रंडी मा और बहन के सच की चुदाई सेक्स स्टोरी

नमस्कार, मेरा नाम राहुल है, और मैं 18 साल का सिंपल सा दिखने वाला लड़का हू. फिलहाल मैं काफ़ी समय से अपनी मों जिनका नाम अनिता है, जो की 46 की है, और अपनी बड़ी बेहन, जिसका नाम आरती है, जो की 29 की है, उनके साथ देल्ही के एक बॅक्वर्ड मोहल्ले में किराए पर रह रहा हू.

मेरी मों और दीदी की एक ख़ासियत है की दोनो डिवोर्स्ड है. उस मोहल्ले को मैं नही जानता था, पर मैं हैरान था की सब मेरी मों और दीदी को जानते थे. तो कुछ मैं आपको मेरी मों और दीदी के बारे में बताता हू.

मेरी मों एक-दूं गोरी है. इस उमर में भी वो एक-दूं मेंटेंड है. उन्हे देख कर लगता नही वो 46 की है. उनका फिगर लाजवाब है. मों के बूब्स इतने बड़े नही है, मगर चूतड़ अची शेप में है. और मेरी दीदी चोकॉलती कलर की ब्यूटिफुल सी लड़की है.

उनके बूब्स और गांद बहुत टाइट है. बूब्स उनके बड़े है, और गांद उनकी थोड़ी सी बाहर को शेप में है. दोनो ही सेक्युलर थिंकिंग वाली है, और दोनो का ही वे ऑफ टॉकिंग काफ़ी फ्रेंड्ली है. काफ़ी जवान लड़के और अंकल उनको उठा के अपने लंड पे उछालना चाहते है.

फिलहाल तो हम उस मोहल्ले में रहते है जहा की मेरी मों डॅन्सर भी रह चुकी है. आक्च्युयली मों इस इलाक़े से वाक़िफ़ है, और ज़्यादातर सब लोग मों को जानते है. मगर मैने जिस-जिस से पूछा की इलाक़ा कैसा है, सब ने बोला रंडी बाज़ार है ये, एक-दूं बुरा इलाक़ा है.

यहा के सारे मर्द बहुत ज़ालिम है. औरते छोड़-छोड़ कर पानी की नादिया बहा देते है उनकी छूटों से. हम इस मोहल्ले में दीदी के डाइवोर्स के कुछ सालों बाद आए थे. मों और दीदी को यहा पर काफ़ी लोग जानते थे. मगर मुझे ज़्यादा कोई पहचानता नही था.

उस मोहल्ले में आने के बाद जिन-जिन को पता लगा की मैं अनिता का बेटा हू, वो सब मुझे तिल वाली आंटी का बेटा कहते थे. मुझे समझ नही आता था, इसका मतलब. तभी मोहल्ले में मेरे 2 दोस्त बने. एक था सलीम, और दूसरा इक़बाल. दोनो भाई थे, और उनकी टेलर की दुकान थी.

सलीम की उमर 27 साल थी, और इक़बाल 26 का था. वो दोनो काफ़ी स्ट्रॉंग और दिखने में काले रंग के थे. मेरे साथ दोनो की दोस्ती अची हो गयी, और हम काफ़ी फ्रॅंक्ली बात किया करते थे.

एक दिन की बात है, मैं ऐसे ही घर से निकला तो वाहा मुझे उस मोहल्ले के पुराने कसाई-खाने के मलिक अब्दुल चाचा मिले. उनकी उमर 64 साल की थी, और उनका शरीर आज भी मर्दाना था. तगड़े से दिखने वाला आदमी था वो. उन्होने मुझसे पूछा-

अब्दुल चाचा: तुम क्या नये हो बेटा यहा?

मैने कहा: जी अंकल.

अचानक तब वाहा से दीदी और मों गुज़र रही थी. मों और दीदी दोनो ने टाइट कपड़े पहने थे. दीदी ने तो शॉर्ट्स पहनी थी. अब्दुल चाचा को पता नही था की वो दोनो मेरी मों और दीदी थी.

अब्दुल चाचा: बेटा वो देख 2 गड्राई घोड़ियान.

मैने यही शो किया की जैसे मैं जानता ही नही हू दोनो को.

मैने कहा: चाचा जी, आप जानते है इन्हे?

अब्दुल चाचा: ये नचनिया रही है यहा की.

मैने कहा: चाचा आपको कैसे पता?

अब्दुल चाचा: 2 बार नाचा कर इसका नमकीन पानी मैने भी चखा है. बेटा तेरी उमर कितनी है?

मैने कहा: चाचा 19.

अब्दुल चाचा: बेटा जितनी तेरी उमर है, उससे ज़्यादा मर्दों के लिए ये टांगे फैला चुकी है रांड़. बीच में तेरी उमर के लड़कों से चुड गयी है रांड़.

मैं शर्मा गया. मैने सोचा अंकल मेरी मों को काफ़ी हद तक जानते थे. सोचा इनसे पूछा जाए की मों को तिल वाली आंटी क्यूँ कहते है? मगर जब मैने पूछा तो उसका जवाब आया.

अब्दुल चाचा: बेटा इस रांड़ की गांद के सुराख (च्छेद) के पास एक तिल है, जो पुर मोहल्ले ने देखा है. क्यूंकी सब ने बजाया है, इसलिए.

मैने सोचा बहनचोड़ तभी सारे मुझे तिल वाली आंटी का बेटा कहते है. उस दिन तो अब्दुल चाचा ने मेरी आखें खोल दी. अब इसके आयेज मैं अब क्या करू मुझे समझ ही ना आए. लेकिन एक दिन मैने मों से खुद ही पूच लिया-

मैं: सारे मुझे तिल वाली आंटी का बेटा कहते है, इसका क्या मतलब है?

मों के चेहरे पे एक स्माइल आई और वो बोली-

मों: बेटा आपको पता है ना मैं एक प्रोफेशनल डॅन्सर रह चुकी हू. बस इसी वजह से उस टाइम ये माशूर था की मैं तिल-खिल कर नाचती हू.

मैने सोचा मों झूठ कितना अछा बोलती है, और ज़्यादा गौर नही किया. कुछ दीनो बाद दीदी को किसी काम से अपने बॉस के साथ शहर से बाहर कुछ दीनो के लिए जाना पड़ा. तब मैं और मों एक-दूं अकेले थे घर में. मैं उस टाइम सलीम और इक़बाल से मिलने चला गया.

जैसा की मैने आपको बताया की सलीम और इक़बाल मेरे साथ काफ़ी फ्रॅंक थे, और हम खुल के बात किया करते थे.

इक़बाल: भाई कैसा है तू?

मैने कहा: मैं ठीक हू. तू कैसा है?

इक़बाल: मैं भी बढ़िया.

सलीम: भाई तेरी मा और बेहन कैसी है?

मैने कहा: दोनो ठीक है.

इक़बाल: तेरी बेहन नही दिखती आज-कल.

मैने कहा: क्यूंकी वो अपने बॉस के साथ काम के सिलसिले में बाहर गयी है.

सलीम: फिर तो वो प्रमोशन लेकर ही आएगी.

मैने कहा: वो कैसे?

सलीम: बॉस छूट जो मारेगा.

ये कह कर तीनो हम हासणे लगे.

सलीम मुझे कहता है: भाई मज़ाक था.

मैने भी इस बात को मज़ाक ही समझा.

इक़बाल: तेरी मा और बेहन डाइवोर्स के बाद कैसे संभालती है?

मैने पूछा: इक़बाल तुम कहना क्या चाहते हो?

सलीम: यही पूच रहा है वो की दोनो सेक्स के लिए क्या करती है? दीदी के पास तो बॉस है, पर तेरी मा के पास क्या है?

मैने कहा: नही भाई, वो दोनो संस्कारी है, नही करती.

इक़बाल: भाई बुरा मत मानना. हम दोनो टेलर है. जितनी दोनो रंडियों की गांद मटकती है, दोनो छिनाल आज भी मर्दों से ज़ोर लगवती है.

मैने कहा: भाई मैं इन बातों के बारे नही सोचता, क्यूंकी मैं ध्यान नही देता.

इक़बाल: सुना है तिल वाली रांड़ भी कहते है तेरी मा को.

मैने कहा: तुझे किसने बोला?

इक़बाल: पुर मोहल्ले में माशूर रही है. सब ने देखा है. हम भी तो जब आंटी को मिलते है, तिल वाली आंटी कहते है.

बस इतनी बातें होने के बाद मैं वाहा से चला गया. मैं इससे ज़्यादा नही सुन सकता था उनकी.

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