रंडी मा ने मामा का बिस्तर गरम किया

हेलो दोस्तो, एक बार फिर से आपका स्वागत है मेरे इस स्टोरी मे. पिच्छले कहानी मे आपने देखा की कैसे मेरी मा इंदु दो मर्दो से, नरेश और बशीर से चुड गयी.

अब आयेज…

मई बिके से जेया रहा था,और पिच्चे बैठी मा से बात भी कर रहा था.

मे- सॉरी मम्मी मेरे वजह से उनलोगो के साथ आपको ये सब करना पड़ा.

मा- कोई बात नही बेटा, मुझे थोड़े कुछ हुआ है. देखो मई तो बिल्कुल ठीक हू, वो लोग कुछ बुरा नही किए मेरे साथ.

मे- फिर भी मम्मी, वो लोग के साथ ये सब…तुम्हे कितना बुरा लगा होगा.

मा- बुरा क्या लगेगा, ये तो सब करते है ना.. और तेरे पापा भी तो करते रहते है ना मेरे साथ, ये तो मज़ा के लिए ही करते है, मुझे भी तोड़ा भी दुख नही हुआ और तू भी ये सब के लिए खुद को दोष मत दो, समझे मेरे लल्लू लाल.

मुझे ये सून के बहोट मज़ा आया और अब मम्मी से ये सब चुदाई वाली बात खुल के करने की हिम्मत आ गयी.

मे- मम्मी तुमको सच मे मज़ा आआया उनसे चूड़ने मे?

मा- हन बहोट दीनो बाद मुझे इतना मज़ा आया.

मे- पापा के साथ नही आता क्या?

मा- एक तो वो साप्ताह मे 1-2 दिन छोड़ते है और उतना मज़ा भी नही देते.

मे- और मम्मी पेशाब की महक क्यू आ रही है?

मा- ये सब चुदाई मे होते रहता है, लल्लू.. कहते हुए हसी.

मे- कैसे? बताओ ना मम्मी प्लज़्ज़्ज़्ज़..

मा- मजेदार चुदाई मे कभी कभार औरत का मूट निकल ही आता है, इसमे बहोट मज़ा आता है.

मे- ऊऊऊऊ…चलो मम्मी तुम खुस तो मई भी खुस, मई अपनी मा के खुशी के लिए कुछ भी करूँगा.

मा- ऊ मेरे प्यारे बेटे.. कहते हुए काश कर पकड़ी और पिच्चे से मेरे नेक पे एक चुम्मा दे दी.

मम्मी भी अब मेरे सामने खुल के बात करने लगी और मई भी, थॅंक्स तो नाओ वाला नरेश आंड बशीर.

कुछ देर मे हम लोग नानी के य्चा पहुच गये. अभी शादी मे 4 दिन थे, छ्होटी मोटी रस्म आज से स्टार्ट हुई थी. मेरी मा एकलौती बुआ थी जिसको बहोट सी रस्म करनी थी.

जैसा की मेरी नानी घर डियारा इलाक़ा मे है, अनडिवेलप्ड एरिया. नानी घर पक्के का तो था, बड़ा सा, लेकिन उसमे अलग से बातरूम लेट्रीन की व्यवस्था नही है. नहाना है तो घर के पिच्छ बने कुआ (वेल) या फिर घर के सामने वेल छपकाल पर. औरते पिच्चे कुआ पर ही नहाती है अक्सर.

मई नानी घर के सामने वाला पीपल के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर बैठा था. पास मे ही 3 लोग और बैठे थे. सबकी उमर 40-50 के बीच ही थी.

तभी मेरी मा आस पड़ोस मे घूमने के लिए मामी के साथ निकली. अयाया क्या लग रही थी मेरी मा, कुट्टी साली एक नंबर की रंडी जैसी लाल नेट वाली सारी जिसके अंदर कला पेटीकोत पूरा नज़र आ रहा था. और सारी भी नाभि से बहोट नीचे बाँध रखी थी.

घर पर तो इतना कभी नीचे से नही पहनी थी. ब्लाउस भी यहा पता नही कहा से सेक्सी वाली ले आई थी. आयेज से समझो 80% चुचि तो सॉफ दिख रही थी. एक इंच और नीचे होता तो कला निपल भी दिख जाता. पल्लू को गोल कर के रस्सी जैसा ब्ना कर डाली हुई थी, पल्लू के होने ना होने का कोई फयडा नही.

इतनी बड़े बूब्स पे पल्लू तो धागे जैसे ही ल्ग रहे थे. पिच्चे से ब्लाउस सिर्फ़ एक डोरी पर अटका हुआ था, पूरा पीठ नंगा, इतना सेक्सी पीठ उपर से आध नंगी चुचि, गहरी नाभि. किसी की भी लंड टाइट कर दे. जी कर रहा था अभी ही जाो और पटक के मा की सारी रस चूस लू. बेटा हो कर ज्ब मेरा ये हाल था तो दूसरे मर्दो का क्या हो रहा होगा.

तभी पास मे बैठा पहला आदमी बोला- ये बूरछोड़ी कब आई?

दूसरा आदमी- कों? इंदु?

पहला आदमी (वासना भारी आवाज़ मे)- हन इंदु..चुचि वाली, भोसदीवाली, रंडी साली!

दूसरा आदमी- पता ना भोसदीवाली कब आई, पर पूरा रांड़ लग रही है.

तीसरा आदमी- तू सब यही करेगा खाली, ये ना की बेचारी को लंड का सूख दो, देखने से ही रंडी लंड की भूखी लग रही है.

पहला आदमी- इस बार ना छ्चोड़ेंगे रंडी के जाने से पहले हम तीनो इसके छूट मे अपना रस नही डाले तब कहना, तीनो छोड़ेंगे एक साथ.

तीसरा आदमी- ना रे, पहले शादी हो जाय दो उसके बाद इश्स रंडी की सवारी किया जायगा.

मई बैठा अपनी मा की चुदाई का प्लॅनिंग सुन रहा था और मॅन ही मॅन खुश भी हो रहा था. कुछ देर बाद मैने मामी को आते देखा पर मम्मी उसके साथ नही थी.

मई पुचछा – मामी,मम्मी कहा रह गयी?

मामी- दिनेश भैया के घर पर है, बोली तोड़ा देर बाद आएगी.

दिनेश (आगे 52) नानी घर के पड़ोस मे ही रहता था 4 घर के बाद. मई तो उसे दिनेश मामा ही कहता हू पर पापा उससे बहुत गुस्सा रहते है. दिनेश से ही मेरी मा की शादी होने वाली थी, दिनेश नाना के काश आदमी है. दिनेश मामा आचे आदमी थे, बहोट प्यार देते थे और मुझे मम्मी और मामा के अफेर का कोई डाउट भी नही था.

मई भी दिनेश मामा से मिलने उनके घर गया. घर खाली था, शायद दिनेश मामा के घर के लोग शादी वेल घर मे थे. फिर थोड़ी देर बाद मुझे मोनिंग की आवाज़ आई. मुझे डाउट हुआ, मई उसके तरफ बढ़ा, रूम के दरवाजा तो खुले थे पर मई खिड़की से ही देखना सही समझा.

अंदर देखने से मेरा आँख खुला के खुला ही रह गया. मेरी मा पूरी नंगी थी टाँग फैला कर नीचे लेती हुई और दिनेश मामा भी नीचे से नंगे हो कर मम्मी पे चढ़े हुए थे. मम्मी कस के उसको अपने बाहो मे दबाई हुई थी और दिनेश मामा ने मम्मी के होतो को चूस भी रहे थे और नीचे छूट मे धक्के भी मार रहे थे और बीच मे चुचिया भी दबा रहे थे.

मा (आँखे बंद कर के)- आआआः…अहह….उम्म्म्ममम….अहह….अहह…आहह दिनईएशह… आराअम सीईई…

दिनेश- चुप्प्प रंडी, इतना दिन बाद तो हाथ आई हो आराम से कैसे छोड़े तुम्हे.. कहते हुए उसने मम्मी के निपल ज़ोर से दबाया.

मा चीख पड़ी- उईईईईईईईईईईई माआआआआआआअ आआआआः मररर्र्ररर गाइिईईईई.

दिनेश- चुप रंडी, तुझ जैसी को तो यहा के कुत्ते भी बिना छोड़े ना जाने दे, ज़्यादा चिल्लेयगी तो मई अपना घोरा से तेरी छूट का गूफा बना दूँगा.

चीख को नज़र अंदाज करते हुए उसने मा की छूट मे रेल गाड़ी चलानी और तेज कर दी. बीच बीच मे कभी निपल दबा कर मा की चीख निकलता तो कभी मा की गोरी चिकने पेट मसल कर. और मा की आआआआः उहह उम्म्म माअरर्र्र्ररर गयी सून कर दिनेश मामा और मई दोनो उत्तेजित होते.

मई मूठ मरते अपना पानी गिरा लिया, लेकिन चुदाई अभी चल ही रही थी.

अब पोज़िशन बदल गयी थी, मा एक करवट ले के लेती हुई थी और मामा पिच्चे से हग कर के मा की छूट मे लंड डाले हुए थे और दोनो चुचिया हाथो से मसल भी रहे थे.

मुझे सैइटानी सूझी, मई तोड़ा पिच्चे जेया कर – मम्मी…मम्मी..कहा हो तुम.. कहते हुए रूम मे घुस गया, जहा मेरी मा रंडियो के त्राह पेल्वा रही थी.

मेरे आवाज़ करने से रूम मे घुसने तक मे 10 सेक ही ल्गा था. जैसे ही अंदर घुसा तो उन दोनो के उपर चदडार था जो सीना से लेकर घुटने तक ही दोनो को ढके हुए था. दिनेश मामा अभी भी मा के पिच्चे चिपका हुआ था. उसके हाथ मा के पेट पर और दूसरी हाथ चुचि पर था जो चादर के उपर से ही पता चल रहा था.

मुझे देख कर मा मुस्कुराते हुए- अरे बेटा ऋषि तू य्चा क्या कर रहा है? मा को कुछ समझ नही आ रहा था की क्या करे.

मैं- हा..मा..दिनेश मामा से मिलने आया था.

ये कहते हुए मैने दिनेश मामा के पैर च्छुने के लिए बढ़ा. मामा का पैर मा के पैर के उपर थी और जैसा की मैने बताया, दोनो को चादर गुटने तक ही ढके हुए था. मा की गोरी जांघे भी दिख रही थी जिसके पिच्चे मामा शायद पिच्चे से अभी भी छूट मे लंड घुसे चिपके थे. मैने मामा के पैर च्छू के परणाम किए.

मामा जी- खुश रहो बेटे, कैसे हो?

मैं वाहा रखे कुर्सी पे बैठते हुए- ठीक हू मामा जी, आप दोनो ऐसे क्यू लेते हो और मम्मी तुमने सारी क्यू खोल रखी है? (हाथ मे ब्लाउस उठाते हुए) और ये ब्लाउस भी नीचे है.

मा घबरा गयी, उनके पास कोई जबाब नही था. मई चाह रहा था वो दोनो खुद ग़लती माने और मुझसे माफी माँगे. लेकिन नही, वो दोनो तो मुझे बेबकूफ़ बनाने मे ल्गे थे.

मामा जी- वो तेरी मम्मी की सारी मे लाल चीटी घुस गयी थी तो वही निकल रही थी. निकलते तक गयी तो मैने बोला यही लेट जाओ सारी बाद मे पहन लेना.

मामा जी खुद को रोक नही पा रहे थे और वो पिच्चे से अपना गांद धीरे हिला रहा थे. मा की चुदाई जारी थी. मा भी खुद को रोक नही पा रही थी, मा का फेस देख कर कोई भी बीटीये सकता था की उसकी छूट लंड खा रहा है.

ममाजी- और बेटा गाओ घूमे की नही?

मे- नही ममाजी, अभी कहा घूम पाया.

ममाजी- घूमना चाहिए ना, घूम लेना.

यह कहते हुए मामा जी ने धक्के तेज कर दिए. शायद वो झड़ने वेल थे इसलिए खुद को रोक नही पाए, शायद वो मेरे से डरते नही थे क्यूकी कोई अँधा भी उनके हिलते और मा की सिसकारी से बीटीये देता की चुदाई चल रहा है.

मा बेचारी के हाथ मे कुछ नही था. जोरदार चुदाई से उनकी भी आआआः निकल गयी. मा ने भी आँख बंद कर के एंजाय करना ही उचित समझा. शायद मा भी झरने वाली थी और आख़िरकार ममाजी ने अपना माल मा के पैरो पर ही गिरा दिया. सफेद चादर मा के छूट के पास गीली हो चुकी थी.

ममाजी को झड़ने के बाद फिर मेरा ध्यान आया और बोले अब लाल चीटी तुम्हे तंग नही करेंगे इंदु.

मा मुस्कुराते हुए- हन अब आराम मिला भैया.

मा को पता था उसका जवान बेटा सब समझ रहा है.

दिनेश मामा – बेटा, बगल वेल कमरे मे देखो तो मेरी गारी की चाभी है क्या.

मई चला गया चाभी लेने. टीबी पिच्चे से ममाजी आए लूँगी लपेट कर और बोले – रहने दो नही मिल रहा तो.

फिर हम बाहर बात करने ल्गे. तभी मा आई अंदर से, चेहरे पर ख़ुसी और तोड़ा सा दर भी झलक रहा था. इश्स चुदाई मे मा के बाल बिखर गये थे.

मा ने सिर्फ़ एक रब्बर से बाल को समेत कर बाँध लिया. खुली हुए घनी काले बाल, गोरी नंगी पीठ पर तो कहर ही ढा रही थी. मेरे पास आ कर बोली – चलो ऋषि घर चलते है.

तभी ममाजी ने मुझे 2000 रुपये दिए आशिरबाद के रूप मे. आज तक तो 500 ही दिया करते थे आशिरबाद मे. शायद मा की चुदाई का रते भी मुझे ही दे दिए. मैने चरण स्पर्श किए और मा के साथ नानी घर के तरफ बढ़ गया.

इश्स तरह से मा एक ही दिन मे 3 लंड (नाओ वेल नरेश, बशीर और दिनेश मामा) ले चुकी थी.

आज मा के चेहरे पे अलग ही खुशी देखने को मिल रही थी. शायद पापा से दूर वो आज़ाद महसूस कर रही थी. आज़ादी पे पहले ही दिन 3 लंड खा चुकी थी मा और उससे बड़ी बात ये, दिन अभी पूरा ख़तम भी नही हुआ था.

क्या मेरी मा (रांड़ इंदु) आज 3 ही लंड खा पायगी या और भी लंड का जुगार हो जाएगा? ये जानने के लिए नेक्स्ट एपिसोड का वेट करे.

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