पति,पत्नी,सास ,ससुर की रासलीला

मेरा नाम पार्थो है और मैं अपने मा बाप का एकलौता बेटा हूँ. मैं २८ साल का हूँ. मैं रोज़ एक्सेर्सिसे करता हूँ और नहाने के पहलेशारेर पर खूब तेल माता हूँ. मेरा तंदुरस्ती इसीलिए काफी अच्चीहाई. मेरा लुंड करीब १०” लुम्बा और करीब ३ ½” मोटा है. पहलेमेरा लुंड का सुपर काफी लाल रंग का था लेकिन अस परोस मी रहनेवालीन के छूट छोड़ छोड़ कर अब मेरा सुपर कला पर गया है. मैं अब तक करीब १० १२ औरतों को छोड़ चूका हूँ. हमारे परोस किऔरतें मुझसे कई बार अपनी छूट चुदा चुकी हैं और जब मौकमिलता है मैं उनकी छूट और गंद मी अपना लुंड पेल कर जम कर्चुदै करता हूँ. अब मेरी शादी हो गयी है और अब परोसिओं कोचोड़ने का मौका बहुत काम मिलता है.मेरे पत्नी का नाम नुपुर है और व्हो एक सुन्दर भरे बदन वाली औरत्हाई. मेरे विफे के चुन्ची का साइज़ ३६क् और चुतर का साइज़ करीब ४०.

हमारा परिवार बहुत ही कांसेर्वतिवे है लेकिन शादी के बाद नुपुरको हमारे परिवार का कांसेर्वतिवे रहन सहन अच्छा नही लगा.उसने हमसे इस बारे मी बात कि और मैंने उसे बताई कि हाँ मैं भी इस्तारफ कि रहन सहन से परेशां हूँ, लेकिन मैं कुछ नहे कर सकता.हाँ अगर तुम कुछ कर सकती हो तो तुम्हे हमारी तरफ से खुला चुथई. इसके बाद नुपुर चुप हो गयी और अपना काम मी लग गुई. एक दिन्मै और नुपुर रात को चुदाई कर रहे थे. नुपुर मरे उत्तेजेना केकफी बर्बर रही थी, जैसे हाँ हाँ मेरे रजा छोडो मुझे, और्जोर से छोडो, फार दो आज मेरी छूट को लेकिन अपना लुंड सम्हाल केराखना अभी तो तुम्हे मेरी गंद भी पह्रनी है.मैं नुपुर कि छूट जोर जोर से छोड़ रह था और बर्बर रहता, “चुप चिनल रंडी, पहले अपनी तंगो को और फैला अपनी चूत्धिला कर और मेरा लुंड पुरा का पुरा उंदर घुसने दे,

साली कि चोत्त्मे हमेशा ही खुजली रहती है, आज मैं तेरी छूट छोड़ छोड़ कर्भोसरा बना दूंगा. आरे मेरी चुडैल रानी जरा धीरे धीरे bol,जैसे ही तेरे छूट को मेरा लुंड दिखता है बस तू बर्बराने लग्तीहाई, जितना लुंड प्लिवती है उतना ही चिल्लाती है. धीरे धीरे बोल्तेरे ससुर और सास बगल के कमरे मी है, व्हो कई कहेंगे. नुपुर ने मुझको अपनी बाँहों मी भर कर अपनी चुतर उछालते हुए कही, “आरे सास और ससुर मेरा चिल्लाना सुन सुम्झेंगे कि उनका लरका अपनी बीवी किचूत छोड़ रह है और इससे व्हो भी गरमा कर अपनी चुदाई शुरू कर्देंगे. अच्छा ही होगा मेरी सास कि छूट चुदेगी, दिन भर बहुत्बोलती है मन करता है कि उनकी छूट मी किसी कुत्ते का लुंड पिल्वाडून.”मैं बोला “चुप हरामजादी, सास ससुर कि चुदाई कि बात नहीकारते.” नुपुर तुनक कर बोली, “कुओं न बोलूं, क्या तिम्हारे मा बापके छूट और लुंड नही है? क्या उन्होने चुदाई का मज़ा नही लियाहाई, अगर ऐसा है तो तुम सास कि छूट से कैसे निकले? आरे तुम्नाही जानते, तेरे मा और बाप रोज दुपहर को खाना खाने के बाद अप्नेकमरे मी जाकर खूब चुदाई कटते हैं.”तेरे को कैसे मालूम कि मेरा बाप दोपहर को मेरी मा को छोड़ता है,क्या तुने देखा है क्या?

आरे देखने कि क्या जरूरत है, तुम्हारी मा भी छूट मी लुंड जाते हो बहुत बर्बरती है और तेरा बापितना जोर जोर से से तेरे मा को छोड़ता है कि पलंग चर्मारानेलाग्ती है. इन आवाज को सुन सुन कर मैं भी अपनी छूट मी अपनी उन्ग्लीदल कर हिलती हूँ. “तू बहुत चिनल औरत है, अपने सास और ससुर्की चुदाई का हिसाब रखती है. मेरे को लगता है कि तू जरूर सेमेरे माबाप कि चुदाई देख चुकी है” मैं नुपुर से बोला. नुपुर तब्बोली, “हाँ मैंने तेरे माबाप कि चुदाई रोज़ देखती हूँ”. “कैसे?”आरे कैसे क्या, जब तेरे मा और बाप दोपहर का खाना खा कर अप्नेबेद्रूम मी जाते है तो मैं उनके कमरे कि खिरकी के पीछे खरीहो जाती हूँ जहन से मुझे उंदर कमरे मी जो हो रही सब कर्वाहिसफ्सफ़ दिक्लाई पार्टी है. तो क्या तू रोज मेरे माबाप कि चुदैदेखती रहती है? और क्या, कबसे? एही करीब दोतीन महीने से.अच्छा अब बोल चिनल रुन्दी जब तेरे सास और ससुर कि चुदाई देख्तीराह्ती है तो क्या उनको मालूम चलता? सास को एह बात मालूम नही, हन्तेरे बाप को मालूम है कि मैं खिरकी से उनकी चुदाई कि ससान देख्राही हूँ. व्हो कैसे? एक दिन मैं रोज कि तरह से अपने सास और ससुर के बेडरूम के खिरकी पीछे खरी थी और उनकी चुदाई देख रही थी कि एकाएक ससुर जी अपना लुंड सास कि छूट मी पेलते पेलते अपना मुँह खिरकी कि तरफ घुमाया.

मेरे पास इतना टीम नही था कि मैं चुप जाऊँ और ससुर जी ने हमे खिरकी के बाहर खरे देख लिया. मैं भी क्या करती, मैवान्ही खरी रहे और उनकी चुदाई का ससान देखती रही. ससुर जिहुमे देख कर सिर्फ मुस्कुरा दिया और सास कि तंग हमारी तरफ घुमाकर हमे दिखा दिखा कर अपना लुंड सास कि बुर मी अन्दर बाहर कर्नेलागे. तू पूरी तरह से रुन्दी है, अच्छा अब बोल तुने मेरे बाप कोमेरे मा को कैसे छोड़ते हैं. नुपुर बोली, “एक सफी बात बातों, तेरिमा नंगी होने पर बहुत सेक्सी लगती है और व्हो बहुत हुद्दकरौरत है.” कैसे मालूम?”एकदिन मैं उनकी चुदाई देख रहे थी कि देखी बाबुजी ने ससुमा केसर कपरे उतर दिया और माजी बिल्कुल नंगी हो बाबुजी से लिपत्रही थी और उनका लौरा अपने हाथ मी पाकर कर जोर जोर से मसल्राही थी. बाबुजी एक हाथ से नंगी माजी कि चुन्ची दबा रहती और दुसरे हाथ कि उन्ग्लेओं से माजी कि छूट खोद रहे थी.सास जी जोर जोर से सिसकारी भर रही थी और बोल रही थी, “हैमेरे रजा जल्दी करो, मेरी छूट तुम्हारे लुंड खाने के लिए बहुतातुर है. जल्दी से मुझे बिस्टर पर दल कर अपना लुंड मेरी गर्मी छूट मी पेल दो और मुझे छोडो. बौजी ने कहा,

“आरे रुको इतनी भिजल्दी क्या है, जर मुझे तुम्हारा छूट को पहले अपने उंगली सेफिर जीव से छोड़ने दे फिर मैं तेरी छूट मी पाना लुंड डालूँगा.अभी अभी तो कमरे आई हो और अभी से छूट छोड़ने कि बात कह्राही हो? अभी तो पुरा दोपहर पर हुआ है, पार्थो तो अभी ४५घन्ती नही आयेगा और उसके आने के बाद ही चाय मिलेगी.” माजी नेह सब सुन कर बोली, “है तुम्हे मेरी छूट मी उंगली करना है और्चातना है, वो सब बाद मी कर लेना पहले मेरी छूट मी अपना लुन्द्पेलो, मैं बहुत चुदसी हूँ.””ऐसी भी क्या बात है और इतनी जल्दीक्यों है,” बाबुजी ने माजी से बोला.माजी बोली आज सुबह मैं जब सुंदर (हमारे घर का नौकर) कोजगाने के लिए गयी थी तो उसके कमरे मी देखी कि वो अपनी बीवी (सुधा) को पलंग के किनारे उलटी लेटा कर उसकी छूट मी पीछे सीपना लुंड दल कर दाना डान छोड़ रह है. सुधा बोल रहीथी, “जल्दी निकालो नही तो माजी आ गायेंगी और हमे चुदते हेदेख कर क्या कहेंगी.” सुन्दर बोला, “आरे चुप कर और हमे मेज़ लेले कर तेरी छूट छोड़ने दे, अभी हमे बहुत मज़ा आ रह है. अगरिस समय माजी भी आयेंगी तो मैं उनके सामने ही तुझे इसी तरफ्चोद्ता रहूंगा.” उस समय सुन्दर ऎंड सुधा दोनो ही पूरी तरह सेनंगे थे और बगल मी उनका बच्चा लेटा हुआ था. सुंदर अपने दोनोहाथ से सुधा कि दोनो चुन्ची पाकर मसल रह था और अपनी कमार्चाला कर सुधा कि छूट छोड़ रह था. थोरी देर के बाद सुधा बोल्नेलगी, “है जल्दी से पुरा का पुरा लुंड दल कर हमे छोडो,

बहुत्माज़ा आ रह है. आने दो माजी को मैं उनके सामने ही अपनी चूत्मर्वौंगी. क्या होगा ज्यादा से ज्यादा माजी गरम हो कर बाबुजी सीप्नी छूट मरवा लेंगी. बस अब जोर जोर से मुझे छोडो.” मैं सुंदर और सुधा कि चुदाई देख कर सुबह से ही गरम हो रही हूँ और मेरिचूत मी बहुत खाज हो रही है. जल्दी से तुम मुझे छोडो, नहीतो मैं अभी जा कर सुंदर से अपनी छूट मर्वाती हूँ.”इन सब बात सुन कर बाबुजी ने कहा, “आरे एह तुमने पहले क्यों नहिबोला, मैं सुबह ही तेरी छूट को छोड़ कर त्र छूट कि गर्मी कोथान्दा कर देता. चल बिस्टर पर लेट कर अपनी तंगो को फैला औरप्नी हाथ से अपनी छूट कि पत्शन को खोल, मैं अभी अपना लुंड तेरिचूत मी डालता हूँ.” फिर बाबुजी ने माजी को पलंग पर दल कर्चित लेटा दिया और उनके पैर अपने कांडों पर रख कर अपना लुन्द्माजी कि छूट मी एक झटके से दल दिया. माजी ओह! ओह! करने लागिऔर अपनी कमर उचल उचल कर बाबुजी का लुंड अपने छूट मी लेने लगी. सास कि गर्मी देख कर ससुरजी ने भी जोर जोर से अपना लुन्दंदर बाहर करने लगे. तब बाबुजी ने कहा, “अरी सुन, जरा मुझीह बता कि सुधा नंगी कैसे लगती है?” माम्जी ने पूछा,

“क्योंतुम्हे इससे क्या लेना देना?” बाबुजी बोले, “अरी कुछ नही, मुझेसुधा देखने मी अच्छी लगती है इसीलिए पूछा रह हूँ कि सुधानंगी कैसे लगती है?” “क्या तुम सुधा कि लेना चाहते हो?” माजीने बाबुजी से पूछा. “लेना तो चाहता हूँ, लेकिन क्या वो देगी?बाबुजी ने कहा. “तुम बहुत दिलफेंक हो, अच्छा मैं देखती हूँ किक्य कर सकती हूँ. लेकिन तुम अभी मुझे जम कर छोडो, मैं छूट किखुज्ली से मरी जा रही हूँ” माजी ने बाबुजी से कहा. फिर मैनेनुपुर से पूछा कि एह सब देखने के बाद तू ने क्या किया? तो नुपुर नेकहा कि मैं क्या करता, मैं ने अपनी उंगली से अपनी छूट कि गर्मी निकल दे.दो दिन बाद जब मैं और नुपुर अपने बिस्टर एक दुसरे को चूम रहे ठेतो नुपुर ने कहा, “लगता है बाबुजी हमको बहुत पसंद कर्तेहाई.” “क्या मतलब?” “नही कुछ नही, बाबुजी हम को आजकल घुरघुर कर देखा करते है और मैं जब नहा कर बाथरूम से निकल्तीहूँ तुब वो हमको ऐसे देखते हैं जिसकी हमको अभी पाकर कर्बिस्टर दल कर मेरी छूट कि धुनाई कर देंगे” निपुर बोली.

“तुम क्यबक रही हो. तुम्हारा दीमक तो ठीक है?” मैंने नुपुर से कहा.नुपुर मुझसे बोली, “मैं बिल्कुल सही कहा रही हूँ, तेरा बाप मुझेअपने बिस्टर पर लेटना चाहता है. तीख है मैं भी कल से तेरेबप को पटना चालू कर दूंगी, तुम घबराना मत अगर तेरे बप्तेरी बीवी को चोदेगा तो तुम उसकी बीवी को छोड़ लेना और नही तो मेरिमा तो है उसको छोड़ लेना, बस सब हिसाब किताब बराबर.” नुपुर कि एह सब बात सुन कर मैंने कहा, “चिनल तेरी छूट मी बहुत खुजली है,तू अपनी ससुर से छूट मर्वागी? तुझे शरम नही आएगी?और फिर्लोग क्या कहेंगे?” नुपुर बोली, “आरे लोग जब जानेगे तब न कहेंगे?मैं कान्हा सब गाती फिरुंगी कि मैंने अपनी छूट अपनी ससुर सेचुद्वाया? और फिर तुमको भी तो एक दुसरी छूट मिल रही है चोद्नेके लिए. आरे भाई हम सब लोग शादी शुदा तो हैं ही, बस सिर्फ्हुम्लोग अपने अपने छोड़ने के पार्टनर बदलेंगे, हमको एक नया लुन्द्मिलेगा और तुमको एक या हो सकता है दो दो ने छूट मिलेगी और जब्चाहोगे तुम हमे छोड़ लेना, मैं कान्हा मन कर रही हूँ?

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मैंने कहा, “ठीक है जैसी तेरी मर्जी, लेकिन देख लेना कंही कोइगर्गबर् नो पी”. नुपुर बोली, “आरी कोई गर्बर नही होगा, तेरा बप्तो हमे अपने आंख से रोज़ छोड़ रह है अब उसके लौरे से अपनी चूत्चोद्वंगी.”अगले दिन से नुपुर खूब सज धज कर रहने लगी और बाबुजी केसामने आते ही अपनी पल्लू गिरा कर उनको अपनी चुन्ची कि दिखानेलगी. बाबुजी भी नुपुर कि चुन्ची कि घुर घुर कर देखा कर्तेठे और हमारी आंख बचा कर अपनी लुंड को मसलते रहते थे. मैभी एह सब देख कर गरम होता था और सोचता रहता था कि कब मैं अपनी या सास कि छूट को अपने लुंड का पानी से नहालौंगा. इसी बिच,मेरे मामा के एन्हा से खबर आया कि मामी बीमार हैं तो माजी उन्हेदेखने के लिए दो दिन के लिए अपने भाई के चले गए.तब अगले दिन नुपुर मुझसे बोली, “आज मैं तेरे बाप का लुंड अपने चूत्मे दल्वंगी, तुम कमरे के बाहर से या खिरकी से देखना, लेकिंचिनता मत करना. माजी के आते ही मैं तुम्हे माजी कि छूट दिल्वादुन्गी और नही तो मेरी मा याने तेरे सास तो है ही.

मैं उनको तेरेसे चुदवाने के लिए पता लूँगा और वो अपने दामाद के लुंड से अप्निचूत चुदवाने के लिए टायर हो जाएंगी.” मैंने कहा “ठीक है आज्तुम बाबुजी से अपनी छूट कि खुजली मिटा लो मैं दो दिन बाद अपनी माकी छूट कि खुजली मितौंगा.” नुपुर एह सुन कर बहुत खुस हो गयी और मुझको अपनी बांहों मी भर कर खूब चुम्मा दिया और फिर झुक कर्मेरे लुंड को अपनी मुँह ले लिया.मैं भी मरे गर्म के खरे खरे हिनुपुर कि मुँह को छोड़ने लगा. थोरी देर के बाद मैं नुपुर कि मुँह कंदर खलास हो गया तो नुपुर मी सारा का सारा पानी पी गयी और्फिर हम से बोली, “है बहुत मज़ा आया, अब तुम जल्दी से मेरी चूत्य गंद अपने लुंड से छोड़ दो, मैं बहुत गरम हो गयी हूँ.” मैबोला, “गरम हो गयी हो तो जाकर बाबुजी का लुंड अपनी छूट मेपिलवा ले, बाबुजी तेरी छूट कि साड़ी मस्ती झर देंगे.” “आरे क्यों जल रहे हो, दो दिन बाद तुम भी अपनी मा या अपनी सास कि छूट किमास्ती अपने लौरे निकल देना, लेकिन फिलहाल तुम मेरी छूट कि मस्तीझार दो”, नुपुर ने मुझसे कहा. नुपुर कि एह सब बातें सुन सुन कर्मेरा लौरा खरा हो गया था इसलिए मैंने नुपुर को (जो कि पहले सही नंगी थी) बिस्टर पर लेटा कर उसके दोनो पैर अपने कन्धों पर्रख लिया और अपना लुंड का सुपर उसके छूट के मुँह पर लगा दिया.नुपुर अपने छूट पर लुंड का एहसास से ही अपनी कमर उचल कर गैप सेमेरा लुंड अपने छूट के अन्दर कर लिया और मुझसे बोलने लगी,

“क्योंतार्पा रहे हो, जल्दी से जोर जोर से धक्के मरो और मेरी छूट किमास्ती झर दो.” मैं भी नुपुर कि दोनो चुन्ची को पाकर कर नुपुरको जोर जोर से छोड़ने लगा. नुपुर भी अपनी कमर उचल उचल कर हमारे धक्को के जबाब दे रही थे और बर्बर रही थी, “है और्तेज, और तेज तेज छोडो मेरे रजा. आज तुम मेरा छूट अपने लुंड केधाक्के से फार डालो, कल से तुम्हे फर्ने के लिए अपने मा या सास किचूत मिलेगी तब उनको भी छोड़ छोड़ कर फरना. ओह! ओह! बहुत मज़ा रह है, ही! आज जब तुम मेरी छूट छोड़ छोड़ कर फार दल रहेहो कल तेरा बाप कया फरेगा, क्या मैं उनसे अपनी गंद फरुन्गी?”हमलोग ऐसे ही एक दुसरे को गली देते हुए अपनी चुदाई पूरी कि.अगले दिन माजी अपने भाई के घर कोई फुच्शन के होने वाघा सेचाली गयी. नुपुर नहाने के बाद कोई ब्लौसे या ब्रा नही पहनी,सिर्फ पेट्तिकोअत और साड़ी लप्पेट कर खाना बनने लगी. खाना बनाते समय नुपुर कि चूची पर से उसकी पल्लू हटने से उसकी चुन्ची सफ्सफ़ दिख रह था और उन चुन्ची को बाबुजी बारे घुर घुर कर देख्राहे थे. नुपुर ने खाना बना कर हमे और बाबुजी को खाना खाने केलिए बुलाया.

खाना परोसते समय नुपुर कि पल्लू हट जा रही थीऔर उसकी चुन्ची बाहर को अ रह था और उसको देख देख कर मेरमण खराब हो रह था और बाबुजी अपने लौरे को अपने धोती के उपेरसे खाभी कभी सहला रहे थे. मैं एह देख कर नुपुर के तरफ्देखा तो वो हंस परी. खाना खाने के बाद नुपुर ने दूध का गिलास्बबुजी के कमरे ले गयी, उस समय भी नुपुर कि चुंचे बाहर कोदिख रही थी. बाबुजी ने कहा, “नुपुर आज मैं एह दूध नहीपिऊंगा”. “क्यों?” नुपुर ने पूछा. “नही मैं आज दुसरी दूध पियोंगा”, बाबुजी ने कहा. “दूसरी दूध, मतलब?” तब बाबुजी नेकहा दूसरी दूध मतलब वह दूध जो मैं आज खाना खाते वक़्त देख्रह था और एह कह कर बाबुजी ने नुपुर कि चुन्चेओं को पाकर लिया.नुपुर तो एही चाहती थी मगर नखरा दिखा कर उसने बाबुजी सेकही “एह आप क्या कर रहें है? चोरी आपका लरका आ जाएगा.

“अरेअने दो लार्के को, मैं अज उसके सामने ही मैं तुम्हारी चुंची चोसुन्गौर फिर तुझे नंगी करके तेरी छूट मी अपना लुंड दल कर तेरिचूत चोदुन्गा” बाबूजी ने नुपुर से कहा. “नही बाबूजी चोरियेना, एहाप क्या कर रहें है, मैं आप कि बहु हूँ और आप मेरी चुन्चीमसल रहें है और कहा रहें है कि आप मुझको नंगी करके मेरिचूत अपना लुंड दल कर मुझे चोदेंगे” नुपुर ने बाबुजी से कही. तब बाबुजी ने नुपुर कि चुन्ची चोर कर उसको अपनी गूढ़ मी उठालिया और उसको बिस्टर पर दल दिया और एक हाथ से नुपुर कि सरेयूतारने लगेऔर और दुसरे हाथ से उसकी चुन्ची दबाने लगे. बबुजीनुपुर कि चुन्ची मसलते हुए कभी कभी उसकी घुंडी भी मसल्राहे थे और बोल रहे थे कि “है मेरी बहु, मैं कब से तुम्हारी इन्मास्त चुन्ची को मसलने के लिए तरस रह था, आज मेरा सपना पुराहुआ. अब आज मैं तुझे नही चोरुंगा,

चाहे आज कुछ भी हो जाये मैआज तुझको जरूर चोदुन्गा”. उधर नुपुर अपने ससुर के हाथ अप्नेचुन्ची पर हटाने कि कोशिश कर रही थी और बाबुजी से कह रही थे “है बाबुजी मुझे चोर दीजिए, मैं आप कि बहु हूँ, मुझेनंगी मत करियेहमारे बुजुर्ग है मुझको मत छोडिये”.बाबुजी ने तब बोला, “हरामजादी, अभी तो तू खाना खाते वक़्त हुम्कोअप्नी चुन्ची का नज़ारा दिखा रही थी और अब छूट चुदवाने किबरी आई तो नखरा दिखा रही है, अभी मैं तुझको नंगी कर्केतेरे छूट मी अपना ९” का लुम्बा लुंड पेलूँगा और तुझको खूब जीभर कर चोदुन्गा”. नुपुर तब बोली, “आरे बाबुजी, मैं आपकी बहु हुनौर आप मेरे ससुर हैं, क्या कोई सौर अपनी बहु को छोड़ता है?” “हाँ ससुर बहु कि छूट मरता है, अगर बहु चुदासी हो तो ससुर बहु किछोत और गंद जरूर मरता है” बाबुजी ने बोला और नुपुर को अप्निगोदी मी उठा कर बिस्टर पर पटक दिया. नुपुर को बिस्टर पर पटककर बाबुजी ने नुपुर कि चुन्ची को अपने हाथ मी ले कर जोर जोर सेदबने लगे और बोल रहे थे,

“साली रंडी, आज मैं तेरे छूट किभूख मिटा दूंगा, देखता हूँ कि तेरी छूट कितना चुदाई सह सक्तिहाई.” थोरी देर के बाद बाबुजी ने नुपुर कि एक चुन्ची अपने मुँह मेले कर चूसने लगे.अपनी चुन्ची मसलाई और चुसी से नुपुर भी अब गरम हो गयी थी और उसने बाबुजी को अपने सुदोल हाथों से जाकर लिया और उनके चेहेरेको चूमने लगी और बर्बर रही थी, “ओह! बौब्जी, ससुरजी क्यओंमुझे तंग कर रहे हो, जो भी करना है जल्दी करो, मैं मारी जारही हूँ.” तब बौजी ने नुपुर कि साड़ी को उसके बदन से कींच करुसको नंगी कर दिया और उसकी छूट मी अपना मुँह लगा कर उसकी चूत्चाटने लगे. तब मैं भी कमरे के अन्दर दाखिल हो गया और बबुजीसे पूछा, “बाबुजी एह आप क्या कर रहें है, नुपुर आपकी बहु है औराप उसको ही छोड़ने कि तयारी कर रहें हैं?” बाबुजी बोले, “आरे तेरा बीबी तो पहले से ही अपनी तंग उठा कर अपनी छूट मी मेरा लुन्द्लेना चाहती है, मैं तो बस उसकी कविश पूरी कर रह हूँ.”

मैं तब्बोला, “तीख है बाबुजी, आप चाहे तो नुपुर को छोड़ सकते हैन्लेकिन आपको चुदाई कि फ़ीस देनी परेगी.” “कैसा फ़ीस, क्या नुपुर एक्रंडी है? तीख है बोल कितनी फ़ीस देनी परिगी? जो भी फीस्चाहिया बोल दे आज मैं नुपुर को बिना छोड नही चोरुंगा” बबुजीबोले. मैंने बाबुजी से बोला, “मुझे कोई पैसा या रूपया नही चाहेया. बस आज अप जिस तरह से मेरी बीवी को छोड़ रहे हैं, वैसेही आप अपनी बीवी को मेरे सामने नंगी करके मुझसे चुद्वाए, बस्यही है नुपुर कि चुदाई कि फ़ीस.” बाबुजी बोले, “तीख है, मैजैसे आज तेरी बीवी को छोड़ने जा रह हूँ, मेरी बीवी आते ही मैं उस्कोतेरे सामने नंगी करके पेश करूँगा, फिर तू जैसे चाहे मेरे बिविको छोड़ सकता है.”इतना सुनते ही मैं नुपुर जो कि पलंग पर नंगी चित लेटी थी, कपास गया और अपने हाथों से नुपुर कि छूट को खोल कर कर बबुजीसे कहा, “लो बाबुजी मेरी बीवी कि छूट तुम्हारे लुंड खाने के लियेतायर है, आओ और इसकी छूट मी अपना लुंड पेल कर इस रंडी को खूब छोडो. छोड़ छोड़ कर आज इसकी छूट कि खुजली मिटा दो, साली किचूत हमेशा लुंड खाने के लिए टायर रहती है.”

इतना सुनते हिबबुजी ने अपना तन्तानाया हुआ लुंड नुपुर कि छूट के दरवाजे पे रखकर अपने दोनो तों से उसकी चुन्ची पाकर लिया और एक जोर दर्दाक्खा मर कर अपना ९” का खरा कुंद नुपुर कि छूट मी एक ही बार मेडल दिया.नुपुर इस जोर दर झटके सह न पी और उसकी मुँह से एक्चिख निकल गयी. तब बाबुजी नुपुर से बोले, “चुप हरामजादी,वैसे तो तेरी छूट हमेशा चुदास से भरी रहती है, और आज जब्मैने अपना लौरा तेरे छूट मी दिया तो चिल्लाती है.” नुपुर तब मुस्कुरा कर्बोली, “आरे नही मेरे प्यारे चोदु ससुरजी, मैं तो कबसे तुम्हारा गधे जैसा लुंड अपनी छूट से खाने के लिए प्यासी थी,लेकिन आज तुमने जब अपना लौरा मेरी छूट मी एकाएक घुसेर दिया तोमेरी छूट कल्ला उठी. अब ठीक है और अब तुम आराम से मुझे जित्नाचाहे छोडो, मैं मुस्कुरा मुस्कुरा कर अपनी गंद उचल उचल कर्तुम्हारा लुंड अपनी छूट मी पिल्वुन्गी और तुम्हारा लौरे का सारा रुस्पनी छूट से पी जाउंगी.बाबुजी इतना सुनते ही नुपुर पर पिल परे और उसकी चुन्ची कोमसलते हुए उसकी छूट मी कास कास कर धक्का मर कर छोड़ना शुरू करदिया. नुपुर भी अपने वादा के मुताबिक बबुब्जी के हर धक्के का जवाबप्नी चुतर उचल उचल कर दे रही थी. कमरे मी सिर्फ फौच्फूच कि आवाज सुने पर रह था. इस जबर्दत चुदाई से नुपुर किचूत से झाग निकालना शुरू हो गया था,

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लेकिन बाबुजी और नुपुर इनसब बातों से बेखबर दोनो एक दुसरे कि छूट उर लुंड का पानी निकालने मी तन्मय थे और एक दुसरे को उपर और नीचे से धक् मरकर छोड़ रहे थे. नुपुर अपनी चुदाई से पागल हो कर बर्बर रहीथी, “है! है! मेरे चोदु ससुरजी, क्या जोरदार धक्के मर मर कराज तुम हमे छोड़ रहे हो, क्या तुम ऐसे ही मेरे सासु जी को भिचोदते होगे? तब तो उनकी छूट अब तक फैल कर पुरा का पुरा भोस्राबन गया होगा. क्या तुम्हे अब भी सासूजी कि ढीली चुन्ची मसलने मय उनकी फैली हुए छूट को छोड़ने मी मज़ा अत है? मरो मरो और्जोर से मरो, आज तुम अपना सारा का सारा लुंड मेरी छूट मी पेल दो और्खुब रगर रगर कर छोडो मुझे. हमे बहुत मज़ा आ रह है. बुसैसे ही अपने बेटे के सामने उसकी बीवी कि छूट मी अपना लौरा पेलते रहो. कल तुम्हारे बेटे को अपनी माँ को छोड़ने मी भी बहुत मज़ा आयेगा.हाँ अगर तेरी बीवी अपनी छूट अपनी बेटे से चुदवाने के राजी न हो तोकल मैं मेरी माँ को बुला लूंगी और उसको तेरे बेटे कि लुंड सेचुद्वौंगी. बस अभी तुम अपने बेटे के सामने उसकी बीवी को ऐसे हिचोदते रहो.” बुबुजी भी नुपुर को जोर जोर छोड़ रहे थे और बर्बराराहे थे,

“है! मेरे चुद्क्कर बहु, तेरी छूट तो पूरी मख्हन जैसहाई, तेरी छूट छोड़ कर मैं आनंद से पागल हुआ जा रह हूँ. क्यातेरी मा कि छूट ऐसे ही चिकना और चुदास से भरी है? उसको बुलालाना, मा और बेटी दोनो को एकसाथ छोड़ने मी बहुत मज़ा आयेगा. वैसेतेरे मा कि गंद बहुत भरी भरी है, उसकी गंद मी लुंड पेलने मेबहुत सुख मिलेगा. कल तेरा पति तो अपनी मा कि छूट मी लुंड घुसेरेगा और मैं तेरी छूट मरूँगा और तेरी मा कि गंद मी अप्निलुन्द पेलूँगा. है! है! तेरी छूट मी क्या जादू भरा है, एह तोमेरे लौरे कि पानी किंच कर निकालना चाहती है. है मैं अब्झारने वाला हूँ. ले ले मेरी चुद्द्कर बहु अपनी छूट से मेरे लुंड किंरित पी जा, कल एह पानी तेरी मा को उसकी गंद से पिल्वाऊंगा. ले मैअब जह्रने वाला हूँ, अपनी तंगो को और फैला, मैं तेरी छूट मी अपनालुन्द का अमृत डालने वाला हूऊऊउन्.” इतना कहने के बाद बाबुजी जिका लुंड नुपुर कि छूट के अन्दर उलटी कर दी, और नुपुर आंख बन्द्कर्के अपनी छूट कि झरने आनंद लेटी रही.

बाबुजी और नुपुर कि जबदस्त चुदाई देख कर मेरा लौरा भी अब तन्ना गया था और थोरी देर के बाद मैंने बाबुजी को नुपुर के उपेरसे उठाया और अपना लुंड नुपुर कि छूट मी पेल दिया. नुपुर ने हुम्कोअप्नी हाथों और पैर से जाकर कर हमको एक जोरदार चुम्मा दिया और्मुस्कुरा कर बोली, “तेरे बाप से अपनी छूट चुद्वा कर बहुत मज़ा आया,अब कल तेरा बरी है. कल तेरे को अपनी मा और सासूजी को छोड़ना है.क्या तू दोनो कि छूट मी अपना लुंड दल पायेगा?” मैंने बोला,”भोसृकिचुदासी औरत, मैं अपनी मा और सासूजी कि छूट तो क्या तेरे खान्दंमे जितने छूट है उन सुब को छोड़ दूंगा, बस उन सब छूट को मेरेसमने तू पेश करती जा. फिर देख मैं तेरे खंडन कि सुब चूतोंकी क्या हल बनता हूँ.” नुपुर एह सुन कर मुस्कुर दी और बोली, “वह्मेरे चोदु रजा, कल जब तू अपने मा कि छूट मी अपना मुसल जैसलुन्द पेलेगा तो तुझको बहुत मज़ा आयेगा. मैं भी तब अपनी छूट मी बाबुजी का लुंड पिल्वौंगी. कल घर कि दोनो चिनल सास और बहुअप्नी अपनी आदमी बदल कर एक ही बिस्तर पर तंग उठा कर खुब्चुद्वौंगी.”

मैं इन सब बातों को सुन कर और गरमा गया और नुपुर्की छूट मी अपना लुंड जोर जोर से पेलने लगा. थोरी देर के बाद मुझेलगा कि मेरा पानी लिकने वाला है और मैं नुपुर से बोला, “ले ले रंदिले अपने छूट मी तुने अपने ससुर से चुद्वा कर उसका पानी भरा था लीब मेरा पानी अपनी छूट मी भर ले.” नुपुर भी अब झरने के करीब्थी और उसने अपनी चुतर उचल कर बोली, “ला ला मेरे रजा मेरिचूत तू अपने लुंड के पानी से भर दे, एह छूट तो अब तुम दोनो बप्बेते के लौरे के लिए है, तुमलोग जब चाहो इसे अपने पानी से भर्सकते हो, मैं हमेशा एह छूट तुम दोनो के लिए खुली रखूंगी”.इतना सुन कर मैं नुपुर के छूट अन्दर अपना लुंड और ठेल कर दोमिनुते के लिया रुका और मेरा लुंड उसकी छूट के अन्दर उलटी कर दी.नुपुर कि छूट भी मेरे झरने के साथ साथ अपनी पानी चोर दिया. इसके बाद मैं और बाबुजी उसी बिस्टर पर नुपुर को बित्च मी रख करुसकी एक एक चुन्ची अपने अपने मुँह मी भर कर सो गए.

सुबह जबंख खुली तो देखा कि बाबुजी का लुंड नुपुर कि छूट मी फंसा था.इसका मतलब था कि नुपुर ने मेरे सो जाने के बाद बाबुजी से फिर्चुद्वाई थी. मैं गौर से नुपुर कि छूट पर देखा तो पाया कि उस्किचूत से अब तक चुदाई का पानी रिस रिस कर बाहर आ रह है औरुसकी गंद के नीचे बिस्तर को गिला कर रह था. मैं नुपुर और्बबुजी को उठाया और बाथरूम मी जाकर सुबह का सारा काम खाताम्कारने के बाद बाहर आया तो पाया कि बाबुजी भी नहा धो कर चाय पीराहे हैं और अख़बार पढ़ रहे हैं. मैं बाबुजी को उनकी कल का वादयद दिलाया तो बोह बोले, “बेटे चिंता मत कर. मैं आज ही जा कराप्नी बीवी को ले आऊंगा और तेरे सामने उसको नंगी करके तुझसे चुद्वाऊंगा.” थोरी देर के बाद बाबुजी गौण मा को लाने और नुपुरापने घर अपनी मा को लाने चली गयी. मैं भी खाना खा कर अप्नेदाफ्तर के लिए रवाना हो गया.

मैं दिन भर ऑफिस मी कोई काम नहीक्र सका. हर्बक्त मेरे नको के सामने कल रात का सीन घूम रह ठौर मैं एह सोच सोच कर आज मैं अपनी मा और ससुमा को छोड़ने वालाहूँ मेरे लौरा खरा हो रह था. जैसे तैसे दिन पुरा हुआ और मैघर चला आया.घर आकार मैंने देखा कि नुपुर अपनी मा को ले आई है. मेरी ससुमेक बहुत ही सुन्दर और सुन्दर बदन वाली औरत है. उनकी तिघ्त और्बरी बरी चुन्ची और चल्कता हुआ चूतर देख कर मेरा मन उन्कोअभी छोड़ने को हुआ और मैंने नुपुर से एह कहा. लेकिन नुपुर ने कहे “नही अभी कुछ नही. जो कुछ होगा सुब के सामने होगा औरिस्केलिये तुम बाबुजी और अपनी मा का इन्तिजर करो.” मैं चुप चपप्न खरा लुंड लेके अपने कमरे मी चला आया. थोरी देर के बद्बबुजी और मा अ गए. मा को देख कर मैं समझ गया कि आज माने के पहले ब्यूटी पार्लर हो के आई हैं.

मा आज बहुत हिसुन्दर लग रही थी. बाबुजी तब नुपुर से बोले, “क्यों बहु सबकुछ टायर हैं न?” “हाँ बाबुजी, जैसा अपने कहा था मैं वैसा हिसाब बंदोबस्त कर राखी हैं” नुपुर बोली. मा ने बाबुजी और नुपुरसे पुन्ची, “कैसा बंदोबस्त और क्या होना है?” बाबुजी बोले, “तुम्चुप चाप देखती चलो, सब कुछ तीख हो रह है, और जो भी हो रह है वो हमारे परिवार के लिए अच्छा होने वाला है.” मा तब्जोर दे कर बोली, “आरे क्या होने वाला है, एह तो पता चले.” बबुजीना कहा कि आज मैं और पार्थो दोनो एक एक नया शादी करेंगे.” “क्यबक रहे हो? तुम को इस समय कौन अपनी लार्की देगा और घर मी जब्नुपुर मौजूद है तो पार्थो फिर से क्यों एक और शादी करेगा? शादिके लिए लार्की कहाँ है, मुझे कुछ समझ मी नही अ रह hai” माबबुजी से बोली. तब बाबुजी मा से बोले, “तो सुनो मैं आज अपने बहुयानी कि नुपुर से शादी करूँगा और पार्थो आज तुमसे शादी करेगा औरिन बातों का गवाह हमारे समधिन जी रहेंगी”. “आरे मैं दो दिन्घर पर नही थी और तुम लोग ने क्या क्या खिच्री पका रखा है?एह सब क्या बकवास लगा रखा है?” मा बिगार कर बौजी से बोली. बाबुजी ने तब अपना तेवर बदल कर मा से बोले कि,

“आरे क्योंखाम्खा हल्ला मचा रही हो, हम जो भी कर रहे है सुब कि भालैके लिए कर रहे हैं. जरा सोचो, जब हम लोग नयी शादी कर्लेंगे तो हम को और पार्थो को नयी छूट मिलेगी छोड़ने लिए और्तुमको और नुपुर को नयी लौरा मिलेगा चुदवाने के लिए. सुबसे मजेकी बात तो एह है कि बात घर कि घर मी रहेगी.” तब नुपुर भी मासे बोली, “सासुजी मन जाईये न, बाबुजी ठीख ही कह रहेन्हें”. “चुप हरामजादी, चिनल कुटी मुझे मालूम है कि तेरे चूत्मे हमेशा लुंड के लिए खुजली रहती है, लेकिन इसका मतलब तो एह्नाहे है कि चुदाई के लिए हमलोग आपस मी अपने आदमी बदल ले?” मानुपुर को बिगार कर बोली. तब मेरे ससुमा अपनी समधिन से बोली, “बहनजी अब आप् मन भी जयेये, देखिए न इस बात पर घर केसभी लोग राजी हैं, और फिर आजकल कि दुनिया मी एह सब चल्ताहाई. हर घर मी एह सब हो रह. अब देखिए न हमारे परोस मी एक्बेंगली फमिली है जिसमे मा बाप और उनके तीन बेटे और दो बेतिंहाई. बेटों और बेटियों कि शादी हो चुकी है. अब उस फमिली मी फ्रीसेक्स चालू है. जब जिस का मन होता है, वो किसी के साथ, कहीं भिऔर किसीके भी सामने छोड़ना शुरू कर देता है. छोड़ने वाला एह नहिदेखता कि जिसकी छूट मी अपना लुंड दल रह है वो उसकी मा, याबहन, या भाभी या साली या बहु है. बस लुंड खरा हुआ नही कि जोभी सामने है उसकी साड़ी उठाई और उसकी छूट मी अपना लुंड पेल देताहाई.

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