सील तुद्वा कर बहन हुई दीवानी

दोस्तों पिछली कहानी में मैने आपको बताया की कैसे हम ओरल सेक्स तक पहुँचे. अब बताता हू की आयेज क्या हुआ. उस रात जब मैं अपनी बेहन के बूब्स पर फ्री हुआ, उसके बाद मेरी बेहन सादिया ने मुझे कहा-

सादिया: शारजील भाई, वाहा से कोई कपड़ा उठाओ, और मुझे सॉफ करो.

मैने अपनी बनियान से अपनी बेहन को सॉफ किया. एक तो उसकी उभरती जवानी. उस पर उसके टाइट बूब्स, और पिंक निपल्स ने मुझे फिरसे तैयार कर दिया. मेरा लंड फिरसे जहाज़ बन चुका था, तो सादिया ने बोला-

सादिया: भाई लगता है आज तुम अपनी बेहन को छोड़ के ही रहोगे.

मैने जवाब दिया: सादिया मेरी बेहन, तुम हो ही इतनी हॉट, इतनी सेक्सी. मैं क्या करू, मेरा खुद पर इकतियार ही नही है.

ये कह कर मैने अपनी बेहन के होंठो को चूसना स्टार्ट कर दिया. साथ-साथ अपनी बेहन के बूब्स को भी मसल रहा था. फिर मैने अपनी बेहन की छूट को सॉफ किया, और उसके बूब्स को पकड़ कर उसकी छूट को चाटना शुरू कर दिया. मेरी बेहन की छूट बिल्कुल पिंक थी. मैने अपनी ज़ुबान को जैसे ही उसकी छूट में डाला, उसके मूह से सिसकारियाँ निकलनी शुरू हो गयी.

सादिया ने कहा: शारजील भाई, मैं मॅर जौंगी.

और साथ ही उसने अपनी छूट को उपर की तरफ उठाया. मैने अचानक ही अपनी उंगली उसकी छूट में डाली. बहुत गरम छूट थी मेरी बेहन की. थोड़ी देर बाद मैने अपने लंड को अपनी बेहन की छूट पर रखा. मैं चाहता था की एक ही झटके में डाल डू. लेकिन ऐसा नही कर पा रहा था.

मैने अपनी बेहन से पूछा: सादिया मेरी बेहन, मज़ा आ रहा है?

उसके मूह से बड़ी मुश्किल से आवाज़ निकली: शारजील भाई, तड़पाव नही.

मैने तोड़ा सा ज़ोर लगाया तो मेरे लंड का टोपा उसकी छूट मैं घुस गया. उसकी हल्की सी चीख निकली. मुझे ऐसे लगा जैसे मेरा लंड काहु फ़ासस गया हो. बहुत टाइट छूट थी मेरी बेहन सादिया की.

मेरा भी पहला सेक्स था, और मेरी बेहन का भी पहला सेक्स था. लेकिन पॉर्न मोविए देख कर हमे पता चल गया था की कैसे करना था. अब सादिया चाह रही थी, की मैं अपने लंड को बाहर निकालु.

उसने कहा: शारजील भाई, तुम्हे खुदा का वास्ता है, इसे बाहर निकालो.

जब की मैं पूरा डालना चाह रहा था. मैं चाह रहा था की एक बार अपनी बेहन की सील तोड़ डू. फिर सारी ज़िंदगी उसे छोड़ता रहूँगा. अचानक ही मेरे ज़हन में ख़याल आया की ये बाहर भी तो किसी से छुड़वाने जेया रही थी. ये सोच के मुझे गुस्सा आ गया.

तो मैने कहा: सादिया बाहर भी तो तुम ये लंड लेने जेया रही थी. उसने कों सा तुम्हारा ख़याल रखना था. मैं तो तुम्हारा भाई हू, और तुम्हारे दर्द की वजह से आराम से कर रहा हू.

जब मैने ये कहा, तो वो ढीली पद गयी. मैने मौके का फ़ायदा उठाया, और ज़ोर से झटका मारा, तो मेरी बेहन तड़पने लगी. उसकी आँखों से आँसू आ गये. उसके मूह से धीमी-धीमी चीखें निकालने लगी.

मैने कहा: सादिया मेरी बेहन, जो होना था वो हो गया है.

वो कुछ नही बोली, और मैने अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया. मेरी बेहन की दर्द की आवाज़े अब मज़े में बदल गयी, और वो भी मेरा साथ देने लगी. उसने मुझे कस्स के पकड़ लिया, और मैने ज़ोर के झटके मार रहा था की अचानक ही मैं फारिघ् हो गया. मैने सारी मलाई अपनी बेहन की छूट में डाल दी, और उसके उपर ही लेट गेया.

वो भी फारिघ् हो गयी थी. वो मुझे चूम रही थी. उसके चेहरे की चमक बढ़ गयी थी. जब हम उठे तो देखा की चादर पर भी खून था, और मेरे अंड पर भी.

सादिया ने कहा: भाई अब तो यकीन आया की तुम्हारी बेहन कुवारि थी, और तुमने अपनी कुवारि बेहन की सील तोड़ी.

मैने कहा: सादिया मेरी बेहन, अछा हुआ मैने खुद अपनी बेहन की सील तोड़ी. किसी और को क्यूँ तोड़ने देता.

खैर उसने चादर उठा के धो दी, और दोबारा बेड पर डाल दी. उस रात हमने वादा किया की सारी ज़िंदगी ये मज़े लेंगे. वो भी बोली, की कोई बाय्फ्रेंड नही बनाएगी. और मैं कोई गर्लफ्रेंड नही बनौँगा. ये वादा करके वो अम्मी के पास चली गयी, और मैं भी सो गया.

सुबा हो गयी. वो कॉलेज चली गयी. फिर वापसी पर मैं उसे लेने गया, तो रास्ते में बात हुई.

तो सादिया ने कहा: शारजील भाई, रात बहुत मज़ा आया आपको?

मैने कहा: यकीन करो, तुमने अपने भाई को जन्नत की सैर करवा दी है.

सादिया ने कहा: मैं दिन भर तुम्हारे बारे में सोचती रही हू, और उसी मज़े को महसूस करती रही हू. वैसे एक बात बतौ?

मैने कहा: बोलो मेरी बेहन?

उसने कहा: जब तुम्हे गाली देते थे बहनचोड़, तो मैं सोचती थी की अब्बू कितनी गंदी गाली देते है. आज मुझे वो गाली बहुत अची लग रही है. मैने कहा: हा हू मैं बहनचोड़, और रोज़ तुम्हे छोड़ूँगा.

हम घर पहुँचे तो अम्मी ने कहा: मैं तुम्हारी आंटी ज़ेनत के घर जेया रही हू. आ जाती हू थोड़ी देर में. तुम बेहन भाई खाना खा लेना.

अम्मी के जाते गाते बंद किया, और सादिया मेरे सामने ही कपड़े उतारने लगी. मैने दिन की रोशनी में देखा की वो रात से ज़्यादा खूबसूरत थी. मैं उससे लिपट गया, और अपने कपड़े भी उतार दिए. उफ़फ्फ़ किया झप्पी थी. मेरा लंड उसकी छूट के साथ लगा हुआ था, और हमारे जिस्म साथ लगे हुए थे. मैने उसको किस करना स्टार्ट कर दिया.

वो भी कंट्रोल खो रही थी. मैने वही उसका डॉगी-स्टाइल बनाया, और लंड को उसकी छूट में डालने लगा.

तो सादिया ने कहा: भाई ऐसे नही जाएगा. पहले इसको किस करो. फिर ये रास्ता देगी.

मैने अपनी बेहन को सीधा चारपाई पर लिटाया, और उसकी छूट को चाटने लगा. नमकीन मज़े का पानी था. दिल चाह रहा था की उसकी छूट को खा जौ. और लंड को फिर अपनी बेहन की छूट में डाल दिया. आज भी वो बहुत फसा के जेया रहा था.

सादिया ने कहा: भाई आज जल्दी करना क्यूंकी अम्मी आ जाएँगी रात. वो गोली ले आना आज फिर, और अम्मी को देके रात को अपनी बेहन को जितना मर्ज़ी छोड़ लेना.

तुम्हारी बेहन को अपने भाई का लंड बहुत पसंद आया है. मैने जल्दी से झटके मारने स्टार्ट कर दिए. हर झटके पर मेरा लंड फ़ासस के आता जाता, और मेरी बेहन भी भरपूर साथ दे रही थी. वो मुझसे पहले फारिघ् हो गयी, और मैं बाद में.

फारिघ् होने का बाद वो मेरे लंड को अपनी छूट से दबा रही थी, जैसे आखरी कटरा तक निचोढ़ लेगी. उसने ऐसे मेरे लंड को दबाया, की आज तक कोई ऐसी लड़की नही मिली जिसकी छूट ऐसे लंड को दबाती हो.

आयेज किया हुआ. कैसे हम रोज़ सेक्स करते रहे. कैसे मेरी बेहन ने मुझसे गांद मरवाई, और जिससे मिलने जेया रही थे उससे भी उसने चुडवाया. फिर शादी के बाद कैसे उसने अपने ड्राइवर से चुडवाया, और कैसे अपने क्लास फेलो से चुडवाया, यानी मेरी बेहन ने रंडी बन के किस-किस से चुडवाया. अगले एपिसोड का इंतेज़ार करे, और कॉमेंट करके बताए की मेरी सॅकी कहानी कैसी लगी.

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