पति की सहमति से परपुरुष सहवास-2

आरती और जसवंत पूरी तरह झड़के शाँत हो गये पर जसवंत अब भी आरती के जिस्म पे लेटा हुआ था और जसवंत ने पूरा लंड आरती की चूत में घुसाया हुआ था। जब जसवंत भी ढीला पड़ा तो आरती की चूत से उन दोनों के चुदाई-रस का मिश्रण हल्के-हल्के बाहर आने लगा। दिल की धड़कन शाँत होने के बाद जसवंत आरती की चूत से लंड निकाल के उसकी बगल में लेट गया। जसवंत आरती को चोद चुका था और दोनों बेहाल पड़े थे। १५- २० मिनट के बाद आरती जसवंत की बाहों में आयी और बालों से भरा जसवंत का सीना हल्के हाथों से सहलाने लगी। जसवंत भी करवट लेके आरती के मम्मे मसलने लगा। फिर आरती का हाथ अपने लंड पे रखते हुर जसवंत बोला, “मेरी जानेमन… अब भी मेरा दिल भरा नहीं है… मेरा लंड फिरसे तुझे चोदना चाहता है… ज़रा मुँह में मेरा लंड लेके उसे गरम कर… ताकि फिर तुझे चोदूँ।” आरती उठके जसवंत का पूरा लंड अच्छी तरह चाट के बोली, “मेरी चूत के राजा.. तूने मुझे इतना तगड़ा चोदा कि मज़ा आ गया पर अब मेरी चूत भी दोबारा चुदाई के लिए तड़प रही है। लेकिन थोड़ा सा रुक जा फिर फ़्रैश होके मुझे चोद… वैसे भी मुझे मंगल से भी चुदवाना है। मेरी बेटी भी तो देखे कि उसकी माँ कैसे चुदासी बन के चुदवाती है।” जसवंत आरती के निप्पल हल्के से खींचते हुए बोला, “बड़ी हरामी चूत है तू… साली… तो अब मुझसे नहीं चुदवाना है… लेकिन मंगल से बेटी के सामने चुदवाना चाहती है तू… बहनचोद तेरी जैसी बेशरम औरत नहीं देखी मैंने… ठीक है चल देखते हैं तेरी मादरचोद बेटी का क्या हाल किया है उस मंगल ने।” इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

आरती के चुदाई के नशे की तरह ही उसका शराब का नशा भी कम नहीं हुआ था। जसवंत लड़खड़ाती हुई नंगी आरती को लेके हॉल में आया। उन्होंने देखा कि मंगल पूजा को कुत्तिया बनाके अब उसकी गाँड मारने के तैयारी में है। दोनों बेशरम माँ बेटी एक दूसरे को देख के मुस्कुराईं। माँ और बेटी आपस में खुल चुकी थीं इसलिए दोनों में से किसी को भी शरम नहीं थी। आरती पूजा के सामने जाके उसे किस करने लगी। मंगल तब पूजा की गाँड पे अपना लंड ज़ोर ज़ोर से रगड़के बोला, “साली रंडी की छिनाल बेटी… आज तू सही मायने में रंडी बनेगी। साली राजेश और वैभव तुझे बराबर चोदते हैं तो फिर हमसे क्या झिझक…? तेरी माँ की चूत पूजा… आज के बाद तू मेरी रंडी बनके रहेगी और तेरी छिनाल माँ जसवंत सर की… समझी?” जसवंत पूजा के मम्मे मसलते हुए ललचाती नज़रों से पूजा को देखते हुए बोला, “क्या मंगल अब तक तूने पूजा को चोदा नहीं? बहनचोद मैंने तो आरती को चोद भी दिया और अब दूसरे राऊँड की तैयारी करने आया था। यह बहनचोद आरती अब तुझसे अपनी बेटी के सामने चुदवाना चाहती है।” इसके पहले कि मंगल कुछ जवाब देता, आरती पूजा के मम्मे मसल रहे जसवंत के हाथ को हल्के से मारते हुए हँसते हुए बोली, “साले कमीने… तूने अभी इस पूजा की माँ को इतनी चोद-चोद कर रंडी बना दिया… अब फिर बेटी को देख रहा है… हरामी जितनी कमीनी मुझे बोलता है… उतने ही कमीने तुम दोनों हो।”

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आरती और जसवंत की बात सुनके मंगल ने पूजा को छोड़ा और आरती को धक्का देके सोफ़े पे गिराते हुए खुद सोफ़े पे चड़ गया और अपना लंड उसके मुँह में डालते हुए बोला, “छिनाल चूत… बहनचोद… साली एक तो तुझे हमने अपनी रंडी बनाया और हमको ही कमीना बोलती है? कुत्तिया… साली बेवड़ी… नशे में अपनी औकात मत भूल… तू और तेरी बेटी हमारी रंडियाँ हो। तुझे सर चोदने के लिए ले गये तब तेरी बेटी की चूत मैंने मारी और अब गाँड मारने जा रहा था। अब तू आयी है तो तुझे भी चोदके अपनी रंडी बनाऊँगा और जसवंत सर पूजा को चोदके उसे अपनी छिनाल बनायेंगे।” जसवंत नंगी पूजा को अपनी गोद में बिठा के उसके बदन से खेलते हुए आरती से बोला, “हरामज़ादी राँड… तेरी बेटी भी एकदम जवान और हसीन है… वैसे तुम माँ बेटी नहीं बल्कि एक दूसरे की बहन लगती हो… देख तेरी मादरचोद बेटी कैसे अपनी गाँड मेरे लंड पे रगड़ रही है। पूजा… तेरी माँ की चूत… मादरचोद चूत… तेरी माँ को मंगल कुत्तिया बनाके उसकी गाँड मारेगा… तू सोफ़े पे बैठके अपनी माँ के मम्मे मसलेगी और तेरी छिनाल माँ तेरी चूत चाटते हुए अपनी गाँड मरवायेगी और तू… हरामी मादरचोद रंडी… मेरा लंड चूसेगी… समझी?” पूजा यह सुनके खुश हुई कि उसकी माँ उसकी चूत चाटने वाली है और वो तुरँत हाँ बोली। जसवंत पूजा को खड़ी करके बोला, “मंगल की रंडी… अब चल तू आ मेरे साथ।” जसवंत पूजा को पकड़के मंगल और आरती के पास ले गया और उसे सोफ़े पे बिठा के उसकी टाँगें खोल दीं। फिर आरती को कुत्तिया जैसी झुका के उसका सिर पूजा की चूत पे दबाते हुए जसवंत बोला, “सुन पूजा रंडी… तू अपनी माँ के मम्मों से खेल… तेरी यह रंडी माँ तेरी चूत चाटेगी और पीछे से मंगल तेरी माँ की गाँड मारेगा। मैं सोफ़े के पास खड़ा रहूँगा और तू मेरा लंड चूसेगी… समझी…? चल मादरचोद अपनी माँ के मम्मे मसलने शुरू कर।”

आरती बिल्कुल वैसा ही करने लगी जो जसवंत कह रहा था। अब कमरे में दृश्य ऐसा था कि मंगल धीरे-धीरे करके अपना लंड आरती की गाँड में घुसाते हुए उसे चोद रहा था और आरती अपनी गाँड मरवाती हुई झुक के अपनी बेटी की चूत चाट रही थी। पूजा अपनी माँ से अपनी चूत चटवाती हुई आरती के मम्मों से खेल रही थी और साथ ही जसवंत का लंड भी चूस रही थी। जसवंत पूजा का मुँह चोदते-चोदते पूजा के मम्मों से खेल रहा था। बड़ी बेरहमी से वो दोनों मर्द इन माँ बेटी की गाँड और मुँह चोद रहे थे। आरती बेशरम होके अपनी बेटी की चूत चाट रही थी और पूजा भी मस्ती से उसके मम्मे मसल रही थी। मंगल आरती की कमर पकड़के गाँड में ज़ोरदार धक्के मारते हुए बोला, “आहह… आरती तेरी गाँड तेरी बेटी जैसी लाजवाब है… साली जब तुझे जसवंत सर के ऑफिस में जाते देखा था तबसे तुझे चोदने की तमन्ना हुई। उस दिन सर के ऑफिस में तेरी गाँड मारी तब मुझे सकून मिल… लेकिन जबसे तेरी बेटी को चोदा तबसे लंड को आराम ही नहीं मिलता। बहनचोद क्या मस्त रंडियाँ हो तुम माँ बेटी।” आरती पूजा की चूत चाटती हुई मंगल से पूरा लंड ले रही थी गाँड में। पूजा भी अब जोश में अपनी माँ के मम्मे मसलती हुई जसवंत का लंड चूस रही थी।

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जसवंत आगे पीछे करते हुए पूरा लंड पूजा के मुँह में डालके उसे चोदते हुए बोला, “साली पूजा… रंडी की औलाद… तू भी अपनी माँ जैसी ही मस्त लंड चूसती है। आरती पहले तेरे मर्द ने और कोई अच्छा काम किया हो या नहीं पर साले ने तेरी जैसी गरम बीवी और पूजा जैसी कम्सिन चूत हमारे लिए यहाँ छोड़के जाने का अच्छा काम किया है। क्या मस्त गरम बेटी पैदा की है तुम पति-पत्नी ने… साली आगे जाके तेरी बेटी तेरा नाम रोशन करेगी। मेरा लंड चूस छिनाल और अपनी माँ को मंगल से गाँड मरवाते भी देख।” इन माँ बेटी के साथ वो दो मर्द बेरहमी से पेश आ रहे थे लेकिन यह बेरहमी उन माँ बेटी को अच्छी लग रही थी। सब गालियाँ और बेइज़्ज़ती उन्हें और चुदास बना रही थी और वो माँ बेटी बेशरम हो के अपना बदन उनसे चुदवा रही थीं। इस कहानी का शीर्षक ’आरती की वासना’ है!

मंगल आरती की गाँड मारने के साथ-साथ उसकी गीली टपकती चूत में अँगुली रगड़ रहा था और आरती भी मस्ती से गाँड में मंगल का लंड ले रही थी और टाँगें फ़ैला के उसकी अँगुली से अपनी चूत को भी चुदवा रही थी। आरती दोनों हाथों से पूजा की कमर पकड़के अपनी कम्सिन जवान बेटी की चूत का पानी बड़ी प्यार से चाट रही थी। पूजा की चूत के दाने को हल्के से चबाती हुई आरती पूजा को और गरम कर रही थी। साँस लेने के लिए उसने मुँह पूजा की चूत से हटाया और बोली, “हम माँ बेटी के यारों… आज मेरी प्यारी बेटी और उसकी रंडी माँ को इतना चोदो कि पूजा राजेश और वैभव को भूल जाये और मैं अपने बाकी यारों को। जब चाहो पूजा रंडी को कॉलेज में चोदना और जब दिल करे तो घर आके इस अपनी रखैल रंडी आरती को चोदना। तुम दोनों इसको चोदते रहोगे तो यह इधर उधर नहीं जायेगी, कॉलेज में अटेंडैंस और पढ़ाई भी इम्प्रूव करेगी और चूतिया लड़कों से अपनी जवानी बर्बाद नहीं करेगी।”

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