ससुर ने चुड़क्कड़ बहू को चोदा

मेरा नाम संगीता है. मेरी चुदाई के टीन एक्सपीरियेन्स मैने पिछले टीन पार्ट्स में बताए है. अगर आपने नही पढ़े तो आप पढ़ सकते है. प्रट्यूश जी से मेरी शादी हुए अभी सिर्फ़ दो हफ्ते हुए थे, की उनकी ट्रान्स्फर मुंबई हो गयी, और वो वाहा पहले चले गये. वो कुछ दिन बाद सेट्ल होके मुझे बुलाने वाले थे. मैं अपने घर में अकेली ही थी. घर में मेरे ससुर जी थे. सासू मा का देहांत होके अभी दो वर्ष होने को थे.

एक देर रात मैं अपने कमरे में बैठ कर अपने पति की याद में मॅर जेया रही थी. मेरी छूट में खुजली होने लगी थी. तो मैने प्रट्यूश जी को कॉल किया. उन्होने मेरे साथ फोन सेक्स करना शुरू किया. मैं भी उनकी सुन-सुन के अपने आपको मास्टरबेट करने लगी.

मैने अपने ब्लाउस और ब्रा के हुक को खोला, और बूब्स को ढीला किया, और अपनी सारी को उठा कर अपनी छूट में उंगलियों से अंदर-बाहर करने लगी. मेरा पानी अभी निकला नही था, और मैं गरम होने ही वाली थी, की तभी वाहा ससुर जी आ गये.

उन्होने मुझे ऐसी अवस्था में देख लिया. मैने जैसे ही उन्हे देखा मैने अपने आप को रोका और कपड़े आचे से पहनने लगी. मैं शरम से पानी-पानी हो गयी. थोड़ी देर बाद ससुर जी ने मुझे कमरे में बुलाया. मैं डरते-डरते उनके कमरे में चली गयी.

ससुर जी ने कहा: मैं समझ सकता हू पति के ना होने पर पत्नी शारीरिक सुख हो तरसती है.

फिर ससुर जी मेरे करीब आए और मेरी दोनो कंधो को पर अपने हाथ रखे, और कहने लगे-

ससुर जी: चिंता मत करो, आज मैं तुम्हे कुछ मज़े दिलाता हू.

मैने कहा: मैं समझी नही.

फिर ससुर जी ने कहा: मुझे पता है. छ्होटे विनीत ने तुम्हारी, विनीत, और प्रट्यूश की मज़ेदार चुदाई के बारे में बता दिया था.

मैं चौंक गयी और दर्र गयी.

ससुर जी ने कहा: दररो मत, हमारे परिवार में सब को आज़ादी है. तुम जो चाहो कर सकती हो. जाओ दरवाज़ा बंद करो.

मैने फिर दरवाज़ा बंद किया. ससुर जी बेड पर बैठे और मुझे उनकी जाँघ पर बैठने को कहा. मैं हिचकिचाते हुए बैठ गयी. उन्होने मुझे कमर से पकड़ा और सहारा दिया. फिर उन्होने मेरा पल्लू नीचे किया, और ब्लाउस का हुक खोला. मैने अपनी आँखें बंद कर दी. उन्होने पीछे से ब्रा का हुक खोला, और वैसे ही अपने एक हाथ से बूब्स दबाने लगे.

पहले वो एक, और फिर दोनो बूब्स दबाने लगे. जैसे वो बूब्स दबा और सहला रहे थे, उससे पता चलता था की उन्हे औरतों के बारे में कितना आचे से पता था. सिर्फ़ बूब्स दबाने भर से कुछ मिंटो में मुझे ससुर जी ने गरम कर दिया.

अभी तो मेरे कपड़े उतारे भी नही थे, पर उनके छूने से अलग ही मज़ा आने लगा. मैं आँखें बंद करके वो महसूस कर रही थी. कुछ देर बाद ससुर जी ने मुझे खड़ा किया, और मेरे कपड़े उतारने लगे. ब्लाउस ब्रा नीचे फेंक दी उन्होने.

फिर सारी और पेटिकोट उतरा, और पनटी में बेड पर लेटने को कहा. मैं पनटी में बेड पर लेट गयी. उन्होने भी अपने उपर के कपड़े उतारे, और मेरे बाजू में आके बैठ गये. फिर उन्होने अपना एक हाथ मेरी पनटी के अंदर सीधा डाल दिया.

अब उनकी उंगलियों का जादू चला. उनकी उंगलियाँ सीधे मेरी छूट पर सहलाने लगी. उन्होने ऐसे सहलाया जैसे एक लड़की की छूट के कोने-कोने से वो वाकिफ़ थे. और हो भी क्यूँ ना, अपनी पूरी ज़िंदगी छूट और चुदाई का एक्सपीरियेन्स जो होगा.

उनकी उंगलियों की चुदाई से ही मैने अपना पानी पनटी में उनके हाथ पे निकाला. फिर भी गीली छूट पर उनके गीले हाथ नही रुके. मैं अपनी छूट और गांद उठा-उठा कर मज़े ले रही थी. कुछ देर बाद वो मेरे सामने नंगे हो गये, और मुझे लंड चूसने को कहा. उनका लंड भी बड़ा था.

उनका बड़ा लंड देख कर मैं समझ गयी की कहा से मेरे पति और देवर जी को विरासत मिली थी. मैं घुटनो के बाल बैठ गयी, और उनका लंड पकड़ कर हिलने लगी. उनके लंड से एक ज़बरदस्त मर्दाना खुश्बू आई, जिससे मैं मदहोश हो गयी. मैने उनका लंड चूसना शुरू किया, और करीब 10-15 मिनिट तक चूसा. जब उन्हे लगा की उनका निकल जाएगा, उन्होने मुझे रोक लिया.

कुछ देर बाद ससुर जी ने मुझे एक टेबल के पास खड़ा किया, और मुझे झुकाया. फिर पीछे से उन्होने मेरी छूट पर थूक गिराया और अपना लंड सेट किया. कुछ ही धक्को में उनका पूरा लंड मेरी छूट में था, और उन्होने चुदाई शुरू की.

मेरी चुदाई ससुर जी करने लगे. ससुर जी मेरी छूट थोड़ी बेरेहमी से ही मारने लगे. मैं उन्हे रोकने लगी, पर उन्होने मेरे दोनो हाथ पीछे पकड़े, और नीचे से लंड से चुदाई करने लगे.

मैं चिल्ला उठी: ससुर जी, धीरे कीजिए. हाए मैं मॅर जौंगी. प्लीज़ ससुर जी प्लीज़.

ससुर जी: ये क्या, अभी तो शुरुआत है. तुम इतना भी नही ले सकती तो मेरे प्रट्यूश को कैसे खुश करोगी? उसका तो अभी जवानी वाला लंड है. चुप रहो, और चुदाई का मज़ा लो.

मैने दर्द सहा और ससुर जी के सामने कुछ ना बोल पाई. ससुर जी ने 15-20 तक चुदाई की, और मेरी गांद पर सारा अपना कम निकाला. मैं बातरूम में ढोने लगी तो ससुर जी पीछे से आए और मुझे पुर शरीर पर जगह-जगह टच करने लगे.

वो कभी बूब्स दबाते, तो कभी गांद पर तमाचा मारते. कभी छूट में उंगली करते, तो कभी मूह में उंगलियाँ डाल कर अंदर-बाहर करते. उनकी हरकतों में एक डॉमिनेन्स था, और एक मर्दाना फीलिंग थी. पता नही अपनी जवानी में तो उन्होने काई लड़कियों की छूट का भोंसड़ा बनाया होगा.

उस रात ससुर जी नंगे सो गये. पर मैं आधी रात को अपने कमरे आके नंगी सो गयी. सुबा देर से आँख खुली तो देवर जी कमरे में ही थे. मुझे नंगा देख कर उन्होने भी अपना चान्स मारा. वो मेरे पास आए और सुबा-सुबा वापस मुझे गरम करने लगे. वो भी अपने कपड़े उतार कर नंगे हो गये, और मिशनरी जो उनकी फॅवुरेट पोज़िशन है, उसमे मेरी छूट चुदाई 20 मिनिट तक की.

फिर उन्होने कहा: मैं पिता जी से मिलके आ रहा हू. कल फिर फाइनली आपने अपने ससुर जी के साथ चुदाई कर ही डाली.

हम दोनो हस्स दिए, और इस तरह मेरी चुदाई में एक और एक्सपीरियेन्स शामिल हो गया.

फिर मैं कुछ हफ्ते बाद अपने पति के साथ मुंबई चली गयी. वाहा मेरी चुदाई मेरे दो जेठ जी ने की. दोनो ने मिल के कैसे मेरी छूट गीली की, आप अगले पार्ट में ज़रूर पढ़िए. और उपर की कहानी कैसी लगी वो जवानिकजोश@आउटलुक.कॉम पर ज़रूरर बताइए. आपकी ईद सेफ रहेगी.

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