प्रिंसिपल सर के साथ मस्ती

दोस्तो यूँ तो मैने कई बार गैर मर्दों से मज़े किए हैं उनमें से सबसे ज़्यादा मज़े मेरे स्कूल केप्रीसिपल सर के साथ कैसे लिए ये कहानी इसी बारे मे हैमैं एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाने जाने लग गई थी.. उसमें मेरे साथ एक मेरे मोहल्ले की औरत भी पढ़ाती थी.. उसका नाम रोशनी था.. वो और मैं स्कूल में और बाहर भी बहुत अच्छे से रहते थे।
वो और मैं दोनों बहुत सुंदर थीं.. वो मुझे भाभीजी कह कर बुलाती थी.. क्योंकि मैं उससे बड़ी जो थी।
रोशनी ने नया मोबाइल लिया था.. वो स्कूल में भी मोबाइल ले जाती थी और वहीं मुझे ट्विटर चलाना सिखाती थी।
फिर उसने धीरे-धीरे मेरी भी ट्विटर पर आईडी बना दी और मुझे ट्विटर चलाना सिखा दिया.. मुझे भी इसमें मजा आने लगा.. मुझे लगा कि इधर हम किसी को भी दोस्त बना सकते हैं.. बातें कर सकते हैं.. अपनी फोटो दिखा सकते हैं.. तो मुझे इसमें बहुत मज़ा आने लगा।
फिर एक दिन हमारे स्कूल के प्रिंसीपल की फ्रेण्ड रिक्वेस्ट आई.. और वे मेरे साथ एड हो गए। मैं और रोशनी स्कूल में खाली समय में बैठ कर प्रिंसिपल सर से ट्विटर पर बातें करते.. वो ऑफिस में बैठे रहते थे।
रोशनी ने ही मुझे बताया था- कोमल भाभी जी.. प्रिंसिपल सर आपको बहुत घूर-घूर कर देखते हैं.. शायद आपको पसंद करते हैं।
मैंने कहा- हट पगली.. मैं ऐसी-वैसी नहीं हूँ..
हम दोनों हँसने लगे और फिर इसी तरह धीरे-धीरे हमारी बातें आगे बढ़ने लगीं।
फिर मैंने भी फोन ले लिया और स्कूल भी ले जाने लग गई।
गाँव में सब लोग मुझे एक शरीफ़ और सीधी औरत समझते थे।
धीरे-धीरे प्रिंसिपल सर के साथ मैं बातें करने लग गई.. मुझे भी वे अच्छे लगने लग गए थे..
फिर एक दिन स्कूल में कोई मीटिंग थी.. जिसमें सभी अध्यापक आदि बैठे थे। प्रिंसिपल सर मेरी तरफ़ देख कर आँख मार रहे थे.. जिसका मुझे और रोशनी को ही पता चल पा रहा था।
स्कूल में वे सबसे ज्यादा सेलरी भी रोशनी और मुझे ही देते थे.. मतलब कि रोशनी ने मेरी प्रिंसिपल सर से सैटिंग करवा दी थी।
फिर जब मीटिंग ख़त्म हुई तो सब एक एक करके चले गए.. प्रिंसिपल सर ने मुझसे कहा- कोमल मैडम.. रोशनी मैडम.. आप दोनों थोड़ा इधर ही रुकना.. रजिस्टर का काम बाकी है।
तो बाकी सब लोग चले गए.. मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा कि प्रिंसिपल सर ने हमें क्यों रोका।
ऑफिस का गेट थोड़ा ऐसे ही खुला था.. तो प्रिंसिपल सर ने रोशनी से कहा- आप वहाँ गेट के पास थोड़ा खड़ी हो जाओ.. ताकि कोई अन्दर न आने पाए, मैं और कोमल मैडम अन्दर ही थोड़ा काम कर रहे हैं।
रोशनी भी एक शादीशुदा औरत थी.. वो भी जानती थी कि कौन सा काम होना है। वो मन ही मन हँस रही थी कि आज तो प्रिंसिपल सर कोमल भाभी की चुदाई करके ही छोड़ेंगे।
मैं अन्दर कमरे में चली गई और प्रिंसिपल सर और मैं चिपक कर खड़े थे।
प्रिंसिपल सर ने कहा- कोमल.. मेरी जान आई लव यू.. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ.. यहाँ तक कि तुमसे शादी भी करने के लिए तैयार हूँ.. हम दोनों ये शहर छोड़ कर कहीं भाग चलते हैं।
मैंने कहा- प्रिंसिपल सर.. आप यह क्या बोल रहे हो? आप भी शादीशुदा हो और मैं भी.. हमारी फैमिली है.. बच्चे हैं!
‘तो कोमल मुझसे प्यार नहीं करती हो क्या?’
‘करती हूँ ना.. राज..’
प्रिंसिपल सर का नाम राज था.. उन्होंने कहा- कहाँ कर रही हो.. इतनी तो दूर खड़ी हो?
‘नहीं राज.. मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.. आई लव यू राज..’
मैं उसके गालों को चूमने लग गई और राज ने मुझे बाँहों में भर कर ज़ोर से दबाने.. और चूमने-चाटने लगा।
अब एक मर्द की बाँहों में जाते ही मेरी सीत्कारियां निकलने लगीं जो बाहर खड़ी रोशनी तक को सुनाई दे रही थीं।
वो बाहर खड़ी हँस रही थी और राज ने मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे मम्मों को चूमने लगे।
मैं मर्द की सुंगध पाते ही अपना आपा खोने लगी.. और मैंने अपने आपको प्रिंसिपल सर की बाँहों में छोड़ दिया।
कुछ ही पलों में मैं भी कामातुर होकर उनको चूम रही थी.. साथ जवाब भी दे रही थी।
प्रिंसिपल सर ने मेरे साड़ी खोल दी.. ब्लाउज भी खोल दिया.. पेटीकोट भी जमीन पर मेरे पैरों में गिर कर माफ़ी मांगने लगा था।
अब मैं सिर्फ़ लाल रंग की ब्रा और हल्के बैगनी रंग की पैन्टी में राज के लम्बे बैगन को लेने के लिए तैयार खड़ी थी।
मुझे शर्म आने लग गई थी.. कि रोशनी बाहर खड़ी सब समझ रही है।
मैंने चिरौरी की- अभी नहीं प्रिंसिपल सर.. इस वक्त हम लोग स्कूल में हैं और इस बीच कोई भी आ गया तो सबकी बदनामी होगी.. मेरा तो ससुराल है..
‘नहीं कोमल रानी.. बहुत दिनों बाद मौका मिला है.. आज तो मैं तुम्हारी चुदाई करके ही तुमको जाने दूँगा।’

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