सलीम अंकल ने चुदवाते हुए पकड़ा

हेलो दोस्तो, मेरा नाम है पूजा कॉयार और मई लेके आई हू अपनी कहानी “अंकल ने छोड़ी मेरी कुवारि छूट” का अगला पार्ट. अभी तक आपने पढ़ा, की जब रिंकू मेरी छूट मे लंड डाल रहा था, तो पीछे से किसी की आवाज़ आई और हम रुक गये. अब आयेज-

ये तो सलीम अंकल की आवाज़ थी. रिंकू ने जल्दी से अपनी पंत उठाई और आधी टूटी दीवार पर चढ़ कर दूसरी तरफ कूद गया और भाग गया. मैने जल्दी से अपना लोवर और पनटी उपर की.

पीछे मुड़ते ही सलीम अंकल मेरे सामने थे. उनको अपने सामने देख कर मेरे तो होश ही उडद गये और मई रोने लग गयी.

अंकल: यार से चूड़ते टाइम रोना नही आ रहा था. चल तेरे बाप को बताता हू, की उसकी लोंड़िया लंड खाने लगी है.

उनकी बात सुन कर मेरी आँखों से आँसू बहने लगे और मई बुरी तरह से दर्र गयी और बोली-

मई: अंकल प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए.

अंकल: माफी तो अब अपने बाप से माँगना.

मई रोते हुए उनके पैरो मे गिर गयी और बोली: अंकल ग़लती हो गयी, प्लीज़ माफ़ कर दीजिए. प्लीज़, आयेज से ऐसी ग़लती दोबारा नही होगी.

अंकल: कैसे नही होगी. छूट है तो चूड़ेगी भी. आज ये था, तो कल कोई और होगा. जिसने एक बार लंड खा लिया, वो तो दोबारा लंड ढूँढेगी ही.

अंकल की बात सुन कर, कुछ समझ नही आया की क्या बोलू. मई बस रोटी हुई सॉरी बोले जेया रही थी. तभी सलीम अंकल ने मुझे दाँत कर कहा-

सलीम अंकल: चुप होज़ा, वरना यही तेरे पापा को बुला लूँगा.

उनकी बात सुन कर मई चुप होने की कोशिश करने लगी, पर आँखों से आँसू लगातार बह रहे थे. फिर अंकल को ना-जाने क्या हुआ और वो मेरे उपर बड़ा प्यार दिखाने लगे और मुझे अपनी तरफ खींच कर गले से लगा लिया और बोले-

सलीम अंकल: अर्रे मेरे बच्चे, तू रो मत. अछा नही बताता तेरे पापा को.

मई अंकल की चेस्ट तक भी नही पहुँच रही थी, क्यूकी अंकल की हाइट 6 फीट से भी ज़्यादा थी और एक-दूं हटते-काटते थे. उनकी बाहो मे मई दिखाई भी नही दे रही थी.

अंकल ने मुझे कुछ देर ऐसे ही हग करके रखा और मुझे चुप कराते रहे और फिर नीचे बैठ कर मुझे अपनी गोद मे बिता लिया और चुप कराने लगे. वो मुझे बड़े प्यार से सहला रहे थे, जिससे मई कुछ ही देर मे चुप हो गयी.

फिर उन्होने पीछे से ही मुझे अपनी बाहो मे भींच कर, मेरे कान के पास और गाल पर 3-4 किस कर दी और बोले-

सलीम अंकल: चुप हो गया मेरा बच्चा?

वो एक पत्थर पर बैठे थे. उन्होने मुझे पूरी तरह अपनी गोद मे बिता लिया और मई भी अपनी दोनो टांगे उनकी जाँघो पर रख कर उनकी गोद मे बच्चे की तरह से बैठ गयी.

अब अंकल का चेहरा बिल्कुल मेरे चेहरे के सामने था. अंकल के चेहरे पर काफ़ी दाढ़ी थी और लिप्स बिल्कुल काले पड़े थे. दिखने मे अंकल भी काफ़ी काले थे और उस टाइम उन्होने वाइट कलर का पाजामा-कुर्ता पहना हुआ था. कुछ देर मेरे चेहरे को ऐसे ही देखने के बाद, अंकल बोले-

सलीम अंकल: वो लड़का कों था?

तो मैने बता दिया, की वो मेरे कॉलेज मे 2न्ड एअर मे पढ़ता है.

अंकल: कब से उसको जानती हो?

मई: 2-3 महीने से जानती हू.

अंकल: और ये सब कब से चल रहा है?

मई: यहा पर हम 2न्ड टाइम ही मिले है अंकल और इससे पहले सिर्फ़ कॉलेज के पार्क मे बैठे थे.

अंकल: कितनी बार छोड़ा है उसने तुमको और इसके अलावा किस-किस से चूड़ी है?

अंकल की बात सुन कर मई शर्मा गयी और आँखें नीचे करके बोली-

मई: कभी नही.

अंकल: झूट मत बोलो, मैने रंगे हाथ पकड़ा है तुम दोनो को.

मई: अंकल आज फर्स्ट टाइम कर रहे थे.

अंकल: श! और रंग मे मैने भंग डाल दिया.

और ये बोल कर अंकल मुस्कुराने लगे. मैने शर्मा कर नज़र झुका ली और दूसरी तरफ देखने लगी. अब अंकल का हाथ मेरी टाँगो पर घूमने लगा था.

अंकल: और बताओ तुम दोनो यहा क्या-क्या करते हो.

अंकल की बात सुन कर मेरे चेहरे पर स्माइल आ गयी और अंकल का हाथ मेरे लोवर के अंदर घुस कर, मेरी पनटी के उपर से ही मेरी छूट को सहलाने लगा था. क्या बतौ अंकल का हाथ इतना बड़ा और भारी था, की उसके स्पर्श से मेरी छूट मे कुछ होने लगा.

मई लड़खड़ाती आवाज़ मे बोली: किस करते है.

अंकल: कहा पर?

तो मैने पहले अपने गाल पर हाथ रखा और बोली: यहा.

तो अंकल ने मेरे गाल को किस कर दिया. फिर मैने अपने फोर्हेड पर हाथ रखा और बोली: यहा.

तो अंकल ने मेरे फोर्हेड पर भी किस किया. फिर मैने अपने लिप्स पर हाथ रखा और बोली: यहा.

तो अंकल ने मेरे लिप्स को अपने मूह मे भर लिया और चूसने लगे. इस वक़्त मई अपने पुर होश खो बैठी थी. ना-जाने अंकल ने अपने हाथो से मेरे बदन पर कॉन्सा जादू कर दिया था, की मुझे ये तक होश नही था, की मई अभी एक 50 साल के आदमी की गोद मे बैठी हू और वो मेरे बदन से खेल रहा है.

अंकल मेरे लिप्स को चूस रहे थे और उनका हाथ अब मेरी पनटी के अंदर मेरी छूट पर था. फिर अंकल ने अपनी एक उंगली मेरी छूट मे घुसा दी. अंकल की फिगर भूत ही सकत और कठोर टाइप की थी, पर मेरी छूट इस वक़्त इतनी चिकनी हो गयी थी, की उंगली सरक्ति हुई अंदर चली गयी और अंकल उसे अंदर-बाहर करके अपनी उंगली से ही मुझे छोड़ने लगे.

मुझे भूत मज़ा आ रहा था. इतना मज़ा तो कभी रिंकू के साथ भी नही आया था.
कुछ देर बाद, अंकल हटे और बोले-

सलीम अंकल: और क्या करते हो?

मैने कहा: बस यही करते है.

अंकल: झूट मत बोलो. मैने कल देखा था, की तुम क्या कर रही थी. चलो अब मेरा लंड भी अपने मूह मे लो और फिर घर चलते है. वरना तुम्हारे मा-बाप तुमको ढूँढने लगेंगे.

उनकी बात सुन कर मई अंकल की गोद से खड़ी हुई और फिर अंकल ने खड़े होकर अपना पाजामा नीचे करके, अपना लंड बाहर निकाल लिया. क्या लंड था अंकल का, मोविए वाले हबशी जैसा.

उनका लंड कोई 9 इंच का होगा और एक-दूं मोटा और लंबा था. मैने उसे अपने हाथ मे पकड़ा. अंकल का लंड भूत भारी भी था और मेरे हाथ मे तो पूरा आ ही नही रहा था.

अंकल ने कहा: जल्दी करो.

तो मई घुटने के बाल अंकल के पास बैठ गयी और अंकल के मोटे लंड पर किस करने लगी. लंड की खाल पहले से ही पीछे थी. उसके लाल-लाल मोटा सुपाड़ा मेरे मूह के सामने आ गया, तो मैने उस पर किस किया.

फिर मई लंड को मूह मे भरने की कोशिश करने लगी, पर अंकल का लंड इतना मोटा था, की मेरे मूह मे ही नही आ रहा था.
अब अंकल ने मेरे बाल पकड़े और ज़ोर लगा कर लंड मेरे मूह मे डाल दिया.

लंड मेरे मूह मे घुस तो गया, पर भूत टाइट आया. फिर अंकल मेरे बाल पकड़ कर मूह को छोड़ने लगे, जैसे कल रिंकू ने किया था और लगातार 20-25 मिनिट तक हिलते रहे.

मेरा तो तब तक बुरा हाल हो गया था. मुझसे साँस भी नही ली जेया रही थी और मई कुछ बोल भी नही पा रही थी. मेरी आँखों से आँसू आ गये थे, पर अंकल का काम अभी तक नही हुआ था.

पर फिर अचानक अंकल ने ज़ोर लगाया और अपना आधा लंड मेरे मूह मे घुसा दिया. अंकल का लंड मेरे गले तक फ़ासस गया और अंकल ने ज़ोर से पिचकारी छोढ़नी शुरू कर दी.

उनका पूरा का पूरा माल, मेरे गले मे उतार गया और फिर अंकल ने अपना लंड मेरे मूह से बाहर निकाल लिया. मेरा तो कल से भी ज़्यादा बुरा हाल हो गया. लंड के बाहर निकलते ही, मई बुरी तरह से खाँसने लगी और 15-20 मिनिट बाद ही नॉर्मल हो पाई. उसके बाद मई अपने घर चली गयी.

नेक्स्ट दे कॉलेज मे रिंकू मुझे कही नही दिखाई दिया. मई उससे मिलना चाहती थी, पर शायद वो आज कॉलेज नही आया था. फिर शाम को स्कूल के बाद, मई अपनी बाल्कनी के बाहर खड़ी हो गयी और रिंकू का वेट करने लगी.

रिंकू तो नही आया, पर कुछ देर बाद सलीम अंकल ज़रूर आ गये और इशारे से मुझे उन्होने नीचे बुला लिया. मई नीचे गयी, तो अंकल मुझे फिरसे उसी टूटे हुए घर मे ले गये और मुझे अपनी बाहो मे भर लिया और फिरसे मेरे बदन से खेलने लगे.

अंकल के टच से मुझे भूत मज़ा आता था और जैसे वो मेरी छूट मे उंगली डालते थे, उतना मज़ा तो कभी खुद फिंगरिंग करने मे भी नही आता था.

अब हमारा रोज़ का यही काम हो गया था. अंकल शाम को मुझे बुला लेते और मेरे बदन से खेलते. अंकल मुझे अपनी फिंगर से शांत करते और मई उनका लंड चूस कर उनको शांत कर देती.

एक दिन सनडे को पापा और मम्मी मार्केट गये हुए थे. वो अपने साथ मे मेरे छोटे भाई को भी ले गये थे. उनके जाने के कुछ देर बाद ही सलीम अंकल मेरे घर आ गये और आते ही उन्होने मुझे अपनी बाहो मे भर लिया. मई भी उनसे लिपट गयी और बोली-

मई: आपको कैसे पता चला, की मई अकेली हू घर पे?

तो अंकल ने कहा: तेरे पापा आए थे स्कूटर दिखाने और उन्होने बताया था, की वो मार्केट जेया रहे है और वापस आने मे 3-4 घंटे लग जाएँगे. तो मैने सोचा, की तब तक जाकर उनकी लोंड़िया की सर्विस कर डू.

उनकी बात सुन कर मुझे हस्सी आ गयी और फिर अंकल मुझे गोद मे उठा कर मेरे रूम मे ले गये. रूम मे आते ही अंकल ने मुझे बेड पर गिरा दिया और खुद मेरे उपर आकर मुझ पर टूट पड़े.

मई भी पुर जोश मे रेस्पॉन्स करने लगी. अंकल ने जल्दी से मेरा टॉप उतार दिया और ब्रा उतार कर मेरे बूब्स को चूसने लगे. कुछ देर बूब्स चूस कर अंकल ने मेरी लेगैंग्स भी उतार दी. मेरी पनटी भी लेगिंग के साथ ही उतार गयी. फिर अंकल कुछ देर के लिए रुके और मेरी छूट को देखते हुए बोले-

सलीम अंकल: क्या माल है तू, मेरे हाथ तो हीरा लगा है हीरा.

और फिर अपने कपड़े उतारने लगे. अपने कपड़े उतार कर अंकल ने मेरी टांगे उठा ली और लंड को सीधा मेरी छूट पर टीका दिया. मेरी कोमल सी छूट, जिसमे आज तक दो उंगलिया एक साथ नही गयी, वो जात अंकल के 3 इंच मोटे लंड को लेने के लिए रेडी थी.

अंकल ने लंड को कुछ देर मेरी छूट पर रगड़ा, तो मई मदहोश होने लगी और फिर उन्होने लंड को मेरी छूट के छेड़ पर रोका. मैने अपनी आँखें बंद कर ली और फिर अंकल का गढ़े जैसा लंड मेरी छोटी सी छूट को फाड़ता हुआ अंदर घुसने लगा.

मेरी तो चीखे निकल गयी और अंकल से छूटने की कोशिश करने लगी. उन्होने अपने हाथ को मेरे मूह पर रख कर दबा दिया. मई पूरा ज़ोर लगा कर भी सांड़ जैसे अंकल को हिला नही पाई.

मेरी आँखों से आँसू आने लगे, पर अंकल को मुझ पर ज़रा भी तरस नही आया और वो लंड को अंदर घुसा कर ही रुके और उसके बाद लंड को अंदर-बाहर करने लगे.

मुझे भूत ज़्यादा दर्द हो रहा था, पर अंकल मुझे बुरी तरह से छोड़े जेया रहे थे. उनके लगातार छोड़ने से मेरा दर्द कम होने लगा और फिर धीरे-धीरे मुझे मज़ा आने लगा.

अब अंकल का लंड भी आराम से छूट मे अंदर-बाहर होने लगा और अंकल पुर जोश से मुझे छोड़ने लगे. मुझे इतना मज़ा आ रहा था, की मेरे मूह से सिसकारिया फूटने लगी और मई आअहह..म सस्स्शह्ी.. ईयीई.. आआआअहह…. की आवाज़े निकालने लगी.

मेरी सिसकारिया सुन कर वो और ज़्यादा जोश मे आ गये और पूरी ताक़त से मुझे छोड़ने लगे. उनका लंड मेरे पेट मे अंदर टकरा सा रहा था. उसके जोश के सामने मेरा जोश ठंडा पढ़ने लगा.

तभी उसने मुझे ज़ोर से पकड़ा और मुझे मेरे पेट मे गरम-गरम पिचकारी महसूस होने लगी और अचानक से वो बुरी तरह से तक गया और धीरे-धीरे हिलते हुए मेरे उपर लेट गया.

मई उसके वज़न के नीचे डब सी गयी और मेरी चूत से उसका माल निकल कर बेड पर गिरने लगा. कुछ देर बाद वो हटा और अपने कपड़े पहन कर चला गया.

मई बड़ी मुस्किल से खड़ी हुई. चुदाई से मेरी टाँगो मे भूत दर्द हो रहा था और छूट तो सूज सी गयी थी. पर मज़ा भूत आया.

तो फ्रेंड्स कैसी लगी मेरी स्टोरी, मुझे एमाइल करके ज़रूर बताए.

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