पति के आने से पहले भाई से चुदी उषा

मौके मे चक्का मरने वाली बात को उषा सही तरीके से इस्तेमाल केरते हुए उषा ने आख़िर कार बहोट डिंनो बाद अपने पति के आने की करभ का बहाने लेगर उमेश से चुड ही गयइ. उसके बाद उषा और उमेश (अपने जीजा/उषा अपने पति) को पिक केरके घर की तरफ निकल गये). रास्ते मे वही काम खूं की बात हुए और उनकी बातो बातो मे वो घर भी पहुच गये.

उमेश के मम्मी पापा ने उनका वेलकम करा और उषा की मम्मी पानी लेकर आई. और उषा भी किचन मे छाई बनाने लगी, तभी उनकी मम्मी आई और बोली.

मम्मी – बेटी मेहमान की फ्लाइट तो लेट थी ना.

उषा – मम्मी वो… वो बस उनके बीनना अब रहा नि जा रहा था ना इसलिए बस जल्द से जल्द उनको देखने के लिए पहुच गयी.

उषा की मम्मी मॅन ही मॅन सोचने लगी की उसको पक्का चुदाई की तलब लग गयी होगी. फिर आके जाड़ा बाद ने करेटे हुए. (तब तक छाई भी बन गयी थी) छाई लेकर मम्मी बाहर आई और उमेश किचन मे गुस्स आया.

उमेश – साली आज की सुबा तो तुनने सही मेी हर्याली ला दी बिल्कुल फ्रेश फ्रेश सा फील हो रहा हा.

उषा – भाई, मम्मी भी लंड लेके आजा बहोट सुकून मिला कसम से.

उमेश – अब तो बता दे वेसए जीजा के आने से केसे चुदाई करेंगे?

उषा – कान ला!!

उषा ने अपना मूह उमेश के कान के पास ले गयी और कुछ क़ुस्स्श पूशने लगी. (वाही राज बताया की वो दोनो केसे उसके पति के आने के बाद भी चुदाई कर सकते है). ये सुनकर-

उमेश – अरे वाह मेरी रांड़ मतलब आजरात भी रनगीइन होंने वाली हा.

उषा – सिर्फ़ आज की रात नही आने वाली सभी राते.

उमेश – हन्न्न मेरी क्यूटी रॅंड.

( दोनो फिर वही अपनी सेक्स भारी बाते करी और बाहर आ गये).

और फिर सभी मिलकर बात वाअत होंने लगी. वो कुछ जाड़ा ही लंबी चल गयइ वो पता ही नही चला की कब दोफर के बारह बाज गये. फिर उमेश ने अपने जीजा को फ्रेश होंने को बोलकर अपने बातरूम मे ले गया. तब तक दोनो मा बेटी किचन मे मेहमान के आने की कुशी मे पकवान बनाने लगे.

उमेश अपने जीजा के मज़े लेने के लिए रूम मे चला गया.

उमेश – जीजा ही नहा लिए क्या.

उसका जीजा – नही अभी.

उमेश – उषा को बेजू क्या अंदर हेल्प केरने.

उसका जीजा – मतलब केसी हेल्प?

उमेश – क्या जीजा जी बाकचा समझ रहे हो काया.

ये सुनकर वो बातरूम से टवल लपेट कर बाहर आया.

उसका जीजा – देख तू जेसा सोच रहा हा वेसा कुछ न्ही हा.

उमेश – (और मज़े लेते हुए) अपने और उषा ने सुहाग्रात माननी हा फिर भी आपको हेल्प न्ही समझ आ रही.

उषा जीजा – यार तेरी बेहन की मैने आज तक चुम्मि भी रही ली.

उमेश – आआहएं झहहोट, सही हा मुझे बोलने मे सर्मा रहे हो.

उषा जीजा – साले जी आपकी कसम, मैने कुछ नही किया अभी तक मैं वर्जिन हूँ अभी तक.

उमेश – साच मेी?

उसका जीजा – प्लीज़ कुछ करिए ना, यहा इसलिए आया हू ताकि कुछ कर साकु.

उमेश – एक काम करिए आज रात को ये गोली खा लीजिएगा. आपका हतियार शांत नही रहेगा और तबाई मचा डॉग्गे आज अप.

उसका जीजा – तुम सही मे साले निकले साले जी.

कुश होकर वो उमेश के गले लग गया.

(उमेश मॅन ही मॅन – और अप कितने बड़े छूतिए हो जीजा जी).

फिर दोंनो बाहर आए और काने के टेबल मे बैठ कर फिर वही घर काम धाम की बातो ने उमेश और उषा के कान पकक्का दिए थे. और देखते देखते शाम भी हो गयी. फिर दोनो जीजा साला बाहर घूमने गये और उमेश अपने जीजा को बाटने लगा की उसकी बेहन. (उषा को केसे केसे छोड़ना हा). ये सब सुनकर उसके मॅन मे तो रात का सीन पोज़िशन सब की तस्वीर छा गयी थी.

दोनो वापस घर की तरफ और पहले पहले घर मे आते ही उमेश ने उषा की तरफ देखकर कुछ इशारा करा (जेसे की उसकी तरफ से उसने अपना काम कर दिया हा), ये इशारा पा कर उषा के सेहरे पे भी स्माइल आई और बड़े प्यार से अपने पति के साथ बरतााव केरने लगी इससे उससे और यकीन हो गया की उसका यहा आना आज रात को शपाल हो ज्एगा.

सभी एक साथ बैठ कर टीवी देखने लगे और 10 कब बाज गये पता ही नही लगा, तभी-

उमेश – मम्मी पापा चाहिए रात काफ़ी हो गयइ है चलिए सो जाइए, काल घूमने भी जाना है.

उषा – हॅन मम्मी अप दोनो जाहिए.

उषा का पति – हाँ अब आपको रेस्ट केरना चाहिए.

तीनो के इतना कहने पर दोनो अपने रूम मे चले गये.

उषा – जी अप भी जाहिए सॉन मे अभी आती हू तोड़ा सा काम हा बस ख़तम केरके आती हू.

उमेश – चलिए मेी आपको रूम दिखा देता हू.

कहकर उससे अपने रूम मे ले जाकर अपने जीजा को और उतेज़ित केरते उससे वो गोली खिला देता है. और बेस्ट ऑफ लक कमरे से बाहर निकल जाता है. थोड़ी देर बाद उषा रूम मे आ जाती हा.

(00:30आम के बाद)

उषा / उमेश की मम्मी की नींद खुलती है ( प्यास के मारे). वो किचन मे पानी पीने चली जाती और पानी पीने के बाद उन्हे उषा के रूम के रूम का दरवाजा हल्का से खुला नज़र आता हा. वाहा से हल्की लाइट भी. जिससे देख कर वो समाज जाती है की उसकी बेटी की चुदाई हो रही है. लेकिन वो भी खुद पे कंट्रोल न्ही कर पाती और उनके कमरे के पास पहुच जाती है.

दरवाजे पे कान लगा के अंदर की आवाज़े सुनने लगती है, अहहहहहहहहहहहहहहहहहहहः अहहहहहहहहहहहहहहहहहहहः उहुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहुहू ओहिहॉहिहॉहिहहहहहहहहहाः हीयाहहहवाहाहाहहहाहाहहहहहहहहहोहॉहिहिहिहिहीः अहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहाहा वआहोआहियाहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहहा हाहहहहहहहहहहहहहहहहहहहह अहहहहहहहहहहहहहहहहहहहः आवाज़े सॉफ सॉफ उनके कानो पे सुनाई दे रहे थे. जिससे सुनकर वो अंदर ही अंदर कुशी होई जेया रही थी. और इस्सि कुशी के साथ वो अपने कानो को दरवाज़े से हटा कर खड़ी हो जाती हा लेकिन तभी.

उषा – अहहहहहहहहहहहहहहहहहहहः अहहहहहहहहहहहहहहहहहहहः भैया क्या सही लंड हा आपका… अहहः बड़ा सुकून सा मिल जाता हा आपके लंड से चुड कर आहहहह.. सच मे भैया अगर आप मेरे सगे भाई ना होते ने तो मैं पक्का शादी कर लेती आपसे.. और ढेर्ररर सारे बाकचो के पापा बना चुकी होती अभी तक तो.

ये सब उनकर उषा/उमेश की मम्मी की गंद ही फाट गयइ. और जल्दी से वो उमेश के रूम की तरफ भागी. वो वाहा जाकर देखता तो उषा का पति सुअर की तरफ सो रहा त.आ उससे अब कुछ समाज न्ही आया और वो दोबारा उषा के रूम की तरफ भागी. वो बस अंदर जाने की हिम्मत नही करी और मॅन मार कर वो अंदर गुस्स ही गयइ. लेकिन तब तक बहोट देर हो चुकी थी,

उमेश ने अपना साअरा का सारा माल उषा की चूत मे झाड़ चुका. और उषा बस बहाल कुशी मेी बेड पर ही लेती हुए थी. उमेश उशी के शमने खड़ा लंड पक्कड़ा खड़ा था की. तभी उनकी मम्मी अंदर आई जिससे देखार कर दोनो की गंद फटत्त गयइ. और वो भी उमेश और उषा की एसी हालत देख कर शॉक हो गयी.

उमेश ने झट से अपना लंड छुपाया और लोवर लेकर पीछे मुद्ध गया उषा भी अपनी पनटी सलवार त-शर्ट लिए बातरूम मे भागी. इतने मे उनकी मा ने सर पकड़ कर वही बैठ गयी थी.उमेश भी जल्दी बाहर जाकर देखा तो कोई न्ही दिखा और वापस कमरे मे आकर गाते लॉक कर दिया, तबतक उषा भी बातरूम से अपनी हालत ठीक केरके बाहर आई.

दोनो उनके पास आकर उनके कुछ के हालत मे न्ही थे लेकिन उन्हे फिर भी कुछ कहना तो था ही लेकिन तभी उनकी मम्मी बोल पद्धि-

मम्मी – तुम दोनो के बीच ये सब काब्से हा.

उमेश – मम्मी वो सॉरी हम बस बहकक गये थे.

मम्मी – तुम्हे पता हा ये सब तुम्हे क्या किया, ये कितना ग़लत है.

उमेश – मम्मी ये सब मेरी ग़लती है, प्लीज़ मम्मी शांत.

उषा – मम्मी गॉल्ट बोल रहे हे ये मेरी मर्ज़ी थी, और यहा ग़लती भैया की भी पापा की हा.

मम्मी – अपने ये रिस्ता का इल्ज़ाम अपने बाप पे लगते हुए शरम न्ही आई.

उषा – उन्हे कभी शरम आई थी, मेरी मेर्जी जाने किसी छूतिए से मेरी शादी केरवाने मे.

मम्मी – बाप हा वो तुम्हारा.

उषा – और मैं बेटी हू आपकी, मेरी कुशी का क्या मम्मी. हर टाइम पापा की कुशी पापा की मर्ज़ी, और मेरा क्या मेरी कुशी का क्या मम्मी.

कहकर, उषा गुटनो पे बैठ कर रोनने लगी. उसकी ये हालत देखार उनकी मम्मी को उषा की हालत पे तराश आ गया. (उन्हे भी कही ना कही ये पता था की इस हालत की वजह कही ना कही उनका पापा भी हा).

उमेश – मम्मी, प्लीज़ पापा को मॅट बताने, नही तो..

मम्मी – देख बेटी मैं ये बात तेरे पापा को तो नही बतौँगी लेकिन तेरे पति से नही छुपा पौँगी.

उमेश – मम्मी बस, अप पापा को मॅट बताना बाकी, हुंपे चोर्र दो.

मम्मी – मैं बस तेरी कुशी चाहती हू. मैं तेरी हर कुशी मे कुश हू मानना मैने की तेरी शादी के टाइम तेरे साथ खड़ी न्ही हो पाई. लेकिन अभी जब मौका हा तो पक्का तेरे कुशी मे साथ दूँगी

उषा – लोवे योउ मा!!!!!

(कहकर उनकी मम्मी उनके रूम से बाहर निकल आई).

_थे एंड_

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