बेटे की बीवी के साथ सुहागरात

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रामनाथ है। आज में आपको अपनी रियल कहानी बता रहा हूँ। ऐसा शायद ही किसी के साथ हुआ होगा, मेरी उम्र 45 साल है, मेरी पत्नी के 2 साल काफी बीमार रहने के बाद उसका देहान्त आज से 1 साल पहले हो गया था। उस समय मेरा लड़का 23 साल का था। अब में सोच रहा था कि मेरे लड़के की शादी कर दूँ, तो घर में बहू घर सम्भालने वाली आ जाये, लेकिन मेरा लड़का राजनाथ (राजू) शादी के लिए तैयार ही नहीं हो रहा था। फिर भी किसी तरह उसे राज़ी करके 3 महीने पहले उसकी शादी एक सुन्दर लड़की (सुनीता) से हो गई। मेरा ऑफिस घर के पास था और में घर पर 8 बजे तक आ जाता था और राजू करीब 7 बजे घर आता था।

आज से करीब 3 महीने पहले एक दिन ऑफिस से मेरी 3 बजे छुट्टी हो गई थी। फिर में घर आया और मेरे पास चाबी थी, तो में उससे मैन दरवाजा खोलकर घर में अंदर गया। तो मैंने अन्दर देखा कि सुनीता पलंग पर पड़ी हुई थी और वो नंगी सो रही थी, उसकी साड़ी और पेटीकोट पलंग पर उसके पास में पड़े हुए थे, उसकी चूत एकदम नंगी दिखाई दे रही थी, उसकी चूत पर इतने बाल थे जैसे उसने कई महिनों से बाल काटे ही नहीं है, उसकी चूत के नीचे एक मोटी लम्बी ककड़ी पलंग पर पड़ी थी, ऐसा लग रहा था कि सुनीता सोने से पहले ककड़ी को अपनी चूत में डालकर चोद रही होगी। तो यह सब देखकर मुझे थोड़ा अजीब सा लगा, सुनीता ऐसा क्यों कर रही थी? अब सुनीता की चूत को देखकर मेरा कई साल से सोया हुआ लंड खड़ा हो गया था, आखिर में भी आदमी हूँ कोई हिज़ड़ा तो नहीं हूँ, लेकिन मेरी सुनीता को छूने की हिम्मत नहीं हुई थी।

अब में अपने कपड़े बदलकर हॉल में बैठकर अपने खड़े लंड को सहलाने लगा था। फिर थोड़े समय के बाद सुनीता जागी, उसे उम्मीद नहीं थी कि घर में कोई है। फिर वो वैसे ही नंगी हॉल में आई और मुझे हॉल में देखकर चौंकी और घबरा गई, लेकिन उसकी नजर मेरे लंड पर पड़ गई थी, तो वो भागकर अपने कमरे में गई और कपड़े पहनकर वापस आई। फिर वो बोली कि पापा आज इतनी जल्दी कैसे? आपकी ताबियत तो ठीक है ना? तो मैंने उसे जल्दी आने का कारण बताया। तो तब वो बोली कि चाय बना दूँ। तो में बोला कि नहीं रहने दो, मेरे पास बैठो, तुमसे कुछ बात करनी है। तो वो बोली कि क्या बात है? बोलिए। फिर मैंने उससे पूछा कि सुनीता तुम शादी के बाद खुश तो होना। तो इतना सुनते ही वो उदास हो गई और ऐसा लगा जैसे अभी रो पड़ेगी। तब मुझे लगा कि कुछ ना कुछ तो गड़बड़ है। फिर मैंने पूछा कि क्या राजू से कोई परेशानी है? तो तभी सुनीता बोली कि आज शायद आपने मुझे जिस हाल में देखा इसलिए यह बातें पूछ रहे है। तो तब सुनीता बोली कि आज आपने पूछ ही लिया है तो आपको सारी बात बता देती हूँ, आपको सुनकर विश्वास नहीं होगा, आपके लड़के को लड़की में कोई रुची ही नहीं है।

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तो में कुछ समझा नहीं और बोला कि जरा खुलकर बताओ। फिर वो बोली कि उसको सिर्फ लड़को में ही रुची है, हमारे हनीमून पर हम दोनों अकेले नहीं गए थे, बल्कि अलग से इनके 2 दोस्त भी गए थे, जिसका पता मुझे वहां पहुंचकर लगा था। इनके दोनों दोस्त का कमरा हमारे कमरे के पास ही था। राजू सारे दिन उनके साथ उनके कमरे में ही रहता था। फिर तब मैंने पूछा कि में कुछ समझा नहीं, राजू ने ऐसा क्यों किया? जरा खुलकर पूरी बात बताओ। तो तब वो बोली कि हाँ आज खुलकर सारी बातें बताती हूँ, राजू अपने दोस्तों के साथ सेक्स करता है, राजू उनका चूसता है और उनके दोस्त राजू का चूसते है। फिर मैंने राजू से कहा भी कि चलो अपने कमरे में जैसा तुम चाहते हो, वो में करूँगी। तो तब राजू बोला कि सुनीता बेकार है, तुम अपने कमरे में जाकर आराम करो और हमारा मज़ा खराब मत करो, मुझे और मेरे दोस्तो को लड़की में कोई रुचि नहीं है और तो और तुम अगर नंगी भी हो जाओगी, तो भी ये मेरे दोस्त भी तुम्हें टच तक नहीं करेंगे।

फिर में उनके सामने नंगी भी हुई, लेकिन उन तीनों को कोई फर्क ही नहीं पड़ा था, वो अपने आप में खेलते रहे, एक दूसरे का चूसना और सेक्स करते रहे। फिर मैंने पूछा कि राजू तो मुझसे शादी क्यों की? और अब में अपनी जवानी की आग का क्या करूँ? तो तब वो बोला कि पापा ने परेशान कर रखा था इसलिए शादी की और तुम चाहे जिसके साथ जो चाहो करो मुझे कोई मतलब नहीं है, होटल में ही कोई मिले और नहीं तो चाहे होटल के वेटर के साथ कर लो। फिर उनके एक दोस्त ने मुझे केला दिखाकर कहा कि भाभी इस केले से अपने आप ही कर लो। अब में बिल्कुल नंगी थी, लेकिन उन तीनों के लिए तो जैसे में वहां थी ही नहीं, अब मेरी इससे ज्यादा बेइज़्जती और क्या हो सकती थी? फिर उस दिन में अपने कमरे में जाकर खूब रोई। अब मेरे दिमाग में कई दिन से अपनी आगे की जिंदगी के लिए कई विचार घूम रहे है, राजू से तलाक लेकर दूसरी शादी कर लूँ, लेकिन डरती हूँ कि दूसरा लड़का भी अगर ऐसा ही हुआ तो? बाहर किसी लड़के को पटा लूँ, लेकिन उसमें बदनामी और ब्लेकमैल का डर है, मेरी खुदकुशी कि हिम्मत नहीं होती और खुदकुशी करना कायरपन है। फिर मज़बूरी में अपने आप नकली चीज़ो के सहारे अपने आपको बहला रही हूँ, लेकिन उससे कब तब अपने आपको बहलाउंगी? क्या शादी का मतलब यही है? अब आप ही बोलो में क्या करूँ?

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