प्रोफेसर से रंडी जैसे चुद कर लड़की ने किया पेपर पास

मेरे बारे में आप सब जानते हैं मैं कितनी बड़ी चुदक्कड़ हूं। अपनी चुदाई के चक्कर में मैं अपने अंतिम वर्ष के पेपर की तैयारी करना भूल गई। और मेरा इस साल फेल होना लगभग तय था। पर मैं भूल गई थी चूत है मेरे पास, बस पेपर लेने वाले को दर्शन करवाने थे।

मेरा पहला पेपर था। मुझे सच में कुछ भी नहीं आता था। तो मैंने पेपर के लिए कुछ नोट तैयार किये, जो कि मैंने अपनी टांगो पर लिख लिए, और एक दो अपनी चूत के पास भी। मैं पेपर के दिन एक फ्राक और टोप पहन कर पेपर देने गई। पेपर लेने जो प्रोफेसर आया था, एक मस्त शरीर का अंकल था। सब को चेक करके ही हॉल में जाने दे रहा था। मुझे भी चेक किया।

चैक करते समय मैंने उस प्रोफेसर को अपने थोड़े बूब्स के दर्शन करवा दिये। फिर मैं अंदर आ कर अपनी सीट पर बैठ गई। सब को पेपर मिल गए, और सब अपना-अपना पेपर करने लगे। मैं भी सब से छुप कर अपना फ्राक ऊपर करके उत्तर देख कर लिखने लगी।

3 उत्तर मैंने बहुत जल्दी लिख लिए फिर मैंने अपना फ्राक और ऊपर, यानी चूत तक किया ही था, तभी वो प्रोफेसर आ गया और आते ही मेरा पेपर ले लिया, और मुझे बोला,‌‌ “मेरे साथ चलो।”

मैं उठने लगी तो सब मुझे ही देख रहे थे और भी टीचर देखने लगे। पर किसी की भी प्रोफेसर को पूछने की हिम्मत नहीं हुई। प्रोफेसर मुझे कोलेज में बने स्ट्रांग रुम जहां पेपर लेने वालों के अलावा कोई नहीं आ सकता था, वहां लेकर आ गए। मैं पूछने लगी, “सर मुझे यहां क्यूं लाए हो?”

फिर प्रोफेसर मुझे बोलने लगे, “नकल कर रही थी तुम।” मैं बोली, “नहीं सर मैं नहीं कर रही थी, आपको गलती लगी है।” मेरा इतना ही बोलना था तब तक प्रोफेसर ने मेरा फ्राक ऊपर कर दी और बोले, “यह क्या है?” मुझे पास होना था तो मैं प्रोफेसर को बोली, “सर आप मेरे साथ सब कर लो, पर मुझे पास होना है।”

प्रोफेसर मेरी तरफ पीठ करके सोचने लगे, पर मैं उनके पीछे पूरी नंगी हो गई। जब प्रोफेसर कुछ बोलने को मुड़े, तो मुझे नंगी देख कर हैरान रह गए। मैं खुद ही प्रोफेसर के गले लग गई, और उनकी पेंट के ऊपर से लंड सहलाने लगी। प्रोफेसर की सांस तेज होने लगी।

मैं प्रोफेसर के चेहरे पर किस करती हुई बोलने लगी, “सर अब क्या सोचा आपने मेरे बारे में?” तो प्रोफेसर ने मेरे सर को पकड़ा, और अपने होंठ मेरे होंठों पर लगा दिए। मैं भी अब उनका साथ देने लगी। प्रोफेसर के हाथ मेरी गांड को दबाते रहे। कुछ देर बाद मैंने प्रोफेसर की पेंट खोल दी, और अंडरवियर के अंदर से उनका लंड बाहर निकाल दिया।

फिर मैं नीचे बैठ गई, और लंड को चूसने-चाटने लगी। प्रोफेसर ने फिर किसी को फोन किया, और स्ट्रांग रुम में बुलाया। मुझे तो पास होना था, चाहे वो दोनों साथ मिल कर मुझे चोद लेते। कुछ देर बाद दूसरा प्रोफेसर अंदर आ गया। मुझे लंड चूसते हुए देख कर बोला, “सर यह सब क्या है?”

तो प्रोफेसर बोला, “हमारी रंड़ी है, साली की चूत में बहुत गर्मी है।” फिर मेरा पेपर उस प्रोफेसर को देकर बोले, “तू कर दे रांड का पेपर आज। अगला पेपर मैं करूंगा, तू रंडी के साथ मजा करना।” वो प्रोफेसर खुश हो गया, और पेपर लेकर चला गया।

फिर प्रोफेसर ने मुझे उठा कर एक टेबल पर लिटा दिया, और मेरे बूब्स को मुंह में लेकर चूसने लगे। मेरे बूब्स को चूस-चूस कर उन्होंने लाल कर दिया। फिर मेरी टांगों को फैला कर चूत के ऊपर आ गए। वो चूत के मुंह पर लंड रगड़ने लगे। उनका एक हाथ मेरे बूब्स को दबा रहा था।

तभी प्रोफेसर ने लंड चूत में डाला, और मेरे बूब्स भी जोर से दबा दिए। मैं दर्द से चिला उठी। प्रोफेसर रुका और 3-4 थप्पड़ मेरे मुंह पर मार दिए। वो बोला, “रंडी पास होना है तुझे या चीखना है?” मैं हाथ जोड़ते हुए बोली, “सर पास होना है।” उनके थप्पड़ से मेरा मुंह भी लाल हो गया था।

प्रोफेसर फिर से लंड चूत में डाल कर चोदने लगा। अब प्रोफेसर मेरे शरीर को नोचने भी लगा। मैं दर्द से तड़पती रही, पर प्रोफेसर को कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। प्रोफेसर के दांत के निशान मेरे बूब्स ओर ऊपर साफ नजर आने लगे। मैं मन में अपने आप को कोसने लगी कि इससे अच्छा तो मैं फेल ही हो जाती।

अब कर भी क्या सकती थी? प्रोफेसर मुझे चोदता रहा, और मेरा शरीर नोचता रहा। मेरी चूत पता नहीं कितनी बार पानी छोड़ चुकी थी। पर प्रोफेसर चोदता रहा। काफी समय बाद प्रोफेसर ने अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया, और टेबल के दूसरी तरफ मेरे मुंह के पास आकर लंड मेरे मुंह में डाल दिया।

अब मेरे मुंह की चुदाई शुरु हो गई, और थोड़ी देर बाद प्रोफेसर के लंड ने मेरे मुंह के अन्दर पानी छोड़ दिया। मैं पानी पी गई। फिर लंड को चाट कर साफ कर दी। प्रोफेसर अब शांत हो गया। फिर नंगा ही कुर्सी पर बैठ गया, और काम करने लगा। मैं टेबल पर वैसे ही लेटी रही।

कुछ देर बाद मैं उठने लगी तो प्रोफेसर बोला, “बहन की लोड़ी रंडी, अभी क्यूं उठ रही है? अभी एक घंटा है पेपर खत्म होने में।” मैं बोली, “सर बहुत दर्द हो रहा है। अब मुझे जाने दो।” तो प्रोफेसर बोला, “अभी तो तेरी गांड मारनी है, और तू जाने की बात कर रही है।”

फिर प्रोफेसर ने कोई दवाई खाई। कुछ ही पल में उनका लंड फिर से खड़ा हो गया। प्रोफेसर मेरे पास आया, और मुझे टेबल पर ही कुतिया बना दिया। प्रोफेसर ने मेरी गांड पर थूका, और अपना थूक गांड के छेद पर लगा दिया। मैंने अपने हाथों से अपनी गांड को खोल दिया।

अब मेरी गांड का छेद प्रोफेसर को साफ दिखाई देने लगा। प्रोफेसर ने लंड छेद पर लगा दिया, और धीरे-धीरे लंड मेरी गांड के अंदर जाने लगा। प्रोफेसर मुझे बालों से पकड़ कर चोदने लगा, और एक हाथ से मेरी गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदने लगा। मैं दर्द को सहते हुए चुदाई करवाने लगी।

प्रोफेसर कभी मेरे एक चूतड़ पर मारता, तो कभी दूसरे चूतड़ पर, और लंड तो गांड के अंदर अपना काम कर ही रहा था। प्रोफेसर मेरी पीठ चूमते हुए पीठ पर दांत गाड़ने लगा। मैं चीख भी नहीं सकती थी, तो मुंह बन्द करके सब सह रही थी।

प्रोफेसर मेरी गांड में लंड बहुत जोर-जोर से अंदर-बाहर कर रहा था। मुझे लग रहा था आज मैं नहीं बचूंगी। तभी दूसरा प्रोफेसर भी आ गया उसके हाथ में मेरा पेपर था। उसने पेपर टेबल पर रख दिया, और अपनी पेंट खोल कर लंड को बाहर निकाल कर मेरे मुंह में भर दिया।

अब दो लंड अंदर-बाहर होने लगे। दोनों आपस में बोलने लगे, “यार यह साली है मस्त रंडी। चुदाई में भी एक नम्बर की है। आज साली को चोद कर मजा आ गया।” दूसरा बोला, “सर आपने तो साली को आज ही नोच दिया।” यह सुनते ही प्रोफेसर हंसने लगा।

कुछ देर बाद प्रोफेसर ने मेरी गांड के अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया। मेरी सांस में सांस आई। दूसरा मेरा मुंह चोदता रहा। कुछ देर बाद प्रोफेसर बोला, “जल्दी निकाल पानी कुतिया के मुंह में, पेपर खत्म होने का समय हो गया है।” वो मेरे मुंह को बुरी तरह चोदने लगा, और कुछ ही झटकों के बाद मेरे मुंह में झड गया।

मैंने उसका भी पानी पी लिया, और लंड चाट कर साफ कर दिया। मैं वैसे ही फिर से लेट गई। दूसरा प्रोफेसर बाहर चला गया। अब प्रोफेसर मुझे बोला, “चल अपने कपड़े पहन ले, आज के पेपर में तुझे अब कोई भी फेल नहीं कर सकता है। किसी भी पेपर में फेल होने का डर हो, तो मुझे बता देना।”

फिर प्रोफेसर ने मुझ से मेरे शरीर को काटने के लिए माफी मांगी, और अपना फोन नंबर दिया। और मुझे एक क्रीम लिख कर दी और बोले, “यह क्रीम लगा लेना, एक दो दिन में सब निशान खत्म हो जाएंगे।”

मैंने अपना पेपर देखा सब उतर लिखे हुए थे। मैं खुश हो गई और कपड़े पहन कर स्ट्रांग रुम से छुप कर कॉलेज से बाहर आ गई। घर आते समय मैंने प्रोफेसर की लिखी हुई क्रीम लेली, और घर आ गई।

कैसी लगी मेरी कहानी सब जरुर बताना, और साथ में यह भी बताना क्या मुझे अब हर पेपर के लिए प्रोफेसर से चुदाई करवानी चाहिए? आपके मेल का इंतजार रहेगा।

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