कहीं की।
सविता- साले हरामी.. गांडू की औलाद तूने तो बचपन से मुठ मार-मार के अपने लौड़े को ढीला कर लिया.. और अब मुझे छिनाल बोल रहा है.. मादरचोद शादी से ले करके आज तक कभी संतुष्ट किया है तूने मुझे..
यह बोल कर सविता रमेश के लंड को पूरा अन्दर गले तक उतार गई।
‘सड़प सड़प आह्ह.. आह्ह..’ की आवाजें सविता के मुँह से आने लगी।
इतने में सविता ने अपनी मोटी रस से भरी गांड को और ऊपर उठा लिया और जोर-जोर से रमेश के लौड़े को चूसने लगी।
साथ ही सविता ने अपनी गांड पर से अपनी साड़ी को पूरा ऊपर उठा लिया।
उसकी नंगी मस्त गोरी गांड को देख के मेरे मुँह से भी एक ‘आह’ निकल गई।
क्या मस्त गांड थी यारों उसकी.. काश एक बार मारने को मिल जाए।
उसकी नंगी गांड को देख कर मैं भी मेरे लंड को जोर-जोर से सड़का मारने लगा।
मेरा लंड भी अपने पूरे उफान पर था।
तभी मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे पीछे खड़ा है और जैसे ही मैंने पलट कर देखा तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।
मेरे मुँह से बस ‘व्व्वर्षा..’ ये ही निकला तभी वर्षा ने एक जोरदार थप्पड़ मेरे गाल पर मारा और अपनी आँखें दिखाते हुए मेरा हाथ पकड़ कर मुझे घसीट कर नीचे मेरे कमरे में लेकर आ गई।
यारों मेरी तो गांड ही फट गई थी। मेरा दिमाग भी मेरे लंड की तरह ठंडा पड़ गया था और मैं भूल गया था कि मेरा लंड अभी भी बाहर लटक रहा है।

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