सास और दामाद की जंगल में तगड़ी चुदाई की कहानी

स्टोरी आयेज बाढ़ते है-

परेश जी स्कूटर जंगल के ककचे रास्ते पर ले गये, और एक सेफ जगह पर पार्क कर दिया.

मैने पूछा: आप ये क्या कर रहे हो? हम यहा क्यूँ रुके है?

मैं कुछ ज़्यादा बोलू, उसके पहले वो मेरा हाथ पकड़ कर बड़ा सा पेड़ था उसके पीछे ले गये. फिर मुझे पेड़ से सता कर खड़ा कर दिया. मैं कुछ नही बोली, और ऐसे ही उनकी आँखों में देखती रही. उनकी आँखों में मेरे लिए प्यार दिख रहा था. उसे लग रहा था वो मुझे चाहने लगा था.

उनका हाथ मेरी कमर में था और मेरी साँसे तेज़ हो गयी थी, और दिल की धड़कने बढ़ गयी थी. कभी सोचा नही था की किसी दामाद जी से ऐसे संबंध बनेंगे. पर अब मुझे भी किसी गैर मर्द की तलाश थी, और परेश जी हॅंडसम और स्मार्ट थे. वो भी मुझे पसंद करते थे, तो मैं ये मौका खोना नही चाहती थी.

उन्होने मेरी कमर से हाथ हटा कर मेरे मूह को दोनो हाथो से पकड़ लिया, और उनके होंठ मेरे होंठो के करीब कर दिए. मुझे उनकी साँसे महसूस होने लगी, और मैं मदहोश होने लगी. मैने अपनी आँखें बंद की, और चुप-छाप खड़ी रही.

मैने अपना तोड़ा मूह खोला, तो उन्होने मुझे किस करना शुरू कर दिया. मैं भी बिना कोई विरोध किए साथ देने लगी. परेश जी बड़े प्यार से मुझे किस कर रहे थे. अब वो दोनो हाथ मेरी गांद के उपर ले गये, और मुझे कस्स कर पकड़ लिया, और मेरे होंठ चूसने लगे.

गैर मर्द की बाहों में आते ही मेरे अंदर एक लेहायर दौड़ गयी. अब मैं भी उनके बालों पर हाथ घूमते हुए किस करने लगी. ऐसे ही हम कुछ 5 मिनिट तक किस करके हुए रुक गये. मैने अपनी आँखें खोली, तो परेश जी मेरी और देख कर मुस्कुरा रहे थे. मैं शर्मा गयी, और उनको कस्स कर गले लगा दिया.

परेश जी: संगीता जी आपकी इसी अदा पर मैं मॅर रहा हू.

संगीता: आप भी बहुत स्मार्ट और हॅंडसम हो. मैं आपको दोस्ती के लिए कैसे माना कर सकती थी.

मेरे इतना कहते ही उन्होने मेरे लिप्स पर फिरसे किस करना शुरू कर दिया. वो लिप्स से होते हुए मेरे गले पर किस कर रहे थे. मैं भी उनकी पीठ पर हाथ घुमा रही थी. अब उन्होने एक हाथ सारी के उपर से मेरे बूब्स पर रख दिया, और वो हल्के हाथो उसको बड़ा रहे थे. दूसरे हाथ से वो मेरी गांद को सहला रहे थे.

मैने उनको धक्का दिया, और मेरी सारी का पल्लू साइड पर करके मेरा ब्लाउस निकाल दिया. फिर पूरी सारी कमर पर बाँध दी. अब मैं उनके सामने ब्रा और सारी में खड़ी थी. मेरी ब्रा में काससे टाइट बूब्स देख कर उनकी आँखों में चमक आ गयी, और मूह से वाउ निकल गया.

मैने भी अब उनको तोड़ा डोर किया, और उनकी शर्ट के बटन खोलने लगी. उनकी बॉडी पर एक भी बाल नही था. मैं उनकी चिकनी छ्चाटी पर किस करने लगी, और निपल को दांतो से काटने लगी. मैने देखा की उनका लंड पूरा खड़ा हो गया था. वो पंत के उपर से दिख रहा था. अब मैं उनके पेट पर किस करते हुए घुटनो के बाल बैठ गयी.

मैने परेश जी की आँखों में देखा तो वो मेरे बूब्स को हवस भारी निगाहों से देख रहे थे. वाइट ब्रा में काससे हुए मेरे बूब्स किसी भी मर्द को पागल बना सकते थे. अब उनकी पंत की क्लिप और ज़िप खोल कर अंडरवेर के साथ ही पंत उतार दी. उनका लंड देख कर मैने तो होश खो दिया. मेरा मूह खुल्ला रह गया.

उनका लंड विशाल के लंड जैसा लंबा और मोटा था. और मेरे पति और कमाल के लंड से भी गोरा था. इतना खूबसूरत लंड देख कर मेरे से रहा नही गया. जब मैने लंड हाथ में पकड़ा, तो वो और बड़ा हो गया. मैने उसको आगे-पीछे किया तो वो एक-दूं खड़ा हो गया और सख़्त हो गया.

मैने अब उनके लंड पर किस किया और जीभ से पूरा लंड चाट लिया. मेरे ऐसा करते है परेश जी की बॉडी में एक सरूर दौड़ गया, जो मैने भी फील किया. उन्होने कभी सोचा नही होगा की उनकी सेक्सी मौसी सासू उनको ऐसा मज़ा देगी.

मैने अब लंड की स्किन नीचे उतरी और उनके गुलाबी टोपे को जीभ से चाटने लगी. परेश जी अपनी गर्दन उपर करके आसमान की और देखने लगे. मैने अब मूह खोला और लंड को मूह के अंदर लिया. उनके लंड की गर्मी से मुझे जो सुकून मिला, मैं शब्दों में बता नही सकती.

मैं अपना मूह आगे-पीछे करके एक रंडी की तरह लंड चूसने लगी. लंड चूसने में इतनी मगन हो गयी थी, की मुझे वक़्त का पता ही नही चला. जब मैं होश में आई, तो मैने लंड मूह से बाहर निकाला. मेरी थूक से लंड पूरा चमक रहा था. परेश जी मेरी और देख कर मुस्कुरा रहे थे.

परेश जी: रुक क्यूँ गयी आप? मैं तो कब से आपकी गर्मी का आनंद ले रहा था. आप बड़ी चुड़क्कड़ निकली. आइस क्रीम की तरह लंड चूस रही हो. आज तक ऐसा मज़ा किसी औरत ने नही दिया.

संगीता: परेश जी आप इतने दीनो से कहा थे ( लंड पर किस किया)? कहा च्छूपा रखा था आपके इस प्यारे से लंड को? इसको देख कर मेरे से रहा नही गया. मेरे अंदर की औरत की इक्चा को आपने जगा दिया.

अब मैने अपने दोनो हाथ उपर किए, और परेश जी ने मुझे उठा कर खड़ा किया. फिर उन्होने मुझे उल्टा घुमाया और मेरे दोनो हाथ पेड़ के सपोर्ट में डाल दिए, और पीछे से मेरे बूब्स दबाने लगे.

वो कहने लगे: आपकी चुचि बहुत ही सख़्त है. ऐसी चुचियाँ कभी नही देखी.

पीछे से वो मेरी पूरी पीठ पर चूमने लगे, और ब्रा का हुक खोल दिया. मेरी ब्रा मेरे दोनो हाथो में झूलने लगी, जो मैने हटा दी. अब वो मेरे दोनो बूब्स पर किस करने लगे, और आचे से निपल्स चूसने लगे. मैं उपर से पूरी नंगी थी. परेश जी ने अपनी पंत और अंडरवेर निकाल दिया.

मैं पेड़ के पत्तों के उपर लेट गयी, और परेश जी ने मेरी सारी उपर कर दी. अब उन्होने मेरी पनटी को निकाल दिया, और मेरे पैर को खोल दिए. उसके बाद उनका बड़ा सा लंड मेरी छूट के उपर रखा. मैं थोड़ी दररी हुई थी. एक तो पहली बार ऐसे किसी गैर मर्द से खुले आसमान के नीचे छुड़वा रही थी, और परेश जी का लंड काफ़ी बड़ा भी था.

मैने अपने हाथो की मुट्ठी बंद कर दी. परेश जी ने एक धक्का मारा और आधा लंड छूट में उतार दिया. मेरी तो छूट फटत गयी. हल्का खून भी निकल गया. मैं चीखती रही, क्यूंकी जंगल के रास्ते पर कों मुझे सुन रहा होगा. 15-20 धक्के मेरी आधे लंड से चुदाई होती रही.

फिर उन्होने एक ज़ोर से झटका लगाया, की पूरा लंड छूट फाड़ कर अंदर चला गया. मैं चिल्ला रही थी, और परेश जी मेरी चुदाई करे जेया रहे थे. थोड़ी देर मेरी मेरी चीखें मधुर बन गयी. मैं परेश जी के बड़े लंड के मीठे दर्द को एंजाय कर रही थी.

अब परेश जी मेरे उपर आ कर मुझे किस करने लगे. मैने उनको कस्स कर गले लगा लिया. परेश जी से मिलने वाला हर एक धक्का मुझे जन्नत की सवारी करवा रहा था. ऐसे ही वो मुझे छोड़ते रहे, और मैं 2 बार झाड़ गयी. अब मैं खड़ी हुई, और उनको पट्टियों पर लिटा दिया, और उनके लंड पर बैठ गयी. अब उनका पूरा लंड मेरी छूट में उतार रहा था.

मैं लंड पर उछाल रही थी, और रंडी की तरह अपने बूब्स खुद से दबा रही थी. मैं उनके लंड की तारीफ कर रही थी. किसी भी मर्द के लंड की तारीफ करो तो वो खुश हो जाता है. परेश जी का भी यही हाल था. मेरे मूह से उनके लंड की तारीफ सुन कर उनकी खुशी का ठिकाना नही था. वैसे भी उनका लंड बहुत ही तगड़ा था. बहुत मुश्किल से किसी मर्द में ऐसा लंड मिलता है. जब मैं तक गयी तो खड़ी हो गयी, और अब मैं पेड़ का सहारा लेकर घोड़ी बन गयी.

परेश जी पीछे से मेरी छूट छोड़ने लगे. बहुत मज़ा आ रहा था. वो मेरे पर लट्तू हो गये थे. अब तो मेरी तगड़ी चुदाई होने लगी थी. 10 मिनिट ऐसे ही चुदाई के बाद उनका निकालने वाला था. तो मैने कहा मैं आपका रस्स पीना चाहती हू.

फिर मैं घुटनो पर बैठ गयी, और लंड चूसने लगी. मैं एक हाथ से लंड हिलने लगी. मैं किसी रंडी की तरह उस दिन चुड रही थी. ये सब मैं परेश जी आँखों में देख कर कर रही थी.

वो मुझे हवस भारी निगाहों से देख रहे थे. अब वो मेरे मूह में झाड़ गये. कुछ बूंदे मेरे चेहरे और बूब्स पर गिरी, जो मैं उंगली से लेकर चाट गयी. फिर मैं हासणे लगी, और वो भी मुस्कुरा रहे थे. हमने फिर अपने कपड़े पहने, और पानी से मूह धो लिया. परेश जी ने अपने हाथो से मेरी ब्रा पहनाई, और मेरे बूब्स दबाए. मैने भी उनको कस्स कर गले लगा लिया.

परेश जी: आप बहुत अची हो. मुझे ऐसा सुख आज तक किसी ने नही दिया. मैं आप से प्यार करता हू.

संगीता: आप भी असली मर्द हो. मेरी चुदाई ऐसे कभी नही हुई. पहली बार पति को धोखा दिया है (मैने रोने का नाटक किया ताकि वो मुझे रंडी ना समझे). मैं आपकी मौसी सास हू, ऐसे आपके साथ रिश्ता नही बना सकती थी. मुझसे बहुत बड़ी ग़लती हो गयी. किसी को पता चला तो मेरी बदनामी होगी. कोई क्या सोचेगा मेरे बारे में?

परेश जी (मेरे आँसू पोंछते हुए): आपने कुछ ग़लत नही किया है. हमारा रिश्ता किसी को पता नही चलेगा. ये बात हम दोनो के बीच ही रहेगी. मैं आपसे प्यार करता हू. अब से मैं आपको हमेशा खुश रखूँगा.

मैने परेश जी को कस्स कर गले लगा लिया, और लिप्स किस करने लगी. फिर हम स्कूटर से घर जाने लगे. जब कोई नही होता रास्ते पर तो मैं उनको टाइट हग करके बैठ जाती, और पीछे से उनके गाल पर किस करती थी. परेश जी मेरे से बहुत खुश थे. मैने पुर रास्ते उनको मेरे प्यार में फ़ससा दिया. अब वो वही करने वाले थे जो मैं करने को कहती.

घर जेया कर हमने ये बोल दिया की स्कूटर का टाइयर पंक्चर हो गया था तो उसमे टाइम लग गया. उसके बाद हम कभी-कभी फोन पर बातें करने लगे.

आपको नेक्स्ट पार्ट में बतौँगी और कों मेरी चुदाई करने वाला है. आपको स्टोरी अची लगे तो आप जिस रिश्तेदार को छोड़ना चाहते हो, उसके साथ शेर करे और कॉमेंट्स करे. और अपना फीडबॅक मूडछंगेरबोय@गमाल.कॉम पर मैल करे.

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