उसने भी अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी, लंड चुत की गहराइयों में डूबता चला गया… मैं सिसकारी भरती हुई झुकी लंड को अपने भीतर समाने लगी, मेरे बोबे तन गये… लंड जड़ तक उतर चुका था।
उसके हाथ मेरे बोबे पर कसते चले गये… उसका खुरदरा और मोटा लंड देसी चुदाई का मजा दे रहा था। मेरी चुत ने उसके लंड को लपेट लिया था और जैसे उसका पूरा स्वाद ले रही थी। बाहर निकलता हुआ लंड मुझे अपने अन्दर एक खालीपन का अहसास कराने लगा था पर दूसरे ही क्षण उसका अन्दर घुसना मुझे तड़पा गया, मेरी चुत एक मिठास से भर गई।
इतनी ज़बरदस्त मेरी चुदाई मेरे पति के दोस्तों ने भी नहीं की थी।
उसकी रफ़्तार बढ़ने लगी… चुत में मिठास का अहसास ज्यादा आने लगा, मेरा बांध टूटने लगा था, अब मैं भी अपनी चुत को जोर जोर से उछालने लगी थी, वासना का नशा… चुदाई की मिठास… लंड का जड़ तक चुदाई करना… मुझे स्वर्ग की सैर करा रहा था।
पति की चुदाई से यह बिल्कुल अलग थी।
चोरी से चुदाई… जवान स्टूडेंट का देसी लंड… और कॉलेज का टॉयलेट… ये सब नशा डबल कर रहे थे। चुदाई की रफ़्तार तेज हो चुकी थी… मैं उन्मुक्त भाव से चुदा रही थी… चरमसीमा के नज़दीक आती जा रही थी।
एक जवान टीचर देसी लंड कब तक झेल पाती… मेरा पूरा शरीर चुदाई की मिठास से परिपूर्ण हो रहा था… बदन तड़क रहा था… कसक रहा था… मेरा जिस्म जैसे सब कुछ बाहर निकालने को तड़प उठा- अंऽअऽअऽऽ ह्ह्ह… रोशन… हऽऽऽय… चुद गई… ऐईईईइऽऽऽ… मेरा निकला रीऽऽऽ… माई रीऽऽऽऽ… जोर से मार रे… फ़ाड़ दे मेरी… गोऽऽऽपी…’
और मैं अब सिमटने लगी… मेरे जिस्म ने मेरा साथ छोड़ दिया और लगा कि मेरा सब कुछ चुत के रास्ते बाहर आ जायेगा… मैं जोर से झड़ने लगी।
रोशन समझ गया था, वो धीरे धीरे चोदने लगा था, मुझे झड़ने में मेरी सहायता कर रहा था- शहनाज़… मेरी मदद करो प्लीज… ऐसे ही रहो…!
मैंने अपने पांव ऊपर ही रखे… जवान स्टूडेंट का देसी लंड था, इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं था। वह मुझे वापस झुका कर मेरी गांड को खोलने लगा। उसने उंगली से थूक लगाकर मेरी संकरी गांड के छेद को सहलाया, फिर धीरे धीरे उस पर अपना लंड का टोपा रगड़ा। मैं झुकी हुई अपनी चुत में दोबारा उसका लंड खाने का इंतज़ार कर रही थी।
तभी अचानक मैं दर्द से छटपटा उठी, उसका ताकतवर लंड मेरे चूतड़ों को चीरता हुआ मेरी गांड में घुस चुका था।
‘उफ्फ…!! नहीं… नहीं यह नहीं रोशन… मैं मर जाऊंगी…! गांड में नहीं…’
उसने मेरी एक नहीं सुनी… और जोर लगा कर और अन्दर घुसेड़ता चला गया- बस शहनाज़… हो गया… करने दे…प्लीज!
‘मेरी गांड फ़ट जायेगी रोशन… मान जा… छोड़ दे नाऽऽऽ बहुत दुःख रही है यार…गांड नहीं मरवाऊँगी!’
‘मैडम आपकी गोरी गुलाबी गांड मारने में जो मजा है वह दुनिया के किसी काम में नहीं है। जबसे हमको मालूम हुआ है कि आप अपने पति के दोस्तों से चुदवा रही हो, तबसे कॉलेज का हर एक लड़का आपकी गांड मारना चाहता है।’
‘प्लीज यार रोशन, बहुत दर्द हो रहा है गांड मत मार… मैडम हूँ तेरी!’
वह मेरी कमर को कसकर पकड़े हुए था, मैं कसमसा कर अपनी गांड सिकोड़ रही थी।
‘चुप मादरचोद साली तू सिर्फ एक शादीशुदा रांड है जिसका नामर्द पति चोद नहीं पाता है तो तू यहाँ वहाँ नए नए लंड से चुदाई करवाती है।’
मुझे यकीन नहीं हुआ कि मेरा ब्राइट स्टूडेंट रोशन मुझे गन्दी गन्दी गालियाँ देते हुए मेरी गांड मार रहा था।
अब उसके लंड ने मेरी गांड पर पूरा कब्जा कर लिया था, उसने धक्के बढ़ा दिये… मैं झड़ भी चुकी थी… इसलिये ज्यादा तकलीफ़ हो रही थी।
उसने मेरे बोबे फिर से खींचने चालू कर दिये, मेरी चूचियाँ जलने लगी थी- आअह्ह्ह्ह… बहुत दर्द हो रहा है… मेरी गांड मत मार यार… अल्ला!
लग रहा था जैसे मेरी गांड में किसी ने गर्म लोहे की सलाख डाल दी हो… मैं दर्द से बिलबिला उठी।
पर जल्दी ही दर्द कम होने लगा… मेरी सहनशक्ति काम कर गई थी। अब मैं उसके लंड को झेल सकती थी।
मैं फिर से गर्म होने लगी थी, उसकी गांड चोदने की रफ़्तार बढ़ चली थी। मुझे अपने स्टूडेंट से टॉयलेट में इस तरह गांड मरवाना अच्छा लग रहा था।
मुझे अपने कॉलेज के दिन याद आ गए जब पहली बार मेरे बॉयफ्रेंड ने क्लास के पीछे मेरा स्कर्ट उठाकर मेरी गांड मारी थी।
‘मैं मर गया… शहनाज़… मैं… मैं… गया… हाय…’ उसने अपना लंड गांड से बाहर खींच लिया।
अचानक फ़च्छ के साथ ही गांड में खालीपन लगने लगा।
मैं तुरंत घूम गई उसका लंड पकड़ कर जोर से दबा कर मुठ मारने लगी।
‘मुंह में ले… मुंह में ले साली कुतिया रांड…’ उसने तुरंत मेरी चोटी पकड़कर मुझे नीचे झुका दिया, उसके लंड में एक लहर उठी और मैंने तुरन्त ही लंड को अपने मुख में प्यार से ले लिया।
Hmse bhi koi chudwa lo..lynd tight hogya….koi bhi housewife girls jo mujhse maza lena chahti ho chudi ki…chut gaand ko chatwana or chudwana chahti ho to what’s aap kro 8858354885